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- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-124’ में इस सप्ताह शामिल हुए- स्मृति दत्त, दुलाल समाद्दार, पल्लव चटर्जी, प्रदीप भट्टाचार्य, आलोक कुमार चंदा, वीरेंद्रनाथ सरकार, ममता सरकार, रतन सरकार, पं. बासुदेब भट्टाचार्य और कृष्णचंद्र रॉय : ‘मध्यबलय’ मासिक बुलेटिन पर चर्चा, कवि गुरु रविंद्रनाथ टैगोर और उनकी कृतियों पर बातचीत एवं काव्य पाठ
‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-124’ में इस सप्ताह शामिल हुए- स्मृति दत्त, दुलाल समाद्दार, पल्लव चटर्जी, प्रदीप भट्टाचार्य, आलोक कुमार चंदा, वीरेंद्रनाथ सरकार, ममता सरकार, रतन सरकार, पं. बासुदेब भट्टाचार्य और कृष्णचंद्र रॉय : ‘मध्यबलय’ मासिक बुलेटिन पर चर्चा, कवि गुरु रविंद्रनाथ टैगोर और उनकी कृतियों पर बातचीत एवं काव्य पाठ

👉 • ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सदस्य ‘इंडियन कॉफी हाउस’ भिलाई निवास में [25 अप्रैल, 2026]
• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई
‘बंगीय साहित्य संस्था’ विगत 65 वर्षों से दुर्ग-भिलाई के बांग्ला साहित्यिक रचनाकारों की एक जूटता के कारण आज भी जीवंत है. बांग्ला भाषा, संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत को बंगीय सदस्यों द्वारा साल भर अनेकों साहित्यिक आयोजन के माध्यम से जीवंतता बनाए रखी है. प्रतिमाह ‘साहित्य सभा’, प्रति सप्ताह कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा, वार्षिक सर्व भारतीय साहित्यिक सभा, ‘मध्यबलय’ पत्रिका एवं बुलेटिन आदि कार्यक्रम है. इस संस्था के संस्थापक सदस्य स्व. शिबव्रत देवानजी और डॉ. भवानी प्रसाद मुखर्जी ने नींव रखी थी. वर्तमान में संस्था की सभापति बानी चक्रवर्ती, उप सभापति स्मृति दत्त एवं दीपाली दासगुप्ता, महासचिव शुभेंदु बागची, उपसचिव प्रकाशचंद्र मण्डल, कोषाध्यक्ष पल्लव चटर्जी और संपादक दुलाल समाद्दार हैं.

👉 [बाएँ से] • ममता सरकार, कृष्णचंद्र रॉय, स्मृति दत्त, आलोक कुमार चंदा, पं. बासुदेब भट्टाचार्य, रतन सरकार, वीरेंद्रनाथ सरकार, प्रदीप भट्टाचार्य और पल्लव चटर्जी [फोटो क्लिक- दुलाल समाद्दार]

👉 [बाएँ से] • कृष्णचंद्र रॉय, पं. बासुदेब भट्टाचार्य, प्रदीप भट्टाचार्य, स्मृतिदत्त, दुलाल समाद्दार, रतन सरकार और ममता सरकार [फोटो क्लिक- पल्लव चटर्जी ]
‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-124’ की अध्यक्षता ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उप सभापति एवं बांग्ला की देशव्यापी चर्चित लेखिका स्मृति दत्त और संचालन बांग्ला के सुप्रसिद्ध कवि पल्लव चटर्जी ने किया.
प्रारंभ में दुलाल समाद्दार ने ‘मध्यबलय’ बुलेटिन के पुन: प्रकाशन के बारे में सदस्यों को विस्तृत जानकारी दी. 27 साल पहले हस्तलिपी में प्रकाशित ‘मध्यबलय’ की कुछ प्रतियाँ अवलोकनार्थ सदस्यों के सामने रखा. अप्रैल-2026 से ‘मध्यबलय’ बुलेटिन का पुन: प्रकाशन किया जाएगा. इस माह के संपादन का दायित्व स्मृति दत्त को दिया गया. सदस्य छोटी-छोटी कविता, अनु-गोल्पो स्मृति दत्त के इस व्हाट्सएप नंबर [99071 55985] पर भेज सकते हैं. बुलेटिन बांग्ला भाषा में प्रकाशित होगी.


