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कृति समीक्षा : गीत ग़ज़ल अऊ कविता के फुलवारी ‘छतनार’- पोखनलाल जायसवाल

6 days ago
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👉 • काव्य संग्रह ‘छतनार’
कवि- राजकुमार चौधरी
प्रकाशक- डॉ. अभिलाषा बेहार, सचिव- छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग

‘छतनार’ काव्य संग्रह राजकुमार चौधरी ‘रौना’ के चउथइया किताब आय। जेन हर छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग डहन ले बछर 2025 मं प्रकाशित करे गे हे। साहित्यिक दृष्टि ले कृति ऊपर गोठ-बात करना सही रहिथे। पर कृतिकार के जिनगी ला झाॅंकत रचना संसार मं उतरे के अपन एक अलगे आनंद हे। मजा हे। भाव समझे के सुभिता घलव।
राजकुमार चौधरी ‘रौना’ छत्तीसगढ़ी साहित्य बर एक समर्पित नाम हे। जौन मन तीन कोरी ले आगर सावन देख चुके हें। उन ला ए सावन मन कभू हरियर होय के सुख नइ पहुॅंचाइन। उॅंकर जिनगी मं सावन हा हरदम पूरा बन के आइस। जब आवय, तब ओकर बर दुख-पीरा अउ अभाव के काप छोड़ चल देवय। उन कतको जतन करिन, उदिम करिन, फेर उॅंकर किस्मत उन ला कभू संग नइ दिस। उन बड़ मिहनती हें, करम करे ले कभू नि ढेरियाइन। बड़ फजर ले सुरुज नरायन ल परघावत अपन बुता मं लग जथें अउ बेरा आछत ले भिंड़े रहिथें। हाथ मं कतको रेखा हें, लकीर हें। फेर फ़कीर के लकीर। भाग के रेखा कभू चमकिस नहीं। भाग के जब्बर रेखा जइसे उॅंकर लाखा मं नइ परिस। तभो जिनगी ले हारिन नइ, न घबराइन। उन ल ओकर (जिनगी) ले कोनो शिकायत नइ होइस। संतोषी सुभाव के रौना हरदम खुश रहिथें। जेन हे, तेन मं खुश रहना, उॅंकर सब ले बड़े खासियत आय। कखरो ले न जलना अउ न कोनो कॉम्पीटिशन। बड़े बने के कोनो सउॅंक नहीं। …ससन भर अगास मं उड़े पाछू आना तो भुइॅंया च म हे। बस अपन बाॅंटा के बुता मं लगे रहिथें। अपन व्यंग्य अउ कविता मन ले उन आजो छत्तीसगढ़ी साहित्य के बढ़वार मं चेतलगहा बुता कर हावॅंय।
‘छतनार’ उही उदिम के एक ठिन चिन्हारी आय। छतनार के ए फुलवारी मं गीत, छंद, ग़ज़ल, मुक्तक अउ नवा कविता के रकम-रकम के फूल फूले हें। जेमा जिनगी के रंग हे। माटी के ममहासी हे। बेरा के व्यथा हे। प्रगतिशीलता हे। जागरण के आरो हे, संदेश हे। मया-पीरा के कथा घलाव हे। प्रकृति के सुघराई हे।
मनसे जब महतारी के गोदी म रहिथे, तौ ओकर मन लोरी सुन के बहल जथे। कहे के मतलब हे कि गीत ले हमर जुराव ननपन ले रहिथे। गीत आनंद देथे, जिनगी मं रस घोरथे। चाहे गीत लोरी, सोहर, बिहाव, ददरिया, करमा, जइसन कोनो भी गीत होवय। ए संग्रह के पहिली खंड गीत ले सजे हावे। रकम-रकम के 31 गीत हें। जेन म प्रकृति चित्रण के संग मया-पिरीत के गीत हे। जेन मं मिलन के सुग्घर सुर मिलथे त बिरहा के पीरा घलाव।
पहलइया गीत मं मैना ले मुॅंहाचाही करत रौना लिखथें-
जेन करे जंगल अजार
ओ तो पाही दुख अपार
कर ले भुॅंइया के सिंगार मैना मीठ-मीठ गा ले
तोर भाखा हवे मज़ेदार मैना….

सिरतो तो हरे कि जब जंगल उजर जही त दुख-पीरा के पूरा आही। जिनगी संकट मं पर जही। खाड़ी मं युद्ध के चलत कहूॅं तेल नि आही/नइ मिलही त का होही, कल्पना कर सकत हन। जेन हम ला कॅंपा देथे। जंगल के रहे ले जम्मो सुख हे। बिन जंगल के जिनगी के जम्मो रंग फीका हे। फेर समझत कहाॅं हन? बस विकास के सरग निसैनी मं चढ़े जात हन। सरग छुआही कि नहीं एकर ठिकाना नइ हे। काबर कि मन पंछी उड़े ले नि छोड़य।

दूसर कोती जंगल मं एक डर हे। जेहर रोज रोवाथे। नक्सली मन के करतूत ले काकर अंतस् रोवत नइ होही। बेकसूर अउ आम आदमी के लहू ले रॅंगत भुइॅंया के पीरा ला रौना लिखथें-

रोज़ हमर धरती लाले लाल होवथे।
नक्सल के मारे माटी, लाले लाल होवथे।

ए पीरा के बादर कब छटही कोन जनी। इही मेर ओ गोहार लगाथे कि ‘वो दिन कौने दिन आही’
ए गीत मं विकास के अगोरा मं हमर स्वाभिमान के गिरवी धराय के पीरा हावय। मन मं इही भरोसा राखे कि कोनो दिन हमरो आही। इही सपना देखत लिखथें-

खान खदानों धन दोगानी उहिच मन पोगरावत हें
तुॅंहरो ठेंगा फरसा भाला धरे-धरे भोथरावत हें

मुड़ी अपन गड़ियाना छोड़, चेथी ला खजुवाना छोड़
अपने छाती ला तनियाही रे….

हमर इहाॅं उवत बेरा के पैलगी करे के चलन हे। धरती मं जिनगी सुरुज के वरदान आय, काबर कि ओकरे ऊर्जा ले ये दुनिया संचालित हे। सुरुज ला लेके ‘रौना’ के लिखे मानवीकरण अलंकार के एक उदाहरण आप मन के पढ़े बर रखत हॅंव, जेन मं आशा के एक किरण हमर घर पहुना बन के रोज आथे। सुख सकरात लाथे।

पहिली किरन सुरुज देव के, भाॅंड़ी चढ़ के आवत हे।
आस जगावत
नवा किसम के, सुख सुमता बगरावत हे।

‘ये पिंजरा के पोसे सुवना’ विरह के गीत आय। फेर ए गीत मं छायावादी गीत के ममहासी हे। दर्शन हे। आत्मा अउ परमात्मा के बीच संवाद हे।

सतरंगी कविता (कविता खंड) मं गर्मी अउ बरसात के सुग्घर चित्रण हे। बेटी कविता के प्रवाह, भाव अउ शिल्प अतेक बढ़िया हे कि पाठक गरीब अउ मिहनतकश बाप के अंतस् के पीरा संग अगाध मया के सगरी ले तर-बतर होय बिगन रहे नइ सके। आखिरी पद देखिहौ-

खाई लेके खाबे कहिके/ अठन्नी दे मनाये हॅंव/ पेट बिकाली हवे जरूरी/ लकर-धकर तब आये हॅंव/ वो मोर मया के झॅंपली ए/ प्यार के संदूक पेटी ए/वो मोर मयारू बेटी ए।

‘रेला के झाला’ कविता प्रतीकात्मकता रूप मं मनखे के जीवन के संघर्ष ला रेखांकित करे मं सफल हे। रेला/रेरवा/बया/दर्जिन पक्षी मानव के प्रतीक आय। कविता मं जीवंतता हे।

साहित्य, संस्कार अउ संस्कृति के पोषक आय। फेर इही साहित्य समाज बर सचेतक के भूमिका अदा करथे। समाज मं व्याप्त विसंगति, विद्रुपता के संग पाखंड अउ आडंबर के विरुद्ध मुखरित हो के समाज ला एक दिशा बोध कराथे। रौना के लेखनी समाज मं व्याप्त हर कुरीति अउ विसंगति ऊपर चलथे।
देश धर्म ला ताक मं रख आपस मं जात-धरम के नाॅंव ले लड़इया मन ऊपर उॅंकर गुस्सा देखव-

रोजे झगरा जात धरम के, मंदिर मस्जिद माथा फोर।
सूते जठना सिसकी पारे, देश धरम के कनिहा टोर।। (पृ. 59)

बिम्ब अउ प्रतीक विधान संग्रह ला नवा उॅंचास देथें। भाषाई दृष्टि ले शब्द चयन लाज़वाब हे। ध्वन्यात्मक अउ जोड़ा शब्द (युग्म) मन संग्रह के सुघरई बढ़ाथें। हाना-मुहावरा मन के प्रयोग मनभावन हे। गीत कविता ला नवा उॅंचास देथें। अलंकार के बिगन काव्य रचना संभवे नइ हे। एकरे सेती अलंकार के गोठ-बात करना ज़रूरी नइ समझत हॅंव। गीत मन मं माधुर्यता हे। शृंगार के संग सामाजिक सरोकार घलाव हे।

ग़ज़ल मं व्यंजना अउ व्यंग्य दूनो के पुट मिलथे। ग़ज़ल मन बह्र मं लिखे गे हें, ग़ज़ल के कहन उॅंकर ग़ज़ल संग्रह ‘पाॅंखी काटे जाही’ के तुलना मं इक्कीस हे। कहन अउ बुनावट मं कोनो समझौता नइ दिखिस। उॅंकर ग़ज़ल पटरी मं दौड़े ला धर लेहे।
जाॅंगर टोर कमइया मजदूर अउ किसान ला समर्पित एक ग़ज़ल के मतला अउ एक शेर आप मन बर बतौर नज़राना पेश करत हॅंव-

हवा घाम पानी म जाॅंगर छरे हन।
तभे भात रोटी के सथरा धरे हन।

सधे ना किसानी करम हा सहज मा
खपाके बदन चाम करिया करे हन। (पृ.96)

व्यवस्था मं बाधा परत मन ला ताना मारत उन शेर कहिथें

झूठ लबरा सियानी करे देश मा
दोगला ला न तो बातबानी हवे। (पृ.92)

मन के करिया मनखे ऊपर उॅंकर शब्द बाण देखव

बैर भरे हे जेकर भीतर
भूॅंजत हें वो मन दाॅंवा ढिल।

‘मुक्तक रौना के’ खंड मं उॅंकर 47 मुक्तक शामिल हें। जौन मन प्रभावी हें। भाव पक्ष अतेक प्रबल हे के पाठक पढ़त खानी एक नवा दुनिया मं विचरे लगथे। चित्रण गज़ब के हे।

बीपत के ऑंसू ला हम पीये बर सीखे हन।
घाम-छाॅंव मा जिनगी ला जीये बर सीखे हन।
झन देखव रे तुम तन के तुनहा ओनहा ला,
हम तो फटहा मन हिरदे ला सीये बर सीखे हन।

नता-गोता, मनसे, अउ घर-परिवार के नैतिक मूल्य मं गिरावट ऊपर उॅंकर मन के पीरा ए मुक्तक मं झलकथे-

छप्पर छानी घलो बदलगे जेमा बरखा घाम सहन।
धरे कटारी वो किंजरत हे जेला भाई राम कहन।
बाॅंटे भाई परोसी होगे परछी मा नेंग निभाथे
बदल गये घर के परिभाषा जेला चारों धाम कहन। (पृ.90)

मृत्यु ए संसार के आखरी सच आय, फेर माया के टोपा पहिने मनखे ले उन सवाल पूछथें-

छूट जही इहचे सबो गठरी जबर जैजाद के।
छोड़ दे अभिमान तन के शान ला औलाद के।
काल जब सोरियाही तब कहाॅं तैं भागबे
लेगही मरघट मं रौना चार संगी लाद के। (पृ.89)

ऊपर के ए मुक्तक मं जिनगी के दर्शन हे, सच्चाई हे।
रौना छंद अउ ग़ज़ल के जानकार हें, मुक्तक बढ़िया लिखथें। मुक्तक छंद या ग़ज़ल के शिल्प मं होथे। अइसन मं कुछ मुक्तक मन मं शिल्पगत सुधार के ज़रूरत हे। जेन ला उन कर सकथें। अवइया संस्करण मं ए कसावट दिखही ए आशा करत हॅंव।

लेखन मं समय के संग प्रगतिशीलता दिखना चाही। एके ढाॅंचा/खाॅंचा/पटरी अउ कथानक मं चले ले नीरसता आथे। इही ला सरेखत रौना एक सवैया लिखथें-

कतका दिन ले बड़ गात रहिबे रखिया मुनगा बर गीत सखा।
भरमार लिखे हस देव मया जस तीज तिहार फलीत सखा।
बितगे जुग बात नवा कर ले हित मान जगे नव रीत सखा।
लिख मानवता जग व्यापकता रस राग जिये धर पगीत सखा।

तुलसी दास जी मन अपन लेखन ल स्वांत: सुखाय बताय रहिन। आजो बहुत झन उही सुख के अनभो करथें अउ लिखथें। रौना घलव अपन मन के भाव ला लेखन मं उतारे के फकत एक उदिम कहे हे। उॅंकर ए उदिम ला नमन करत हुए उॅंकरे लिखे मुक्तक उन ला समर्पित करत हॅंव –
पेड़ पथरा मा फूल पान चढ़ा लेथन हम
उथली तरिया मा डूबकी लगा लेथन हम
का लिख पाबो हम गीत पोथी रचना ला
कागज करिया करके मन मड़ा लेथन हम।

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग डहर ले प्रकाशित ए कृति के मुखपृष्ठ आकर्षक हे, आयोग डहर ले प्रकाशन के ए सुविधा रचनाकार ला प्रोत्साहित करथे। ‘छतनार’ मं बहुत अकन वर्तनी त्रुटि हे। जेकर ले आयोग के साख दाॅंव मं लगथे। छवि खराब होथे। आयोग डहर ले छपे किताब मन मं वर्तनी त्रुटि मिलना भाषा बर काम करइया आयोग कतेक गंभीर हे, ए सवाल खड़ा करथे। ए त्रुटि मन ले छुटकारा पाए बर प्रकाशन विभाग ला छत्तीसगढ़ी के जानकार ले प्रकाशन के पहिली दुबारा जाॅंच कराना चाही।

• समीक्षक संपर्क-
• 99772 52202

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🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
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▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
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▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
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▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
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25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

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🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

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🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

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🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

⏩ 12 अगस्त-  भोजली पर्व पर विशेष
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⏩ 12 अगस्त- भोजली पर्व पर विशेष

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■पर्यावरण दिवस पर चिंतन : संजय मिश्रा [ शिवनाथ बचाओ आंदोलन के संयोजक एवं जनसुनवाई फाउंडेशन के छत्तीसगढ़ प्रमुख ]

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■पर्यावरण दिवस पर विशेष लघुकथा : महेश राजा.

राजनीति न्यूज़

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

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■छत्तीसगढ़ :

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भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

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भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
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स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

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छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

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राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
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प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

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ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

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अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
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हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

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पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन