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प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के लिए लिखी जाविद हसन भाई जान की अभिव्यक्ति ‘आरंभ’

▪️ • जाविद हसन भाईजान
• प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ की विचारधारा एवं प्रतिबद्धता को स्वीकार करते हुए जाविद हसन भाईजान ने ‘आरंभ’ की सदस्यता ली और ‘आरंभ’ को समर्पित किया अपने मन की बातें, कविता के रूप में.
• 26 जनवरी, 1957 को जन्में जावेद हसन 06 जनवरी, 1984 को भिलाई इस्पात संयंत्र के उपकरण यांत्रिकी विभाग में तकनीशियन पद पर पदस्थ होकर 31 जनवरी, 2017 को 33 वर्षों तक सेल-बीएसपी में कार्य किया और 60 वर्ष पूर्ण कर चार्जमैन पद से सेवानिवृत्त हुए.
• जाविद हसन ने सय्यद बिरादरी में इंटरनेशनल हॉकी खिलाड़ी भिलाई इस्पात संयंत्र के सय्यद अब्दुल गफ्फार के छोटी बहन शमीमुन्नीसा बेगम से हुई.
• एक बेटा और एक बेटी है. बड़ा बेटा उच्च शिक्षा मास्टर्स डिग्री जर्मनी से प्राप्त कर, अभी दुबई के कॉलेजेस में टीचर्स एवं स्टूडेंट्स को एजुकेशन ट्रेंडिंग दे रहा है.
• बेटी Nift के प्रथम वर्ष में थी. 19 वर्ष की उम्र में 2013 को चेन्नैई में शादी हुई. नाती 9 वर्ष का है, 4th स्टेंडर्ड में है.
• रिसाली [प्रगति नगर] में स्वयं का मकान है. ‘समभाव सामाजिक सेवा समिति’ से जुड़कर सामाजिक सेवाभाव में भी सक्रिय हैं. लिखने की रुचि भी है. शेरो-शायरी कविता के अलावा गार्डिंनिंग का भी बचपन से शौक है.
• जावेद हसन बीते दिनों ‘आरंभ’ से जुड़ने की चाह रखी और ‘आरंभ’ टीम में शामिल हो गए. वैचारिक अभिव्यक्ति के धनी, साहित्यिक चिंतक, विचारवान कवि हृदय भाईजान का आत्मीय स्वागत है.
-संपादक
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• आरंभ
– जाविद हसन भाईजान

जहां जन-जन विचार धाराओं की आस्था ,
वहीं से “आरंभ” प्रगतिशील साहित्य संस्था।
जिसका उद्देश्य विचार धाराओं की प्रगति ,
“आरंभ” सेअनंत विचारों की निरंतर गति।
संस्था में हिन्दू , मुस्लिम, सिख और ईसाई ,
रहते मिल-जुल कर,आपस में भाई – भाई।
यहां मिलता सबको,समानता का अधिकार,
इसलिए संस्था से जुड़ना है , सहर्ष स्वीकार ।।
मुझे मिला सदियों पुराने , मित्रों का साथ ,
जो मेरे लिए है प्रसन्नता और गौरव की है बात।
नहीं होती यहां , राजनैतिक व धार्मिक चर्चा,
और न ही होती कोई ,भेद – भावपूर्ण स्पर्धा।।
यही हमारे भारत की आन,बानऔर शान है,
अनेकता में एकता ही , हमारी पहचान है।
“आरंभ” साहित्य का साथ विकास की बात , निरंतर साहित्य विकास में आरंभ का साथ।।
यही हमारे भारतवर्ष की शान है ” जाविद “,
अनेकता में एकता ही , हमारी पहचान है ।।

👉 • ‘आरंभ’ द्वारा प्रथम आयोजन ‘शाम-ए-ग़ज़ल’ में शामिल हुए थे काव्य प्रेमी जाविद हसन भाईजान और वे प्रभावित होकर ‘आरंभ’ से जुड़े. आपका आत्मीय स्वागत है, अभिनंदन है.
• कवि संपर्क-
• 75870 98107
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chhattisgarhaaspaas
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