• Chhattisgarh
  • रौद्र और कोमल की जुगलबंदी की जुगत के पीछे क्या है ❓ – बादल सरोज

रौद्र और कोमल की जुगलबंदी की जुगत के पीछे क्या है ❓ – बादल सरोज

3 years ago
299

संगीत, भारतीय शास्त्रीय संगीत में स्वर और रागों का एक ख़ास विधान है। स्वर की नियमित आवाज को उसकी निर्धारित तीव्रता से नीचा उतारने पर वह कोमल हो जाता है, थोड़ा ऊंचा उठाने पर वह तीव्र हो जाता है। एक साथ एक ही समय इन दोनों तरह के स्वरों की जुगलबंदी संगीत में बहुत कठिन मानी जाती है। यह श्रोता को रसास्वादन कराने की बजाय उसे भ्रम और मुगालते में डाल देती है। संघ परिवार इन दिनों इसी तरह की बेमेल जुगलबंदी में लगा हुआ है।

अभी हाल में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में प्रधानमंत्री मोदी कोमल स्वर में राग गाते नजर आये। उन्होंने फिल्मो पर बयानबाजी करने वाले अपनी ही पार्टी के नेताओं और खासतौर से मध्यप्रदेश के उस गृहमंत्री को फटकारा, जो चौबीस घंटा सातों दिन मुम्बईया फिल्मों के प्रोमो और अभिनेत्रियों के परिधानों को ही निहारता बैठा रहता है। मोदी जी ने कहा, “एक नेता हैं, जो फिल्मों पर बयान देते रहते हैं, उनके बयान टीवी पर चलते रहते हैं। उन्हें लगता है, ऐसा करके वे नेता बन रहे हैं, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी उन्हें फोन किया, लेकिन वे मानते नहीं हैं। क्या जरूरत है हर फिल्म पर बयान देने की।” मोदी यहीं तक नहीं रुके, उन्होंने मुसलमानो के खिलाफ बयानबाजी पर भी अप्रसन्नता जताई। दिल्ली में हुयी इस कार्यकारिणी बैठक में उन्होंने कहा कि “पार्टी नेताओं को मुसलमान समुदाय के लोगों के प्रति अभद्र टिप्पणी करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में कई समुदाय भाजपा को वोट नहीं देते हैं, लेकिन इसके बाद भी भाजपा कार्यकर्ताओं को उनके प्रति अपमान नहीं दिखाना चाहिए, बल्कि बेहतर तालमेल स्थापित कर बेहतर व्यवहार बनाना चाहिए।” हालांकि डिवाइडर – इन – चीफ यहां भी विभाजन की रेखा खींचने से बाज नहीं आये। उन्होंने मुसलमानों में भी पसमांदा और बोहरा समुदाय के लोगों के ज्यादा करीब जाने की बात कही। हैदराबाद में हुयी कार्यकारिणी में भी वे ऐसी ही कुछ बातें बोले थे।

