होली पर विशेष- डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’
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गीत : रंग वो ही डालना.
-डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’
[ कोरबा-छत्तीसगढ़ ]
चढ़कर जो उतरे न , तुम रंग वो ही डालना
वैरागी मन है मेरा , प्यार से सँभालना
निर्मोही सपनों का क्या वो रोज़ आएंगे
थोड़ा सुख देंगे और ज्यादा तड़पाएंगे
मन की बातें किसी के आगे मत निकालना
सखियाँ नित पूछा करेंगी हृदय में कौन हैं
चहक रही हो फिर भी ये आँखें क्यों मौन हैं
सबकी नज़रों से बचाकर मुझे तुम पालना
फिर मौसम मदमस्त हुआ फागुनी बयार है
जीत छिपी हो किसी की मीत ये वो हार है
मिलने को ग़र वक़्त कहे तो कभी न टालना
धूप में निकला न करो देहरी को लाँघकर
रख लेगा प्रेमी कोई छंदों में बाँधकर
भाने लगेगा तुम्हें भी चंदन का पालना
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chhattisgarhaaspaas
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