• Chhattisgarh
  • श्रम संहिताएं : मजदूरी कम करके मुनाफ़ा बढ़ाने का हथियार- सुदीप दत्ता

श्रम संहिताएं : मजदूरी कम करके मुनाफ़ा बढ़ाने का हथियार- सुदीप दत्ता

7 months ago
307

21 नवम्बर, 2025 को केंद्र सरकार ने श्रम की दुनिया में ‘लचीलापन’ लाने के मकसद से चार श्रम संहिताओं को अधिसूचित कर दिया है। इसके जवाब में, देश भर के मज़दूर और किसान सड़कों पर उतर आए हैं, उन्होंने चारों श्रम संहिताओं की प्रतियां जलाईं हैं और उन्होंने पहले से ही आम हड़ताल की तैयारी शुरू कर दी है।

इसमें कोई शक नहीं कि इन संहिताओं को थोपने से हमारे देश के शासन में फासीवाद का बढ़ना और भी साफ़ हो जाता है। इसके साथ ही, यह भी याद रखना चाहिए कि फासीवाद एक राजनीतिक हथियार के तौर पर तब उभरता है, जब पूंजीवाद आम तरीकों से अपने संकट को हल नहीं कर पाता। इसलिए, इन श्रम संहिताओं के ठोस ऐतिहासिक और राजनीतिक-आर्थिक पृष्ठभूमि को समझना बहुत ज़रूरी है।

भारतीय श्रम कानूनों को संहिताबद्ध करने का प्रस्ताव दूसरे राष्ट्रीय श्रम आयोग से आया था। पहला राष्ट्रीय श्रम आयोग (1966-69), हालांकि स्वाभाविक रूप से श्रम को निचोड़ने को आसान बनाने और व्यवस्थित करने के लिए बनाया गया था, लेकिन यह एक कल्याणकारी राज्य के ढांचे पर आधारित था — जो कुछ हद तक श्रम सुरक्षा, रोज़गार सुरक्षा, सामूहिक सौदेबाजी और मज़बूत नियमन को बढ़ावा देता था। ये एक नए आज़ाद हुए उपनिवेश में पूंजीवाद के निर्माण के लिए ज़रूरी थे। इसके विपरीत, दूसरा आयोग (1999-2002), जो नवउदारवादी सोच से प्रभावित था, श्रम को मुख्य रूप से एक आर्थिक माल के रूप में देखता था, नियमन को बाज़ार के लिए गड़बड़ी मानता था, और दक्षता और व्यापार करने में आसानी के नाम पर सुरक्षा कानूनों को कमज़ोर करना चाहता था, और राज्य को पूंजी संचय के साधन के रूप में पुनर्परिभाषित कर रहा था। सभी श्रम कानूनों को चार या पांच संहिताओं में बदलने के आयोग के प्रस्ताव का ट्रेड यूनियनों ने ज़ोरदार विरोध किया था और 2003 में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। 2004 में सरकार बदल गई और संहिताकरण की प्रक्रिया को रोक दिया गया था।

बाद की सरकारों ने टुकड़ों में सुधार शुरू किए, लेकिन मौजूदा कानूनों पर पूरी तरह से हमला नहीं किया। 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद संहिताकरण की प्रक्रिया फिर से शुरू हुई। हालांकि ये संहिताएं 2019 और 2020 में संसद में पारित हो गई थीं, लेकिन देश भर में बड़े पैमाने पर विरोध और प्रतिरोध के कारण पिछले महीने तक उनकी अधिसूचना टली हुई थी। लेकिन सरकार की मौजूदा बेचैनी को समझने के लिए, सबसे पहले श्रम बाजार के लचीलेपन के पूंजीवादी सैद्धांतिक ढांचे की जांच करना ज़रूरी है। इसका तर्क है कि चूंकि स्थायी रोज़गार मज़दूरों की सौदेबाजी की ताकत और मज़दूरी को मज़बूत करता है, इससे रोज़गार मिलने में रुकावट आती है। यह दावा करता है कि असुरक्षित रोज़गार निवेश को आकर्षित करेगा और मजदूरों की भर्ती बढ़ाएगा।

