• Chhattisgarh
  • सांप्रदायिकता और तानाशाही का जहरीला कॉकटेल है भागवत का साक्षात्कार : बृंदा करात

सांप्रदायिकता और तानाशाही का जहरीला कॉकटेल है भागवत का साक्षात्कार : बृंदा करात

3 years ago
293

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने आरएसएस प्रकाशन के ‘ऑर्गनाइज़र’ और ‘पाञ्चजन्य’ (15 जनवरी) के संपादकों को दिए एक साक्षात्कार में कई सवालों का जवाब दिया है। भागवत की टिप्पणियों को हिंदू राष्ट्र के निर्माण के लिए हेगड़ेवार और गोलवलकर जैसे आरएसएस संस्थापकों के लेखन के वर्ष 2023 में नवीकरण (अद्यतन) के रूप में लिया जाना चाहिए। वह कहते हैं, “हिंदुस्तान एक हिंदू राष्ट्र है। यह समृद्ध और शक्तिशाली हिंदू समाज – हिंदू राष्ट्र -8 भारत – अपने गौरव के शिखर पर पहुंचेगा और विश्व को नेतृत्व प्रदान करेगा।” जब भारत एक ब्रिटिश उपनिवेश था, तब आरएसएस ने अपनी परियोजना की शुरुआत की थी। आज स्वतंत्र भारत का अपना संविधान है। आरएसएस प्रमुख के अपमानजनक बयान इस बात की पुष्टि करते हैं कि आरएसएस ने कभी भी संविधान को स्वीकार नहीं किया है। वह यह भी कहते हैं कि आज आरएसएस के पास “प्रचुर संसाधन और साधन” हैं। यह पूछना वैध है कि ये संसाधन क्या हैं, वे कितने प्रचुर हैं और पैसा कहां से आ रहा है?

गोलवलकर के ‘आंतरिक शत्रु’ का विस्तार

साक्षात्कार “हिंदू समाज” की चर्चा पर आधारित है, लेकिन आरएसएस प्रमुख द्वारा प्रतिपादित हिंदू समाज की अवधारणा का भारत के संविधान में कोई स्थान नहीं है। आरएसएस प्रमुख के अनुसार “हिंदू समाज 1000 से अधिक वर्षों से युद्ध में रहा है, इसलिए यह स्वाभाविक है कि ये युद्धरत लोग आक्रामक हो …।” इस प्रकार, भागवत एक ही झटके में हिन्दू बनाम अन्य के रूप में हिंदुओं की एकरूपता के एक द्विआधारी इतिहास का निर्माण करते हैं, जहां सामंती राजाओं के बीच अपने स्थानीय सहयोगियों द्वारा सहायता प्राप्त आक्रमणकारियों और विजेताओं के युद्ध, मुस्लिमों और हिंदू समाज के बीच एक धार्मिक लड़ाई में परिवर्तित हो जाते हैं। वे कथित ऐतिहासिक अन्याय के नाम पर आज के समय में “हिंदुओं” के “आक्रमण” को जायज बताते हैं। उनके शब्दों में “यह बाहर का शत्रु नहीं, भीतर का शत्रु है। इसलिए हिंदू समाज, हिंदू धर्म और हिंदू संस्कृति की रक्षा के लिए एक युद्ध चल रहा है”, और आगे “आज भारत में रहने वाले मुस्लिमों को कोई खतरा नहीं है। अगर वे अपने विश्वास पर टिके रहना चाहते हैं, तो वे टिके रह सकते हैं। यदि वे अपने पूर्वजों की आस्था पर विश्वास करना चाहते हैं, तो वे वापस लौट सकते हैं — अब इस्लाम से डरने की कोई बात नहीं है… लेकिन मुस्लिमों को अपनी सर्वोच्चता की उद्दाम बयानबाजी को छोड़ देना चाहिए, क्योंकि इसे ऐसे दावों के रूप में वर्णित किया जाता है कि मुसलमान एक “उन्नत नस्ल” हैं जो “भारत पर फिर से शासन करना चाहते है”, आदि-इत्यादि।” आगे और भी — वास्तव में वे सभी लोग, जो यहाँ रहते हैं – चाहे वे हिंदू हों या कम्युनिस्ट – उन्हें इस आख्यान को त्याग देना चाहिए, इस तर्क को छोड़ देना चाहिए।”

यह आरएसएस का तर्क है — वे आरएसएस के फर्जी नैरेटिव के खिलाफ लड़ाई में कम्युनिस्टों सहित उन सभी को डरा-धमका रहे हैं, जो समझौताहीन तरीके से लड़ रहे हैं। गोलवलकर ने कहा था, “भारत में मुस्लिम पूरी तरह से हिंदू राष्ट्र के अधीन ही रह सकते हैं।” भागवत ने इस बयान को कानून की नजरों से बचने के लिए संशोधित किया है, लेकिन इसका उद्देश्य भी वही है कि मुस्लिम समुदाय को आरएसएस की जांच-पड़ताल के अधीन किया जाएं और उन पर संघ परिवार द्वारा किये जा रहे आपराधिक हमलों को माफ किया जाएं। यह स्थापित करने के लिए कि एक आंतरिक शत्रु के खिलाफ युद्ध है, भागवत ने गोलवलकर की मुसलमानों, कम्युनिस्टों और ईसाइयों के रूप में दुश्मन की परिभाषा का विस्तार किया है, ताकि उन हिंदुओं को भी शामिल किया जा सके, जो आरएसएस के आख्यान के अनुरूप आचरण नहीं करते हैं। यह साम्प्रदायिकता और तानाशाही का एक ज़हरीला कॉकटेल है। “वे सभी जो यहां रहते हैं” यानि कि जो भारतीय नागरिक हैं, उन्हें शांति से रहने के लिए भारत के संविधान के अनुसार नहीं, बल्कि आरएसएस के दृष्टिकोण के अनुरूप होना होगा। यह बहुत ही खतरनाक है।

यह ध्यान रखना चाहिए कि सीपीआई (एम) यह मानती है कि आरएसएस के तीव्र उकसावे की कार्यवाहियों ने इस्लामिक समुदाय के एक समूह को मुस्लिम समुदाय के तबको के बीच अपने कट्टरपंथी विचारों और प्रथाओं को फैलाने में सक्षम बनाया है, जो बदले में आरएसएस के ध्रुवीकरण और विभाजनकारी रणनीतियों को और मजबूत करती है। यह साक्षात्कार माकपा द्वारा बार-बार कही गई इस बात की पुष्टि करता है कि एक सांप्रदायिकता दूसरी सांप्रदायिकता को मजबूत करती है।

आरएसएस के लिए कोई जाति-अत्याचार नहीं

भागवत इस “हिंदू समाज” के स्वयंभू प्रतिनिधि के रूप में बोलते हैं, जो “समाज” की ओर से अपमानजनक दावे कर रहे हैं। हिंदुत्व के आचरण का दावा करना एक बात है, क्योंकि यह एक राजनैतिक अवधारणा है, जिसका धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन उन सभी लोगों के प्रतिनिधित्व करने का दावा करना, जो इस देश में हिंदू हैं, दूसरी बात है, जबकि इस देश में अधिकांश लोग – धर्म से हिंदू होते हुए भी आरएसएस के सदस्य/समर्थक नहीं हैं। ऐसा लगता है कि आरएसएस प्रमुख के लिए दलितों के खिलाफ अत्याचार में उल्लेखनीय वृद्धि कोई मुद्दा नहीं है। साक्षात्कार में जाति का एकमात्र उल्लेख इस प्रकार है कि “श्री राम ने सभी जातियों और संप्रदायों को एक साथ जोड़ा।” इस प्रकार श्री राम हिंदुत्व की पहचान बनाने के लिए “जय श्री राम” के नारों में परिलक्षित एक राजनीतिक साधन बन जाते हैं, जबकि उच्च जाति के हिंदुओं द्वारा भेदभाव, हिंसा, यौन उत्पीड़न का सामना करने वाले दलितों की वास्तविकता का वे कोई उल्लेख नहीं करते।

ये “गरीबी” है या “समृद्धि”?

भागवत “समृद्ध और शक्तिशाली हिंदू समाज” की बात करते हैं। सबसे बड़ी कुपोषित और भूख से प्रभावित आबादी वाले देशों में भारत है और जहां अधिकांश की धार्मिक संबद्धता हिंदू होगी, वहां वैश्विक भूख सूचकांक पर भारत की शर्मनाक रैंकिंग के साथ, “समृद्धि” की बात करना एक बीमार मजाक की तरह है। यह उल्लेखनीय है कि आरएसएस प्रमुख के पास आम लोगों की दुर्दशा, सामाजिक और आर्थिक असमानताओं के बारे में कहने के लिए एक शब्द भी नहीं है, जो भारत को तबाह कर रहे हैं। आरएसएस के लिए, मजदूर या किसान जैसी कोई श्रेणी नहीं हैं — सभी तथाकथित हिंदू समाज में शामिल हैं। इसलिए जब अडानी एक दिन में औसतन 1216 करोड़ रुपये कमाता है और एक ग्रामीण महिला मजदूर एक दिन में बमुश्किल 250 रुपये कमाती है, तो आरएसएस उन्हें जिस एक ही श्रेणी में रखता है — वह है हिंदू समाज। एक चमकदार वास्तविकता के संदर्भ में चूक कभी-कभी एक बचाव का काम भी करती है। उस अर्थ में आरएसएस प्रमुख अमीर और गरीब की वास्तविकता को पहचानने से इंकार करके भारी असमानताओं का बचाव करते हैं और उसे व्यापक हिंदुत्व की पहचान में शामिल करते हैं, जिसे आरएसएस बनाना चाहता है। जबकि अधिकांश भारतीय मूल्य वृद्धि से प्रभावित हैं और आधिकारिक आंकड़े भी बहुत कम खपत व्यय को दिखाते हैं, यह अधिकांश लोगों की कम क्रय शक्ति को दर्शाता है। इसके बावजूद आरएसएस प्रमुख का मानना है कि मुद्रास्फीति “उपभोक्तावाद” के कारण है। इसका मतलब है कि लोग अधिक खरीद रहे है और इस प्रकार कीमतों को बढ़ा रहे हैं! जबकि भारत मंदी के कगार पर है, यहां तक कि पूंजीवादी समर्थक अर्थशास्त्री भी मांग बढ़ाने के लिए नीतियों पर जोर दे रहे हैं, लेकिन यहां आरएसएस प्रमुख महंगाई के लिए लोगों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं! वास्तव में यह साक्षात्कार हिंदुत्व का बचाव करने वाले कॉरपोरेट वर्ग के हितों के साथ “हिंदू समाज” का कथित प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले आरएसएस के संबंधों को उजागर करता है।

एक संविधानेत्तर प्राधिकरण

इस साक्षात्कार का एक और खुलासा करने वाला पहलू तब उजागर होता है, जब वे आरएसएस और उसके स्वयंसेवकों के साथ राजनीति और सरकार के बीच के संबंधों की बात करते है। वे इस मिथक को दोहराते हैं कि आरएसएस एक “सांस्कृतिक” संगठन है, जो दिन-प्रतिदिन की राजनीति में दिलचस्पी नहीं रखता है। लेकिन वे यह स्वीकार करते हैं कि वर्तमान स्थिति में आरएसएस, न चाहते हुए भी, सरकारी मुद्दों में हस्तक्षेप करने के लिए “मजबूर” है। वे कहते हैं, “पहले अंतर यह था कि हमारे स्वयंसेवक सत्ता के पदों पर नहीं थे। … लेकिन अब स्वयंसेवक राजनीति में जो कुछ भी करते हैं, उसके लिए हमें जवाबदेह ठहराया जाता है। … निश्चित रूप से हमारी कुछ जवाबदेही बनती है, क्योंकि अंततः यह संघ है, जहां स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया जाता है। इसलिए हम यह सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि हमारा रिश्ता कैसा होना चाहिए, किन चीजों को हमें पूरी लगन से आगे बढ़ाना चाहिए।” “अंतर” यह है कि इस देश के प्रधान मंत्री स्वयं एक पूर्व प्रचारक हैं, केंद्रीय मंत्रिमंडल में लगभग 71 प्रतिशत मंत्री आरएसएस से जुड़े हुए हैं। इसी तरह की आरएसएस से संबद्धता वहाँ भी हैं, जहाँ वे भाजपा द्वारा संचालित राज्य सरकारों में मंत्री हैं। आरएसएस ने घोषणा की है कि सरकार में अपने स्वयंसेवकों पर उसकी निगरानी है। “कुछ जवाबदेही” का और क्या मतलब है?

आगे यह भी कि, “राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में एकमात्र बिंदु यह है कि अगर लोग कुछ उम्मीद कर रहे हैं, अगर उन्हें कोई कठिनाई आ रही है, जो हमें बताई गई है, तो अगर वे स्वयंसेवक हैं, तो इसे संबंधित लोगों के ध्यान में लाया जा सकता है … बस इतना ही हम करते हैं।”

“बस इतना ही हम करते हैं” के निहितार्थों को देखें : “कुछ जवाबदेही”, जो कैबिनेट के दो-तिहाई से अधिक संघ-प्रशिक्षित लोगों के निरीक्षण के जरिये पूरी की जाती हैं; नीतियों में हस्तक्षेप के लिए “उचित परिश्रम के साथ कुछ चीजें” की जाती है और आरएसएस द्वारा स्वयंसेवक मंत्रियों को सिफारिशों के जरिये संबंधित लोगों के ध्यान में लाया जाता है। एक संविधानेत्तर प्राधिकरण का ठीक यही अर्थ है। भाजपा द्वारा चलाई जा रही सरकारों पर आरएसएस की शक्ति कोई रहस्य नहीं है — यह बात अब खुद आरएसएस प्रमुख ने कही है। इस संविधानेत्तर शक्ति और आरएसएस की सांप्रदायिक विभाजनकारी विचारधारा का एक पहलू यह भी है कि अपनी नीति को कैसे जारी रखा जाए, लेकिन इसकी धारणा को बदल दिया जाए। भागवत कहते हैं, “हमने अपने मीडिया इंटरैक्शन में वृद्धि की है, कुछ आउटरीच पहल शुरू की हैं, … यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे वांछित परिणाम समय पर दें, हमें सही रणनीति के साथ सही समय पर कार्य करना होगा। ….” इसका अर्थ है कि आने वाले दिनों में हम ऐसी कहानियों की उम्मीद कर सकते हैं, जो आरएसएस की चापलूसी करें और उसके नफरत भरे अतीत को ढंकने का काम करें।

समलैंगिक संबंधों और महिलाओं पर

कुछ लोगों ने “एलजीबीटी/ट्रांसजेंडर समुदायों” पर आरएसएस के विचारों में अनुमानित बदलाव पर सहमति व्यक्त की है। भागवत कहते हैं, “ये कोई नए मुद्दे नहीं हैं। वे हमेशा से रहे हैं। इन लोगों को भी जीने का अधिकार है।” यहां तक ​​कि अगर कोई संरक्षक स्वर की उपेक्षा करता है, तो जो कुछ भी होता है, वह घोर अवमानना ​​दिखाता है। वे कहते हैं, “चूंकि मैं जानवरों का डॉक्टर हूं, इसलिए मुझे पता है कि ऐसे लक्षण जानवरों में भी पाए जाते हैं। यह जैविक जीवन का एक तरीका है। …. हमें इस दृष्टिकोण को बढ़ावा देना होगा, क्योंकि इसे हल करने के अन्य सभी तरीके व्यर्थ हैं।” यौन पसंद की तुलना “जीव विज्ञान” और जानवरों से करना अपमानजनक है। भागवत का दृष्टिकोण सर्वोच्च न्यायालय के उस दृष्टिकोण के बिल्कुल विपरीत है, जिसने अपने ऐतिहासिक फैसले में “यौन अभिविन्यास को संविधान द्वारा गारंटीकृत एक मौलिक अधिकार” कहा है।

महिलाओं के बारे में उनकी विशिष्ट टिप्पणियों से भी यह परिलक्षित होता है कि वे अधिकार आधारित लोकतांत्रिक ढांचे को मान्यता देने से इंकार कर रहे हैं। आरएसएस के अनुसार महिलाओं को परिवार के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए। वह कहते हैं, “महिला मुक्ति और महिला सशक्तिकरण आदि मुद्दों को लंबे समय से उठाया गया है .. लेकिन अब पश्चिम की महिलाएं लिंग-परस्पर निर्भरता और पारिवारिक जीवन की आवश्यकता पर लौट रही हैं।” आरएसएस के अनुसार, समान अधिकारों के साथ एक स्वतंत्र सोच वाली सशक्त महिला का पारिवारिक जीवन के साथ संघर्ष होना तय है, क्योंकि उनके अनुसार, महिला को अपने परिवार के भीतर मनुवादी दृष्टिकोण से निर्देशित हिंसा का सामना करने की परवाह किए बिना “समायोजित” होना चाहिए। आरएसएस का महिला संस्करण राष्ट्रीय सेविका समिति इसी का प्रचार कर रही है। लेकिन यह एक विफल परियोजना है, जैसा कि आरएसएस प्रमुख खुद स्वीकार करते हैं, “आज तक समिति के पास इतनी ताकत नहीं है।” नई बात यह है कि वह कहते हैं कि शाखाओं में सीखने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ रही है, इसलिए उन्हें समिति में नहीं भेजा जाना चाहिए। आरएसएस को यह योजना बनानी चाहिए कि उन्हें सीधे कैसे शामिल किया जाए। प्रज्ञा ठाकुर जैसी हिंदुत्व ब्रिगेड की महिला सदस्यों द्वारा अभद्र भाषा और अत्यधिक भड़काऊ बयान, महिलाओं को सीधे भर्ती करने के लिए आरएसएस के लिए रोल मॉडल हो सकते हैं। दहेज हत्या, बाल बलात्कार सहित बढ़ती हिंसा, जो महिलाओं को प्रभावित करती है, पर आरएसएस प्रमुख चुप हैं — आरएसएस में महिलाओं का संभावित परिचय महिलाओं के अधिकारों के लिए नहीं है, बल्कि महिला आरएसएस कैडर द्वारा सीधे तौर पर नफरत की विचारधारा के प्रसार के लिए है।

आरएसएस प्रमुख का साक्षात्कार उन सभी के लिए एक चेतावनी है, जो स्वतंत्रता संग्राम के बुनियादी मूल्यों — एक धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, न्यायपूर्ण भारत — के लिए प्रतिबद्ध हैं। पूंजीवाद की विफलता ने संविधान के कई वादों को निरर्थक कर दिया है और बदले में अत्यधिक प्रतिक्रिया की ताकतों को जन्म दिया है। जैसा कि इस साक्षात्कार से पता चलता है, मोदी सरकार के सौजन्य से इन ताकतों के पास अब कई क्षेत्रों तक पहुंच है और राज्य सत्ता के लीवर पर उनका नियंत्रण है। इसका उत्तर वैकल्पिक नीतियों, लोकप्रिय लामबंदी और पूंजीवादी लूट के खिलाफ लोगों के अधिकारों की रक्षा करने और प्रतिरोध का निर्माण करने और हिंदुत्व के नवीकृत (अद्यतन) एजेंडे को हराने के लिए कार्रवाई में निहित है। .

[ लेखक प्रसिद्ध महिला नेत्री और माकपा पोलिट ब्यूरो की सदस्य हैं ]

🟥🟥🟥

विज्ञापन (Advertisement)

ब्रेकिंग न्यूज़

छत्तीसगढ़ की महिलाओं के लिए खुशखबरी! जल्द शुरू होगी महतारी वंदन योजना के नए आवेदन की प्रक्रिया
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ की महिलाओं के लिए खुशखबरी! जल्द शुरू होगी महतारी वंदन योजना के नए आवेदन की प्रक्रिया

Amazon CEO पीएम मोदी से मिले, भारत में 4.1 लाख करोड़ निवेश करने का ऐलान किया
breaking National

Amazon CEO पीएम मोदी से मिले, भारत में 4.1 लाख करोड़ निवेश करने का ऐलान किया

IPS बद्रीनारायण मीणा बनाए गए बस्तर रेंज के आईजी, आदेश जारी
breaking Chhattisgarh

IPS बद्रीनारायण मीणा बनाए गए बस्तर रेंज के आईजी, आदेश जारी

छत्तीसगढ़ में 25 तक पहाड़े रटवाने, बारहखड़ी कंठस्थ करने और हिंदी अंग्रेजी की धारावाहिक रीडिंग के लिए चलेगा विशेष अभियान
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में 25 तक पहाड़े रटवाने, बारहखड़ी कंठस्थ करने और हिंदी अंग्रेजी की धारावाहिक रीडिंग के लिए चलेगा विशेष अभियान

छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए खुशखबरी: CM साय ने दिल्ली में जेपी नड्डा से की मुलाकात, प्रदेश के विकास को मिलेगी नई रफ्तार
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए खुशखबरी: CM साय ने दिल्ली में जेपी नड्डा से की मुलाकात, प्रदेश के विकास को मिलेगी नई रफ्तार

छत्तीसगढ़ में कुत्तों की नसबंदी अभियान पर गंभीर सवाल, ऑपरेशन के बाद मौतें और अनियमितताओं के आरोप
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में कुत्तों की नसबंदी अभियान पर गंभीर सवाल, ऑपरेशन के बाद मौतें और अनियमितताओं के आरोप

वन मंत्री केदार कश्यप की पहल, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शुरू होगी ‘हॉर्नबिल सफारी’
breaking Chhattisgarh

वन मंत्री केदार कश्यप की पहल, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शुरू होगी ‘हॉर्नबिल सफारी’

एक जुलाई से लागू होगी VB-G RAM G योजना, ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह, ग्राम सभाओं में दे रहे योजना की जानकारी
breaking Chhattisgarh

एक जुलाई से लागू होगी VB-G RAM G योजना, ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह, ग्राम सभाओं में दे रहे योजना की जानकारी

दुर्ग में भीम का मैंगो आईस कैंडी पर प्रतिबंध, असुरक्षित पाए जाने के बाद खाद्य विभाग की कार्रवाई
breaking Chhattisgarh

दुर्ग में भीम का मैंगो आईस कैंडी पर प्रतिबंध, असुरक्षित पाए जाने के बाद खाद्य विभाग की कार्रवाई

छत्तीसगढ़ में अल-नीनो संकट, 49 लाख हेक्टेयर मे होनी है बुआई अब तक महज दो प्रतिशत
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में अल-नीनो संकट, 49 लाख हेक्टेयर मे होनी है बुआई अब तक महज दो प्रतिशत

छत्तीसगढ़ में हीरे की पुष्टि, महासमुंद में मिले 5 हीरे, मुख्यमंत्री साय ने खुशी जताते हुए कह दी यह बड़ी बात
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में हीरे की पुष्टि, महासमुंद में मिले 5 हीरे, मुख्यमंत्री साय ने खुशी जताते हुए कह दी यह बड़ी बात

साय कैबिनेट की बैठक संपन्न, ग्रामीणों को 125 दिन रोजगार की गारंटी, ‘अटल आजीविका समृद्धि हाट’ और CBG नीति को मंजूरी, पढ़िए सभी फैसले
breaking Chhattisgarh

साय कैबिनेट की बैठक संपन्न, ग्रामीणों को 125 दिन रोजगार की गारंटी, ‘अटल आजीविका समृद्धि हाट’ और CBG नीति को मंजूरी, पढ़िए सभी फैसले

डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में 1076 सीएम हेल्पलाइन साबित हो रहा बड़ा कदम
breaking Chhattisgarh

डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में 1076 सीएम हेल्पलाइन साबित हो रहा बड़ा कदम

सहारा निवेशकों को रिफंड पोर्टल के माध्यम से मिलेगी राशि : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट
breaking Chhattisgarh

सहारा निवेशकों को रिफंड पोर्टल के माध्यम से मिलेगी राशि : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

छत्तीसगढ़ में 8 मर्डर का खुलासा, मजाक और छोटी-छोटी शिकायतों से नाराज होकर बना साइको किलर
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में 8 मर्डर का खुलासा, मजाक और छोटी-छोटी शिकायतों से नाराज होकर बना साइको किलर

PM मोदी ने देश को समर्पित किए तीन स्वदेशी युद्धपोत, अरब सागर से बंगाल की खाड़ी तक और मजबूत हुई भारत की समुद्री सुरक्षा
breaking National

PM मोदी ने देश को समर्पित किए तीन स्वदेशी युद्धपोत, अरब सागर से बंगाल की खाड़ी तक और मजबूत हुई भारत की समुद्री सुरक्षा

छत्तीसगढ़ में मानसून की एंट्री, दंतेवाड़ा से प्रदेश में पहुंचा बारिश का मौसम, रायपुर में हो रही झमाझम बारिश
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में मानसून की एंट्री, दंतेवाड़ा से प्रदेश में पहुंचा बारिश का मौसम, रायपुर में हो रही झमाझम बारिश

छत्तीसगढ़ में अब OTP से नहीं मिलेगा राशन, सिर्फ बायोमेट्रिक से मिलेगा राशन, नियम तोड़ने पर होगी FIR
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में अब OTP से नहीं मिलेगा राशन, सिर्फ बायोमेट्रिक से मिलेगा राशन, नियम तोड़ने पर होगी FIR

चेन्नई में फंसी छत्तीसगढ़ की तीन युवतियां : ‘हमें घर वापस लाओ’… युवतियों ने विधायक को फोन कर मदद की लगाई गुहार
breaking Chhattisgarh

चेन्नई में फंसी छत्तीसगढ़ की तीन युवतियां : ‘हमें घर वापस लाओ’… युवतियों ने विधायक को फोन कर मदद की लगाई गुहार

मीना बाजार परमिशन विवाद: वायरल ऑडियो से गरमाई अंबिकापुर की राजनीति, मेयर मंजूषा भगत पहुंचीं थाने; कांग्रेस ने SIT जांच की रखी मांग
breaking Chhattisgarh

मीना बाजार परमिशन विवाद: वायरल ऑडियो से गरमाई अंबिकापुर की राजनीति, मेयर मंजूषा भगत पहुंचीं थाने; कांग्रेस ने SIT जांच की रखी मांग

कविता

साहित्यिक ‘आरंभ’ : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

साहित्यिक ‘आरंभ’ : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष दोहावली : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर
poetry

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष दोहावली : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर

गीत – डॉ. दीक्षा चौबे
poetry

गीत – डॉ. दीक्षा चौबे

इस माह की नवाकुंर कवयित्री – सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

इस माह की नवाकुंर कवयित्री – सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

इस माह के बाल साहित्यकार : कमलेश चंद्राकर
poetry

इस माह के बाल साहित्यकार : कमलेश चंद्राकर

साहित्यनामा – अमृता मिश्रा
poetry

साहित्यनामा – अमृता मिश्रा

इस माह के ग़ज़लकार : शुभेंदु बागची ‘मुन्तज़िर’
poetry

इस माह के ग़ज़लकार : शुभेंदु बागची ‘मुन्तज़िर’

कवि और कविता : हरिप्रकाश गुप्ता ‘सरल’
poetry

कवि और कविता : हरिप्रकाश गुप्ता ‘सरल’

इस माह के कवि : प्रकाशचंद्र मण्डल
poetry

इस माह के कवि : प्रकाशचंद्र मण्डल

कवि और कविता : दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर
poetry

कवि और कविता : दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

कवि और कविता : कमलेश चंद्राकर
poetry

कवि और कविता : कमलेश चंद्राकर

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

कविता श्रृंखला आरंभ : डॉ. शिरोमणि माथुर
poetry

कविता श्रृंखला आरंभ : डॉ. शिरोमणि माथुर

कविता श्रृंखला ‘आरंभ’ में : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

कविता श्रृंखला ‘आरंभ’ में : दीप्ति श्रीवास्तव

कृति आरंभ : कविता आसपास- दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

कृति आरंभ : कविता आसपास- दीप्ति श्रीवास्तव

स्तम्भ ‘आरंभ’ : इस माह की कवयित्री- दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

स्तम्भ ‘आरंभ’ : इस माह की कवयित्री- दीप्ति श्रीवास्तव

कविता आसपास स्तम्भ ‘आरंभ’ – संजय एम तरानेकर
poetry

कविता आसपास स्तम्भ ‘आरंभ’ – संजय एम तरानेकर

रचना और रचनाकार- पल्लव चटर्जी
poetry

रचना और रचनाकार- पल्लव चटर्जी

होली विशेष [दो फागुनी रचना यें] – तारकनाथ चौधुरी
poetry

होली विशेष [दो फागुनी रचना यें] – तारकनाथ चौधुरी

कहानी

लेख : कैलाश जैन बरमेचा
story

लेख : कैलाश जैन बरमेचा

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव
story

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय
story

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव
story

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’
story

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी
story

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन
story

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है
story

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे
story

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ :  ब्रजेश मल्लिक
story

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ : ब्रजेश मल्लिक

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
story

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
story

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…

story

रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

story

रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

story

कहानी : संतोष झांझी

story

कहानी : ‘ पानी के लिए ‘ – उर्मिला शुक्ल

लेख

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
Article

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

Article

तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

Article

लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
Article

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
Article

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
Article

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
Article

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
Article

🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
Article

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
Article

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
Article

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

Article

🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

Article

🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

Article

🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

⏩ 12 अगस्त-  भोजली पर्व पर विशेष
Article

⏩ 12 अगस्त- भोजली पर्व पर विशेष

Article

■पर्यावरण दिवस पर चिंतन : संजय मिश्रा [ शिवनाथ बचाओ आंदोलन के संयोजक एवं जनसुनवाई फाउंडेशन के छत्तीसगढ़ प्रमुख ]

Article

■पर्यावरण दिवस पर विशेष लघुकथा : महेश राजा.

राजनीति न्यूज़

breaking Politics

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

Politics

■छत्तीसगढ़ :

Politics

भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

breaking Politics

भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
Politics

धमतरी आसपास

Politics

स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

Politics

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

breaking Politics

राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
Politics

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
Politics

मरवाही उपचुनाव

Politics

प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

Politics

ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

breaking Politics

अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
breaking National Politics

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

breaking Politics

हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

breaking Politics

पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन