■लघुकथा : •विक्रम ‘अपना’.
5 years ago
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●नोट छापने की मशीन
-विक्रम ‘अपना’
दसवीं के बाद पोता, दादा जी से विषय चयन के लिए मार्गदर्शन लेने गया।
मेडिकल स्टोर संचालक दादा जी ने उसे जीवन का कटु अनुभव सुनाते हुए कहा…..
देखो!! मैंने अपने तीनों बच्चों की जिद पर उन्हें लाखों रुपये खर्च कर एम बी ए, इंजीनियरिंग और पी एच डी की पढ़ाई करवाई।
लेकिन वे तीनों आज जैसे तैसे जीवन गुजार रहे हैं।
फिर संजीदा होकर वे बोले……
तू तो पढ़ाई में एवरेज है इसीलिए तू बी फार्मा कर ले।
फिर मेडिकल दुकान खोलकर बेधड़क नोट छाप।
●लेखक संपर्क-
●98278 96801
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chhattisgarhaaspaas
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