यह तर्क कई कारणों से पूरी तरह से गलत है। पहला, भारत में श्रम कानून कार्यबल के सिर्फ़ बहुत छोटे-से हिस्से को ही कवर करते हैं, क्योंकि 90 प्रतिशत से ज़्यादा मज़दूर असंगठित या स्व रोजगार के क्षेत्र में हैं और ज़्यादातर श्रम नियमन के दायरे से बाहर हैं। दूसरा, सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों में संविदा और दूसरे अनियमित तरह के रोज़गार के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के बावजूद, भारत में ऐतिहासिक रूप से ज़्यादा बेरोज़गारी बनी हुई है, जिससे पता चलता है कि लचीलेपन से रोज़गार नहीं बढ़ा है। सबसे हैरानी की बात यह है कि 2014 में राजस्थान सरकार द्वारा मौजूदा संहिता के हिसाब से अपने श्रम कानूनों में बदलाव करने के बाद भी, संगठित क्षेत्र में रोज़गार में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है।

असल में, श्रम के लचीलेपन का सिद्धांत से के नियम द्वारा फैलाई गई एक गलत कल्पना पर आधारित है। यह नियम कहता है कि सारा मुनाफा या अधिशेष पूंजीपति वर्ग तुरंत निवेश कर देगा ; इसलिए, मालिकों के लिए ज़्यादा अधिशेष का मतलब है और ज़्यादा निवेश और ज़्यादा रोज़गार देना। लेकिन सच्चाई यह है कि पूंजीपति उत्पादक क्षेत्र में तभी निवेश करते हैं, जब रिटर्न की दर दूसरे वित्तीय क्षेत्र से ज़्यादा हो। इसलिए, सभी क्षेत्रों में निवेश की पाशविक प्रवृत्ति को बनाए रखने के लिए, सभी उद्योगों में पूंजी पर रिटर्न समान रूप से ज़्यादा होना चाहिए। इसके लिए, सभी क्षेत्रों में मज़दूरी लागत कम करना होगा। लेकिन इससे एक और संकट पैदा होता है — कम खपत और ज़्यादा उत्पादन का संकट।

उस बिन्दु पर आने से पहले, भारत की औद्योगिक सच्चाई पर एक नज़र डालना ज़रूरी है। कई सालों से, भारत का औद्योगिक उत्पादन तेज़ी से धीमा हो रहा है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (इंडेक्स ऑफ़ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन) ने चौदह महीनों में सबसे कम वृद्धि दर्ज की है। इस मंदी के साथ-साथ कंपनियों के बंद होने की एक चौंकाने वाली लहर भी है : पिछले पाँच सालों में, 2.04 लाख से ज़्यादा निजी कंपनियाँ बंद हो गई हैं, और सरकार ने साफ़ कर दिया है कि इन बंद कंपनियों के कर्मचारियों के पुनर्वास (फिर से नौकरी देने) की कोई योजना नहीं है। जबकि कंपनियाँ निवेश की कमी को सही ठहराने के लिए अपेक्षित कम रिटर्न का हवाला देती हैं, हैरानी की बात यह है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत का कॉर्पोरेट मुनाफा 15 साल के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया!

असल में, सरकार की आर्थिक नीतियों में बड़े कॉर्पोरेट मुनाफ़े के पक्ष में साफ़ तौर पर झुकाव दिखता है, जो अकेले वित्तीय वर्ष 2025 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के 58,000 करोड़ रुपयों से ज़्यादा के और वित्तीय वर्ष 2015-16 से वित्तीय वर्ष 2024-25 तक कुल 12.08 लाख करोड़ रुपए के ऋण माफ़ करने से पता चलता है, जिससे बड़े दिवालियों का बोझ जनता पर पड़ रहा है। इस अंतरण के साथ-साथ, सरकार ने ऐसी प्रोत्साहन योजना भी शुरू की हैं, जो वृद्धि और रोज़गार पैदा करने के नाम पर जनता का पैसा बड़ी निजी कंपनियों को देती हैं, खासकर रोजगार-संबद्ध प्रोत्साहन (एम्प्लॉयमेंट लिंक्ड इंसेंटिव) योजना, जिसका बजट 99,446 करोड़ रूपये है, जो निवेश, तकनीकी उन्नयन या रोज़गार पैदा करने के लिए बहुत कम जवाबदेही के साथ बड़ी सब्सिडी देती है।

