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प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ साहित्य समिति के तत्वावधान में शहर के प्रतिष्ठित ‘पीजी नर्सिंग कॉलेज’ के सभागार में राज्य स्तरीय काव्य पाठ एवं कविता पर संवाद चर्चा में ‘आरंभ’ के सदस्यों एवं कॉलेज के विद्यार्थियों ने भाग लिया

[बाएँ से]👉 • आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा, कैलाश जैन बरमेचा, डॉ. अंजन कुमार, रवि श्रीवास्तव, डॉ. रोजा प्रिंसी, डॉ. रजनी नेलसन
• छत्तीसगढ़ आसपास
• छत्तीसगढ़ [भिलाई]
भिलाई [30 अप्रैल, 2026 पीजी नर्सिंग कॉलेज से मीडिया प्रवक्ता जाविद हसन भाईजान की रिपोर्ट] : प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के तत्वावधान में कॉलेज के वातानुकूलित सभागार में राज्य स्तरीय काव्य पाठ और कविता पर संवाद चर्चा का सफल आयोजन बीते दिनों सम्पन्न हुआ.
मुख्य अतिथि ‘छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य सम्मेलन’ के राज्य अध्यक्ष एवं ‘छत्तीसगढ़ प्रगतिशील लेखक संघ’ में अध्यक्ष मंडल के सदस्य, सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार व प्रगतिशील कवि रवि श्रीवास्तव थे. अध्यक्षता ‘पीजी नर्सिंग कॉलेज’ की प्राचार्या डॉ. रोजा प्रिंसी थीं. कविता पर संवाद चर्चा में शामिल हुए- ‘कल्याण महाविद्यालय’ हिंदी विभाग में सहायक प्राध्यापक पद पर पदस्थ एवं चर्चित कविता संग्रह ‘स्वप्न में डूबी एक नाव’ के प्रगतिशील कवि डॉ. अंजन कुमार.
इस अवसर पर ‘आरंभ’ के मुख्य संरक्षक, समाजसेवी, उद्योगपति, लेखक कैलाश जैन बरमेचा और मुख्य सलाहकार, छत्तीसगढ़ शासन में संस्कृत आयोग के सदस्य रहे, संस्कृत विद्वान लेखक व शिक्षाविद आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा उपस्थित थे. विशेष रूप से पी जी नर्सिंग कॉलेज की उप प्राचार्या डॉ. जी. हेमावती उपस्थित थीं.

👉 • संचालन किया ‘आरंभ’ की महासचिव शायरा नूरुस्सबाह खान ‘सबा’ ने
प्रारंभ में अतिथियों ने माँ सरस्वती वंदना पूजन और दीप प्रज्ज्वलित किया. सरस्वती वंदन गीत गाए गए. अतिथि का पुष्प गुच्छ देकर डॉ. जी. हेमावती, शेफाली भट्टाचार्य, शौकत इकबाल, जाविद हसन भाईजान, राकेश गुप्ता ‘रुसिया’, दीप्ति श्रीवास्तव, अनिता करडेकर, प्रकाशचंद्र मण्डल, पल्लव चटर्जी और शुभेंदु बागची ने किया.

👉 • शायरा फरीदा शाहीन अंसारी ने ‘आरंभ’ के अध्यक्ष का पुष्प गुच्छ देकर अभिवादन किया

👉 • पी जी नर्सिंग कॉलेज की प्राचार्या डॉ. रोजा प्रिंसी का ‘आरंभ’ की तरफ से स्वागत किया श्रीमती शेफाली भट्टाचार्य ने
स्वागत वक्तव्य ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य ने दिया. कार्यक्रम का कुशल संचालन महासचिव नूरुस्सबाह ‘सबा’ ने किया और आभार प्रदर्शन कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. रजनी नेलसन ने दिया.
काव्य पाठ की शुरुआत ‘पीजी नर्सिंग कॉलेज’ की छात्राओं से हुआ. उप प्राचार्या डॉ. जी. हेमावती ने भी कविता पाठ की-

👉 • पी जी नर्सिंग कॉलेज की उप प्राचार्या डॉ. जी. हेमावती
पीजी नर्सिंग कॉलेज से-
चंद्रकला लिल्हारे, सुश्मिता रॉय, नूतन निराला, डॉली सिन्हा, निक्की तिवारी, पूजा सोनवानी, भावना साहू, शिल्पी नंदी, आफ़सा बानो, कुमारी पावनी और प्रियंका सिन्हा.

‘आरंभ’ से-
अनिता करडेकर, दीप्ति श्रीवास्तव, मिताली श्रीवास्तव वर्मा, फ़रीदा शाहीन अंसारी, शशि प्रभा गुप्ता, डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’, राकेश गुप्ता ‘रूसिया’ , प्रकाशचंद्र मण्डल, पल्लव चटर्जी, शुभेंदु बागची, सुशील यादव, त्रयंबक राव साटकर ‘अंबर’, जाविद हसन ‘भाईजान’, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, डॉ. इकबाल खान ‘तन्हा’ और नवेद रजा दुर्गवी.

काव्य पाठ में भाग लेने वाले सभी रचनाकारों को काव्य “गौरव सम्मान-2026” से सम्मानित किया गया.
मुख्य अतिथि रवि श्रीवास्तव ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि-

कविता पढ़ने में भी कलात्मकता होनी चाहिए. कविता को रुक-रुक कर पढ़ना चाहिए. ‘आरंभ’ ने यह अवसर दिया है और भी अवसर मिलेंगे. लिखते रहें. रवि श्रीवास्तव ने अपनी कुछ कविताओं का पाठ भी किया.
कविता पाठ पर संवाद चर्चा करते हुए डॉ. अंजन कुमार ने कहा कि-

अच्छी कविता लिखने के लिए हिंदी के महत्वपूर्ण वरिष्ठ और नए कवियों की कविताओं को पढ़ना बहुत जरुरी है. कविता कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक कहने की कला है. कविता अंततः कला है इसलिए यथार्थ या जीवन अनुभव को रचनात्मक रूप में अभिव्यक्ति करने की कला भी अर्जित करना जरूरी है. इसके साथ ही अपनी भाषा को स्मृद्ध करना भी आवश्यक है. यह सब सीखने और रचने के लिए निरंतर अध्ययन सबसे अधिक जरूरी है.
कैलाश जैन बरमेचा ने ‘आरंभ’ के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए अपनी बात कुछ यूं रखी-

‘आरंभ’ का उद्देश्य है- “आरंभ हो अंत न हो-चिंतन कभी कलांत न हो” यह एक ऐसी साहित्यिक पहल है, जो प्रगतिशील विचार, सृजनात्मक अभिव्यक्ति और वैचारिक संवाद को केंद्र में रखती है. ‘आरंभ’ का उद्देश्य साहित्य के माध्यम से समाज, समय और संवेदना के बीच सार्थक संवाद स्थापित करना है. साहित्य सेवा है, साधना है, जो अंतिम सांस तक निरंतर चलती रहती है. जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति लेखक, कवि, शायर हो, यदि आप अच्छे श्रोता हैं या पाठक हैं तो भी आप साहित्य को अपना योगदान दे रहे हैं. बरमेचा जी ने एक अच्छी घोषणा की. महाविद्यालय के विद्यार्थी ‘आरंभ’ की सदस्यता लेना चाहते हैं तो उन्हें 500रु. में वार्षिक सदस्यता दी जाएगी. इससे साल भर होने वाले कार्यक्रमों में उन्हें आमंत्रित किया जाएगा और वे ‘आरंभ’ की पत्रिका में अपनी रचनाएं भी प्रकाशित कर सकते हैं.
आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा ने अपने उदगार में बोले कि-

हमारी साहित्य संस्था ‘आरंभ’ का प्रारंभ इसी विश्वास एवं संकल्प के साथ किया गया है कि हम सब मिलकर इस अथाह सागर से कुछ बूंदे लेकर अपनी आत्मा को तृप्त करेंगे और समाज को एक नई दिशा प्रदान करेंगे.
पी जी नर्सिंग कॉलेज की प्राचार्या डॉ. रोजा प्रिंसी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कही कि-

हमें खुशी हुई कि ‘आरंभ’ साहित्य समिति ने राज्य स्तरीय काव्य पाठ के लिए हमारे कॉलेज को चुना. चर्चित कवियों के साथ हमारे कॉलेज के छात्राओं ने भी काव्य पाठ में हिस्सा लिया. इस तरह के आयोजन से बच्चों में साहित्य के प्रति रुचि आयेगी. मैं ‘आरंभ’ की आभारी हूँ.

👉 [बाएँ से] • ‘आरंभ’ के कोषाध्यक्ष कवि प्रकाशचंद्र मण्डल, कैलाश जैन बरमेचा, प्रदीप भट्टाचार्य, रवि श्रीवास्तव, डॉ. अंजन कुमार, डॉ. रजनी नेलसन, डॉ. रोजा प्रिंसी और ‘आरंभ’ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष कवि त्रयंबक राव साटकर ‘अंबर’[रवि श्रीवास्तव को शॉल, श्रीफल, मोमेंटो एवं पुष्पगुच्छ से सम्मानित किया ‘आरंभ’ के पदाधिकारी]

👉 [बाएँ से] • प्रदीप भट्टाचार्य, राकेश गुप्ता ‘रुसिया’, अनिता करडेकर, डॉ. महेशचंद्र शर्मा, डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’, रवि श्रीवास्तव, डॉ. अंजन कुमार, डॉ. रजनी नेलसन और डॉ. रोजा प्रिंसी

👉 [बाएँ से] • ‘आरंभ’ के आजीवन एवं संस्थापक सदस्य, ग़ज़लकार राकेश गुप्ता ‘रुसिया’, प्रदीप भट्टाचार्य, फरीदा शाहीन अंसारी, डॉ. महेशचंद्र शर्मा, डॉ. रोजा प्रिंसी, डॉ. अंजन कुमार, श्रीमती शेफाली भट्टाचार्य, कवयित्री मिताली श्रीवास्तव वर्मा और ‘आरंभ’ के प्रवक्ता,कवि जाविद हसन ‘भाईजान’[कार्यक्रम की अध्यक्षता थीं-डॉ. रोजा प्रिंसी, ‘आरंभ’ के पदाधिकारियों ने उनका शॉल, श्रीफल, पुष्प गुच्छ, मोमेंटो देकर सम्मानित किया]
अंत में मुख्य अतिथि रवि श्रीवास्तव, डॉ. अंजन कुमार और डॉ. रोजा प्रिंसी को शॉल, श्रीफल, पुष्पगुच्छ एवं ‘आरंभ’ मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया.

👉 [बाएँ से] • जाविद हसन ‘भाईजान’, प्रदीप भट्टाचार्य, प्रकाशचंद्र मण्डल, कैलाश जैन बरमेचा, डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’, शशि प्रभा गुप्ता, शेफाली भट्टाचार्य और राकेश गुप्ता ‘रुसिया’
इस अवसर पर ‘आरंभ’ के संस्थापक सदस्य छंद के लोकप्रिय कवि डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’ और कवयित्री शशि प्रभा गुप्ता के 47वीं वैवाहिक वर्षगांठ पर कैलाश जैन बरमेचा के अगुवाई में ‘आरंभ’ की तरफ से शॉल, श्रीफल एवं पुष्पगुच्छ देकर शुभकामनाएं दी गई.
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कुछ पढ़ी गई कविताओं की चंद लाइनें-


किसी के हाथ में मार्कशीट/किसी के हाथ में रिज्यूम है/आजकल हर इंसान बस एक ही/फाइल का हिस्सा है…
– भावना साहू
वह कभी सवाल नहीं थी/फिर भी दुनिया ने/उसके जवाब तय कर दिए/कैसे चले/कैसे बोले/कितने छोटे सपने देखे…
– कुमारी पावनी
फूल थी मैं/पराया आंगन मेरा, घर बना/जिस बेटी को पिता की शान कहते थे लोग/आज उन्हीं लोगों ने उसे उसका कर्जदार बनाया है/आखिर क्यों? इस समाज को दहेज की प्रथा चलाई है/क्यों, एक पिता को बेटी का कर्जदार बनाया है?…
– निक्की तिवारी
पर सबसे खास वो पल था/जो दिल में आज भी बसा है/जब मैं पहली बार हॉस्टल जाने निकली थी/अपनी ही दुनिया से जैसे थोड़ी दुर चली थी…
– डॉली सिन्हा
जो दिन-रात मरीजों की सेवा करती/वो कहलाती है नर्स/जो निरंतर काम करती/थकने का एहसास न करती/वो कहलाती है नर्स…
– आफ़सा बानो
नारी का घर/कहते हैं/नारी घर की शोभा है/नारी ही घर की शान है/फिर क्यों? उसका घर किसी और के नाम है/पर सच तो ये है दुनिया/नारी खुद एक घर होती है/उसके बिना अधूरा है जीवन/वो ही जीवन का आधार है…
– शिल्पी नंदी
कानून ने ये साफ ऐलान किया है/दहेज को गुनाह का नाम दिया है/धारा 498 A और 304 B देती है, सजा का अधिकार/फिर क्यों? नहीं रुकता दहेज का ये व्यापार…
– नूतन निराला
अभी तो मैंने ठाना है/जिंदगी में कुछ करके दिखाना है/मुश्किल राहों से गुजरना है/मंजिल तक पहुँच के दिखाना है…
– पूजा सोनवानी

👉 • जाविद हसन ‘भाईजान’ कविता पाठ करते हुए…

👉 • ‘आरंभ’ के प्रचार-प्रसार प्रमुख डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’ काव्य पाठ करते हुए…
ना जाने वो प्यार के नग़्में सुनाने क्यों नहीं आते/हमारे शहर में/आखिर परिंदे क्यों नहीं आते/हंसी भी नेक सीरत/खानादारी, डिग्रियाँ फिर भी/गरीबी में जवां बोरी के रिश्ते, क्यों नहीं आते…
– डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’
वो सबब खढ़ी दूरियाँ सोच के पछताती तो होगी/तन्हाई के आलम उसे/मेरी याद आती तो होगी/तपीस वक़्त गुजरे हैं/एक दूसरे के साथ हम/गुजरे लम्हों को याद कर/वो मुस्कुराती तो होगी…
– डॉ. इकबाल खान ‘तन्हा’
खाली हाथों में किस्मत तो नहीं होती है/मेहनतों से ही ये लकीरें बदल जाती है/तुम अगर ख़्वाब हकीकत में बदलना चाहो/रात की नींद भी आँखों से निकल जाती है…
– फरीदा शाहीन अंसारी

मैं नारी हूँ/तुम्हारी अर्धांगिनी/प्रतिदिन तुम्हारी आदेश का/पालनकरन को मैं/अपना धर्म समझती हूँ…
– प्रकाशचंद्र मण्डल
है शिकायतें हजार मगर सुनवाई न हुआ/वो जो शर्माए के सुर्ख रुखसार न हुआ/अंग पर चुनरिया/लगे हैं अंबर के सानी/जादू काम ना आया के कोई हैरां ना हुआ…
– शुभेन्दु बागची
आजकल मुझसे बहुत भूल होती है/लिफ़ाफ़े पर दूसरों का पता लिखने की जगह/अपना नाम-पता लिखकर/टिकिट लगा के पोस्ट कर आता हूँ…
– पल्लव चटर्जी

हमें अच्छा नहीं लगता तुम्हारा फ़ासला रखना/बिखरने की वजह तुम हो/तुमसे क्या गिला रखना/मिटाने दूरियाँ दिल की हजारों रास्ते यूँ तो/मगर होता नही हमसे/दोबारा हौसला रखना…
– राकेश गुप्ता ‘रुसिया’
शब्दों द्वारा कविता का सृजन संसार/इस भौतिक युग में/एक अमरत्व भाषा की/पहचान बनता है/शब्दों की लहर रूपी काव्य ने/इस देश को आजाद कराने में/महत्वपूर्ण किरदार निभाया/नव पीढ़ी को आगे लाने/पहचान बनाने का अति सुंदर कार्य/’आरंभ’ संस्था कर रही है/बधाईयाँ…
– डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’
घर सजाने में कहीं कोई कमी लगती है/दर-ओ-दीवार/यहाँ धूल जमीं लगती है/इस तरह निभाता नहीं रिश्ता बिल्कुल/जैसे बरसात में दीवाल नमी लगती है/मैंने जूडे में लगाए थे/बूफा के गजरे/अब कितावों वही मुरझा के दबी लगती है…
– सुशील यादव

👉 • सुप्रसिद्घ कवि शुभेन्दु बागची काव्य पाठ करते हुए…
कौन घटी इंसा काम पढ़े/लब पे रखना रसीले/इश्क भरा दिल, हो इंसा का/तब जा कहता बात सुरीले.
आलस छोड़ो, तुम काम करो/लाभ यही देगा, कल प्यारे/सीख शजर के भाती झुकना/जो समझा वो चोट न खाते…
– नवेद रज़ा दुर्गवी
वो लेखन के कर्णधारों/तुम्हें नमन, तुम्हें नमन/वो साहित्य के मर्मज्ञ सितारों, तुम्हें नमन, तुम्हें नमन… मन की गंगा अब हुई प्रवाहित है/करने सृजन समाज का मन समाहित है/हर दिल में तुम प्यार जगाओ/और खिला दो नया सुमन, नया सुमन/वो लेखन…
– त्रयंबक राव साटकर ‘अंबर’

क्यूँ हंसी सबकी थोड़ी मंद हो रही है/हर तरफ अजीब सी दुर्गंध हो रही है/काट गया बोटी/इंसान की इंसान ही/महाभारत की तैयारी आरंभ हो रही है…
– मिताली श्रीवास्तव वर्मा
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इस अति महत्वपूर्ण काव्य पाठ में ‘आरंभ’ के सभी कार्यकारिणी सदस्य और पी जी नर्सिंग कॉलेज के विद्यार्थी, टीचर स्टाफ,आमंत्रित प्रबुद्धजन उपस्थित थे-





श्रीमती शेफाली भट्टाचार्य, शौकत इकबाल, विपुल सेन, दिनेश कुमार मिश्रा, जसवंत कुमार मंडावी, जितेंद्र कुमार पटेल श्रीमिनी पिल्लाई, सीमा संतोष, प्रेरणा बाघ, अपर्णा मोहतेवार, श्रीमती रोमा, श्रीमती ऐश्वर्या, सुनील कुमार फड़के, पिलेश कुमार सिंह, स्नेहा सिंह और कु.आस्ना सिंह.

इस अवसर पर महाविद्यालय में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग से प्रकाशित पुस्तकों की पुस्तक प्रदर्शनी भी रखी गई थी. इसके संयोजक मोहला-मानपुर से ‘आरंभ’ के संस्थापक सदस्य डॉ. इकबाल खान ‘तन्हा’ थे. ‘तन्हा’ जी ‘छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग’ के सदस्य हैं.
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काव्य पाठ करने वाले सभी रचनाकारों को ‘आरंभ’ की तरफ से ‘काव्य गौरव सम्मान- 2026’ से सम्मानित किया गया-

👉 • पी जी नर्सिंग कॉलेज का प्रमाण पत्र प्राचार्या डॉ. रोजा प्रिंसी को दिया गया

👉 • ‘आरंभ’ के प्रवक्ता जाविद हसन ‘भाईजान’ को कविता पाठ के लिए ‘काव्य गौरव सम्मान- 2026’ से नवाजा गया

👉 • पी जी नर्सिंग कॉलेज की प्रतिभागी छात्राओं को प्रमाण पत्र देते हुए अतिथि

👉 • ‘आरंभ’ की महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्षा अनिता करडेकर को काव्य गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया

👉 • ‘आरंभ’ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष त्रयंबक राव साटकर ‘अंबर’ को काव्य गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया

👉 • कुशल संचालन के लिए ‘आरंभ’ की महासचिव नूरुस्सबाह ‘सबा’ को सम्मानित किया गया

👉 • ‘आरंभ’ के आजीवन सदस्य राकेश गुप्ता ‘रुसिया’ को काव्य गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया

👉 • कवि शुभेंदु बागची को काव्य गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया

👉 • ‘आरंभ’ के कोषाध्यक्ष प्रकाशचंद्र मण्डल को कविता पाठ के लिए काव्य गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया

👉 • ‘आरंभ’ की सदस्य मिताली श्रीवास्तव वर्मा को काव्य गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया

👉 • सुशील यादव को काव्य गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया

👉 • डॉ. इकबाल खान ‘तन्हा’ को काव्य गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया

👉 • डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’ को काव्य गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया

👉 • शायर नवेद रज़ा दुर्गवी को काव्य गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया

👉 • ‘आरंभ’ के प्रचार-प्रसार प्रमुख डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’ को काव्य गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया
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आभार व्यक्त करते हुए ‘आरंभ’ की कार्यकारी अध्यक्षा डॉ. रजनी नेलसन ने कहा कि-

‘आरंभ’ पी जी नर्सिंग कॉलेज का दिल से आभार व्यक्त करती है. प्राचार्या डॉ. रोजा प्रिंसी, उप प्राचार्या डॉ. जी. हेमावती और सभी कविता पाठ करने वाले वि विद्यार्थियों का, जिनके बिना यह आयोजन संभव नहीं होता. आने वाले समय में ऐसे आयोजन ‘आरंभ’ की तरफ से होते रहेंगे. ‘आरंभ’ का उद्देश्य है साहित्य को समाज और आम लोगों से जोड़ना. कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, आरंभ की पूरी टीम के प्रति आभार.
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आयोजन की कुछ और झलकियाँ-

👉 • पी जी नर्सिंग कॉलेज और ‘आरंभ’ की टीम

👉 • ‘आरंभ’ के मुख्य सलाहकार डॉ. महेशचंद्र शर्मा ने अपनी पुस्तक ‘गागर में सागर’ और ‘साहित्य और समाज’ पी जी नर्सिंग कॉलेज की प्राचार्या डॉ. रोजा प्रिंसी को भेंट किए

👉 • कवि सुशील यादव ने अपनी ग़ज़ल संग्रह ‘दिल की कलम से’ की प्रति ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ की प्रधान संपादक शेफाली भट्टाचार्य को सादर भेंट करते हुए…

👉 • आयोजन के संदर्भ में कॉलेज की छात्रा शिल्पी नंदी अपनी बात रखी…

👉 • पूरे कार्यक्रम की फोटोग्राफी की सुनील कुमार फड़के. ‘आरंभ’ के मुख्य संरक्षक कैलाश जैन बरमेचा ने पुष्प गुच्छ से सम्मानित किया.

👉 • कॉलेज की छात्राओं के साथ ‘आरंभ’ की महासचिव नूरुस्सबाह ‘सबा’





[ • रिपोर्ट- जाविद हसन ‘भाईजान’ : फोटो क्लिक- सुनील कुमार फड़के, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’ ]
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chhattisgarhaaspaas
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