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हाईकोर्ट की सख्ती के बाद जागा वन विभाग, वन्यजीवों के संरक्षण में लापरवाही पर होगी सीधी कार्रवाई

Chhattisgarh High Court : छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने गुरु घासीदास नेशनल पार्क में बाघ की संदिग्ध मौत और शिकार की घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जवाबदेह बनाया है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने इस मामले में दायर जनहित याचिका को राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत विस्तृत कार्ययोजना के बाद समाप्त कर दिया है, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट चेतावनी भी दी है कि भविष्य में वन्यजीवों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकार द्वारा पेश किए गए रोडमैप के अनुसार, विभाग ने 5726 किलोमीटर के वन क्षेत्र में पैदल गश्त कर भारी मात्रा में अवैध तार और फंदे बरामद किए हैं, साथ ही खैरागढ़ जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस नई रणनीति के तहत ड्रोन निगरानी, कैमरा ट्रैप, स्निफर डॉग और ओडिशा जैसे पड़ोसी राज्यों के साथ संयुक्त अभियान को शामिल किया गया है, ताकि ‘एंटी-स्नेर’ (फंदा विरोधी) अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाया जा सके। बिजली विभाग के साथ मिलकर 1781 लूज वायर पॉइंट को दुरुस्त करना और ग्रामीणों को संरक्षण की मुख्यधारा से जोड़ना इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि यह केवल कागजी योजना नहीं रहेगी, बल्कि टाइगर और हाथियों जैसे वन्यजीवों के लिए प्रदेश के जंगलों को एक सुरक्षित ठिकाना बनाएगी।
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