इन बड़ी रियायतों के बावजूद, 2022-23 में उत्पादकता में 2.38% की गिरावट आई है, सकल निश्चित पूंजी निर्माण में मशीनरी का हिस्सा सिकुड़ गया है और निजी कंपनियाँ मुनाफे को आधुनिकीकरण या तकनीक में दोबारा निवेश नहीं कर रही हैं, जिससे भारत धीरे-धीरे एक असली औद्योगिक आर्थिकी के बजाय सिर्फ़ एक असेंबली हब बनता जा रहा है।

निश्चित रूप से, सभी प्रोत्साहन उपायों को औद्योगिक निवेश में नहीं बदला जाता ; तो इसका बहुत खास कारण है — नवउदारवाद के तहत पूंजी का अत्यधिक केंद्रीकरण। इस वृद्धि का फायदा पूरी तरह से लगभग टॉप 1% लोगों को मिलता है। यहां तक कि टॉप 500 कंपनियों में भी, मुनाफे के संचय का पैटर्न चिंताजनक है। टॉप 10 फर्में बहुत ज़्यादा मुनाफा कमाती हैं। इनके बाद की 40-50 कंपनियां भी अच्छा मुनाफा कमाती हैं। लेकिन बाकी 450 कंपनियां संघर्ष कर रही हैं। भारतीय पूंजीवाद पर अब कुछ बड़े कॉर्पोरेट समूहों का दबदबा है। उनका मुनाफा उनकी लंबी मूल्य श्रृंखला में लागत कम करने पर निर्भर करता है।

यहां पर ढांचागत संकट साफ़ दिखाई देता है। बड़ी कंपनियों का अगला समूह अपने मुनाफ़े को सिर्फ़ अपने ज़्यादा वेतन वाले कर्मचारियों के फ़ायदे कम करके ही बनाए रख सकता है ; लेकिन इस समूह पर हमला करने से महंगी चीज़ों के लिए उपभोक्ता बाजार सिकुड़ जाएगा। कर्मचारियों के इस समूह को उदारीकरण के शुरुआती दशकों में फ़ायदा हुआ था, लेकिन 2017 के बाद उनकी आय कम होने लगी और 2024 तक भी उसमें सुधार नहीं हुआ है, और इस तरह, एक स्पष्ट उपभोक्ता संकट सामने आया है। केंद्र सरकार द्वारा 2025-26 में दी गई आयकर में राहत असल में इसी विरोधाभास को दूर करने की एक कोशिश है।

इसलिए, ऊपरी-स्तर की, ज़्यादा वेतन वाली कंपनियों के लिए बचने का प्राकृतिक रास्ता यह है कि वे अपना बोझ और नीचे की तरफ़ धकेल दें। यह अब मुमकिन है, क्योंकि मध्यम और छोटी कंपनियां अपनी मूल्य श्रृंखला में आपूर्तिकर्ता के तौर पर काम करती हैं। ये मध्यम और छोटी कंपनियां कड़ी प्रतियोगिता के कारण कीमतें नहीं बढ़ा पाती हैं। इसके अलावा, ट्रंप द्वारा लगाया गया 50 प्रतिशत टैरिफ, जिसका मकसद अमेरिका में आने वाले संकट को कम करना और उसका बोझ भारत पर डालना है, निर्यात-माल बाजार की कीमतों पर और नीचे की तरफ दबाव डालेगा। और इसलिए, इस बड़े रोज़गार-प्रदाय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) क्षेत्र को ज़िंदा रखने, निवेश करने और संकट को कम करने के लिए, मोदी सरकार ने श्रम संहिता लाया है — जिससे वे मज़दूरों का शोषण और तेज कर सकें। ये संहिताएं मज़दूरी कम करती हैं, रोज़गार को अस्थाई बनाती हैं और मज़दूरों के अधिकारों को कुचलती हैं। इसमें कोई शक नहीं कि इन संहिताओं की पूरी प्रणाली भारतीय पूंजीवाद के मौजूदा संकट को मध्यम और छोटे उद्योगों में काम करने वाले मज़दूरों के सबसे गरीब तबके पर अंतरित करने की एक प्रक्रिया है, और श्रम संहिताओं में किए गए बदलाव इस बात को बिल्कुल साफ़ कर देते हैं।

चार नई श्रम संहिताएं, मुख्य क्षेत्रों में कार्यरत मजदूरों की संख्या की सीमा को तेज़ी से बढ़ाकर, श्रम सुरक्षा को व्यवस्थित रूप से कमज़ोर करती हैं। इन मुख्य क्षेत्रों में तकनीकी उन्नति के कारण इस संख्या को कम किया जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा न करके, संगठित क्षेत्र — और यहां तक कि एमएसएमई — में भी ज़्यादातर मजदूरों को कानूनी सुरक्षा से बाहर कर दिया गया है। पेशागत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कामकाजी परिस्थितियां संहिता (ओएसडी कोड) कारखाने में काम करने वाले मजदूरों की संख्या की सीमा बढ़ाती है और ठेका मजदूर नियमन के लागू होने की सीमा 20 से बढ़ाकर 50 मजदूर कर देती है, जबकि औद्योगिक संबंध संहिता (इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड) कामबंदी, छंटनी और बंद करने के साथ-साथ स्थाई आदेश के लिए पहले से अनुमति की ज़रूरत को 100 से बढ़ाकर 300 मजदूर कर देता है, जिससे मालिकों को अपनी मर्ज़ी से कर्मचारियों को रखने और निकालने (हायर एंड फायर) की छूट मिल जाती है। सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण के प्रावधानों को भी इसी तरह कमज़ोर किया गया है, जिससे मालिक सुरक्षा या कल्याण अधिकारी नियुक्त करने, कैंटीन, क्रेच या एम्बुलेंस सेवाएँ प्रदान करने जैसे दायित्वों से बच सकते हैं। ये संहिताएं स्थायी काम के लिए भी निश्चित-अवधि रोज़गार को कानूनी बनाते हैं, जिससे नौकरी की असुरक्षा आम बात हो जाती है, वरिष्ठता और पदोन्नति कमज़ोर होते हैं, और सामूहिक रूप से संगठित होने को हतोत्साहित किया जाता है। यूनियन पंजीयन को और मुश्किल बनाकर, अनिवार्य नोटिस और सुलह प्रतिबंधों के माध्यम से हड़तालों पर लगभग रोक लगाकर, और गंभीर दंड लगाकर मौलिक श्रम अधिकारों में और कटौती की गई है। आखिर में, ये संहिताएं काम के घंटों को 12 घंटे तक बढ़ाने, ओवरटाइम सुरक्षा को कमज़ोर करने और 12 घंटे के कार्यदिवस के साथ चार-दिवसीय कार्य सप्ताह को वैध बनाने का मौका देती हैं, जिससे कर्मचारियों के स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन को गंभीर नुकसान होता है। हर साल, हमारे देश में कार्यस्थलों पर दुर्घटनाओं में हज़ारों कर्मचारी मर जाते हैं। नई श्रम संहिता ने कर्मचारियों की सुरक्षा से संबंधित निरीक्षण प्रणाली को बहुत कमज़ोर कर दिया है।

इसके साथ ही, श्रम बल नीति 2025 भी आ ग़ई है, जिसका मुख्य मकसद पूरे देश के श्रम बल को एक सिंगल डिजिटल डेटाबेस में लाना और पूंजी की ज़रूरतों के हिसाब से उन्हें आपूर्ति करना है ; सभी स्थायी कामों को गिग-नेचर श्रम से बदल दिया जाएगा — जिसका अर्थ है कि पूरे श्रम बल को धीरे-धीरे सभी नियमनों से बाहर धकेलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बिना रोक-टोक की लूट का यह इंतज़ाम असल में भारत के संकटग्रस्त पूंजीवाद को बचाने के लिए संकट का बोझ मेहनतकशों पर डालने की ही प्रक्रिया है।

