टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी खबर, HRA, PAN Limit और Crypto को लेकर 1 अप्रैल से बदलेंगे नियम

Income Tax Draft Rules 2026 : इनकम टैक्स रूल्स 2026 के ड्राफ्ट में एचआरए, पैन कार्ड लिमिट और क्रिप्टो को लेकर बड़े बदलाव की बात कही गई है। जानें 1 अप्रैल से क्या सस्ता और क्या आसान होगा।
मौजूदा 511 नियमों को घटाकर अब केवल 333 कर दिया गया है।
इसी तरह, टैक्स फॉर्म्स की संख्या 399 से घटाकर 190 करने का प्रस्ताव है। इससे रिटर्न फाइल करना पहले से कहीं ज्यादा तेज और सुविधाजनक होगा।
2. पैन कार्ड के इस्तेमाल पर नई सीमाएं
लेन-देन में पैन कार्ड की अनिवार्यता को लेकर सीमाओं में संशोधन किया गया है:
होटल बिल: अब एक लाख रुपये से कम के होटल बिल के भुगतान पर पैन देना जरूरी नहीं होगा।
गाड़ी की खरीद: दोपहिया या चौपहिया वाहन खरीदते समय अगर कीमत पांच लाख रुपये से अधिक है, तो पैन देना अनिवार्य होगा।
प्रॉपर्टी: अचल संपत्ति के मामले में, अगर कीमत 20 लाख रुपये से ज्यादा है, तो पैन कोट करना जरूरी होगा।
नकद लेन-देन: साल भर में 10 लाख रुपये से ज्यादा के कैश डिपॉजिट या विदड्रॉल पर पैन देना अनिवार्य होगा।
इंश्योरेंस: बीमा कंपनियों के साथ खाता-आधारित संबंध रखने के लिए पैन जरूरी कर दिया गया है।
3. नौकरीपेशा लोगों के लिए एचआरए और भत्तों में राहत
सैलरीड क्लास के लिए ड्राफ्ट में कुछ अच्छी खबरें हैं:
एचआरए का दायरा बढ़ा: हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) की गणना के लिए ‘मेट्रो शहरों’ की सूची में बेंगलुरु, पुणे, अहमदाबाद और हैदराबाद को भी शामिल किया गया है। इससे इन शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को ज्यादा टैक्स छूट मिल सकेगी।
टैक्स-फ्री सुविधाएं: आधिकारिक वाहनों और मुफ्त भोजन जैसी सुविधाओं की टैक्स-फ्री सीमा बढ़ा दी गई है, जिससे कर्मचारियों के हाथ में ज्यादा पैसा बचेगा।
4. क्रिप्टो और डिजिटल करेंसी पर सख्ती और स्वीकार्यता
डिजिटल इकोनॉमी को रेगुलेट करने के लिए भी नियम स्पष्ट किए गए हैं:
क्रिप्टो एक्सचेंज: अब क्रिप्टो एक्सचेंजों को अनिवार्य रूप से टैक्स विभाग के साथ जानकारी साझा करनी होगी। इससे क्रिप्टो ट्रांजेक्शन पर निगरानी बढ़ेगी।
सीबीडीसी: सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) को इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के एक स्वीकार्य मोड के रूप में मान्यता दी जाएगी।
नए नियम 1962 के पुराने इनकम टैक्स नियमों की जगह लेंगे। सरकार का लक्ष्य मार्च की शुरुआत तक फाइनल रूल्स को नोटिफाई करना है ताकि नए वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल) से एक पारदर्शी और सरल टैक्स व्यवस्था लागू की जा सके।
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