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छत्तीसगढ़ के सबसे धनी मंदिर ट्रस्ट के पुजारियों का मानदेय न्यूनतम मजदूरी से कम, परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल

राजनांदगांव: राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर ट्रस्ट की वार्षिक आय लगभग 17 करोड़ रुपये होने के बावजूद यहां कार्यरत पुजारियों को बेहद कम मानदेय मिल रहा है। मंदिर ट्रस्ट में सेवा दे रहे पुजारियों को प्रतिमाह केवल छह से नौ हजार रुपये तक का भुगतान किया जा रहा है। वर्ष 2022 तक यह राशि अधिकतम छह हजार रुपये ही थी। यह भुगतान अकुशल श्रमिकों के न्यूनतम वेतन से भी कम बताया जा रहा है।
27 पुजारियों सहित 350 कर्मचारी कार्यरत
वर्ष 1964 में स्थापित मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर ट्रस्ट प्रदेश के सबसे समृद्ध धार्मिक ट्रस्टों में गिना जाता है। ट्रस्ट के अंतर्गत पहाड़ी पर स्थित मुख्य मंदिर के साथ तलहटी मंदिर और शीतला मंदिर का भी संचालन किया जाता है। यहां लगभग 27 पुजारियों सहित करीब 350 कर्मचारी कार्यरत हैं। कर्मचारियों के मानदेय को लेकर ट्रस्ट की ओर से स्पष्ट जानकारी साझा करने में भी हिचकिचाहट दिखाई जा रही है।
दक्षिणा और आरती चढ़ावे पर निर्भर पुजारी
ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर में होने वाली आरती का चढ़ावा पुजारियों के बीच बांट दिया जाता है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। इसके अलावा मासिक मानदेय भी दिया जाता है। पुजारियों का मानना है कि मंदिर सेवा के बाद प्रतिदिन औसतन 200 से 300 रुपये की आय में परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद इस विषय पर लंबे समय से कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है।
सुप्रीम कोर्ट में भी उठ चुका है मुद्दा
देशभर में पुजारियों को दिए जाने वाले वेतन और मानदेय का मुद्दा उच्चतम न्यायालय तक पहुंच चुका है। दायर याचिका में कहा गया है कि कई मंदिरों में पुजारियों को श्रम कानूनों के तहत तय न्यूनतम मजदूरी के बराबर भी भुगतान नहीं किया जा रहा। डोंगरगढ़ के बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट में भी ऐसी ही स्थिति सामने आ रही है।
रोपवे और दान से होती है बड़ी कमाई
मंदिर ट्रस्ट की आय के प्रमुख स्रोतों में श्रद्धालुओं का दान, रोपवे शुल्क, ट्रस्ट की दुकानों का किराया, धर्मशाला से आय और विज्ञापन शामिल हैं। ट्रस्ट के अनुसार केवल रोपवे से ही प्रतिवर्ष लगभग चार करोड़ रुपये की आय होती है, जबकि इसके संचालन पर करीब ढाई करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। ट्रस्ट के पास लगभग 100 एकड़ भूमि भी है।
नवरात्र आयोजन पर ढाई करोड़ खर्च
ट्रस्ट अध्यक्ष मनोज अग्रवाल के मुताबिक चैत्र और क्वांर नवरात्र के दौरान मंदिर की व्यवस्थाओं पर हर वर्ष लगभग ढाई करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। दोनों नवरात्र में सवा-सवा करोड़ रुपये का बजट रखा जाता है। केवल फूलों की सजावट पर ही 20 से 25 लाख रुपये तक खर्च हो जाते हैं।
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