• Chhattisgarh
  • गीता प्रेस को गाँधी शांति पुरस्कार : पुनि – पुनि गाँधी हत्या : आलेख – राजेंद्र शर्मा

गीता प्रेस को गाँधी शांति पुरस्कार : पुनि – पुनि गाँधी हत्या : आलेख – राजेंद्र शर्मा

3 years ago
471

अमृतकाल-पूर्व का भारत होता तो बेशक, इसके भोंडेपन पर आम तौर पर हंसा ही जा रहा होता। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में, उनकी सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली समिति, गोरखपुर के ‘‘गीता प्रेस’’ को वर्ष 2021 के लिए ‘‘गांधी शांति पुरस्कार’’ देने का एलान करती है। प्रधानमंत्री, ट्विटर पर एक संदेश के जरिए, गीता प्रेस को यह सम्मान प्राप्त होने के लिए बधाई देते हैं। और फिर, गीता प्रेस का न्यासी मंडल, यह सम्मान दिए जाने के लिए वर्तमान सरकार को और विशेष रूप से प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देता है! लेकिन, यही तो मोदी राज में आया संघ-भाजपा का अमृतकाल है, जहां इस तरह का भोंडापन ही नया सामान्य है; सब कुछ –प्रधानमंत्री का, प्रधानमंत्री द्वारा और प्रधानमंत्री के लिए! लेकिन, चूंकि यह संघ-भाजपा का अमृतकाल है, इसीलिए इस तरह की निर्लज्जता के भोंडेपन पर तो शायद ही कोई उंगली उठाने में अपनी ऊर्जा बर्बाद करेगा, पर ‘‘गीता प्रेस’’ को न सिर्फ पुरस्कृत किए जाने बल्कि उसे ‘‘गांधी शांति पुरस्कार’’ दिए जाने के संदेश पर जरूर, अनेक सवाल उठे हैं। फिर भी, कांग्रेस पार्टी की यह टिप्पणी तो एक प्रकार से मोदी सरकार के इस निर्णय के वास्तविक संदेश की कील पर, सीधे हथौड़ा ही जड़ देती है कि यह तो ‘सावरकर और गोडसे को गांधी शांति पुरस्कार देेने’ जैसा ही है!

यह किसी से छुपा नहीं है कि संघ परिवार का हमेशा से सावरकर ही नहीं, गोडसे से भी गहरा लगाव रहा है। बेशक, महात्मा गांधी की हत्या के बाद, तत्काल सामने आयी तीखी जन-प्रतिक्रिया के सामने और खासतौर तत्कालीन गृहमंत्री सरदार पटेल द्वारा इस स्पष्ट समझ के आधार पर आरएसएस पर पाबंदी लगाए जाने के बाद, कि सीधे अगर गांधी पर गोली चलवाने में लिप्त नहीं भी हों, तब भी हिंदू महासभा और आरएसएस, नफरत का वह वातावरण बनाने के मुख्य अपराधी थे, जिसने अनेक जानें ली थीं, जिनमें सबसे अमूल्य महात्मा गांधी की जान भी शामिल थी; संघ ने गोडसे से अपने लगाव को छुपाना और उससे अपने किसी भी तरह के संबंध को नकारना जरूरी समझा था। बहरहाल, भीतर-भीतर उसने गोडसे प्रेम और गांधी द्वेष की अपनी अंतर्धारा को सायास सुरक्षित रखा था; जिसका पता ‘‘गांधी वध क्यों?’’ जैसी किताबों के आरएसएस से जुड़े प्रकाशनों द्वारा लगातार छापे जाने और आरएसएस के प्रचार नैटवर्क पर हमेशा उपलब्ध रहने से चलता है। जाहिर है कि इसी दबे-छुपे अनुमोदन की शह पर, संघ परिवार के हाशिए के संगठनों की मार्फत गोडसे को शहीद बताने, गोडसे का मंदिर बनाने, गोडसे का जन्म दिन मनाने आदि के रूप में, प्रकट गोडसे भक्ति भी चलती रही है। मोदी राज के नौ साल में, इस सब को काफी फूलने-फैलने का मौका मिला है और सोशल मीडिया पर तो जैसे संघ से शह-प्राप्त गांधी-घृणा और गोडसे-प्रेम का विस्फोट ही हो गया है।

पिछले चंद हफ्तों में ही, सत्ताधारी भाजपा के एक पूर्व-मुख्यमंत्री ने बाकायदा गोडसे के देशभक्त होने का एलान किया है, तो एक केंद्रीय मंत्री ने उसके ‘‘भारत माता का सपूत’’ होने का। सत्ताधारी पार्टी के नेताओं की गोडसे की हिमायत में इस बढ़ती मुखरता के सामने उन प्रधानमंत्री ने भी चुप्पी साध ली है, जिन्होंने पिछले आम चुनाव की पूर्व-संध्या में, मध्य प्रदेश में अपनी पार्टी की लोकसभा की सीट की उम्मीदवार, प्रज्ञा ठाकुर के ऐसा ही कहने पर कम से कम यह कहना जरूरी समझा था कि उन्हें वह, ‘‘दिल से माफ नहीं कर पाएंगे”! गांधी को ठिकाने लगाने की इस मुहिम में, गांधी के नाम से जुड़ी संस्थाओं पर कब्जा करने तथा उन्हें गांधी के मूल्यों से जुड़े अपने घोषित उद्देश्यों से उल्टी दिशा में धकेलने की, वर्तमान सत्ताधारियों की लगातार जारी कोशिशों को और जोड़ लीजिए।

इस सब की पृष्ठभूमि में वर्तमान शासन द्वारा, जो गांधी के उस समावेशी राष्ट्रवाद को पलटकर, जिसका वर्तमान सत्ताधारी विचार-परिवार आजादी की लड़ाई के पूरे दौर में बड़ी हिकारत से ‘भौगोलिक राष्ट्रवाद’ कहकर विरोध करता आया था, सांप्रदायिक हिंदुत्ववादी राष्ट्र थोपने में जुटा हुआ है, एक हिंदुत्ववादी संस्था को गांधी की शांति निष्ठा से जुड़ा सम्मान देना, सहज ही यह शंका पैदा करता है कि यह कहीं गांधी के नाम की ओट में, उनके मूल्यों के नकार, उनकी हत्या को ही तो, आगे बढ़ाने का प्रयास तो नहीं है। यहां सामान्य रूप से भी, गांधी से जुड़े पुरस्कार से गोडसे को सम्मानित करने की उपमा लागू होती है। लेकिन, वर्तमान संघ-भाजपा निजाम ने, इस मामले में भी इस तरह की व्यंजनाओं की कोई गुंजाइश ही नहीं छोड़ी है। नये संसद भवन का उद्घाटन, गांधी की हत्या के षडयंत्र में शामिल होने के आरोप में अदालत के कटघरे मेें खड़े हुए, विनायक दामोदर सावरकर की जयंती पर करने के बाद, उसने अब ‘‘गांधी शांति पुरस्कार’’ एक ऐसे हिंदुत्ववादी संगठन को दिया है, जिसके मुख्य कर्ताधर्ता, ‘‘गीता प्रेस’’ तथा उसकी पत्रिका ‘कल्याण’ के संस्थापक-संपादक द्वय, जयदयाल गोयंदका और हनुमान प्रसाद पोद्दार को भी, गांधी की हत्या से किसी न किसी रूप में जुड़े होने के संदेह में, गिरफ्तार किया गया था। बेशक, बाद में दूसरे बहुत से लोगों की तरह उन्हें भी छोड़ दिया गया। यहां तक कि 1955 में राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने गोरखपुर में गीता प्रेस के विशाल परिसर का उद्घाटन भी किया था। लेकिन, इस पूरे प्रसंग से कम से कम इसका तो भली-भांति अंदाज लगाया ही जा सकता है कि गीता प्रेस और उसके प्रमुख प्रकाशन, ‘कल्याण’ के कर्ताधर्ताओं और गांधी के रिश्ते, कम से कम ऐसे किसी भी तरह नहीं थे कि उनके काम को, किसी भी प्रकार से गांधी की परंपरा से जोडक़र सम्मानित किया जा सके। वे अगर किसी परंपरा में आते हैं, तो गांधी की हत्या करने वालों की ही परंपरा में आते हैं। कम-से-कम गांधी की हत्या के समय के भारत की यही समझ थी। गांंधी के नाम से जुड़ा पुरस्कार, गीता प्रेस को देकर वर्तमान सरकार ने, अब गांधी की हत्या की इस परंपरा को ही बल देने का प्रयास किया है।

बेशक, 1923 से शुरू हुए, गीता प्रेस का सौ साल पूरे करना, एक महत्वपूर्ण सफर तय करना है। उसने खासतौर पर हिंदी भाषी क्षेत्र में नये-नये बनते हुए मध्यवर्ग के परिवारों की बड़ी संख्या तक, सस्ते दाम में रामायण, गीता तथा अन्य हिंदू धार्मिक पुस्तकें पहुंचायी हैं। उसकी पत्रिका ‘कल्याण’ ने भी कुछ हद तक ऐसा ही काम किया है। करीब पौने दो हजार किताबें और 90 करोड़ से ज्यादा प्रतियां छापकर लोगों तक पहुंचाना, बेशक एक उल्लेखनीय उपलब्धि है और जिसके बल पर अपने इन सौ वर्षों में गीता प्रेस ने हिंदीभाषी क्षेत्र में मध्य वर्ग की पूरी पहली पीढ़ी को, कहीं-न-कहीं छुआ है। गीता प्रेस के वैबसाइट पर ही स्पष्ट कर दिया गया है कि, “इसका मुख्य उद्देश्य गीता, रामायण, उपनिषद, पुराण, प्रख्यात संतों के प्रवचन और अन्य चरित्र निर्माण पुस्तकों को प्रकाशित करके सनातन धर्म के सिद्घांतों को आम जनता के बीच प्रचारित करना और फैलाना है। साथ ही पत्रिकाओं को अत्यधिक रियायती कीमतों पर बेचना है।”

तो क्या इस प्रकाशन को पुरस्कृत किए जाने का इसलिए विरोध किया जा रहा है कि यह हिंदू धर्म या कथित सनातन धर्म की पुस्तकों का प्रकाशन तथा प्रसार करता रहा हैै। बेशक, ऐसी संस्था को, जो किसी खास धर्म या उसके धार्मिक ग्रंथों का प्रचार-प्रसार करती हो और हमारा धर्मनिरपेक्ष संविधान इसकी पूरी आजादी देता है, शासन द्वारा पुरस्कृत या प्रमोट किया जाना भी, अपने आप में समस्यापूर्ण है। और यह समस्या तब और बढ़ जाती है, जब वर्तमान शासन की तरह नंगई से एक धर्म विशेष के धार्मिक ग्रंथों के प्रचार-प्रसार को प्रमोट करने वाली संस्थाओं को ही प्रमोट किया जाने लगा हो, क्योंकि यह धर्मनिपरेक्षता की खास भारतीय न्यूनतम अपेक्षा, सर्वधर्म समभाव का भी उल्लंघन करता है। फिर भी बात सिर्फ एक धर्म विशेष से जुड़ी संस्था को, एक खास अवसर पर शासन द्वारा पुरस्कृत किए जाने तक ही रहती, तब तो फिर भी गनीमत थी। आखिरकार, गीता प्रेस के शताब्दी समारोह में तत्कालीन राष्ट्रपति, रामनाथ कोविंद गोरखपुर में शामिल होने पहुंचे ही थे और उस पर शायद ही कोई बहस हुई थी।

मोदी सरकार के प्रवक्ता और संघ परिवार जो दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, उसके विपरीत मुद्दा एक हिंदू धार्मिक प्रकाशन संस्थान की ‘‘कामयाबी’’ सेलिब्रेट किया जाने या नहीं किए जाने का दूर-दूर तक नहीं है। मुद्दा है, गांधी के नाम पर स्थापित शांति पुरुस्कार, मोदी सरकार द्वारा एक ऐसी संस्था को दिए जाने का, जिसका गांधी के साथ रिश्ता सहयोग से ज्यादा विरोध का ही रहा था और विरोध भी इतना उग्र कि उसने गांधी के संगियों के मन में, उनकी हत्या में ही इस संस्था के कर्ताधर्ताओं का हाथ होने तक का संदेह पैदा किया था। और मुद्दा है ऐसी संस्था को यह कहकर गांधी के नाम से जुड़ा सम्मान दिए जाने का कि उसका ‘‘अहिंसक और गांधीवादी तरीकों के माध्यम से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन के लिए…उत्कृष्ट योगदान’’ रहा है और उसने ‘‘लोगों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन को आगे बढ़ाने की दिशा में, पिछले 100 वर्षों में सराहनीय काम किया है।’’ इस दावे का इस संस्था की वास्तविक भूमिका से दूर-दूर तक कुछ लेना-देना नहीं है। यह तो अपने हिंदुत्ववादी सांप्रदायिक आग्रहों के हिसाब से इतिहास का वैसा ही पुनर्लेखन है, जिसके जरिए कितने ही क्षेत्रों में वास्तविक इतिहास को प्रतिस्थापित करने को, मौजूदा शासन ने अपना एजेंडा ही बना लिया है। बेशक, सावरकर और गोडसे के इतिहास का पुनर्लेखन भी, इस परियोजना का एक जरूरी हिस्सा है।

अक्षय मुकुल ने अपनी शानदार शोध-आधारित पुस्तक, ‘गीता प्रेस एंड मेकिंग ऑफ हिंदू इंडिया’ में विस्तार से इसका जिक्र किया कि किस तरह, इस ग्रुप के मुख्य विचारक रहे, हनूमान प्रसाद पोद्दार, शुरू में गांधी के हिंदू आचार-व्यवहार की ओर आकर्षित जरूर हुए थे, लेकिन उन्नीस सौ तीस के दशक के शुरू होते-होते, गांधी के अपनी सनातनी हिंदू आस्था को, हिंदू-मुस्लिम एकता के आग्रह और दलितों के मंदिर प्रवेश के आंदोलन और पूना पैक्ट के जरिए, जाति व्यवस्था के उत्पीडि़तों के अधिकारों के पक्ष में पुनर्परिभाषित करने ने, उन्हें गांधी के सक्रिय विरोध की ओर धकेल दिया गया। निजी व्यवहार में यह विरोध जितना तीखा था, उससे ज्यादा उग्र पोद्दार द्वारा संपादित पत्रिका के पन्नों पर नजर आता था। धर्म तथा आध्यात्मिकता के नाम पर, सांप्रदायिकता और ब्राह्मणवाद के प्रचार-प्रसार को ‘‘सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन के लिए…उत्कृष्ट योगदान’’ सिर्फ और सिर्फ संघ के नजरिए से ही कहा जा सकता है। हैरानी की बात नहीं है कि गांधी के विचार के विरोध में गीता प्रेस और ‘कल्याण’ हिंदू महासभा और आएसएस जैसी हिंदुत्ववादी सांप्रदायिक राष्ट्रवाद की ताकतों के साथ जुड़ते गए। गांधी की हत्या के बाद, जब आरएसएस पर लगायी गयी पाबंदी, कुछ शर्तें मनवाते हुए सरदार पटेल ने हटायी, उसके फौरन बाद गोरखपुर में आयोजित गोलवलकर की सभा में, पोद्दार की प्रमुख भूमिका रही थी। इससे पहले, 1946 में जब हिंदू महासभा का वार्षिक अधिवेशन गोरखपुर में हुआ, पोद्दार ने उसके मुख्य आयोजनकर्ता की जिम्मेदारी संभाली। दलितों के मंदिर प्रवेश के लिए गांधी का विरोध करने वाले गीता प्रेस-कल्याण ग्रुप ने, हिंदू महिलाओं के अधिकार सुनिश्चित करने वाले हिंदू कोड बिल का हिंदू महासभा तथा आरएसएस के साथ कंधे से कंधे भिड़ाकर विरोध ही नहीं किया, ऐसी जुर्रत करने के लिए स्वतंत्र भारत के पहले विधिमंत्री, डा. अम्बेडकर के इस्तीफे की भी मांग की। वास्तव में बाहर से और खुद कांग्रेस में भीतर से भी, इसी तरह के मनुस्मृतिवादी समर्थन के सामने जब नेहरू को मूल हिंदू कोड बिल के साथ समझौता करना पड़ा, इसे कम-से-कम कानून की नजरों में बराबरी के राज के सपने का शासन की ओर से नकारा जाना मानते हुए, डा. अम्बेडकर ने बाद में मंत्रिपद से इस्तीफा ही दे दिया।

इसीलिए, हैरानी की बात नहीं है कि गांधी की हत्या के बाद, जब शक की सुई हिंदू महासभा तथा आरएसएस की ओर घूमी, गीता प्रेस और कल्याण के कर्ताधर्ता भी पुलिस के राडार पर आ गए। दिलचस्प है कि जी डी बिड़ला ने उस समय, पोद्दार और गोइंदका के पक्ष में हस्तक्षेप करने से यह कहकर इंकार कर दिया था कि उनका काम ‘सनातनी नहीं, शैतानी’ था। सनातन के नाम पर ऐसी शैतानी भूमिका को मोदी सरकार का ‘अहिंसक और गांधीवादी तरीकों के माध्यम से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन के लिए…उत्कृष्ट योगदान’ बताना, गांधी की पुनि-पुनि हत्या करना नहीं, तो और क्या है!


•राजेंद्र शर्मा
[ लेखक ‘ लोकलहर ‘ के संपादक हैं ]

🟥🟥🟥

विज्ञापन (Advertisement)

ब्रेकिंग न्यूज़

छत्तीसगढ़ में शुरू होगा ‘बासमती धान मिशन’, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में महकेगा प्रदेश का चावल, बढ़ेगी किसानों की आय
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में शुरू होगा ‘बासमती धान मिशन’, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में महकेगा प्रदेश का चावल, बढ़ेगी किसानों की आय

नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और पॉपकॉर्न स्टेटस से बाहर निकलने की आवश्यकता है – श्री रमेन डेका
breaking Chhattisgarh

नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और पॉपकॉर्न स्टेटस से बाहर निकलने की आवश्यकता है – श्री रमेन डेका

जनता तक पहुंचे योजनाओं का वास्तविक लाभ, प्रशासन जवाबदेही के साथ करे कार्य : मुख्यमंत्री श्री साय
breaking Chhattisgarh

जनता तक पहुंचे योजनाओं का वास्तविक लाभ, प्रशासन जवाबदेही के साथ करे कार्य : मुख्यमंत्री श्री साय

भारत के पड़ोस में नया देश बनेगा: म्यांमार के होंगे दो टुकड़े, रखाइन प्रांत के 17 में से 14 इलाकों पर विद्रोहियों का कब्जा, राजधानी सितवे को भी घेरा
breaking international

भारत के पड़ोस में नया देश बनेगा: म्यांमार के होंगे दो टुकड़े, रखाइन प्रांत के 17 में से 14 इलाकों पर विद्रोहियों का कब्जा, राजधानी सितवे को भी घेरा

पीएम मोदी सूरत के हथियार फैक्ट्री पहुंचे; मेड इन इंडिया टैंक और ड्रोन देखा, जनसभा को संबोधित करेंगे
breaking National

पीएम मोदी सूरत के हथियार फैक्ट्री पहुंचे; मेड इन इंडिया टैंक और ड्रोन देखा, जनसभा को संबोधित करेंगे

छत्तीसगढ़ में इबोला की आहट: दुर्ग-भिलाई में मिले तीन संदिग्ध मरीज, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में इबोला की आहट: दुर्ग-भिलाई में मिले तीन संदिग्ध मरीज, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

छत्तीसगढ़ के पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 149 संविदा पदों पर होगी भर्ती, प्रोफेसर-असिस्टेंट प्रोफेसर और सीनियर रेजीडेंट्स की होगी नियुक्ति
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 149 संविदा पदों पर होगी भर्ती, प्रोफेसर-असिस्टेंट प्रोफेसर और सीनियर रेजीडेंट्स की होगी नियुक्ति

तेल संकट के बीच मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, ATF के के दाम स्थिर करने लिए 10000 करोड़ के फंड का किया ऐलान
breaking international

तेल संकट के बीच मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, ATF के के दाम स्थिर करने लिए 10000 करोड़ के फंड का किया ऐलान

नए शैक्षणिक सत्र से पहले सरकारी स्कूलों के छात्रों को बड़ी राहत, एक साथ मिलेंगे यूनिफॉर्म के दो सेट
breaking Chhattisgarh

नए शैक्षणिक सत्र से पहले सरकारी स्कूलों के छात्रों को बड़ी राहत, एक साथ मिलेंगे यूनिफॉर्म के दो सेट

खेती केवल आजीविका नहीं, हमारी संस्कृति और पहचान का आधार : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
breaking Chhattisgarh

खेती केवल आजीविका नहीं, हमारी संस्कृति और पहचान का आधार : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

कभी गोलियों की गूंज, अब बच्चों के सपनों की आवाज
breaking Chhattisgarh

कभी गोलियों की गूंज, अब बच्चों के सपनों की आवाज

मुख्यमंत्री ने बिहान की दीदियों को सौंपी आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के तहत टाटा मैजिक वाहन
breaking Chhattisgarh

मुख्यमंत्री ने बिहान की दीदियों को सौंपी आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के तहत टाटा मैजिक वाहन

तमिलनाडु में बंधक बने छत्तीसगढ़ के 50 श्रमिकों को मिली आजादी, जांजगीर-चांपा प्रशासन की तत्परता से हुई सुरक्षित घर वापसी
breaking Chhattisgarh

तमिलनाडु में बंधक बने छत्तीसगढ़ के 50 श्रमिकों को मिली आजादी, जांजगीर-चांपा प्रशासन की तत्परता से हुई सुरक्षित घर वापसी

छत्तीसगढ़ में फिर बढ़ेगी गर्मी, लेकिन बारिश-अंधड़ का भी अलर्ट… रायपुर समेत कई जिलों में बदलेगा मौसम
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में फिर बढ़ेगी गर्मी, लेकिन बारिश-अंधड़ का भी अलर्ट… रायपुर समेत कई जिलों में बदलेगा मौसम

छत्तीसगढ़ के पूर्व IAS अधिकारी बीकेएस रे का निधन, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के पूर्व IAS अधिकारी बीकेएस रे का निधन, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक

शासकीय योजनाओं का लाभ हर पात्र परिवार तक पहुंचे, प्रशासन संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ करे कार्य : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
breaking Chhattisgarh

शासकीय योजनाओं का लाभ हर पात्र परिवार तक पहुंचे, प्रशासन संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ करे कार्य : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

’गाँव के द्वार पहुँची डिजिटल सरकार: बड़ेकनेरा का ‘सेवा सेतु’ मॉडल बना ग्रामीण सुशासन की नई मिसाल – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय’
breaking Chhattisgarh

’गाँव के द्वार पहुँची डिजिटल सरकार: बड़ेकनेरा का ‘सेवा सेतु’ मॉडल बना ग्रामीण सुशासन की नई मिसाल – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय’

’महिला सशक्तिकरण और मातृ-शिशु कल्याण योजनाओं से बदल रही जिंदगी: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय’
breaking Chhattisgarh

’महिला सशक्तिकरण और मातृ-शिशु कल्याण योजनाओं से बदल रही जिंदगी: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय’

सुप्रीम कोर्ट को 5 नए जज मिले, जजों की संख्या अब 37 हुई, जानें इससे क्या फायदा होगा
breaking National

सुप्रीम कोर्ट को 5 नए जज मिले, जजों की संख्या अब 37 हुई, जानें इससे क्या फायदा होगा

10वीं-12वीं के टॉपर्स को मिलेंगे 2-2 लाख रुपये, शीर्ष 10 बच्चों की सूची तैयार
breaking Chhattisgarh

10वीं-12वीं के टॉपर्स को मिलेंगे 2-2 लाख रुपये, शीर्ष 10 बच्चों की सूची तैयार

कविता

साहित्यिक ‘आरंभ’ : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

साहित्यिक ‘आरंभ’ : सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष दोहावली : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर
poetry

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष दोहावली : ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर

गीत – डॉ. दीक्षा चौबे
poetry

गीत – डॉ. दीक्षा चौबे

इस माह की नवाकुंर कवयित्री – सुरभि ताम्रकार ‘शावि’
poetry

इस माह की नवाकुंर कवयित्री – सुरभि ताम्रकार ‘शावि’

इस माह के बाल साहित्यकार : कमलेश चंद्राकर
poetry

इस माह के बाल साहित्यकार : कमलेश चंद्राकर

साहित्यनामा – अमृता मिश्रा
poetry

साहित्यनामा – अमृता मिश्रा

इस माह के ग़ज़लकार : शुभेंदु बागची ‘मुन्तज़िर’
poetry

इस माह के ग़ज़लकार : शुभेंदु बागची ‘मुन्तज़िर’

कवि और कविता : हरिप्रकाश गुप्ता ‘सरल’
poetry

कवि और कविता : हरिप्रकाश गुप्ता ‘सरल’

इस माह के कवि : प्रकाशचंद्र मण्डल
poetry

इस माह के कवि : प्रकाशचंद्र मण्डल

कवि और कविता : दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर
poetry

कवि और कविता : दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

कवि और कविता : कमलेश चंद्राकर
poetry

कवि और कविता : कमलेश चंद्राकर

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

कविता श्रृंखला आरंभ : डॉ. शिरोमणि माथुर
poetry

कविता श्रृंखला आरंभ : डॉ. शिरोमणि माथुर

कविता श्रृंखला ‘आरंभ’ में : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

कविता श्रृंखला ‘आरंभ’ में : दीप्ति श्रीवास्तव

कृति आरंभ : कविता आसपास- दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

कृति आरंभ : कविता आसपास- दीप्ति श्रीवास्तव

स्तम्भ ‘आरंभ’ : इस माह की कवयित्री- दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

स्तम्भ ‘आरंभ’ : इस माह की कवयित्री- दीप्ति श्रीवास्तव

कविता आसपास स्तम्भ ‘आरंभ’ – संजय एम तरानेकर
poetry

कविता आसपास स्तम्भ ‘आरंभ’ – संजय एम तरानेकर

रचना और रचनाकार- पल्लव चटर्जी
poetry

रचना और रचनाकार- पल्लव चटर्जी

होली विशेष [दो फागुनी रचना यें] – तारकनाथ चौधुरी
poetry

होली विशेष [दो फागुनी रचना यें] – तारकनाथ चौधुरी

कहानी

लेख : कैलाश जैन बरमेचा
story

लेख : कैलाश जैन बरमेचा

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव
story

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय
story

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव
story

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’
story

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी
story

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन
story

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है
story

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे
story

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ :  ब्रजेश मल्लिक
story

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ : ब्रजेश मल्लिक

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
story

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
story

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…

story

रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

story

रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

story

कहानी : संतोष झांझी

story

कहानी : ‘ पानी के लिए ‘ – उर्मिला शुक्ल

लेख

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
Article

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

Article

तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

Article

लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
Article

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
Article

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
Article

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
Article

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
Article

🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
Article

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
Article

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
Article

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

Article

🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

Article

🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

Article

🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

⏩ 12 अगस्त-  भोजली पर्व पर विशेष
Article

⏩ 12 अगस्त- भोजली पर्व पर विशेष

Article

■पर्यावरण दिवस पर चिंतन : संजय मिश्रा [ शिवनाथ बचाओ आंदोलन के संयोजक एवं जनसुनवाई फाउंडेशन के छत्तीसगढ़ प्रमुख ]

Article

■पर्यावरण दिवस पर विशेष लघुकथा : महेश राजा.

राजनीति न्यूज़

breaking Politics

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

Politics

■छत्तीसगढ़ :

Politics

भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

breaking Politics

भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
Politics

धमतरी आसपास

Politics

स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

Politics

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

breaking Politics

राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
Politics

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
Politics

मरवाही उपचुनाव

Politics

प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

Politics

ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

breaking Politics

अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
breaking National Politics

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

breaking Politics

हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

breaking Politics

पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन