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■कविता आसपास : शुचि ‘भवि’.
4 years ago
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♀ अमर प्रेम
किसी ने यूँ ही आज पूछा
प्यार भी मरता क्या कभी
सुनो
प्यार जन्मता तो है
कब
कैसे
ये कोई नहीं बता सकता
हाँ मगर
अद्भुत बना देता है सृष्टि को
जब जन्मता
सम्पूर्णता से सब कुछ प्रेममय
बना देता है
सुनो
प्यार सच्चा हो अगर
आडंबर रहित
तो देह के रस्ते रुह तक जाता
बिन थके
और फिर विश्राम गृह
रुह को बनाता
और निर्लिप्त हो जाता
मान-अपमान, देह, वासना, वस्ल-हिज्र
वफ़ा-बेवफाई इत्यादि
सभी से ही
एकबारगी
और हो जाता फिर
अमर
मगर मोक्ष नहीं मिलता उसे
जन्मता फिर फिर वो
हर जन्म ही
क्योंकि प्रेम अभिशप्त है
अतृप्त रहने के शाप से,,,,,
सुनो
मुझे प्रेम है तुमसे
नहीं जानती
यह जन्म कौन सा है
तुम्हारे सँग,,,,,
■कवयित्री संपर्क-
■98268 03394
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chhattisgarhaaspaas
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