दुलाल समाद्दार ने ‘मध्यबलय’ के पुराने अंकों से कुछ कविताओं का पाठ भी किया.
वीरेंद्रनाथ सरकार ने रविंद्रनाथ टैगोर के बारे कुछ जानकारी दी-
07 मई 1861 को कोलकाता में जन्में रविंद्रनाथ टैगोर का निधन 1941 को हुआ. आज भी उनकी रचनाएँ कालजयी एवं लोगों के दिलों मैं जीवित है. गीतांजलि/गोरा/घरे-बाइरे/काबुलीवाला और डाकघर प्रमुख कृतियाँ है. टैगोर पहले भारतीय हैं जिन्हें ‘नोबेल पुरस्कार’ मिला. भारत का राष्ट्र गान ‘जन गण मन’ और बांग्ला देश का राष्ट्रीय गीत ‘आमार सोनार बांग्ला’ दोनों उनकी ही रचनाएं हैं. रविंद्रनाथ टैगोर ने हजारों गीतों की रचना की, जिन्हें “रवींद्र संगीत” के नाम से जाना जाता है. उनके द्वारा स्थापना की गई ‘शांति निकेतन’ अब ‘विश्व-भारती विश्वविद्यालय’ के नाम से जाना जाता है.
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काव्य पाठ-

👉 [बाएँ से] • दुलाल समाद्दार, रतन सरकार और ममता सरकार

👉 • कवि वीरेंद्रनाथ सरकार और स्मृति दत्त

👉 • स्मृति दत्त उद्बोधन देते हुए…

👉 • ममता सरकार काव्य पाठ करती हुई…

👉 • प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य ने कुछ मुक्तक का पाठ किया
• पं. बासुदेब भट्टाचार्य ने ‘सत्य की विजय’ और ‘अनंत प्रेम’/ • ममता सरकार ने आवृत्ति ‘शुभेच्छा’/ • दुलाल समाद्दार ने नूतन बोछोर, शिब व्रत देवानजी की एक कविता ‘नदी’ और पल्लव चटर्जी की एक कविता ‘निर्बाध’ का पाठ किया/ • स्मृति दत्त ने विश्व पुस्तक दिवस पर अपने अनुभव को साझा किया और एक ईश्वरीय रचना का पाठ की/ • पल्लव चटर्जी ने वर्णमाला पर लिखी कविता ‘अ’ शब्द पर ‘अंधों मेये टी…’ ‘आ’ शब्द पर दुलाल समाद्दार को समर्पित भावनात्मक कविता ‘आमार कवि’ एवं एक जन-पक्षधर कविता ‘हाट्टी’/ • वीरेंद्रनाथ सरकार ने ‘निर्झरणी’, ‘आमी भांगा चेयर’ और स्पर्शमणि {रवि ठाकुर} और • प्रदीप भट्टाचार्य ने छोटी-छोटी मुक्तक जो आज के समाज को आइना दिखाती है, पढ़ी.
* आभार व्यक्त कृष्णचंद्र रॉय ने दिया.
• एक सूचना से अवगत कराया गया कि मई माह में भीष्ण गर्मी को देखते हुए ‘आड्डा’ बंद रहेगा.
• ‘साहित्य सभा’ मई माह के अंतिम सप्ताह में स्मृति दत्त के निवास पर होगा, इसकी सूचना सदस्यों को दी जाएगी. यह साहित्य सभा शरदचंद्र चट्टोपाध्याय को समर्पित होगा.

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