स्तम्भ : कविता आसपास ‘आरंभ’ – मिताली श्रीवास्तव वर्मा

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अनुभव की संपदा
– मिताली श्रीवास्तव वर्मा
[ छत्तीसगढ़-भिलाई ]

सीख कर अपनी गलतियों से
हर कदम
सुधार लेता है
साथ लेकर
अनुभव की संपदा
खुद को निखार लेता है
मोड़ अनजान
दुष्कर डगर सही
पथ आसान बना लेता है
डरता नहीं किसी भी
ठोकर से वो
खुद को संभाल लेता है
तूफानों में फंसी कश्ती
हौसलों की
पतवार चला लेता है
ऐसा सरफिरा शख्स है वो
सीप से
मोती निकाल लेता है
जलाकर खुद को
सूरज की भांति
अंधियारा मिटा देता है
साथ लेकर अनुभव की संपदा
बंजर में
उम्मीद उगा देता है..
[ • पेशे से शिक्षिका मिताली श्रीवास्तव वर्मा की सात किताबें प्रकाशित हो चुकी है. • प्रकाशित कृति- ‘मेरी जान तिरंगा’, ‘ काव्य धारा’, ‘ जीवन के सप्तरंग’, ‘साहित्य त्रिविधा’, ‘ईश आराधना’, ‘पिता से अस्तित्व’ और ‘रंगों की बौछार’. • मिताली जी वर्तमान में ‘हिंदुस्तान मंच’ छत्तीसगढ़ इकाई की अध्यक्षा हैं. • अनेक साहित्यिक मंचों से जुड़ी मिताली जी की पहली रचना ‘आरंभ’ में प्रकाशित है. • आपकी कविताएं देश की विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में समय-समय पर प्रकाशित होते रहती है. मंचों से भी काव्य पाठ किया है. • ‘गोल्डन बुक ऑफ छत्तीसगढ़’ एवं ‘दी ग्राम टूडे’ प्रकाशन समूह से सम्मानित मिताली श्रीवास्तव वर्मा की रचना के बारे में अपनी राय से अवश्य अवगत कराएं. – संपादक ]
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chhattisgarhaaspaas
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