नव वर्ष पर विशेष ग़ज़ल : नूरुस्सबाह खान ‘सबा’
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• छोड़ आए थे जिन को दिसम्बर में हम, मिल गए उन को हमदम नए साल में…
– नूरुस्साबाह खान ‘सबा’
[ छत्तीसगढ़-दुर्ग ]

दर्द हो जाए कुछ कम नए साल में
ज़ख़्म पा जाएँ मरहम नए साल में
दिल के वीराने में आज हलचल सी है
आज फिर आँख है नम नए साल में
छोड़ आए थे जिन को दिसंबर में हम
मिल गए उन को हमदम नए साल में
तल्ख़ियाँ रिश्तों से मिटा कर सभी
साथ मिल कर रहें हम नए साल में
कुछ तो महंगाई से हम को राहत मिले
दाम चीज़ों के हों कम नए साल में
मेरे भारत की तारीफ़ दुनिया करे
शान इस की न हो कम नए साल में
ज़िंदगी हो सबा की मसर्रत भरी
दूर हो जाए हर ग़म नए साल में
[ • चर्चित शायरा नूरुस्सबाह खान ‘सबा’ प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ की महासचिव एवं ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ पत्रिका व वेब पोर्टल e-पत्रिका की साहित्य संपादक है. • संपर्क : 99267 72322 ]
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chhattisgarhaaspaas
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