जाहिर है कि प्रधानमंत्री के इस बयान को तवज्जोह मिली, मिलनी भी थी। इसलिए भी कि यह बीबीसी की डॉक्यूमेंटरी में 2002 के गुजरात नरसंहार के लिए उन्हें दोषी ठहराए जाने की पृष्ठभूमि में आया था। उन मोदी की तरफ से आया था, जो साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण को शमशान और कब्रिस्तान की गहराई तक ले जा चुके हैं। इनके साथ, इनके अलावा और इनके बावजूद मोदी के इस भाषण के संज्ञान लिए जाने की एक वजह कुछ दिन पहले आरएसएस प्रमुख का भाषण भी था। आरएसएस से जुड़े पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादकों की एक बैठक में बोलते हुए सरसंघचालक मोहन भागवत ने एक तरह से युद्धघोष ही कर दिया था। उन्होंने कहा कि “हिंदू समाज हजारों साल से गुलाम रहा है, अब उसमें जागृति आ रही है, जिसके कारण कभी-कभी हिंदू समुदाय की ओर से कुछ आक्रामक व्यवहार दिखाई पड़ जाता है।” उन्होंने इसे ठीक तो नहीं बताया, लेकिन परोक्ष रूप से इस बात का समर्थन कर दिया कि “हिंदू समुदाय का यह आक्रोश इतिहास को देखते हुए सही है। स्वाभाविक है कि लड़ना है, तो दृढ़ होना ही पड़ता है।” इसी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने हिंसक टिप्पणियों और शाब्दिक हिंसा को जायज करार देते हुए यहां तक कहा कि “जब युद्ध है, तो लोगों में कट्टरता आएगी ही। ऐसा नहीं होना चाहिए, मगर फिर भी उग्र वक्तव्य आएंगे ही।” इस युद्ध या लड़ाई के बारे में कहीं कोई गफलत न छूट जाए, इसलिए उन्होंने इसकी सीमा रेखा भी खींची। उन्होंने कहा कि : “यह लड़ाई बाहर से नहीं है, वह लड़ाई अंदर से ही है। यह हिंदू धर्म, हिंदू संस्कृति, हिंदू समाज की सुरक्षा का प्रश्न है, उसकी लड़ाई चल रही है।” और आगे बढ़ते हुए उन्होंने मुसलमानों (और कम्युनिस्टों) को भी सलाह दी कि वे रहना चाहते हैं तो रहें, अपने पूर्वजों के पास आना (हिन्दू बनना) चाहते हैं तो रहें। हम अलग हैं, यह सोचना छोड़ना पडेगा। ऐसा सोचने वाला कोई हिन्दू (पढ़ें : दलित, आदिवासी, ओबीसी, एमबीसी) है, तो उसको भी छोड़ना पडेगा। कम्युनिस्ट है, उसको भी छोड़ना पड़ेगा।”

अपनी इसी बात में उन्होंने आगे जोड़ा कि “जनसंख्या नियंत्रण एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। उसका विचार करना चाहिए… धर्मांतरण और घुसपैठियों से ज्यादा असंतुलन होता है। उसको रोकने से असंतुलन नष्ट हो जाता है।” भारत में रहने वाले मुसलमानों के बारे में बात करते हुए भागवत ने जबरन धर्मांतरण, अवैध प्रवासी और ‘घर वापसी’ की बात भी की। हालांकि अपने इस संबोधन में उन्होंने गीता को दूसरा श्लोक दोहराया था, मगर असल में वे :
“सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुच:॥” (सभी धर्मों को त्याग कर अर्थात हर आश्रय को त्याग कर केवल मेरी शरण में आओ, मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्ति दिला दूंगा, इसलिए शोक मत करो।) श्लोक में निहित सन्देश दे रहे थे। वास्तव में तो वे और भी आगे बढ़कर एमएस गोलवलकर की “वी एंड आवर नेशनहुड” (हम और हमारी राष्ट्रीयता) की उस किताब में लिखे को दोहरा रहे थे, जिसे खुद आरएसएस – फिलहाल – स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।

मोदी और भागवत के इन दोनों भाषणों को अलग-अलग नहीं आपस में जोड़कर पढ़ा जाना चाहिए, तभी असली मकसद साफ़ होता है। वैसे भी यह पहली बार नहीं है, जब इन दोनों ने एक दूसरे के विपरीत और अंतर्विरोधी लगते, किन्तु वास्तव में एक-दूसरे के पूरक बयान दिए हों। वे समय-समय पर ऐसा करते रहते हैं – और वह एक सुविचारित पटकथा का हिस्सा होता है। इसके पहले मोदी ने गोरक्षा के नाम पर गोरखधंधा करने वालों पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि ‘‘ऐसे लोग दिन में गोरक्षा का चोला पहनकर घूमते हैं और रात में असामाजिक गतिविधियों में लिप्त रहते हैं।” उन्होंने कहा था कि “पड़ताल की जाए, तो इनमें से 80 प्रतिशत लोग ऐसे निकलेंगे, जो गोरक्षा की दुकान खोलकर बैठ गए हैं।” ऐसे लोगों पर गुस्सा जाहिर करते हुए उन्होंने राज्य सरकारों से ऐसे लोगों का डोजियर तैयार कर उनके खिलाफ कार्रवाई की अपील की थी। ऐसा कोई डोजियर न बनना था, न बना। दूसरों की छोड़िये, खुद उनकी भाजपा सरकारों ने ही तैयार नहीं किया। मोदी के इस बयान के बाद तुरंत ही मोहन भागवत गौरक्षकों के अप्रतिम धार्मिक योगदान की सराहना करते हुए कूद पड़े थे। इनसे पहले अटल बिहारी वाजपेयी तक इसे आजमाते रहे थे। गुजरात दंगों के बाद राजधर्म के पालन और बीच-बीच में “काम न धाम – जयश्रीराम” के जुमलों से अपनी उदार छवि का मुखौटा संवारते रहते थे। संघ परिवार की यह आजमाई हुयी जुगलबंदी हैं, जिसे संगीत की भाषा में ही कहे, तो आरोहो-अवरोहों से घूम-घामकर अंततः शुद्ध पर पहुँच जाती है। मूलतः यह शुद्ध युद्ध का आव्हान है। “युद्ध और प्रेम (जिसे यह जानते तक नहीं हैं) में सब कुछ जायज है” के बेहूदा मुहावरे का पुनराख्यान है।

गौरतलब है कि मोदी जी कहने से मना कर रहे हैं, करने से नहीं। उनका रिकॉर्ड है कि अपने पूरे कार्यकाल में घटी जघन्य और विचलित कर देने वाली घटनाओं पर उन्होंने कभी कुछ नहीं बोला। मजबूरी में कभी बोलना भी पड़ा, तो “दिल से कभी माफ़ नहीं करूंगा” जैसा ही बोला।

फिल्मों के बारे में मोदी जी की टिप्पणी के पीछे भी सदभाव या कला के प्रति उदारता नहीं, व्यवसाय और इसकी अंतर्राष्ट्रीय स्वीकार्यता है। फिल्म उद्योग में अम्बानी सहित भारत के धन्नासेठों और अमरीकी घरानो का पैसा लगा है। इस इंडस्ट्री का भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान है। इसके द्वारा सृजित किये जाने वाले विविध रोजगार अकसर अगर आंतरिक अर्थव्यवस्था के हिसाब से महत्व के हैं, तो अकेले अमरीकी मनोरंजन उद्योग में सबसे ज्यादा निर्यात करने और उसके माध्यम से विदेशी मुद्रा लाने वाला जरिया भी है। उस पर इन दिनों जो संघ परिवार के सीधे निशाने पर है, उन शाहरुख खान की लोकप्रियता कम असाधारण नहीं है। सिर्फ मध्य-पूर्व या खाड़ी के देशों में ही नहीं, वे यूरोप और अमरीका में भी भारत की पहचान माने जाते हैं। कला का यह माध्यम देखने-सुनने के आस्वाद और आल्हाद से कहीं आगे जाता है। आमतौर से हर जगह और खासतौर से भारत में फिल्मों की भूमिका समाज और व्यक्ति की जीवन शैली को प्रभावित और एक हद तक संस्कारित करने की भी होती है। आजाद भारत में सत्तर के दशक तक की फिल्मों ने इसमें जो योगदान दिया है, उसे सब जानते हैं। फिल्में इन सबकी पहचान दुनिया से भी कराती है। एक तरह से फिल्में देश की कल्चरल एम्बेसडर – सांस्कृतिक राजदूत – है। हालांकि ठीक यही वजह फासिस्टों और तानाशाहों को इस कला माध्यम को हमले की जद में भी लाती हैं। जैसा कि इसी जगह पहले लिखा जा चुका है, हिटलर ने यही किया था। जी-20 के अध्यक्ष बनने से अभिभूत मोदी और उनकी सरकार जानती है कि भारतीय फिल्मों को निशाना बनाकर किये जाने वाले हमलों पर दुनिया के देशों की प्रतिक्रिया उनके लिए नकारात्मक साबित हो सकती है। पिछली साल नूपुर शर्मा के बयानों के बाद हुयी तीखी प्रतिक्रिया का सबक उन्हें याद है।

मोदी की कथित कड़ी सलाह और तथाकथित मीठी फटकार के बाद नरोत्तम मिश्रा और हेमंत विश्व सरमा भले लाईन पर आने के भाव दिखा रहे हों, भक्तों की बटालियनें अपने काम में लगी हुयी हैं। पठान फिल्म को लेकर इनके हुड़दंगियों की हुड़दंगई पूरा देश और दुनिया देख चुकी है। जनता द्वारा ठुकराए जाने के बाद अब पतली गली तलाशी जा रही है।

ऐसा होना ही था क्योंकि ये जो कच्चे, कोमल राग की रागिनी है, वह पक्के, कर्कश स्वरों से अलग नहीं है। उन्हें दबाने के लिए नहीं है, उन पर आवरण डालने के लिए, एक भरम खड़ा करने के लिए है। पठान फिल्म पर मिली हार के बाद ये सुधरने वाले नहीं हैं – नया मुद्दा, नया झूठ लेकर आएंगे।

•बादल सरोज
[ लेखक ‘ लोकजतन ‘ के संपादक हैं ]

🟥🟥🟥

विज्ञापन (Advertisement)

ब्रेकिंग न्यूज़

छत्तीसगढ़ में शुरू होगा ‘बासमती धान मिशन’, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में महकेगा प्रदेश का चावल, बढ़ेगी किसानों की आय
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में शुरू होगा ‘बासमती धान मिशन’, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में महकेगा प्रदेश का चावल, बढ़ेगी किसानों की आय

नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और पॉपकॉर्न स्टेटस से बाहर निकलने की आवश्यकता है – श्री रमेन डेका
breaking Chhattisgarh

नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और पॉपकॉर्न स्टेटस से बाहर निकलने की आवश्यकता है – श्री रमेन डेका

जनता तक पहुंचे योजनाओं का वास्तविक लाभ, प्रशासन जवाबदेही के साथ करे कार्य : मुख्यमंत्री श्री साय
breaking Chhattisgarh

जनता तक पहुंचे योजनाओं का वास्तविक लाभ, प्रशासन जवाबदेही के साथ करे कार्य : मुख्यमंत्री श्री साय

भारत के पड़ोस में नया देश बनेगा: म्यांमार के होंगे दो टुकड़े, रखाइन प्रांत के 17 में से 14 इलाकों पर विद्रोहियों का कब्जा, राजधानी सितवे को भी घेरा
breaking international

भारत के पड़ोस में नया देश बनेगा: म्यांमार के होंगे दो टुकड़े, रखाइन प्रांत के 17 में से 14 इलाकों पर विद्रोहियों का कब्जा, राजधानी सितवे को भी घेरा

पीएम मोदी सूरत के हथियार फैक्ट्री पहुंचे; मेड इन इंडिया टैंक और ड्रोन देखा, जनसभा को संबोधित करेंगे
breaking National

पीएम मोदी सूरत के हथियार फैक्ट्री पहुंचे; मेड इन इंडिया टैंक और ड्रोन देखा, जनसभा को संबोधित करेंगे

छत्तीसगढ़ में इबोला की आहट: दुर्ग-भिलाई में मिले तीन संदिग्ध मरीज, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में इबोला की आहट: दुर्ग-भिलाई में मिले तीन संदिग्ध मरीज, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

छत्तीसगढ़ के पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 149 संविदा पदों पर होगी भर्ती, प्रोफेसर-असिस्टेंट प्रोफेसर और सीनियर रेजीडेंट्स की होगी नियुक्ति
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 149 संविदा पदों पर होगी भर्ती, प्रोफेसर-असिस्टेंट प्रोफेसर और सीनियर रेजीडेंट्स की होगी नियुक्ति

तेल संकट के बीच मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, ATF के के दाम स्थिर करने लिए 10000 करोड़ के फंड का किया ऐलान
breaking international

तेल संकट के बीच मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, ATF के के दाम स्थिर करने लिए 10000 करोड़ के फंड का किया ऐलान

नए शैक्षणिक सत्र से पहले सरकारी स्कूलों के छात्रों को बड़ी राहत, एक साथ मिलेंगे यूनिफॉर्म के दो सेट
breaking Chhattisgarh

नए शैक्षणिक सत्र से पहले सरकारी स्कूलों के छात्रों को बड़ी राहत, एक साथ मिलेंगे यूनिफॉर्म के दो सेट

खेती केवल आजीविका नहीं, हमारी संस्कृति और पहचान का आधार : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
breaking Chhattisgarh

खेती केवल आजीविका नहीं, हमारी संस्कृति और पहचान का आधार : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

कभी गोलियों की गूंज, अब बच्चों के सपनों की आवाज
breaking Chhattisgarh

कभी गोलियों की गूंज, अब बच्चों के सपनों की आवाज

मुख्यमंत्री ने बिहान की दीदियों को सौंपी आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के तहत टाटा मैजिक वाहन
breaking Chhattisgarh

मुख्यमंत्री ने बिहान की दीदियों को सौंपी आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के तहत टाटा मैजिक वाहन

तमिलनाडु में बंधक बने छत्तीसगढ़ के 50 श्रमिकों को मिली आजादी, जांजगीर-चांपा प्रशासन की तत्परता से हुई सुरक्षित घर वापसी
breaking Chhattisgarh

तमिलनाडु में बंधक बने छत्तीसगढ़ के 50 श्रमिकों को मिली आजादी, जांजगीर-चांपा प्रशासन की तत्परता से हुई सुरक्षित घर वापसी

छत्तीसगढ़ में फिर बढ़ेगी गर्मी, लेकिन बारिश-अंधड़ का भी अलर्ट… रायपुर समेत कई जिलों में बदलेगा मौसम
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में फिर बढ़ेगी गर्मी, लेकिन बारिश-अंधड़ का भी अलर्ट… रायपुर समेत कई जिलों में बदलेगा मौसम

छत्तीसगढ़ के पूर्व IAS अधिकारी बीकेएस रे का निधन, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के पूर्व IAS अधिकारी बीकेएस रे का निधन, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक

शासकीय योजनाओं का लाभ हर पात्र परिवार तक पहुंचे, प्रशासन संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ करे कार्य : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
breaking Chhattisgarh

शासकीय योजनाओं का लाभ हर पात्र परिवार तक पहुंचे, प्रशासन संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ करे कार्य : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

’गाँव के द्वार पहुँची डिजिटल सरकार: बड़ेकनेरा का ‘सेवा सेतु’ मॉडल बना ग्रामीण सुशासन की नई मिसाल – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय’
breaking Chhattisgarh

’गाँव के द्वार पहुँची डिजिटल सरकार: बड़ेकनेरा का ‘सेवा सेतु’ मॉडल बना ग्रामीण सुशासन की नई मिसाल – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय’

’महिला सशक्तिकरण और मातृ-शिशु कल्याण योजनाओं से बदल रही जिंदगी: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय’
breaking Chhattisgarh

’महिला सशक्तिकरण और मातृ-शिशु कल्याण योजनाओं से बदल रही जिंदगी: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय’

सुप्रीम कोर्ट को 5 नए जज मिले, जजों की संख्या अब 37 हुई, जानें इससे क्या फायदा होगा
breaking National

सुप्रीम कोर्ट को 5 नए जज मिले, जजों की संख्या अब 37 हुई, जानें इससे क्या फायदा होगा

10वीं-12वीं के टॉपर्स को मिलेंगे 2-2 लाख रुपये, शीर्ष 10 बच्चों की सूची तैयार
breaking Chhattisgarh

10वीं-12वीं के टॉपर्स को मिलेंगे 2-2 लाख रुपये, शीर्ष 10 बच्चों की सूची तैयार

कविता

साहित्यिक ‘आरंभ’ : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

साहित्यिक ‘आरंभ’ : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष दोहावली : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर
poetry

