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श्रद्धांजलि : ‘राष्ट्रीय प्रगतिशील लेखक संघ’ [प्रलेसं] के अध्यक्ष मंडल के सदस्य, सुप्रसिद्ध आलोचक, निर्भीक प्रखर वक्ता वीरेंद्र यादव और ‘जन संस्कृति मंच’ [जसम] के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व लोकप्रिय कवि राजेंद्र कुमार को ‘प्रलेसं’, ‘जसम’ और ‘जनवादी लेखक संघ’ ने दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

👉 • सुप्रसिद्ध आलोचक प्रो. सियाराम शर्मा के निवास में शोक सभा आयोजित की गई
• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई
सुप्रसिद्ध आलोचक, निर्भीक प्रखर वक्ता राष्ट्रीय प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष मंडल के सदस्य वीरेंद्र यादव और लोकप्रिय कवि व जन संस्कृति मंच के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेन्द्र कुमार के आकस्मिक निधन पर छत्तीसगढ़ प्रगतिशील लेखक संघ भिलाई दुर्ग ,जन संस्कृति मंच और जनवादी लेखकं संघ के संयुक्त तत्वावधान में प्रो. सियाराम शर्मा के निवास में शोकसभा आयोजित की गई।

👉 • प्रो. सियाराम शर्मा ने कहा कि- ‘सितारे जा रहे हम जुगनू की तरह बचे हुए हैं’
इस अवसर पर अध्यक्षता करते हुए पूर्व प्राचार्य शिक्षाविद डॉ कोमल सिंह शारवा ने कहा जब सत्ता साहित्य का राजनीतिकरण करने में तुली हुई है ऐसे समय हमारे निर्भीक आलोचक वीरेंद्र यादव और संवेदनशील कवि राजेन्द्र कुमार का जाना बेहद चिंतनीय है। दोनों ने बड़े रचनाकार थे परंतु सरल स्वभावी थे,आमजनों के हक में उहोंने व्यवस्था की आलोचना की.

👉 • कथाकार लोकबाबू ने कहा कि- ‘साहित्य में प्रेम का विषय है तो प्रेम में सच्चाई की कठोरता होनी ही चाहिए’
प्रो. सियाराम शर्मा ने कहा- सितारे जा रहे हम जुगनू की तरह बचे हुए हैं ।वीरेंद्र यादव जी मूलतः उपन्यास के बड़े आलोचक थे साहित्य में सत्ता कैसे अभिव्यक्त होती है इसे उकेरने की उन्होने बेबाक कोशिश की ।
लोकप्रिय कवि राजेन्द्र कुमार नामवर सिंह ,केदार नाथ सिंह की परम्परा के साहित्यकार थे उनकी आलोचना में काव्यगत रचनात्मकता अलग तरह की दिखाई देती है.
कथाकार लोकबाबू ने कहा- साहित्य में प्रेम का विषय है तो प्रेम में सच्चाई की कठोरता होनी ही चाहिए.
वीरेंद्र यादव ने इसी कठोरता से साहसिक आलोचना की । राजेन्द्र कुमार अच्छे शिक्षक और गहरी संवेदना के कवि थे.
‘छत्तीसगढ़ प्रगतिशील लेखक संघ’ के राज्य महासचिव व कवि परमेश्वर वैष्णव ने कहा- प्रेमचंद साहित्य के मर्मज्ञ और प्रतिबद्ध आलोचक वीरेंद्र यादव ने न केवल आलोचना को शिखर तक पहुंचाया अपितु अपनी निर्भीकता से बड़े लेखकों की प्रतिबद्धता पर भी सवाल खड़े किए । वे हस्तक्षेपकारी सजग सक्रिय आलोचक थे.
‘जनवादी लेखक संघ’ के सदस्य शायर मुमताज ने कहा- दोनों साहित्यकार स्वभाव में बड़े सौम्य सरल थे लेकिन निष्पक्ष बेलाग विचार व्यक्त करते थे । कवि अंजन कुमार ने कहा दो महत्वपूर्ण लेखकों का एक साथ चले जाना साहित्य जगत के लिए अपूर्णीय क्षति है ।
मजदूर नेता विनोद सोनी ने कहा आज की विषम परिस्थिति में दो महान मार्गदर्शकों का जाना बेहद दुख की घड़ी है उनके योगदान हमेशा रेखांकित रहेंगे । साहित्यकार कमलेश वर्मा ने कहा जिन्होंने आलोचना को नई दृष्टि दी सृजन को धार दी वे इतनी जल्दी चले जाएंगे यह अकल्पनीय है । श्रमिक नेता विजेंद्र तिवारी ने कहा जनता के पक्ष में वीरेंद्र यादव जी और राजेंद्र कुमार जी हमेशा पक्षधर रहे उन्होंने वंचितों के हक में अपनी अभिव्यक्ति बुलंद की ।इस अवसर पर अन्य साहित्यकारों ने भी वैचारिक भागीदारी की.
शोक सभा का संचालन ‘छत्तीसगढ़ प्रगतिशील लेखक संघ’ भिलाई-दुर्ग के अध्यक्ष परमेश्वर वैष्णव ने किया.
[ • प्रेस नोट- परमेश्वर वैष्णव ]
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