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- देश के सुप्रसिद्ध कथाकार लोकबाबू के उपन्यास ‘सूरज जहाँ डूबता है’ का लोकार्पण नई दिल्ली के ‘भारत मंडपम’ में चल रहे ‘विश्व पुस्तक मेला’ में किया गया
देश के सुप्रसिद्ध कथाकार लोकबाबू के उपन्यास ‘सूरज जहाँ डूबता है’ का लोकार्पण नई दिल्ली के ‘भारत मंडपम’ में चल रहे ‘विश्व पुस्तक मेला’ में किया गया

👉 • ‘सूरज जहां डूबता है’ का लोकार्पण करते हुए शायर रहमान मुसव्विर, दलित चिंतक व संपादक रविकांत, आलोचक हिमांशु पंड्या और युवा समीक्षक पल्लव. इस अवसर पर ‘कौटिल्य बुक्स’ के प्रबंधक सुधीर यादव.
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• दिल्ली
छत्तीसगढ़ के मूल निवासी, देश- विदेश में प्रचलित ‘मेमना’ क हानी और उपन्यास ‘बस्तर बस्त र’ के सुप्रसिद्ध कथाकार लोक बाबू का लोकार्पण नई दिल्ली के ‘भारत मंडपम’ में चल रहे ‘विश्व पुस्तक मेले’ में हुआ.
युवा समीक्षक पल्लव ने उपन्यास के बारे में बताया कि- निजी अनुभवों का संसार इस उपन्यास को पठनीय बनाता है. जिसमें छत्तीसगढ़ के स्थानीय जीवन और मार्मिक प्रेम प्रसंग सम्मिलित है. सरल सहज भाषा में लोकबाबू दीर्घ कथा सूत्र को बांधने में सफल हुए हैं.
जामिया मिल्लिया विश्वविद्यालय में आचार्य तथा उर्दू हिंदी के शायर रहमान मुसव्विर ने कहा कि- हिंदी उपन्यास ‘सूरज जहाँ डूबता है’ में विभिन्न अंचलों का जीवन आया है किंतु अभी भी समूचे भारत के आंचलिक जीवन को देखना जरूरी है.
लखनऊ विश्वविद्यालय में हिंदी के आचार्य और दलित चिंतक रविकांत ने कहा कि- हाशिए के जीवन को लोकबाबू ने अपने लेखन में बखूबी प्रस्तुत किया है, जिसके कारण उनके लेखन का महत्व कहीं अधिक है.
राजकीय महाविद्यालय [रानीवाड़ा] के प्राचार्य और आलोचक हिमांशु पंड्या ने कहा कि- ‘डींग’ और ‘बस्तर बस्तर’ जैसे उपन्यासों के बाद यह उपन्यास [सूरज जहाँ डूबता है] भी लोकबाबू के लेखन की निष्ठा और निरंतरता का उदाहरण है.
प्रारंभ में ‘कौटिल्य बुक्स पब्लिकेशन’ के प्रबंधक सुधीर यादव ने सभी का स्वागत किया. ‘हंस प्रकाशन’ के स्टॉल पर हुए इस लोकार्पण आयोजन के अंत में हरेंद्र तिवारी ने आभार व्यक्त किया.

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