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  • विशेष : पुनर्वास का केरल मॉडल- साभार टिप्पणी पीपुल्स डेमोक्रेसी, अनुवाद- संजय पराते

विशेष : पुनर्वास का केरल मॉडल- साभार टिप्पणी पीपुल्स डेमोक्रेसी, अनुवाद- संजय पराते

6 months ago
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पिछले हफ्ते, केरल में एलडीएफ सरकार ने 2024 के वायनाड भूस्खलन के पीड़ितों को 178 घर सौंपे। यह राज्य सरकार द्वारा बनाए जा रहे टाउनशिप का पहला चरण था। जमीन के स्वामित्व के दस्तावेज भी परिवारों को सौंपे गए। मानसून शुरू होने से पहले सभी पीड़ितों को जमीन और घर प्रदान करने के लिए एक कार्य योजना तैयार की गई है।

आपदा के परिणामस्वरूप, एक पूरा इलाका रातोंरात गायब हो गया। लोगों ने अपने प्रियजनों को, घरों को, आजीविका को खो दिया और उन्हें विकलांगता का सामना करना पड़ा। केरल के पूरे समाज ने पीड़ितों को सहारा और सहायता प्रदान करने के लिए एकजुट होकर काम किया, ताकि वे अपने जीवन को फिर से सुचारू रूप से शुरू कर सकें। इसके साथ ही केरल की एलडीएफ सरकार द्वारा अपनाए गए उच्च मानवतावादी दृष्टिकोण ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह जैविक सहयोग ही था, जिसने मुंडक्काई और चूरलमाला के लोगों की जीवित रहने की कहानी को लिखा।

अवरोधों को पार करना

पहली हफ्ते से ही आपदा के बाद कई अवरोध सामने आए। मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष के धन के उपयोग के खिलाफ झूठा प्रचार किया गया। कुछ राजनीतिक दलों ने सीएमडीआरएफ में एक पैसा भी न देने की अपील की। राज्य सरकार की सहायता और पुनर्वास के बारे में पीड़ितों को गुमराह करने के लिए सचेत प्रयास किए गए। जब राज्य सरकार ने टाउनशिप बनाने के लिए जमीन अधिग्रहित की, तो उन्हें अदालत में ले जाया गया। पुनर्वास परियोजना को पटरी से उतारने के लिए मीडिया में अभियान भी चलाया गया। इसके ऊपर से, अन्य आपदा प्रभावित राज्यों को सहायता देने में अत्यधिक उदार केंद्रीय सरकार ने भी पुनर्वास के लिए केरल को कोई सहायता देने से इंकार कर दिया। इसके बावजूद भी, निर्माण शुरू करने के सिर्फ 10 महीनों के भीतर, केरल में एलडीएफ सरकार वायनाड पुनर्वास टाउनशिप का पहला चरण पूरा करने में सक्षम हुई।

इन सभी अवरोधों के बीच, केरल के लोगों की एकता शुरु से ही स्पष्ट थी। केरल के सभी हिस्सों से लोग बचाव कार्यों में शामिल हुए। राहत शिविर जल्दी से स्थापित किए गए, जहां भोजन, दवाएं और आवश्यक वस्तुओं के अलावा, प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति को परामर्श सेवाएं भी प्रदान की गईं। शिविरों में सहायता का प्रवाह हुआ। एक मंत्रिमंडलीय उप-समिति के नेतृत्व में मंत्रियों ने प्रभावित स्थल पर डेरा डाला और सभी बचाव और राहत गतिविधियों की सीधे निगरानी की। मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए पुतुमाला एस्टेट में एक प्लॉट में उचित व्यवस्था की गई, जिसे कुछ दिनों में अधिग्रहित कर एक श्मशान घाट स्थापित किया गया। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने शिविरों में रहने वालों को किराए के घरों और सरकारी आवासों में स्थानांतरित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिए, जिससे पीड़ितों को कुछ ही हफ्तों में सामान्य जीवन में वापस आने में मदद मिली।

सहायता और सहयोग

अनुपयोगी सरकारी आवासों की मरम्मत की गई और उन्हें उपलब्ध कराया गया। जो लोग अपनी पसंद के स्थान पर किराए पर रहना चाहते थे, उनके लिए राज्य सरकार ने किराया प्रदान किया। प्रति परिवार 6,000 रुपये आवंटित किए गए, जिसमें अब तक 6 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। 858 परिवारों को प्रति माह 1,000 रुपये के खाद्य कूपन भी प्रदान किए गए। आजीविका खोने वाले पीड़ितों को प्रति दिन 300 रूपये के हिसाब से प्रति माह 9,000 रुपये की सहायता प्रदान की गई। इस मद में अभी तक कुल 17.2 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। 13 करोड़ रुपये राहत सहायता के रूप में और 1.3 करोड़ रुपये आपातकालीन सहायता के रूप में वितरित किए गए हैं। आपदा में माता-पिता दोनों को खोने वाले 21 बच्चों को सहायता प्रदान करने के लिए 2 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

इन लोगों को मदद करने से रोकने के सभी प्रयासों के बावजूद, सीएमडीआरएफ में अभूतपूर्व सहायता का प्रवाह हुआ। वायनाड आपदा के पीड़ितों की मदद के लिए विशेष रूप से 773.98 करोड़ रुपये दान किए गए। सभी क्षेत्रों के संगठनों और व्यक्तियों ने मदद का हाथ बढ़ाया। यहां तक कि, कुछ अन्य राज्य सरकारें भी केरल की मदद के लिए आगे आईं। केरल में एलडीएफ सरकार ने वायनाड भूस्खलन के 555 पीड़ितों के 18.75 करोड़ रुपये के बकाए ऋण को पूरी तरह से माफ कर दिया। इसका मतलब 1,620 ऋणों को माफ करना था। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से आपदा पीड़ितों के ऋण माफ करने के लिए कई बार अनुरोध किया था, लेकिन उसने कोई ध्यान नहीं दिया। इसके बाद केरल की राज्य सरकार ने यह किया गया।

भूमि अधिग्रहण और निर्माण

जब पीड़ितों के पुनर्वास की बात आई, तो एलडीएफ सरकार ने सार्वजनिक परामर्श के माध्यम से व्यापक समाज से राय हासिल किया। सबसे पहले यह सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया गया कि नए घर सुरक्षित स्थान पर हों, जहां पीड़ित एक साथ रह सकें और अपनी आजीविका चला सकें। शुरुआत में वायनाड जिले में 31 स्थानों पर जमीन की पहचान की गई। इसे आगे 9 स्थानों का अंतिम रूप से चयन किया गया। अंत में, पीड़ितों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, नेडुम्बाला एस्टेट और एल्स्टन एस्टेट को अधिग्रहित करने का फैसला किया गया। बाद में, 410 परिवारों को एल्स्टन एस्टेट में प्रति परिवार सात सेंट (लगभग 3050 वर्ग फीट) जमीन और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के साथ एक टाउनशिप में पुनर्वास किया जाना सुनिश्चित किया गया।

भूमि अधिग्रहण के लिए सरकारी आदेश अक्टूबर 2024 में जारी किया गया था। नवंबर 2024 में, पहले चरण में लाभार्थियों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इस बीच, भूमि अधिग्रहण में कानूनी विवाद के कारण देरी हुई। उच्च न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद, जमीन के मूल्यांकन और सर्वेक्षण की प्रक्रिया रिकॉर्ड समय में पूरी की गई। अप्रैल 2025 में, अदालत में 44.33 करोड़ रुपये जमा करके एक ही दिन में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की गई। टाउनशिप का निर्माण भी तुरंत शुरू हो गया।

टाउनशिप का निर्माण उरालुंगल लेबर कॉन्ट्रैक्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (यूएलसीसीएस) ने किया था। यूएलसीसीएस की स्थापना 100 साल पहले वाग्भटानंदन, जो पुनर्जागरण के नेता थे, के नेतृत्व में मजदूरों को वेतन गुलामी से मुक्त करने के उद्देश्य से की गई थी। गर्मियों की बारिश और मानसून की चुनौतियों के बावजूद, टाउनशिप का निर्माण आगे बढ़ा और रिकॉर्ड 10 महीनों में पूरा हुआ। आज वायनाड पुनर्वास टाउनशिप एक वास्तविकता है, जो हजारों निर्माण मजदूरों और अधिकारियों की मेहनत का प्रमाण है, जिन्होंने योजनाबद्ध होकर और अनुशासन के साथ काम किया है।

टाउनशिप

घरों के साथ-साथ, सामुदायिक हॉल, फुटबॉल मैदान, दुकानें, सामग्री संग्रह सुविधा, जलाशय, 9.5 लाख लीटर क्षमता वाली पानी की टंकी, जल निकासी प्रणाली, मलजल उपचार संयंत्र, प्रत्येक घर में 2 केवी क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र, भूमिगत बिजली वितरण नेटवर्क, आपदा आश्रय और एक आपदा स्मारक जैसी सार्वजनिक सुविधाएं हैं। 5 क्षेत्रों में डिज़ाइन की गई टाउनशिप 35 समूहों में बसाई गई है। प्रत्येक समूह में 8 से 20 घर हैं। प्रत्येक समूह में एक विशाल हरा बगीचा है। साढ़े पांच मीटर चौड़ी सड़क इस बगीचे को घेरती है। प्रत्येक समूह के घर उस सड़क का सामना करते हुए बनाए गए हैं। यह बगीचा बड़े लोगों के इकत्र होने, बच्चों के खेलने और यदि चाहें तो एक छोटे रसोई बगीचे के रूप में उपयोग किया जा सकता है। टाउनशिप में बनाए गए हर घर के लिए आवश्यक फर्नीचर प्रदान करने पर भी विचार किया जा रहा है।

‘बेहतर तरीके से पुनर्निर्माण’ वह लक्ष्य था, जिसने टाउनशिप के निर्माण के दौरान एलडीएफ सरकार का मार्गदर्शन किया। इसलिए, घरों और सार्वजनिक भवनों का निर्माण प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के लिए किया गया था। प्रत्येक घर 9 कंक्रीट दीवारों के साथ बनाया गया है, जो 90 सेंटीमीटर चौड़ी हैं। इसके अलावा, डेढ़ फीट ऊंचाई वाले बीम, प्लिंथ बीम और छत बीम जमीन के स्तर और छत के स्तर पर स्थापित किए गए हैं। इसलिए, हालांकि ये घर वर्तमान में एक मंजिला हैं, आवश्यकता होने पर ऊपर और मंजिलें बनाई जा सकती हैं। निर्माण के हर चरण में गुणवत्ता सुनिश्चित की गई है, जिसमें निर्माण के लिए उपयोग की जाने वाली प्रत्येक सामग्री का परीक्षण निर्माण स्थल पर ही स्थापित एक प्रयोगशाला में किया गया है। इसके अलावा, निर्माण सामग्री का परीक्षण एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा भी किया गया था। प्रत्येक घर के पूरा होने से पहले 58 प्रकार के निरीक्षण किए गए थे। निर्माण मानकों को पूरा करने के लिए प्रत्येक निर्माण चरण से पहले और बाद में निरीक्षण किए गए थे। प्रत्येक निरीक्षण उत्तीर्ण होने के बाद ही निर्माण अगले चरण में आगे बढ़ा है।

एलडीएफ सरकार ने पीड़ितों को पुनर्वास के दो विकल्प दिए थे। वे या तो टाउनशिप में एक घर ले सकते थे, या 15 लाख रुपये का मुआवजा स्वीकार कर सकते थे। अधिकांश परिवारों ने वायनाड पुनर्वास टाउनशिप में एक घर चुनना पसंद किया। टाउनशिप के पहले चरण में, जिनके घर भूस्खलन में पूरी तरह से नष्ट हो गए थे, उन्हें घर दिए गए हैं। आपदा में अपना व्यवसाय खोने वाले उद्यमियों के लिए एक पुनरुद्धार योजना भी उनकी सलाहों को ध्यान में रखते हुए लागू की जा रही है।

वर्तमान अनुमानों के अनुसार, जब वायनाड पुनर्वास टाउनशिप का पूरी तरह से काम पूरा हो जाएगा, तो 402 परिवारों के 1,662 लोग वहां रहेंगे। एलडीएफ सरकार ने एक सुरक्षित स्थान बनाया है, जहां लोग अवर्णनीय दुखों को पार करते हुए सामंजस्य से रह सकते हैं। पुनर्वास का यह केरल मॉडल, वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहा है, क्योंकि केंद्र सरकार की उपेक्षा के बावजूद एक राज्य सरकार द्वारा इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।f*पुनर्वास का केरल मॉडल*

पिछले हफ्ते, केरल में एलडीएफ सरकार ने 2024 के वायनाड भूस्खलन के पीड़ितों को 178 घर सौंपे। यह राज्य सरकार द्वारा बनाए जा रहे टाउनशिप का पहला चरण था। जमीन के स्वामित्व के दस्तावेज भी परिवारों को सौंपे गए। मानसून शुरू होने से पहले सभी पीड़ितों को जमीन और घर प्रदान करने के लिए एक कार्य योजना तैयार की गई है।

आपदा के परिणामस्वरूप, एक पूरा इलाका रातोंरात गायब हो गया। लोगों ने अपने प्रियजनों को, घरों को, आजीविका को खो दिया और उन्हें विकलांगता का सामना करना पड़ा। केरल के पूरे समाज ने पीड़ितों को सहारा और सहायता प्रदान करने के लिए एकजुट होकर काम किया, ताकि वे अपने जीवन को फिर से सुचारू रूप से शुरू कर सकें। इसके साथ ही केरल की एलडीएफ सरकार द्वारा अपनाए गए उच्च मानवतावादी दृष्टिकोण ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह जैविक सहयोग ही था, जिसने मुंडक्काई और चूरलमाला के लोगों की जीवित रहने की कहानी को लिखा।

अवरोधों को पार करना

पहली हफ्ते से ही आपदा के बाद कई अवरोध सामने आए। मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष के धन के उपयोग के खिलाफ झूठा प्रचार किया गया। कुछ राजनीतिक दलों ने सीएमडीआरएफ में एक पैसा भी न देने की अपील की। राज्य सरकार की सहायता और पुनर्वास के बारे में पीड़ितों को गुमराह करने के लिए सचेत प्रयास किए गए। जब राज्य सरकार ने टाउनशिप बनाने के लिए जमीन अधिग्रहित की, तो उन्हें अदालत में ले जाया गया। पुनर्वास परियोजना को पटरी से उतारने के लिए मीडिया में अभियान भी चलाया गया। इसके ऊपर से, अन्य आपदा प्रभावित राज्यों को सहायता देने में अत्यधिक उदार केंद्रीय सरकार ने भी पुनर्वास के लिए केरल को कोई सहायता देने से इंकार कर दिया। इसके बावजूद भी, निर्माण शुरू करने के सिर्फ 10 महीनों के भीतर, केरल में एलडीएफ सरकार वायनाड पुनर्वास टाउनशिप का पहला चरण पूरा करने में सक्षम हुई।

इन सभी अवरोधों के बीच, केरल के लोगों की एकता शुरु से ही स्पष्ट थी। केरल के सभी हिस्सों से लोग बचाव कार्यों में शामिल हुए। राहत शिविर जल्दी से स्थापित किए गए, जहां भोजन, दवाएं और आवश्यक वस्तुओं के अलावा, प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति को परामर्श सेवाएं भी प्रदान की गईं। शिविरों में सहायता का प्रवाह हुआ। एक मंत्रिमंडलीय उप-समिति के नेतृत्व में मंत्रियों ने प्रभावित स्थल पर डेरा डाला और सभी बचाव और राहत गतिविधियों की सीधे निगरानी की। मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए पुतुमाला एस्टेट में एक प्लॉट में उचित व्यवस्था की गई, जिसे कुछ दिनों में अधिग्रहित कर एक श्मशान घाट स्थापित किया गया। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने शिविरों में रहने वालों को किराए के घरों और सरकारी आवासों में स्थानांतरित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिए, जिससे पीड़ितों को कुछ ही हफ्तों में सामान्य जीवन में वापस आने में मदद मिली।

सहायता और सहयोग

अनुपयोगी सरकारी आवासों की मरम्मत की गई और उन्हें उपलब्ध कराया गया। जो लोग अपनी पसंद के स्थान पर किराए पर रहना चाहते थे, उनके लिए राज्य सरकार ने किराया प्रदान किया। प्रति परिवार 6,000 रुपये आवंटित किए गए, जिसमें अब तक 6 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। 858 परिवारों को प्रति माह 1,000 रुपये के खाद्य कूपन भी प्रदान किए गए। आजीविका खोने वाले पीड़ितों को प्रति दिन 300 रूपये के हिसाब से प्रति माह 9,000 रुपये की सहायता प्रदान की गई। इस मद में अभी तक कुल 17.2 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। 13 करोड़ रुपये राहत सहायता के रूप में और 1.3 करोड़ रुपये आपातकालीन सहायता के रूप में वितरित किए गए हैं। आपदा में माता-पिता दोनों को खोने वाले 21 बच्चों को सहायता प्रदान करने के लिए 2 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

इन लोगों को मदद करने से रोकने के सभी प्रयासों के बावजूद, सीएमडीआरएफ में अभूतपूर्व सहायता का प्रवाह हुआ। वायनाड आपदा के पीड़ितों की मदद के लिए विशेष रूप से 773.98 करोड़ रुपये दान किए गए। सभी क्षेत्रों के संगठनों और व्यक्तियों ने मदद का हाथ बढ़ाया। यहां तक कि, कुछ अन्य राज्य सरकारें भी केरल की मदद के लिए आगे आईं। केरल में एलडीएफ सरकार ने वायनाड भूस्खलन के 555 पीड़ितों के 18.75 करोड़ रुपये के बकाए ऋण को पूरी तरह से माफ कर दिया। इसका मतलब 1,620 ऋणों को माफ करना था। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से आपदा पीड़ितों के ऋण माफ करने के लिए कई बार अनुरोध किया था, लेकिन उसने कोई ध्यान नहीं दिया। इसके बाद केरल की राज्य सरकार ने यह किया गया।

भूमि अधिग्रहण और निर्माण

जब पीड़ितों के पुनर्वास की बात आई, तो एलडीएफ सरकार ने सार्वजनिक परामर्श के माध्यम से व्यापक समाज से राय हासिल किया। सबसे पहले यह सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया गया कि नए घर सुरक्षित स्थान पर हों, जहां पीड़ित एक साथ रह सकें और अपनी आजीविका चला सकें। शुरुआत में वायनाड जिले में 31 स्थानों पर जमीन की पहचान की गई। इसे आगे 9 स्थानों का अंतिम रूप से चयन किया गया। अंत में, पीड़ितों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, नेडुम्बाला एस्टेट और एल्स्टन एस्टेट को अधिग्रहित करने का फैसला किया गया। बाद में, 410 परिवारों को एल्स्टन एस्टेट में प्रति परिवार सात सेंट (लगभग 3050 वर्ग फीट) जमीन और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के साथ एक टाउनशिप में पुनर्वास किया जाना सुनिश्चित किया गया।

भूमि अधिग्रहण के लिए सरकारी आदेश अक्टूबर 2024 में जारी किया गया था। नवंबर 2024 में, पहले चरण में लाभार्थियों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इस बीच, भूमि अधिग्रहण में कानूनी विवाद के कारण देरी हुई। उच्च न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद, जमीन के मूल्यांकन और सर्वेक्षण की प्रक्रिया रिकॉर्ड समय में पूरी की गई। अप्रैल 2025 में, अदालत में 44.33 करोड़ रुपये जमा करके एक ही दिन में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की गई। टाउनशिप का निर्माण भी तुरंत शुरू हो गया।

टाउनशिप का निर्माण उरालुंगल लेबर कॉन्ट्रैक्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (यूएलसीसीएस) ने किया था। यूएलसीसीएस की स्थापना 100 साल पहले वाग्भटानंदन, जो पुनर्जागरण के नेता थे, के नेतृत्व में मजदूरों को वेतन गुलामी से मुक्त करने के उद्देश्य से की गई थी। गर्मियों की बारिश और मानसून की चुनौतियों के बावजूद, टाउनशिप का निर्माण आगे बढ़ा और रिकॉर्ड 10 महीनों में पूरा हुआ। आज वायनाड पुनर्वास टाउनशिप एक वास्तविकता है, जो हजारों निर्माण मजदूरों और अधिकारियों की मेहनत का प्रमाण है, जिन्होंने योजनाबद्ध होकर और अनुशासन के साथ काम किया है।

टाउनशिप

घरों के साथ-साथ, सामुदायिक हॉल, फुटबॉल मैदान, दुकानें, सामग्री संग्रह सुविधा, जलाशय, 9.5 लाख लीटर क्षमता वाली पानी की टंकी, जल निकासी प्रणाली, मलजल उपचार संयंत्र, प्रत्येक घर में 2 केवी क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र, भूमिगत बिजली वितरण नेटवर्क, आपदा आश्रय और एक आपदा स्मारक जैसी सार्वजनिक सुविधाएं हैं। 5 क्षेत्रों में डिज़ाइन की गई टाउनशिप 35 समूहों में बसाई गई है। प्रत्येक समूह में 8 से 20 घर हैं। प्रत्येक समूह में एक विशाल हरा बगीचा है। साढ़े पांच मीटर चौड़ी सड़क इस बगीचे को घेरती है। प्रत्येक समूह के घर उस सड़क का सामना करते हुए बनाए गए हैं। यह बगीचा बड़े लोगों के इकत्र होने, बच्चों के खेलने और यदि चाहें तो एक छोटे रसोई बगीचे के रूप में उपयोग किया जा सकता है। टाउनशिप में बनाए गए हर घर के लिए आवश्यक फर्नीचर प्रदान करने पर भी विचार किया जा रहा है।

‘बेहतर तरीके से पुनर्निर्माण’ वह लक्ष्य था, जिसने टाउनशिप के निर्माण के दौरान एलडीएफ सरकार का मार्गदर्शन किया। इसलिए, घरों और सार्वजनिक भवनों का निर्माण प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के लिए किया गया था। प्रत्येक घर 9 कंक्रीट दीवारों के साथ बनाया गया है, जो 90 सेंटीमीटर चौड़ी हैं। इसके अलावा, डेढ़ फीट ऊंचाई वाले बीम, प्लिंथ बीम और छत बीम जमीन के स्तर और छत के स्तर पर स्थापित किए गए हैं। इसलिए, हालांकि ये घर वर्तमान में एक मंजिला हैं, आवश्यकता होने पर ऊपर और मंजिलें बनाई जा सकती हैं। निर्माण के हर चरण में गुणवत्ता सुनिश्चित की गई है, जिसमें निर्माण के लिए उपयोग की जाने वाली प्रत्येक सामग्री का परीक्षण निर्माण स्थल पर ही स्थापित एक प्रयोगशाला में किया गया है। इसके अलावा, निर्माण सामग्री का परीक्षण एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा भी किया गया था। प्रत्येक घर के पूरा होने से पहले 58 प्रकार के निरीक्षण किए गए थे। निर्माण मानकों को पूरा करने के लिए प्रत्येक निर्माण चरण से पहले और बाद में निरीक्षण किए गए थे। प्रत्येक निरीक्षण उत्तीर्ण होने के बाद ही निर्माण अगले चरण में आगे बढ़ा है।

एलडीएफ सरकार ने पीड़ितों को पुनर्वास के दो विकल्प दिए थे। वे या तो टाउनशिप में एक घर ले सकते थे, या 15 लाख रुपये का मुआवजा स्वीकार कर सकते थे। अधिकांश परिवारों ने वायनाड पुनर्वास टाउनशिप में एक घर चुनना पसंद किया। टाउनशिप के पहले चरण में, जिनके घर भूस्खलन में पूरी तरह से नष्ट हो गए थे, उन्हें घर दिए गए हैं। आपदा में अपना व्यवसाय खोने वाले उद्यमियों के लिए एक पुनरुद्धार योजना भी उनकी सलाह को ध्यान में रखते हुए लागू की जा रही है।

वर्तमान अनुमानों के अनुसार, जब वायनाड पुनर्वास टाउनशिप का पूरी तरह से काम पूरा हो जाएगा, तो 402 परिवारों के 1,662 लोग वहां रहेंगे। एलडीएफ सरकार ने एक सुरक्षित स्थान बनाया है, जहां लोग अवर्णनीय दुखों को पार करते हुए सामंजस्य से रह सकते हैं। पुनर्वास का यह केरल मॉडल, वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहा है, क्योंकि केंद्र सरकार की उपेक्षा के बावजूद एक राज्य सरकार द्वारा इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।

[ • अनुवादक संजय पराते ‘अखिल भारतीय किसान सभा’ से संबद्ध ‘छत्तीसगढ़ किसान सभा’ के उपाध्यक्ष हैं. ]

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आरंभ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’
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आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’

डॉ. संजय दानी की ग़ज़ल संग्रह ‘चश्मेबद्दुर’ मेरी नज़र में- प्रदीप भट्टाचार्य
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डॉ. संजय दानी की ग़ज़ल संग्रह ‘चश्मेबद्दुर’ मेरी नज़र में- प्रदीप भट्टाचार्य

कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी
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कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
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कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

आरंभ साहित्यिक मंच : उभरते हुए प्रगतिशील परंपरा एवं सोच के कवि डॉ. गिरधर चंद्रा ‘साज़’
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आरंभ साहित्यिक मंच : उभरते हुए प्रगतिशील परंपरा एवं सोच के कवि डॉ. गिरधर चंद्रा ‘साज़’

इस माह की कवयित्री –  सेवानिवृत्त प्राचार्या शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जुनवानी भिलाई जिला- दुर्ग छत्तीसगढ़ की श्रीमती वर्षा ठाकुर
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इस माह की कवयित्री – सेवानिवृत्त प्राचार्या शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जुनवानी भिलाई जिला- दुर्ग छत्तीसगढ़ की श्रीमती वर्षा ठाकुर

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी
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आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव
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पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव

आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी
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आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी

इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव
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इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव

आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’
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आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’

आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी
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आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी

इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’
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इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’

आरंभ साहित्यिक मंच : संध्या जैन
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आरंभ साहित्यिक मंच : संध्या जैन

कहानी

बचपन आसपास [बाल कहानी] – बलदाऊ राम साहू
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बचपन आसपास [बाल कहानी] – बलदाऊ राम साहू

लेख : कैलाश जैन बरमेचा
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लेख : कैलाश जैन बरमेचा

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव
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कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय
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लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव
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लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’
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आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी
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स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे
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कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन
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संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है
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लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे
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मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
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लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ :  ब्रजेश मल्लिक
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सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ : ब्रजेश मल्लिक

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
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लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
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कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
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🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
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चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…

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रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

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रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

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कहानी : संतोष झांझी

लेख

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से
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‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक
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रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए
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काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
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विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

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तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
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व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

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लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
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जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
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18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
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व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
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व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
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🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
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🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
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▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
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▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
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▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
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25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

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🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

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🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

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🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

राजनीति न्यूज़

breaking Politics

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

Politics

■छत्तीसगढ़ :

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भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

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भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
Politics

धमतरी आसपास

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स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

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छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

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राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
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प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

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ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

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अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
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सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

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हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

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पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन