रंग पर्व होली पर विशेष- नुरूस्सबाह ‘सबा’
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• ग़ज़ल
• दिल से दिल आज मिला ओ तो मेरी होली हो…
– नुरूस्सबाह ‘सबा’
[ छत्तीसगढ़-दुर्ग]

दिल से दिल आज मिलाओ तो मेरी होली हो
रंग चाहत के उड़ाओ तो मेरी होली हो
प्रेम के रंग सा पक्का नहीं है रंग कोई
रंग ये मुझको लगाओ तो मेरी होली हो
तुमसे उम्मीदे वफ़ा करते हैं जाने – जांना
वक़्त पर इसको निभाओ तो मेरी होली हो
रंग सारे मुझे फीके लगे तुम बिन साजन
तुम मुझे रंग लगाओ तो मेरी होली हो
रुत बसंती मुझे मदहोश किए जाती है
ऐसे में तुम चले आओ तो मेरी होली हो
बुग्ज़ व नफ़रत से भरी आज की इस दुनिया में
रस्मे उलफ़त को निभाओ तो मेरी होली हो
एक बेनाम सा रिश्ता है हमारा तुमसे
उम्र भर इसको निभाओ तो मेरी होली हो
रंग के नाम पे करते हैं सियासत जो यहां
उनको मसनद से हटाओ तो मेरी होली हो
रंग शेरों में भरा अपने लहू से मैंने
आप गर इनको सराहो तो मेरी होली हो
प्यार के रंग से लिक्खी है सबा! मैंने ग़ज़ल
तुम अगर सुनने को आओ तो मेरी होली हो
• बुग्ज़- कीना, कपट, जलन, हसद
• मसनद- कुर्सी, गद्दी, सत्ता
[ • सुप्रसिद्ध शायरा कवयित्री नुरूस्सबाह ‘सबा’ प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ की महासचिव हैं. • छत्तीसगढ़ के अलावा अन्य शहरों में भी अपनी प्रस्तुति दे चुकी ‘सबा’ आकाशवाणी एवं देश की अनेकों पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर छप रही हैं. • संपर्क- 99267 72322 ]
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