• Chhattisgarh
  • उत्तर – पूर्व में भाजपा का ‘ विजय रथ ‘ : मगर इस ‘ जीत ‘ के पांव कहाँ हैं ❗ – राजेंद्र शर्मा

उत्तर – पूर्व में भाजपा का ‘ विजय रथ ‘ : मगर इस ‘ जीत ‘ के पांव कहाँ हैं ❗ – राजेंद्र शर्मा

3 years ago
279

इस वर्ष के विधानसभाई चुनाव के पहले चक्र की मतगणना के नतीजे आने के फौरन बाद, 2 मार्च की शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राजधानी में भाजपा के हजारों करोड़ रुपए के विशाल भवन में, संघ-भाजपा समर्थकों का जमावड़ा कर के, विशेष रूप से उत्तर-पूर्व में ‘‘विजय’’ का एलान करने से भी आगे बढक़र, ‘‘2024 में क्या होगा, उसकी प्रस्तावना’’ लिख दिए जाने का ढोल पीट रहे थे। ठीक उसी समय त्रिपुरा के विभिन्न हिस्सों से ‘‘विजयोत्सव’’ के नाम पर, संघ-भाजपा के गुंडा गिरोहों द्वारा अपने राजनीतिक विरोधियों, खासतौर पर सी पी आइ (एम) के नेताओं व कार्यकर्ताओं के घरों-दूकानों-बागानों और पार्टी के दफ्तरों आदि पर आगजनी, हमलों तथा कार्यकर्ताओं के घायल किए जाने की खबरें आनी शुरू हो चुकी थीं। कथित ‘‘विजय’’ के साथ ही शुरू हो गए इन हमलों के मूल चरित्र को समझने में इसका जिक्र करना शायद मदददगार होगा कि हमलों के ताजा चक्र में हुए सबसे पहले हमलों में, जुबराजनगर विधानसभाई क्षेत्र से तुरंत ही चुनकर आए, सी पी आइ (एम) के शैलेंद्र नाथ के रबर के बाग में आगजनी शामिल थी।

इन हमलों की इस बाढ़ के लगातार जारी रहने के चौथे दिन, 5 मार्च को राज्य के वामपंथी नेताओं को जब राज्यपाल से मुलाकात की कई कोशिशों में विफल होने के बाद, राज्य के मुख्य सचिव से इस संबंध में मुलाकात करने का समय मिला, उनके पास इस हिंसा की पूरी 668 घटनाओं की सूची थी, जिनमें बड़े पैमाने पर आगजनी से होने वाले नुकसान के अलावा, 3 मौतें होने और 100 से ज्यादा लोग घायल होने की भी जानकारी थी। एक ओर ‘‘विजय’’ का ढोल पीटना और दूसरी ओर, कथित शानदार विजय का सहारा लेकर, विरोधियों के खिलाफ हिंसा की मुहिम बहुत तेज कर देना, इन दोनों के साथ-साथ आने को किसी भी तरह से, महज एक समय-संयोग नहीं माना जा सकता है। वास्तव में, प्रधानमंत्री मोदी पूरे देश और दुनिया भर को सुनाने के लिए, मोदी-मोदी का जाप कराने और अपने समर्थकों से सैल फोन की टार्चों की रौशनी के जरिए, उत्तर-पूर्व को धन्यवाद संदेश भिजवाने जैसे लटकों-झटकों के साथ, जिस ‘‘विजय’’ का ढोल पीट रहे थे, इसकी मूल प्रकृति में ही इसकी मांग छुपी हुई थी कि जनतांत्रिक स्पेस को ज्यादा से ज्यादा सिकोड़ा जाए। विपक्ष पर हिंसक हमले, इसी मांग को पूरा करने की कोशिश का प्रमुख हथियार हैं।

मीडिया पर अपने लगभग मुकम्मल नियंत्रण के जरिए, अपने अर्धसत्यों को पूर्ण सत्य बनाकर चलवाने की कोशिश में, मोदी-शाह की भाजपा द्वारा उत्तर-पूर्व में भी ‘‘जीत ही जीत’’ की जो हवा बांधने की कोशिश की गयी है, वह ‘‘विजय’’ के इस ढोल को वास्तविक नतीजों से काफी हद तक स्वतंत्र ही कर देती है। बेशक, उत्तर-पूर्व के जिन तीन राज्यों –त्रिपुरा, मेघालय तथा नगालेंड– में इस चक्र में विधानसभाई चुनाव हुए हैं, उन तीनों में 2 मार्च के चुनाव नतीजों से, भाजपा के सत्ता तक पहुंचने का जुगाड़ तो बन ही गया है। लेकिन, किस तरह? फिर हाल के विधानसभाई चुनाव से पहले भी तो भाजपा इन तीनों राज्यों में सत्ता का हिस्सा थी ही। फिर इसे जबर्दस्त ‘‘जीत’’ किस तर्क से माना जा सकता है? वास्तव में, सत्ता का हिस्सा होने की एक न्यूनतम समानता को छोड़ दें तो, इन तीनों राज्यों में भाजपा की हैसियत में काफी अंतर था और ताजा चुनाव के नतीजे, इस अंतर के कमोबेश ज्यों का त्यों बने रहने को ही नहीं, पांच साल सत्ता का हिस्सा रहने के बाद, भाजपा के थोड़ा-बहुत नीचे खिसकने को भी दिखाते हैं। तीनों राज्यों की कुल 180 सीटों में से भाजपा को, 2018 के चुनाव के मुकाबले इस बार 4 सीटें कम मिली हैं। जहां उसे मेघालय में पिछले चुनाव की तरह 2 सीटों पर तथा नगालेेंड में 12 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा है, वहीं त्रिपुरा में, जो इन तीनों राज्यों में अकेला था, जहां भाजपा सरकार का नेतृत्व कर रही थी, उसकी अपनी सीटें 36 से घटकर 32 रह गयी हैं और उसके नेतृत्ववाले मोर्चे की, 44 से घटकर 33।

कहने की जरूरत नहीं है कि त्रिपुरा को छोडक़र, दोनों अन्य राज्यों में भाजपा की सत्ता में हिस्सेदारी, उसकी चुनावी ताकत का कम और जोड़-जुगाड़ तथा जुगत का मामला ही ज्यादा थी, जिसमें उत्तर-पूर्वी राज्यों की विखंडित राजनीति में और छोटी-छोटी पार्टियों को, केंद्र में सत्ता की नजदीकी से ललचाने का, कमोबेश नंगई से खेला गया खेल भी शामिल है। मेघालय और नागालेंड, दोनों में भाजपा ने 2 मार्च के चुनाव के नतीजे के बाद भी, उस हद तक अपना सत्ता में बने रहना बेशक सुनिश्चित कर लिया है। फिर भी, नागालेंड की तुलना में, मेघालय में भाजपा का जीत का किसी भी तरह का दावा, वास्तव में झूठा ही कहा जाना चाहिए। नागालेंड में तो फिर भी, भाजपा ने 60 सदस्यीय विधानसभा में सबसे ज्यादा, 25 सीटें जीतकर आयी एनडीपीपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। और हालांकि, इस बार भी भाजपा के हिस्से में 12 सीटें ही आयीं, कम से कम उसका मत फीसद 15.30 से बढक़र 18.80 हो गया है। लेकिन, मेघालय में तो भाजपा ने पांच साल सत्ता में शामिल रहने के बाद, पिछली बार सरकार का नेतृत्व कर रही कोनराड संगमा की पीपीपी के ही खिलाफ और राज्य की सभी 60 विधानसभाई सीटों पर चुनाव लड़ा था, जबकि पिछली बार उसने 47 सीटों पर ही चुनाव लड़ा था। चुनाव प्रचार में भाजपा ने पीपीपी को ही मुख्य निशाना बनाया था और खुद गृहमंत्री अमित शाह ने कथित भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम का एलान करते हुए, मेघालय सरकार को जिसमें भाजपा चुनाव के समय तक बनी ही हुई थी, देश की सबसे भ्रष्ट सरकार ही करार दे दिया था। खुद प्रधानमंत्री ने अपने चुनावी प्रचार भाषणों में इस दावे को आगे बढ़ाया था। लेकिन, 2 मार्च को मतगणना से पहले ही संगमा की, उत्तर-पूर्व में भाजपा-संघ के मुख्य रणनीतिकार बन चुके, असम के भाजपायी मुख्यमंत्री से गोपनीय मुलाकात हो चुकी थी और पूरे चुनाव नतीजे आने से पहले ही भाजपा, न सिर्फ पीपीपी के लिए समर्थन की घोषणा कर चुकी थी बल्कि सबसे पहले इन तीन राज्यों में से मेघालय में ही प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने की घोषणा की जा चुकी थी। इसे हार छुपाने की चतुराई भले ही कहा जा सकता हो, पर ‘‘जीत’’ तो किसी भी तरह से नहीं कहा जा सकता है। याद रहे कि मेघालय में इस बार, सभी सीटों पर लडऩे के बावजूद, भाजपा का मत फीसद पिछली बार के 9.6 फीसद से घटकर, 9.33 फीसद पर आ गया है।

वास्तव में मेघालय में पिछले चुनाव के बाद भाजपा ने,चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर आयी कांग्रेस को सबसे बढ़ कर केंद्र की सत्ता के बल पर, सरकार से दूर रखने के बाद, उसे ही नहीं अपने साथ सत्ताधारी गठजोड़ में शामिल अन्य पार्टियों को भी अस्थिर करने का खेल, जमकर खेला था। इसी प्रकार, नगालेंड में पिछले चुनाव के बाद सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आयी एनडीपीपी के साथ गठजोड़ करने के बाद, उसके अधिकांश विधायकों का उसने सत्ताधारी एनडीपीपी में विलय कराया और उसके बाद एनडीपीपी के साथ गठजोड़ किया, जिस गठजोड़ को हाल के चुनाव में बहुमत मिल गया है। केंद्र में सत्ता के सहारे इतनी जोड़-तोड़ के बाद भी, दोनों राज्यों में भाजपा की सीटें जस की तस ही बनी रही हैं। इसके बावजूद, 2 मार्च के चुनाव नतीजे के आधार पर नरेंद्र मोदी के यह दावा करने को कि अब तक बनी रही आम धारणा के विपरीत, अल्पसंख्यक भाजपा के साथ आ चुके हैं, शुद्ध हवाबाजी की कहा जा सकता है। हैरानी की बात नहीं है कि पहले गोवा में तथा अब उत्तर-पूर्व में, अल्पसंख्यकों के समर्थन के ऐसे ही ‘संकेतों’ के बल पर, प्रधानमंत्री मोदी ने आगे केरल में भी सरकार बनाने का जो दावा किया था, उसे केरल की एलडीएफ सरकार के मुख्यमंत्री, पिनरायी विजयन ने उनका ‘‘दिन में सपने देखना’’ करार देकर, हाथ के हाथ खारिज भी कर दिया।

बहरहाल, त्रिपुरा के चुनाव नतीजों पर लौटें, जहां चुनावोत्तर हिंसा से हमने अपनी यह टिप्पणी शुरू की थी। वास्तव में तीनों राज्यों में एक त्रिपुरा ही है, जहां भाजपा अपनी सरकार बचाने में कामयाबी का दावा कर सकती है। लेकिन, यह कामयाबी भी कम से कम भाजपा या उसकी सरकार की लोकप्रियता बढऩे या उसके लिए जनसमर्थन बढऩे का, दूर-दूर तक कोई इशारा नहीं करती है। उल्टे 2018 के चुनाव के मुकाबले भाजपा के नेतृत्ववाले गठजोड़ की सीटों में पूरे 11 की गिरावट हुई है और उसका आंकड़ा 33 पर आ गया है, जो पिछले कम से कम चार दशकों में पहली बार, सत्तापक्ष का बहुमत इतना कम रह जाने को दिखाता है। इसी प्रकार, सत्ताधारी गठजोड़ के मत फीसद में भी लगभग 11 फीसद की गिरावट आयी है। इसी का नतीजा है कि भाजपा ने त्रिपुरा में अपनी सरकार तो जैसे-जैसे कर के बचा ली है, पर इस सचाई को वह चाहकर भी छुपा नहीं सकती है कि 16 फरवरी को हुए मतदान में, राज्य के मतदाताओं में से 60 फीसद ने, उसकी सरकार के खिलाफ ही वोट दिया था। यानी विपक्ष के वोटों के विभाजन की कृपा से ही, भाजपा त्रिपुरा में मामूली अंतर से अपनी सरकार बचा पायी है वर्ना राज्य की जनता के स्पष्ट बहुमत का जनादेश तो उसकी सरकार के खिलाफ ही था।

