कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी
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कह न सका
– तारकनाथ चौधुरी
[ छत्तीसगढ़-चरोदा, जिला-दुर्ग ]

सागर की लहरों से
खेलते-खुश होते शख़्स से
कोई यूँ ही पूछ ले अगर कि-
“बता सकोगे इस सागर की गहराई?
“या कितने मोती छुपा रखे हैं इसने सीने में?”
या फिर
“कितनी किश्तियों को डुबोया है इसकी मौजों ने?”………..
पशोपेश में पड़ जायेगा वो
उलझ जायेगा सवालों के रेशे में,
तस्कीन के लम्हे
बदल जायेंगे कड़वाहट मे…
मैं भी तो ऊहापोह की हालत में
आ गया था उस दिन…
तुम्हारे सवालों को सुनकर कि
कहिए न कैसा स्वभाव है मेरा?
फि़तरत और मिजा़ज मेरा कैसा है?
बेहद मुश्कि़ल था मेरे लिए भी जवाब दे पाना-
सागर से मुताल्लिक़ उन सवालों की तरह।
ये भी तो कह न सका तुमसे कि
सागर किनारे बैठे हुए को
जिस तरह सुकून देती हैं
आती-जाती लहरें
वैसी ही राहत पहुँचाती है मुझे
तुम्हारी आशनाई।
[ • लब्धप्रतिष्ठित रचनाकार तारकनाथ चौधुरी बांग्ला-हिंदी और उर्दू के सुप्रसिद्ध कवि के रूप में प्रख्यात हैं. • आप प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के संस्थापक सदस्य हैं. ]
• कवि संपर्क-
• 83494 08210
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chhattisgarhaaspaas
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