यात्रा संस्मरण : विद्या गुप्ता

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मेरी पहली यात्रा
– विद्या गुप्ता
{ छत्तीसगढ़-दुर्ग }

स्मृतियां वास्तव में एक यात्रा है। जब हम स्मृतियों की लचीली भूमि पर अंकित जीवन की यादों को दोहराकर जीने लगते हैं तब लगता है स्मृतियां कितनी कीमती है ….!!
मुझे याद आ रही है अपनी पहली यात्रा जो मैंने घोड़ा गाड़ी यानि तांगे में की थी। मन अद्भुत सुख और खुशी से भरा था। रश्मि फ़ूँदे ,मोतियों की लरियों से सजी रंगीन घोड़ा गाड़ी….. सफेद गद्दी और चारों ओर सफेद तकिया जिनमें झालर लगी थी। सामने घोड़ा खड़ा था उसके सिर पर रंगीन फुद्धियों का गुच्छा लगा था जो मुझे बहुत अच्छी लगती थी। घोड़े के चलते ही पूरा तांगा हिचकोले खाकर दौड़ने लगा … टांगे के साथ ही मैं भी झूल रही थी। झूलती चाल का मजा बड़ा ही अद्भुत था मैं तालियां बजाकर पुलक उठी।
मेरी मात्र ढाई तीन वर्ष की उम्र, कोरी कुंवारी दृष्टि कभी टांगे की बनावट पर ठहर जाती तो कभी घोड़े के साथ दौड़ने लगती… कभी लगता तांगा खड़ा है और आसपास की दुकान दौड़ रही है, तो कभी लगता सब हमें ही देख रहे हैं। हवा में उड़ते घुंघराले बाल, लाल रीबन, फ्रॉक के घेर का गुब्बारे सा फूल जाना मुझे दूसरी ही दुनिया की सैर करवा रहा था।
तांगे वाले के हाथ में लकड़ी से बंधी डोरी जिसे वह ऊपर हवा में लहराता और कभी घूमते पहिए से सटाकर अजीब सी कट कट की आवाज निकालता, तो कभी हुर्रे हुर्रे करता सीटी बजाने लगता, मैं तालियां बजाती बहुत खुश थी। मेरी खुशी देखकर उसने मुझे आगे सीट पर बैठा दिया। मेरे हाथों में लगाम देकर कहा ले तांगा चलाएगी…¡!
मगर तब तक मेरा उल्लास उड़ान छु होने लगा मुझे घोड़े के शरीर की गंध से उल्टी आने लगी। मैं बिसूरती पीछे मां के पास जाने की जिद्द करने लगी।
ना ना, अभी वहीं बैठी रह। उछलते टांगे के खतरे को देखते हुए मां ने कहा,
नहीं नहीं, मैं बाई(मां) के पास जाऊंगी… मैं रोने लगी खुशी का पारा उतर गया। किसी ने मेरी परेशानी को नहीं समझा.. और उल्टी हो गई । जिसे रोकना मेरे बस में नहीं था।
अरे अरे च च च…. तांगे वाले ने लगाम खींची, तांगा रूका और मैं उल्टी से लथपथ…वापस घर चलो, घर चलो… कहती रोते रोते जाने कब मां की गोद में सो गई। होशो हवास की जमीन पर यह मेरी पहली यात्रा थी जो मैंने अपने गृह नगर उज्जैन ( पटनी बाजार से चिंतामन गणेश जी ,जहां चैत्र महीने में समाज की दाल बाटी चूरमा की सेल होती थी) की थी।
लौटती आवृत्ति में मैं भयभीत थी। अब टांगे में नहीं बैठूंगी….!! बिल्कुल नहीं बैठूंगी….!!
• लेखिका संपर्क-
• 96170 01222
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chhattisgarhaaspaas
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