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- भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रबंधक और बांग्ला-हिंदी के राष्ट्रवादी कवि ब्रजेश मल्लिक प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ से जुड़े, आजीवन सदस्य बनें
भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रबंधक और बांग्ला-हिंदी के राष्ट्रवादी कवि ब्रजेश मल्लिक प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ से जुड़े, आजीवन सदस्य बनें
• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई
‘आरंभ’ हो अंत न हो-चिंतन कभी कलांत न हो’ : ‘आरंभ’ नवचिंतन का आलंब है. इसी उद्देश्य को लेकर बीते कुछ माह पूर्व शहर के 21 प्रबुद्धजन संगठित होकर ‘आरंभ’ की परिकल्पना की और रचनात्मक प्रतिबद्धता का संकल्प लेकर प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ का शुभारंभ किया.
‘आरंभ’ से जुड़ने का सिलसिला जारी है. इस कड़ी में भारतीय स्टेट बैंक [SBI] से सेवानिवृत्त वरिष्ठ ब्रांच मैनेजर, हिंदी-बांग्ला, अंग्रेजी-छत्तीसगढ़ी भाषा के भाषाविद् कवि साहित्यकार, अर्थशास्त्री, हस्तरेखाविद्, मृदुभाषी एवं सामाजिक कार्यकर्ता ब्रजेश मल्लिक ‘आरंभ’ की विचारधारा से प्रभावित हुए और ‘आरंभ’ से जुड़े, आजीवन सदस्यता ली और ‘आरंभ’ के संस्थापक सदस्य बने.

👉 • ‘आरंभ’ के तत्वावधान में आयोजित ‘शाम-ए-ग़ज़ल’ कार्यक्रम में ब्रजेश मल्लिक शामिल हुए और इस आत्मीय आयोजन से प्रभावित होकर ‘आरंभ’ से जुड़ने का संकल्प लिया.
ब्रजेश मल्लिक पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के एक छोटे से गांव किसान के घर में जन्में. बीकॉम और CAIIB [Certificate of Indian Institutes of Bankers, Bombay] की पढ़ाई की और बैंक की नौकरी से जुड़े. कवि हृदय ब्रजेश मल्लिक का रुझान साहित्य की ओर शुरु से रहा. काव्यात्मक शब्दों को अपनी रोज की डायरी में लिखते रहे. अहिंदी भाषा के कवि ब्रजेश मल्लिक की कविताओं में समाज को बदलने की राह दिखाती है. इनकी ‘माँ’ और ‘बेटी’ पर लिखी कविता बेहद ही मार्मिक एवं प्रचलित है.
ब्रजेश मल्लिक छत्तीसगढ़ के अनेकों साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित हुए. सामाजिक संगठन ने भी सम्मान किया. पत्रकारिता में भी रुचि है और लोक-शिक्षण लोक-जागरण की पत्रिका ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ में संचालक मंडल के सदस्य हैं.
‘आरंभ’ में आपके शामिल होने से संस्था आपके मार्गदर्शन से ऊँचाई की ओर अग्रसर होगी.
शुभकामनाएं…
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chhattisgarhaaspaas
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