इस तरह, नई फासीवादी प्रवृत्ति सामने आई है, जिसका काम मज़दूर वर्ग की विरोध करने की क्षमता को खत्म करना है, जिससे बिना किसी रुकावट के पूंजीवादी मुनाफाखोरी हो सके। साथ ही, नव-फासीवाद का उदय यह दिखाता है कि पूंजीवाद अपने ही व्यवस्थागत कमियों में फंस रहा है, और नव-फासीवादी नीतियां ही इससे बचने का उसे एकमात्र रास्ता लग रही हैं।

आज देश के संगठित आंदोलन को सुरक्षात्मक मानसिकता से बाहर आना होगा। इन श्रम संहिताओं को हराने की लड़ाई को सिर्फ़ विरोध तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे और ज़्यादा आक्रामक बनाना चाहिए, जिसका मकसद पूरी व्यवस्था को बदलना हो। यह संकट ऐसे जुझारू आंदोलनों की मांग करता है, जो मेहनतकश लोगों के बीच सामूहिक शक्ति और नई चेतना पैदा करें। पूंजीवाद के बढ़ते विरोधाभासों ने वैकल्पिक सामाजिक और आर्थिक संभावनाएं पैदा की हैं ; हमारा काम है कि हम उन्हें गंभीरता से पहचानें और सामाजिक बदलाव के लिए चेतना बढ़ाएं।

[ • लेखक सुदीप दत्ता सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स [सीटू] के नव-निर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. और • अनुवादक संजय पराते ‘अखिल भारतीय किसान सभा’ से संबद्ध ‘छत्तीसगढ़ किसान सभा’ के उपाध्यक्ष हैं. ]

🟥🟥🟥

विज्ञापन (Advertisement)

ब्रेकिंग न्यूज़

तिरंगा यात्रा पर भूपेश बघेल ने कहा – जो कहती है उसके विपरीत चलती है भाजपा, राम नाम जपना, पराया माल अपना
breaking Chhattisgarh

तिरंगा यात्रा पर भूपेश बघेल ने कहा – जो कहती है उसके विपरीत चलती है भाजपा, राम नाम जपना, पराया माल अपना

राजधानी में निकली तिरंगा यात्रा, CM साय ने भरी हुंकार, कहा- आसानी से नहीं मिली आजादी, वीरों ने दिया बलिदान…
breaking Chhattisgarh

राजधानी में निकली तिरंगा यात्रा, CM साय ने भरी हुंकार, कहा- आसानी से नहीं मिली आजादी, वीरों ने दिया बलिदान…

महतारी वंदन योजना से जुड़ा बड़ा अपडेट: 40 वर्ष से अधिक उम्र की अविवाहित महिलाओं को भी मिलेगा लाभ
breaking Chhattisgarh

महतारी वंदन योजना से जुड़ा बड़ा अपडेट: 40 वर्ष से अधिक उम्र की अविवाहित महिलाओं को भी मिलेगा लाभ

स्पा सेंटर की आड़ में देह व्यापार का भंडाफोड़, मैनेजर, महिला दलाल और ग्राहकों समेत कुल 9 गिरफ्तार
breaking Chhattisgarh

स्पा सेंटर की आड़ में देह व्यापार का भंडाफोड़, मैनेजर, महिला दलाल और ग्राहकों समेत कुल 9 गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के तबादले का इंतजार खत्म, 700 शिक्षको के हुए ट्रांसफर; 400 नाम हटाए गए
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के तबादले का इंतजार खत्म, 700 शिक्षको के हुए ट्रांसफर; 400 नाम हटाए गए

छत्तीसगढ़ वन विभाग में बड़ा फेरबदल, 24 IFS अधिकारियों को मिली नई पदस्थापना, देखें पूरी लिस्ट
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ वन विभाग में बड़ा फेरबदल, 24 IFS अधिकारियों को मिली नई पदस्थापना, देखें पूरी लिस्ट

ATM से मिलेगा अनाज : रायपुर समेत 3 शहरों में ग्रेन एटीएम शुरू, दूसरे राज्य के हितग्राही भी कर सकेंगे इस्तेमाल
breaking Chhattisgarh

ATM से मिलेगा अनाज : रायपुर समेत 3 शहरों में ग्रेन एटीएम शुरू, दूसरे राज्य के हितग्राही भी कर सकेंगे इस्तेमाल

भगवान शिव पर अभद्र टिप्पणी करने वाले अरुण पन्नालाल गए जेल, कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका…
breaking Chhattisgarh

भगवान शिव पर अभद्र टिप्पणी करने वाले अरुण पन्नालाल गए जेल, कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका…

छत्तीसगढ़ में मौसम का अलर्ट: 6 जिलों में 40-60 KM की रफ्तार से तेज आंधी की चेतावनी, बिजली गिरने के साथ बारिश के आसार
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में मौसम का अलर्ट: 6 जिलों में 40-60 KM की रफ्तार से तेज आंधी की चेतावनी, बिजली गिरने के साथ बारिश के आसार

सुप्रीम कोर्ट से भूपेश बघेल को झटका, चुनाव याचिका पर अब होगी सुनवाई, जानिए क्या है मामला…
breaking Chhattisgarh

सुप्रीम कोर्ट से भूपेश बघेल को झटका, चुनाव याचिका पर अब होगी सुनवाई, जानिए क्या है मामला…

हाईकोर्ट का अहम फैसला, तबादले के आधार पर समाप्त नहीं की जा सकती किसी कर्मचारी की अर्जित वरिष्ठता…
breaking Chhattisgarh

हाईकोर्ट का अहम फैसला, तबादले के आधार पर समाप्त नहीं की जा सकती किसी कर्मचारी की अर्जित वरिष्ठता…

NEET-UG 2026 पेपर लीक: CBI चार्जशीट में बड़ा खुलासा, NTA के 3 एक्सपर्ट पर लीक कराने का आरोप, बताया कैसे छात्रों तक पहुंचाया गया पेपर
breaking National

NEET-UG 2026 पेपर लीक: CBI चार्जशीट में बड़ा खुलासा, NTA के 3 एक्सपर्ट पर लीक कराने का आरोप, बताया कैसे छात्रों तक पहुंचाया गया पेपर

छत्तीसगढ़ को ई-बसों की सौगात… सबसे पहले दुर्ग-भिलाई में दौड़ेंगी इलेक्ट्रिक बसें, अब तक कुल 240 बसों को मिली मंजूरी
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ को ई-बसों की सौगात… सबसे पहले दुर्ग-भिलाई में दौड़ेंगी इलेक्ट्रिक बसें, अब तक कुल 240 बसों को मिली मंजूरी

जानिए याददाश्त बढ़ाने के आसान और वैज्ञानिक तरीके, बेहतर मेमोरी के लिए अपनाएं ये आदतें
breaking Chhattisgarh

जानिए याददाश्त बढ़ाने के आसान और वैज्ञानिक तरीके, बेहतर मेमोरी के लिए अपनाएं ये आदतें

राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने रखा छत्तीसगढ़ को भारत की ऊर्जा सुरक्षा एवं भविष्य की क्रिटिकल मिनरल अर्थव्यवस्था का अग्रणी राज्य बनाने का विजन
breaking National

राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने रखा छत्तीसगढ़ को भारत की ऊर्जा सुरक्षा एवं भविष्य की क्रिटिकल मिनरल अर्थव्यवस्था का अग्रणी राज्य बनाने का विजन

रेल यात्रियों को बड़ी राहत, अब घर बैठे करें अतिरिक्त लगेज की ऑनलाइन बुकिंग, हवाई यात्रा जैसी सुविधा रेलवे में भी शुरू
breaking Chhattisgarh

रेल यात्रियों को बड़ी राहत, अब घर बैठे करें अतिरिक्त लगेज की ऑनलाइन बुकिंग, हवाई यात्रा जैसी सुविधा रेलवे में भी शुरू

वरिष्ठजन कल्याण महासंघ के चुनाव में घनश्याम कुमार देवांगन सर्वसम्मति से अध्यक्ष निर्वाचित
breaking Chhattisgarh

