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‘भिलाई वरिष्ठ नागरिक महासंघ’ का आयोजन : हिंदी एवं संस्कृत के प्रख्यात विद्वान वरिष्ठ साहित्यकार व शिक्षाविद् आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा की साहित्यिक कृतियों पर सारगर्भित परिचर्चा सम्पन्न

👉 • आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा की की तीन महत्वपूर्ण कृति ‘गागर में सागर’, ‘साहित्य और समाज’ एवं ‘प्रेरणा प्रदीप’ कृतियों पर समीक्षा गोष्ठी के मुख्य अतिथि समाजसेवी कैलाश जैन बरमेचा, विशिष्ट अतिथि ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य थे. अध्यक्षता ‘भिलाई वरिष्ठ नागरिक महासंघ’ के अध्यक्ष घनश्याम कुमार देवांगन ने किया
• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई-दुर्ग
‘भिलाई वरिष्ठ नागरिक महासंघ’ के तत्वावधान में आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा की कृतियों पर एक साहित्यिक आयोजन वैशाली नगर के ‘सियान सदन’ में सम्पन्न हुआ. कार्यक्रम में साहित्य, शिक्षा एवं समाजसेवा से जुड़े अनेक गणमान्य नागरिक, साहित्यकार, वरिष्ठजनों एवं ‘भिलाई वरिष्ठ नागरिक महासंघ’ के सदस्यों की उपस्थिति में हुई.

👉 [बाएँ से] • कैलाश जैन बरमेचा, आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा, प्रदीप भट्टाचार्य और घनश्याम कुमार देवांगन
समीक्षा गोष्ठी में अतिथि वक्ताओं ने आलेख पठन कर आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा के बहुआयामी साहित्यिक अवदानों संस्कृत एवं हिंदी भाषा के प्रति उनके समर्पण तथा उनकी रचनाओं में निहित सांस्कृतिक, नैतिक एवं मानवीय मूल्यों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया. सभी वक्ताओं ने कहा कि डॉ. शर्मा की पुस्तकों को पढ़कर सार्थक और संतोषजनक जीवनोपयोगी प्रेरणा मिलती है. आलेख पाठ कवि डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’, कवयित्री शुचि ‘भवि’, पत्रकार-लेखक डॉ. दीनदयाल साहू और शिक्षाविद्-साहित्यविद् वर्षा ठाकुर ने आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा की विभिन्न कृतियों पर अपने शोध परक आलेखों का वाचन किया. वक्ताओं ने कहा कि- “डॉ. शर्मा की रचनाएं भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत साहित्य की गरिमा तथा मानवीय संवेदनाओं को स्मृद्ध करने वाली अमूल्य धरोहर है. उनकी भाषा सरल एवं बोधगम्य है, जो सीधे हृदय को स्पर्श करती है. यह परिचर्चा हिंदी और संस्कृत की स्मृद्ध परंपरा, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों तथा वरिष्ठ साहित्यकारों के योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है.”
कैलाश जैन बरमेचा ने अपने छत्तीसगढ़ी उद्बोधन में कहा कि-

आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा जैसे विद्वान साहित्यकार समाज की सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने का कार्य करते हैं. उनकी साहित्यिक साधना नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं. उनकी रचनाएं अंधेरे में उजाले का आभास देती है, उनकी कथनी एवं करनी में समानता है.
प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष और ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि-

“हमारे शब्द ही हमारे कर्म होते हैं. हमें अपने हर शब्द को बोलने से पहले तौलना बहुत जरूरी होता है. पुस्तक में जो लिख दिया जाता है, उन शब्दों से हमारी भावनाओं का पता चलता है. डॉ. शर्माजी जो भी कहते हैं या लिखते हैं, वो कोई प्रकाण्ड पंडित ही कर सकता है. उन्हें भाषा और साहित्य का जो ज्ञान है उनके बारे में मैं क्या कहूं जिन्हें मैंने गुरु माना, सीखा उन पर कुछ टिप्पणी करना मुझ जैसे पाठक/पत्रकार-कवि की हैसियत नहीं. शब्द चेतना के गुरु हैं डॉ. महेशचंद्र शर्मा जी. इनकी सभी पुस्तकों में शब्द चेतना दिखती है. डॉ. शर्माजी की रचनाओं में भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों का उत्कृष्ट समन्वय दिखाई देता है.”
भिलाई वरिष्ठ नागरिक महासंघ’ के अध्यक्ष घनश्याम कुमार देवांगन ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि-
“वरिष्ठ साहित्यकारों के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर इस प्रकार की परिचर्चाएं साहित्यिक परंपरा को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. डॉ. शर्माजी हिंदी एवं संस्कृत जगत की अमूल्य निधि हैं”
कृतिकार आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा ने कहा कि-

“साहित्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त माध्यम है और साहित्य साधना का उद्देश्य मानवता एवं संस्कृति की सेवा होना चाहिए. हमारे वेद पुराण भारतीय साहित्य एवं संस्कृति के पोषक एवं धरोहर है”
अंत में ‘भिलाई वरिष्ठ नागरिक महासंघ’ की ओर से समस्त अतिथियों एवं आलेख पाठ वक्ताओं को शॉल, श्रीफल एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया. वरिष्ठ नागरिकों के सामूहिक जन्मोउत्सव [जून माह के] दिनेश कुमार गुप्ता, जोसफ एवं शोभाराम भोगड़े को अंगवस्त्र, श्रीफल एवं पुष्पवर्षा कर दीर्घ जीवन गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया. जन्मदिन गीत गाए गए. गायक जोसफ और संतोष शुक्ला ने सु-मधुर गीत प्रस्तुत कर समां बांधा. कार्यक्रम का शुभारंभ सामूहिक हनुमान चालीसा का स-स्वर पाठ एवं आरती से हुआ.




👉 [चित्र-1] • कैलाश जैन बरमेचा का शॉल श्रीफल से स्वागत करते हुए ‘भिलाई वरिष्ठ नागरिक महासंघ’ के पदाधिकारी
👉 [चित्र-2] • प्रदीप भट्टाचार्य का अभिवादन करते हुए ‘महासंघ’
👉 [चित्र-3] • श्रीमती वर्षा ठाकुर का अभिनंदन करते हुए
👉 [चित्र-4] • डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’ का स्वागत किया ‘महासंघ” ने
कार्यक्रम में प्रमुख गणमान्य बुद्धिजीवी लोग उपस्थित हुए-


जनवादी लेखक संघ भिलाई-दुर्ग के अध्यक्ष- शायर मुमताज, ‘आरंभ’- के संयोजक ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर, ‘आरंभ’- के प्रवक्ता जाविद हसन ‘भाईजान’, ‘साहित्य सृजन परिषद्’ के अध्यक्ष एलएन मौर्य ‘प्रीतम’, टीएन कुशवाहा ‘अंजन’, पत्रकार इस्माइल आजाद, डॉ. बीना सिंह ‘रागी’, गंगाचरण पुरोहित, प्रेमनाथ त्रिपाठी, धानेश्वर निर्मल, शिवप्रसाद साहू, हुकुमचंद देवांगन, डीए करमाकर, भोजराज दास, आरके पुरोहित, शैलजा वाष्णय, ईश्वरी साहू, राजपाल राघव, चंद्रभान दिंडे, अशोक जिज्ञासी, आरबी गुप्ता, ओमप्रकाश ठाकुर, शांता शर्मा, श्रुति तिवारी, टीएम कुशवाहा, ओमप्रकाश गुप्ता, राजेंद्र वाष्णर्य, देवेंद्र वर्मा, रमेश चंद्र बटघरे, संतोष शुक्ला, सतीश गुप्ता, राम बोरकर, रवि पुरोहित, रामबालक सिंह, महेश रतनानी, आचार्य संगीतज्ञ यशजी, सुरेंद्र राय, ताम्रध्वज सहारे, रामाधार वर्मा सहित महासंघ के अनेक सदस्य.
स्वागत व्यक्तत्व एवं आभार घनश्याम कुमार देवांगन और कुशल मंच संचालन सहायक प्रोफेसर जयति साहू ने किया.
अंत में ‘भिलाई वरिष्ठ नागरिक महासंघ’ के संग सभी अतिथि, साहित्यकार एवं गणमान्य बुद्धिजीवी एक साथ बैठकर स्वरुचि सात्विक भोजन का आनंद लिए.
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