स्वाभाविक रूप से राज्य में विपक्ष की सबसे बड़ी ताकत होने के नाते, सीपीआइ (एम) के नेतृत्व में वाम मोर्चे ने, भाजपा गठजोड़-विरोधी मतों के विभाजन को टालने की अपनी ओर से पूरी कोशिश की थी। इसी क्रम में उसने कभी इस राज्य में अपनी मुख्य विरोधी रही, कांग्रेस पार्टी के साथ ही नहीं, पिछले चुनाव के बाद की अवधि में त्रिपुरा के आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए विशेष प्रयत्न करने का दावा करने वाली, नवोदित त्रिपुरा मोथा पार्टी के साथ भी तालमेल का प्रयास किया था, जिसे इससे पहले त्रिपुरा आदिवासी स्वायत्त जिला परिषद के चुनाव में तथा उसके बाद हुए विधानसभाई उपचुनाव में भी, आदिवासियों का काफी समर्थन मिला था। लेकिन, विपक्षी वोट को एकजुट करने में उसे पूरी सफलता नहीं मिली और वाम मोर्चा तथा कांग्रेस के एकजुट मंच के अलावा, त्रिपुरा मोथा ने करीब 41 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार कर मुकाबले को बहुत हद तक तिकोना कर दिया। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस ने विधानसभा की करीब सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े कर दिए, हालांकि आमतौर पर मतदाताओं ने उसके उम्मीदवारों को खारिज कर दिया।

इस त्रिकोणीय मुकाबले में ही, 40 फीसद के करीब वोट के बल पर, भाजपा का गठजोड़, बहुमत का आंकड़ा पार करने में कामयाब हो गया। इस तिकोने मुकाबले की भी, एक अतिरिक्त विशेषता ने, भाजपा की खासतौर पर मदद की। 20 सुरक्षित आदिवासी सीटों पर, त्रिपुरा मोथा की स्थिति मुख्य दावेदारों में रही और उसने इनमें से 13 सीटों पर जीत भी दर्ज करायी। लेकिन, इसके अलावा 21 और गैर-आदिवासी बहुल सीटों पर उसके उम्मीदवार, मुख्य मुकाबले के लिहाज से ज्यादातर अगंभीर उम्मीदवार ही साबित हुए और उनमें से अनेक ने विपक्ष के वोटों में थोड़ा-बहुत जो भी विभाजन किया, उसने भाजपा की राह हमवार करने का ही काम किया।

एक अध्ययन के अनुसार धानपुर, बिशालगढ़, चंडीपुर, पबियाचारा में वाम मोर्चा-कांग्रेस के उम्मीदवार, त्रिपुरा मोथा के उम्मीदवारों द्वारा लिए गए वोट से भी कम अंतर से, भाजपा के उम्मीदवार से हार गए, जबकि मोहनपुर, तेलियामुरा,पेंचरथाल तथा पानीसागर आदि में भी विपक्ष का वोट भाजपा से ठीक-ठाक ज्यादा होने के बावजूद, उनके वोट के बंटने से भाजपा के उम्मीदवार जीत गए। इसी प्रकार, अगरतला में रामनगर से वाम मोर्चा-कांग्रेस समर्थित, निर्दलीय मानवाधिकार कार्यकर्ता, पुरुषोत्तम रायबर्मन, भाजपा उम्मीदवार से कुल 897 वोट से हार गए, जबकि यहां टीएमसी उम्मीदवार 2,079 वोट ले गया! यानी त्रिपुरा तक में भाजपा का कम से कम बड़े जनसमर्थन कोई दावा नहीं बनता है, फिर नगालेंड तथा मेघालय की तो बात ही क्या है?

लेकिन, चुनाव के इस चक्र में भाजपा की जीत के इस खोखलेपन का त्रिपुरा में उठे चुनावोत्तर हमलों के ज्वार से क्या संबंध है? दोनों में संबंध वास्तव में काफी सीधा और सरल है। अर्ध-सत्य व असत्य पर टिके अतिशय प्रचार के सहारे, भाजपा की जीत के खोखलेपन को छुपाते हुए, नरेंद्र मोदी की अजेयता का जो नैरेटिव प्रचारित किया जा रहा है, उसकी असलियत से जाहिर है कि खुद संघ-भाजपा पूरी तरह से बेखबर तो नहीं ही हो सकते हैं। इसीलिए, जहां उनका मुकाबला वामपंथ जैसी कडिय़ल, वास्तविक हितों के आधार पर जनता को गोलबंद करने में समर्थ ताकतों से है, फासीवादी हथकंडों के सहारे वे सीधे-सीधे विरोधी ताकतों को पंगु बनाने की ही कोशिश करते हैं। त्रिपुरा में आज वही हो रहा है।