वरिष्ठजन कल्याण महासंघ के चुनाव में घनश्याम कुमार देवांगन सर्वसम्मति से अध्यक्ष निर्वाचित

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल विविधिकरण और आधुनिक तकनीक से खेती बनेगी अधिक लाभकारी – मुख्यमंत्री श्री साय
breaking Chhattisgarh

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल विविधिकरण और आधुनिक तकनीक से खेती बनेगी अधिक लाभकारी – मुख्यमंत्री श्री साय

Repo Rate पर RBI का बड़ा ऐलान, 5.25% पर बरकरार दर, जानिए EMI पर क्या होगा असर
breaking National

Repo Rate पर RBI का बड़ा ऐलान, 5.25% पर बरकरार दर, जानिए EMI पर क्या होगा असर

बृजमोहन अग्रवाल-अमित कटारिया विवाद: उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने लिया सांसद का पक्ष, कहा- अधिकारी सम्मान से करें बात, हिसाब से करें रिस्पांस
breaking Chhattisgarh

बृजमोहन अग्रवाल-अमित कटारिया विवाद: उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने लिया सांसद का पक्ष, कहा- अधिकारी सम्मान से करें बात, हिसाब से करें रिस्पांस

कविता

आरंभ साहित्यिक मंच : उभरते हुए प्रगतिशील परंपरा एवं सोच के कवि डॉ. गिरधर चंद्रा ‘साज़’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : उभरते हुए प्रगतिशील परंपरा एवं सोच के कवि डॉ. गिरधर चंद्रा ‘साज़’

इस माह की कवयित्री –  सेवानिवृत्त प्राचार्या शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जुनवानी भिलाई जिला- दुर्ग छत्तीसगढ़ की श्रीमती वर्षा ठाकुर
poetry

इस माह की कवयित्री – सेवानिवृत्त प्राचार्या शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जुनवानी भिलाई जिला- दुर्ग छत्तीसगढ़ की श्रीमती वर्षा ठाकुर

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव

आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी

इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव
poetry

इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव

आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’

आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी
poetry

आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी

इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’
poetry

इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’

आरंभ साहित्यिक मंच : संध्या जैन
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : संध्या जैन

कवि और कविता : इस माह के कवि में नीलमचंद सांखला
poetry

कवि और कविता : इस माह के कवि में नीलमचंद सांखला

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

आरंभ साहित्यिक मंच : सोनिया नायडू
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : सोनिया नायडू

‘आरंभ साहित्यिक मंच’ : हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’
poetry

‘आरंभ साहित्यिक मंच’ : हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

साहित्यिक पटल : सुरभि ताम्रकर ‘शावि’
poetry

साहित्यिक पटल : सुरभि ताम्रकर ‘शावि’

साहित्यिक ‘आरंभ’ : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

साहित्यिक ‘आरंभ’ : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष दोहावली : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर
poetry

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष दोहावली : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर

कहानी

लेख : कैलाश जैन बरमेचा
story

लेख : कैलाश जैन बरमेचा

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव
story

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय
story

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव
story

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’
story

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी
story

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन
story

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है
story

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे
story

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ :  ब्रजेश मल्लिक
story

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ : ब्रजेश मल्लिक

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
story

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
story

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…

story

रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

story

रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

story

कहानी : संतोष झांझी

story

कहानी : ‘ पानी के लिए ‘ – उर्मिला शुक्ल

लेख

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से
Article

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक
Article

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए
Article

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
Article

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

Article

तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

Article

लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
Article

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
Article

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
Article

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
Article

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
Article

🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
Article

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
Article

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
Article

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

Article

🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

Article

🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

Article

🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

राजनीति न्यूज़

breaking Politics

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

Politics

■छत्तीसगढ़ :

Politics

भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

breaking Politics

भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
Politics

धमतरी आसपास

Politics

स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

Politics

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

breaking Politics

राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
Politics

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
Politics

मरवाही उपचुनाव

Politics

प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

Politics

ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

breaking Politics

अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
breaking National Politics

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

breaking Politics

हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

breaking Politics

पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन