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बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केंद्र भोपाल द्वारा बाल कवि के रूप में प्रख्यात कमलेश चंद्राकर को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान

👉 • बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केंद्र ने बाल साहित्यकार, बाल चिकित्सक और बाल पत्रिका को दिए जाने वाले सम्मानों की घोषणा कर दी है. केंद्र के निदेशक महेश सक्सेना ने छत्तीसगढ़ से सुप्रसिद्ध बाल कवि कमलेश चंद्राकर के नाम की घोषणा की.
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• छत्तीसगढ़ [दुर्ग]
‘गुनगुने’, ‘ओ दर्द तुम्हारे होंठ खिलें’, ‘दादी अम्मा गई किधर’, ‘सारी दुनिया एक तरफ’, ‘सारा जहाँ हमारा है’, ‘स्कूल के दिन आए फिर’ और ‘मम्मा मेरी सुनो जरा’ कृति के कवि कमलेश चंद्राकर को मध्यप्रदेश [भोपाल] में 3 मई, 2026 को ‘बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केंद्र’ द्वारा वर्ष-2026 के लिए “पन्नालाल शर्मा बाल साहित्य सम्मान” से सम्मानित किया जाएगा.
दुर्ग निवासी कमलेश चंद्राकर छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल से सेक्शन ऑफिसर के पद से सेवानिवृत्ति हुए. बालमन के बड़े कवि कमलेश चंद्राकर के पांचवें बाल गीत संग्रह ‘मम्मा मेरी सुनो जरा’ का हाल ही में एक भव्य समारोह में दिल्ली के प्रख्यात बाल साहित्यकार दिविक रमेश के करकमलों द्वारा सम्पन्न हुआ था.
कमलेश चंद्राकर की प्रकाशनधीन कृतियाँ है- ‘सूरज सा हमें दमकना है’, ‘सुनो मम्मा’, ‘सबेरा रोज आता है’, ‘आँसू भी अंगारे भी’, ‘अवसरों के पाट से’, ‘दोपह री तेरी धूप मैं’ और ‘ठाढ़ ठाढ़ कहि दे थव ते लाग जाथे रंज’ [छत्तीसगढ़ी].
कमलेश चंद्राकर को इस सम्मान के लिए प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ की तरफ अनंत- अशेष बधाई एवं शुभकामनाएं.
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