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साहित्य सृजन संस्थान : 22 मार्च को संस्थान के तत्वावधान में विराट कवि सम्ममेलन में देश के सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार कवि गिरीश पंकज ने कहा कि- “कविता के मंच को मसखरों का अड्डा न बनने दें”

👉 • ‘साहित्य सृजन संस्थान’ के तत्वावधान में कवि सम्मेलन में कवियों के साथ मंचस्थ अतिथि डॉ. संजय अलंग, गिरीश पंकज एवं अध्यक्षता की संस्थान के अध्यक्ष वीर अजीत शर्मा
• छत्तीसगढ़ आसपास
• रायपुर
राजधानी के ‘वृंदावन सभागार’ में ‘साहित्य सृजन संस्थान’ द्वारा विराट कवि सम्मेलन और साहित्योत्सव का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में साहित्य, संवेदना और हास्य का अनूठा संगम देखने को मिला. आयोजन की मुख्य विशेषता देश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों की उपस्थिति और उच्चस्तरीय काव्य पाठ रहा.

👉 • वृंदावन सभागार में उपस्थित रचनाकार
साहित्योत्सव के मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं पूर्व आईपीएस प्रशासक डॉ. संजय अलंग थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष व कवि वीर अजीत शर्मा ने की. विशिष्ट अतिथि ‘सद्भावना दर्पण’ के संपादक एवं ख्यातिलब्ध साहित्यकार गिरीश पंकज थे.
हास्य एवं गीतों की जुगलबंदी का काव्य पाठ प्रात: 10 बजे से ‘ओपन मंच’ के माध्यम से प्रारंभ होकर दोपहर 12.00 बजे से विराट कवि सम्मेलन में तब्दील हो गया. ‘ओपन मंच’ का संचालन सुश्री पूनम ऋतु सेन और कवि सम्मेलन का संचालन कवयित्री दीपिका ऋषि झा ने किया. पुस्तक विमोचन भी हुआ. कृति विमोचन का संचालन ‘साहित्य सृजन संस्थान’ महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष ममता खरे ‘मधु’ ने किया. सम्मान समारोह का संचालन सुश्री आहना पुंज ने किया. वंदना ठाकुर की नवीन कृति का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया.
डॉ. संजय अलंग ने कहा कि-
“ऐसे आयोजन की सराहना की. आयोजन से छुपी हुई प्रतिभा मुखर होकर सामने आती है. नवोदित रचनाकार को ख्यातिप्राप्त रचनाकारों को सुनने का मौका मिलता है और वे अपनी रचनाओं को परिष्कृत कर सकते हैं.”
गिरीश पंकज ने कहा कि-
“कविता के मंच को मसखरों का अड्डा न बनाया जाए. हास्य स्वस्थ होना चाहिए. मनोरंजन के फेर में कविता की आत्मा खत्म नहीं होनी चाहिए. नई प्रतिभाओं को तराशना आज के समय की मांग है.”
राजकुमार धर द्विवेदी ने सिलेंडर वाली व्यंग्य कविता का पाठ किया. कविता में सामाजिक विसंगतियों पर करारा तमाचा है. डॉ. दीपशिखा सागर ने अपनी बुलंद आवाज़ में गीत-ग़ज़ल की प्रस्तुति दी. आलोक शर्मा एवं भोले नेमा चंचल की रचनाओं में हास्य के साथ गंभीरता भी थी. कविता जैन कुहुक ने अपनी मधुर आवाज से समा बांधा. ममता खरे ‘मधु’ एवं उमेश सोनी ‘नयन’ ने भी अपनी प्रभावी कविताओं से श्रोताओं को बांधे रखा. शाम 5.00 बजे तक चले इस गरिमामय आयोजन से साहित्यिक वातावरण में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ.
कार्यक्रम में सीमा पाण्डेय ‘सीमा’, अंजू पांडेय ‘अश्रु’, पंखुरी मिश्रा, शुभा शुक्ला ‘निशा’, शुभ्रा ठाकुर, राकेश अग्रवाल, सुदेश मेहर, ज्योत्सना अग्रवाल, सिद्धनाथ सिंह, नत्थूलाल केशरवानी, सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक, साहित्य प्रेमी और युवा रचनाकार उपस्थित थे.
इस अवसर पर साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कई रचनाकारों को सम्मानित भी किया गया.
‘साहित्य सृजन संस्थान’ की यह 43वीं काव्य गोष्ठी थी.
संस्थान की 44वीं मासिक काव्य संध्या 19 अप्रैल, 2026 को रखी गई है.

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‘साहित्य सृजन संस्थान’ 43वीं साहित्योत्सव की कुछ झलकियाँ-








👉 • डॉ. संजय अलंग ने गिरीश पंकज का सम्मान किया

👉 • ‘साहित्य सृजन संस्थान’ के अध्यक्ष वीर अजीत शर्मा ने संस्थान के संरक्षक डॉ. संजय अलंग का पुष्पगुच्छ देकर अभिवादन किया

👉 • कृति विमोचन करते हुए अतिथि

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