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कविता आसपास : पल्लव चटर्जी
1 year ago
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सुन रहे हो! दुनियावालों
– पल्लव चटर्जी
[ छत्तीसगढ़, भिलाई, जिला- दुर्ग ]

सुन रहे हो! दुनियावालों
मुनाफाखोरों और उनकी नीतियाँ दोनों ही
देश के विकास में रोडे़ उत्पन्न कर रही हैं
इससे पूँजी का अवक्षय व उत्पादों का गुणात्मक ह्रास हो रहा है
कालाबाजारी फल फूल रहा है।
इनके पीछे कीअदृश्य शक्तियाँ एवं कार्य परिचालन संस्था
देश के आपसी संबंधों में सेंध लगा रहे हैं।
मुनाफे की हदें तोड़कर भी
वे कदाचित संतुष्ट नहीं रहते हैं।
आपस में युद्ध करवा कर
हथियारो का सौदा करना और
देश को कमजोर करना ही
इनका असली उद्देश्य है।
अतः अब भी सतर्क हो जाओ मानव,
इतिहास गवाह है यह परिकल्पना
आदिकाल से क्रियान्वित है और
अनंतकाल तक चलेगा
जब तक मानव सभ्यता ध्वंस न हो जाती।
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कवि संपर्क-
81093 03936
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chhattisgarhaaspaas
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