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष दोहावली : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर

गीत – डॉ. दीक्षा चौबे
poetry

गीत – डॉ. दीक्षा चौबे

इस माह की नवाकुंर कवयित्री – सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

इस माह की नवाकुंर कवयित्री – सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

इस माह के बाल साहित्यकार : कमलेश चंद्राकर
poetry

इस माह के बाल साहित्यकार : कमलेश चंद्राकर

साहित्यनामा – अमृता मिश्रा
poetry

साहित्यनामा – अमृता मिश्रा

इस माह के ग़ज़लकार : शुभेंदु बागची ‘मुन्तज़िर’
poetry

इस माह के ग़ज़लकार : शुभेंदु बागची ‘मुन्तज़िर’

कवि और कविता : हरिप्रकाश गुप्ता ‘सरल’
poetry

कवि और कविता : हरिप्रकाश गुप्ता ‘सरल’

इस माह के कवि : प्रकाशचंद्र मण्डल
poetry

इस माह के कवि : प्रकाशचंद्र मण्डल

कवि और कविता : दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर
poetry

कवि और कविता : दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

कवि और कविता : कमलेश चंद्राकर
poetry

कवि और कविता : कमलेश चंद्राकर

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

कविता श्रृंखला आरंभ : डॉ. शिरोमणि माथुर
poetry

कविता श्रृंखला आरंभ : डॉ. शिरोमणि माथुर

कविता श्रृंखला ‘आरंभ’ में : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

कविता श्रृंखला ‘आरंभ’ में : दीप्ति श्रीवास्तव

कृति आरंभ : कविता आसपास- दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

कृति आरंभ : कविता आसपास- दीप्ति श्रीवास्तव

स्तम्भ ‘आरंभ’ : इस माह की कवयित्री- दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

स्तम्भ ‘आरंभ’ : इस माह की कवयित्री- दीप्ति श्रीवास्तव

कविता आसपास स्तम्भ ‘आरंभ’ – संजय एम तरानेकर
poetry

कविता आसपास स्तम्भ ‘आरंभ’ – संजय एम तरानेकर

रचना और रचनाकार- पल्लव चटर्जी
poetry

रचना और रचनाकार- पल्लव चटर्जी

होली विशेष [दो फागुनी रचना यें] – तारकनाथ चौधुरी
poetry

होली विशेष [दो फागुनी रचना यें] – तारकनाथ चौधुरी

कहानी

लेख : कैलाश जैन बरमेचा
story

लेख : कैलाश जैन बरमेचा

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव
story

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय
story

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव
story

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’
story

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी
story

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन
story

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है
story

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे
story

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ :  ब्रजेश मल्लिक
story

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ : ब्रजेश मल्लिक

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
story

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
story

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…

story

रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

story

रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

story

कहानी : संतोष झांझी

story

कहानी : ‘ पानी के लिए ‘ – उर्मिला शुक्ल

लेख

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
Article

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

Article

तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

Article

लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
Article

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
Article

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
Article

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
Article

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
Article

🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
Article

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
Article

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
Article

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

Article

🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

Article

🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

Article

🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

⏩ 12 अगस्त-  भोजली पर्व पर विशेष
Article

⏩ 12 अगस्त- भोजली पर्व पर विशेष

Article

■पर्यावरण दिवस पर चिंतन : संजय मिश्रा [ शिवनाथ बचाओ आंदोलन के संयोजक एवं जनसुनवाई फाउंडेशन के छत्तीसगढ़ प्रमुख ]

Article

■पर्यावरण दिवस पर विशेष लघुकथा : महेश राजा.

राजनीति न्यूज़

breaking Politics

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

Politics

■छत्तीसगढ़ :

Politics

भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

breaking Politics

भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
Politics

धमतरी आसपास

Politics

स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

Politics

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

breaking Politics

राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
Politics

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
Politics

मरवाही उपचुनाव

Politics

प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

Politics

ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

breaking Politics

अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
breaking National Politics

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

breaking Politics

हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

breaking Politics

पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन