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छत्तीसगढ़ के लाखों पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर, मध्य प्रदेश से डीआर सहमति की अनिवार्यता समाप्त

रायपुर। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के लाखों पेंशनरों के लिए एक सुखद और राहत भरी खबर सामने आई है। दोनों सरकार ने पेंशनरों को मिलने वाली महंगाई राहत (डीआर) के संबंध में एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए दोनों राज्यों के बीच पारस्परिक सहमति की बाध्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अब दोनों राज्य अपने स्तर पर स्वतंत्र रूप से महंगाई राहत की घोषणा करने और कार्यकारी आदेश जारी करने के लिए सक्षम होंगे।
वित्त विभाग मध्यप्रदेश द्वारा जारी आदेश के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि भविष्य में महंगाई राहत घोषित करने के लिए अब दूसरे राज्य की सहमति का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वर्षों से चली आ रही यह जटिल प्रक्रिया पेंशनरों के लिए अक्सर देरी का कारण बनती थी। इस निर्णय से अब पेंशनरों को महंगाई राहत मिलने की प्रक्रिया अत्यंत सरल और त्वरित हो जाएगी।
पेंशनर्स महासंघ ने जताई खुशी
भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश ने इस निर्णय का स्वागत किया है। महासंघ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने बताया कि यह निर्णय उनके संगठन द्वारा लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है। महासंघ ने वित्त सचिव और मुख्य सचिव के साथ कई दौर की चर्चा की थी और लगातार ज्ञापन सौंपकर इस बाध्यता को समाप्त करने की मांग उठाई थी। नामदेव ने इसे पेंशनरों के हित में उठाया गया एक सकारात्मक और ऐतिहासिक कदम बताया है।
केंद्र के समान डीआर की मांग
बाध्यता समाप्त होने के बाद, अब पेंशनर्स महासंघ ने छत्तीसगढ़ सरकार से तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा की है। प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने शासन से मांग की है कि केंद्र सरकार के समान 1 जनवरी 2026 से देय 2 प्रतिशत महंगाई राहत का आदेश बिना किसी विलंब के जारी किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में समय पर राहत मिलना पेंशनरों का वैधानिक अधिकार है। महासंघ ने उम्मीद जताई है कि सरकार जल्द ही इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लेकर राज्य के लाखों पेंशनरों और परिवार पेंशनरों को बड़ी आर्थिक राहत प्रदान करेगी।
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