वास्तव में त्रिपुरा में वामपंथविरोधी हिंसा का सिलसिला तो 2018 के चुनाव में जीत के बाद ही शुरू हो गया था। भाजपा के राज के पांच साल में राज्य में एक भी चुनाव स्वतंत्र व निष्पक्ष तरीके से नहीं होने दिया गया था। इसी के चलते, आम लोगों के बीच इसकी भारी आशंकाएं थीं कि क्या इस बार उन्हें मर्जी से अपना वोट डालने दिया जाएगा? इन्हीं आशंकाओं के दबाव में, चुनाव आयोग के कुछ कदमों से किसी हद तक लोगों का विश्वास जमा और धीरे-धीरे लोग वोट करने के लिए बाहर भी निकले। इसी ने भाजपा गठजोड़ को सब कुछ के बावजूद, हार के करीब पहुंचा दिया था। अब सत्ता में वापसी के साथ ही भाजपायी सरकार एक बार फिर, विपक्ष के इस बढ़ते खतरे को हिंसक हथकंडों से कुचलने की कोशिशों में जुट गयी है। मगर यह तो उसकी जीत का नहीं, बल्कि हार के उसके डर का ही इशारा है।

•राजेंद्र शर्मा
[ लेखक ‘ लोकलहर ‘ के संपादक हैं ]

🟥🟥🟥

विज्ञापन (Advertisement)

ब्रेकिंग न्यूज़

विधानसभा में गूंजा प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना में भ्रष्टाचार का मुद्दा, 1400 महिलाओं के 61 लाख रुपये गबन का आरोप; विपक्ष का वॉकआउट
breaking Chhattisgarh

विधानसभा में गूंजा प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना में भ्रष्टाचार का मुद्दा, 1400 महिलाओं के 61 लाख रुपये गबन का आरोप; विपक्ष का वॉकआउट

IPS जयंत वैष्णव बने मुख्यमंत्री सुरक्षा के नए SP, DGP अरुण देव गौतम ने जारी किया आदेश
breaking Chhattisgarh

IPS जयंत वैष्णव बने मुख्यमंत्री सुरक्षा के नए SP, DGP अरुण देव गौतम ने जारी किया आदेश

‘सरकार से कहिए ऐसा न करें’, SC ने कहा- 9वीं कक्षा में तीसरी भाषा पढ़ने से तनाव बढ़ेगा
breaking National

‘सरकार से कहिए ऐसा न करें’, SC ने कहा- 9वीं कक्षा में तीसरी भाषा पढ़ने से तनाव बढ़ेगा

होर्मुज रूट पर भारतीय नाविकों की तैनाती पर सरकार ने लिया बड़ा फैसला, DGMA ने जारी की एडवाइजरी
breaking international

होर्मुज रूट पर भारतीय नाविकों की तैनाती पर सरकार ने लिया बड़ा फैसला, DGMA ने जारी की एडवाइजरी

आउटसोर्सिंग कर्मचारियों पर घिरे स्वास्थ्य मंत्री, भाजपा विधायकों ने कहा, चरित्र सत्यापन क्यों नहीं, मंत्री ने दिलाया शत प्रतिशत सत्यापन का भरोसा
breaking Chhattisgarh

आउटसोर्सिंग कर्मचारियों पर घिरे स्वास्थ्य मंत्री, भाजपा विधायकों ने कहा, चरित्र सत्यापन क्यों नहीं, मंत्री ने दिलाया शत प्रतिशत सत्यापन का भरोसा

जो गुजरात में बैन, वो दवा छत्तीसगढ़ में खरीदी गई ? स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने सदन में किया स्पष्ट
breaking Chhattisgarh

जो गुजरात में बैन, वो दवा छत्तीसगढ़ में खरीदी गई ? स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने सदन में किया स्पष्ट

रथ यात्रा स्पेशल: घर में बनाएं भगवान जगन्नाथ का प्रिय खाजा, जानें आसान रेसिपी
breaking Chhattisgarh

रथ यात्रा स्पेशल: घर में बनाएं भगवान जगन्नाथ का प्रिय खाजा, जानें आसान रेसिपी

सदन में गूंजा नकटी में बुलडोजर कार्रवाई का मामला, स्थगन प्रस्ताव खारिज होने पर नाराज़ विपक्ष ने गर्भगृह में जाकर की नारेबाजी, सभी विपक्षी विधायक निलंबित
breaking Chhattisgarh

सदन में गूंजा नकटी में बुलडोजर कार्रवाई का मामला, स्थगन प्रस्ताव खारिज होने पर नाराज़ विपक्ष ने गर्भगृह में जाकर की नारेबाजी, सभी विपक्षी विधायक निलंबित

पोलैंड के उप विदेश मंत्री का बड़ा दावा, कहा- PM मोदी के कहने पर पुतिन ने यूक्रेन पर परमाणु हमला रोका
breaking international

पोलैंड के उप विदेश मंत्री का बड़ा दावा, कहा- PM मोदी के कहने पर पुतिन ने यूक्रेन पर परमाणु हमला रोका

विधानसभा में बीज संकट को लेकर जोरदार हंगामा, स्पीकर ने स्थगन प्रस्ताव ठुकराया, गर्भगृह में नारेबाजी के बाद 34 विपक्षी विधायक निलंबित
breaking Chhattisgarh

विधानसभा में बीज संकट को लेकर जोरदार हंगामा, स्पीकर ने स्थगन प्रस्ताव ठुकराया, गर्भगृह में नारेबाजी के बाद 34 विपक्षी विधायक निलंबित

औद्योगिक दुर्घटनाओं पर विधानसभा में बवाल, वेदांता डायरेक्टर पर FIR का मुद्दा गरमाया, मंत्री के जवाब से नाराज़ विपक्ष ने किया वॉकआउट
breaking Chhattisgarh

औद्योगिक दुर्घटनाओं पर विधानसभा में बवाल, वेदांता डायरेक्टर पर FIR का मुद्दा गरमाया, मंत्री के जवाब से नाराज़ विपक्ष ने किया वॉकआउट

अब AI करेगा जंगल की चौकीदारी, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम का ट्रायल शुरू
breaking Chhattisgarh

अब AI करेगा जंगल की चौकीदारी, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम का ट्रायल शुरू

E20 पेट्रोल को लेकर मोदी सरकार सख्त हुई, ऐसे लोगों के खिलाफ कड़े एक्शन का आदेश दिया
breaking Chhattisgarh

E20 पेट्रोल को लेकर मोदी सरकार सख्त हुई, ऐसे लोगों के खिलाफ कड़े एक्शन का आदेश दिया

आओ ‘सेक्स’ पर बात करेंः प्राइमरी क्लास से दी जाएगी सेक्स एजुकेशन, हफ्ते में दो दिन चलेगी क्लास, जानें बच्चों को यौन शिक्षा देना क्यों जरूरी?
breaking National

आओ ‘सेक्स’ पर बात करेंः प्राइमरी क्लास से दी जाएगी सेक्स एजुकेशन, हफ्ते में दो दिन चलेगी क्लास, जानें बच्चों को यौन शिक्षा देना क्यों जरूरी?

भाडे़ के NRI नहीं लाए गए…ऑस्ट्रेलिया में पीएम मोदी के कार्यक्रम पर आयोजकों की सफाई, कहा- माफ़ी मांगे राहुल और मल्लिकार्जुन खड़गे’
breaking international

भाडे़ के NRI नहीं लाए गए…ऑस्ट्रेलिया में पीएम मोदी के कार्यक्रम पर आयोजकों की सफाई, कहा- माफ़ी मांगे राहुल और मल्लिकार्जुन खड़गे’

विधानसभा में विधायक रिकेश की पहल, शहरी क्षेत्रों में पट्टा वितरण की प्रक्रिया होगी शुरू
breaking Chhattisgarh

विधानसभा में विधायक रिकेश की पहल, शहरी क्षेत्रों में पट्टा वितरण की प्रक्रिया होगी शुरू

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने शिक्षिका की बर्खास्तगी का आदेश किया निरस्त, बिना विभागीय जांच हटाना असंवैधानिक, सेवा बहाली के निर्देश
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने शिक्षिका की बर्खास्तगी का आदेश किया निरस्त, बिना विभागीय जांच हटाना असंवैधानिक, सेवा बहाली के निर्देश

धान के साथ वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा, किसानों को मिलेंगे ₹15 हजार प्रति एकड़ की सहायता
breaking Chhattisgarh

धान के साथ वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा, किसानों को मिलेंगे ₹15 हजार प्रति एकड़ की सहायता

छत्तीसगढ़ को मिले 5 नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों की सौगात, 250 सीटों को मिली स्वीकृति, सीएम साय ने पीएम मोदी मोदी और स्वास्थ्य मंत्री का जताया आभार
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ को मिले 5 नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों की सौगात, 250 सीटों को मिली स्वीकृति, सीएम साय ने पीएम मोदी मोदी और स्वास्थ्य मंत्री का जताया आभार

राज्य पुलिस सेवा के तीन वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले, तारकेश्वर पटेल ADCP से बने DCP
breaking Chhattisgarh

राज्य पुलिस सेवा के तीन वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले, तारकेश्वर पटेल ADCP से बने DCP

कविता

आरंभ साहित्यिक मंच : सोनिया नायडू
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : सोनिया नायडू

‘आरंभ साहित्यिक मंच’ : हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’
poetry

‘आरंभ साहित्यिक मंच’ : हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

‘आरंभ’ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

साहित्यिक पटल : सुरभि ताम्रकर ‘शावि’
poetry

साहित्यिक पटल : सुरभि ताम्रकर ‘शावि’

साहित्यिक ‘आरंभ’ : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

साहित्यिक ‘आरंभ’ : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष दोहावली : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर
poetry

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष दोहावली : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर

गीत – डॉ. दीक्षा चौबे
poetry

गीत – डॉ. दीक्षा चौबे

इस माह की नवाकुंर कवयित्री – सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

इस माह की नवाकुंर कवयित्री – सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

इस माह के बाल साहित्यकार : कमलेश चंद्राकर
poetry

इस माह के बाल साहित्यकार : कमलेश चंद्राकर

साहित्यनामा – अमृता मिश्रा
poetry

साहित्यनामा – अमृता मिश्रा

इस माह के ग़ज़लकार : शुभेंदु बागची ‘मुन्तज़िर’
poetry

इस माह के ग़ज़लकार : शुभेंदु बागची ‘मुन्तज़िर’

कवि और कविता : हरिप्रकाश गुप्ता ‘सरल’
poetry

कवि और कविता : हरिप्रकाश गुप्ता ‘सरल’

इस माह के कवि : प्रकाशचंद्र मण्डल
poetry

इस माह के कवि : प्रकाशचंद्र मण्डल

कवि और कविता : दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर
poetry

कवि और कविता : दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

कवि और कविता : कमलेश चंद्राकर
poetry

कवि और कविता : कमलेश चंद्राकर

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

कविता श्रृंखला आरंभ : डॉ. शिरोमणि माथुर
poetry

कविता श्रृंखला आरंभ : डॉ. शिरोमणि माथुर

कविता श्रृंखला ‘आरंभ’ में : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

कविता श्रृंखला ‘आरंभ’ में : दीप्ति श्रीवास्तव

कहानी

लेख : कैलाश जैन बरमेचा
story

लेख : कैलाश जैन बरमेचा

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव
story

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय
story

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव
story

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’
story

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी
story

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन
story

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है
story

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे
story

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ :  ब्रजेश मल्लिक
story

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ : ब्रजेश मल्लिक

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
story

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
story

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…

story

रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

story

रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

story

कहानी : संतोष झांझी

story

कहानी : ‘ पानी के लिए ‘ – उर्मिला शुक्ल

लेख

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
Article

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

Article

तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

Article

लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
Article

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
Article

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
Article

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
Article

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
Article

🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
Article

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
Article

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
Article

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

Article

🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

Article

🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

Article

🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

⏩ 12 अगस्त-  भोजली पर्व पर विशेष
Article

⏩ 12 अगस्त- भोजली पर्व पर विशेष

Article

■पर्यावरण दिवस पर चिंतन : संजय मिश्रा [ शिवनाथ बचाओ आंदोलन के संयोजक एवं जनसुनवाई फाउंडेशन के छत्तीसगढ़ प्रमुख ]

Article

■पर्यावरण दिवस पर विशेष लघुकथा : महेश राजा.

राजनीति न्यूज़

breaking Politics

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

Politics

■छत्तीसगढ़ :

Politics

भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

breaking Politics

भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
Politics

धमतरी आसपास

Politics

स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

Politics

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

breaking Politics

राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
Politics

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
Politics

मरवाही उपचुनाव

Politics

प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

Politics

ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

breaking Politics

अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
breaking National Politics

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

breaking Politics

हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

breaking Politics

पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन