- Home
- Chhattisgarh
- साकेत साहित्य परिषद् के तत्वावधान में छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के पुरोधा खुमानलाल साव पर केंद्रित कुबेर सिंह साहू द्वारा संपादित पुस्तक ‘स्मृतियों के सुवासित पुष्प’ की समीक्षा हुई
साकेत साहित्य परिषद् के तत्वावधान में छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के पुरोधा खुमानलाल साव पर केंद्रित कुबेर सिंह साहू द्वारा संपादित पुस्तक ‘स्मृतियों के सुवासित पुष्प’ की समीक्षा हुई

• छत्तीसगढ़ आसपास
• राजनांदगांव
संस्कारधानी राजनांदगांव की सक्रिय साहित्य संस्था साकेत साहित्य परिषद सुरगी द्वारा 31 मई, रविवार को ग्राम सुंदरा में संगीत के पुरोधा खुमानलाल साव पर केंद्रित वरिष्ठ साहित्यकार कुबेर सिंह साहू द्वारा संपादित पुस्तक “स्मृतियों के सुवासित पुष्प ” पर साहित्यकारों द्वारा समीक्षात्मक बौद्धिक परिचर्चा कर्मा सामुदायिक भवन सुंदरा में संपन्न हुई। लोक कलाकार भोलाराम साहू एवं युवा कवि रूपल साहू के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में वैचारिक सत्र के मुख्य अतिथि डा बलदाऊराम साहू वरिष्ठ साहित्यकार दुर्ग एवं अध्यक्षता शिवबालक दास साहू सेवानिवृत्त प्राचार्य , दुर्ग ने की । विशिष्ट अतिथि के रूप में अखिलेश्वर प्रसाद मिश्रा ,हिपेंद्र कुमार साहू सरपंच सुंदरा, प्रभात तिवारी, महेंद्र बघेल मधु, अरविंद कुमार लाल,अलख राम यादव , हर्षा देवांगन उपस्थित थे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉक्टर बलदेव राम साहू ने स्मृति के सुवासित पुष्प की सराहना करते हुए कहा कि खुमान लाल साव की संगीत साधना में शास्त्रीय पक्ष भी बेहद मजबूत रहा। खुमान संगीत की मधुरता ही इसका प्रमाण है तथा जनमानस में इसका प्रभाव है।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शिव बालक दास साहू ने कहा कि संगीत के प्रति उनका समर्पण और अनुशासन ने खुमान सर को छत्तीसगढ़ी लोक संगीत की दुनिया में अमर कर दिया।

इस अवसर पर साकेत साहित्य परिषद सुरगी के अध्यक्ष ओमप्रकाश साहू “अंकुर” ने स्वागत भाषण के दौरान कहा कि वरिष्ठ साहित्यकार कुबेर साहू द्वारा संपादित पुस्तक “स्मृतियों के सुवासित पुष्प ” एक बड़ी उपलब्धि है। खुमानलाल साव की संगीत साधना और व्यक्तित्व का यह उम्दा संकलन है। दाऊ रामचंद्र देशमुख के बाद खुमानलाल साव ने चंदैनी गोंदा के माध्यम से छत्तीसगढ़ी लोक संगीत को नयी उंचाई दी। युवा कवि रुपल साहू ने आधार वक्तव्य में कहा कि लोक संगीत के पुरोधा खुमान सर ने नयी पीढ़ी को लगातार अपने साथ जोड़कर उन कलाकारों को आगे बढ़ने के लिए अवसर प्रदान किया। लोक संगीत के संवर्धन में उनका योगदान अतुलनीय है।
समरस साहित्य संस्थान छत्तीसगढ़ इकाई के प्रांताध्यक्ष अखिलेश्वर प्रसाद मिश्रा “अकाट्य” ने कहा कि खुमानलाल साव का व्यक्तित्व अनुशासन प्रिय रहा है जिससे नयी पीढ़ी को प्रेरणा लेकर छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और अस्मिता के लिए काम करना चाहिए।
शिवनाथ साहित्य धारा के अध्यक्ष महेंद्र कुमार बघेल “मधु” ने अपने उद्बबोधन में बताया कि ” स्मृतियों के सुवासित पुष्प ” खुमानलाल साव के व्यक्तित्व, कला और संगीत साधना को जानने परखने प्रेरणास्पद पुस्तक है उन्होंने समीक्षा करते हुए कहा कि खुमान सर के पारिवारिक पृष्ठभूमि की वृहद जानकारी और संबंधित आलेख की कमी को हमें पूरा करने का प्रयास करना था। कार्यक्रम का संचालन करते हुए साकेत साहित्य परिषद सुरगी के पूर्व अध्यक्ष लखनलाल साहू ” लहर ” ने स्मृति के सुवासित पुष्प को पठनीय और संग्रहणीय कृति बताया। कला यात्रा के दौरान, कई चुनौतियों के बाद भी खुमान सर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता और लोक संगीत के लिए जीवन पर्यंत काम करते रहे। समीक्षा गोष्ठी का संचालन लखन लाल साहू लहर एवं आभार व्यक्त कार्यक्रम के संयोजक,लोक कलाकार भोला राम साहू ने किया।
कवि गोष्ठी में रचनाकारों ने विविधता पूर्ण रचनाएं पढ़ी-

द्वितीय सत्र में सरस कवि गोष्ठी का आयोजन अखिलेश्वर प्रसाद मिश्रा वरिष्ठ साहित्यकार की अध्यक्षता एवं प्यारे लाल देशमुख निकुम,देवजोशी गुलाब बालोद,सुरेन्द्र कुमार साहू सुंदरा, विनोद कुमार साहू सुंदरा, देवेश देवांगन राजनांदगांव के विशिष्ट आतिथ्य में हुआ। काव्य पाठ करने वालों में राज कुमार चौधरी रौना, प्रभात तिवारी,डामन लाल डोंगरे,आनंद राम सार्वा,गुमान सिंह साहू, नंद किशोर साव नीरव, भोला राम साहू,पवन यादव पहुना, फकीर प्रसाद साहू, रूपल साहू,डोहर दास साहू, चंचल साहू, बलराम सिन्हा, धनंजय साहू दौना,एस कुमार साहू मोखला,अरविंद कुमार लाल, अलख राम यादव,ओमप्रकाश साहू अंकुर,लखन लाल साहू लहर, हर्षा देवांगन शामिल है। कवि गोष्ठी का संचालन परिषद के उपाध्यक्ष पवन यादव पहुना एवं आभार व्यक्त परिषद के सचिव राज कुमार चौधरी “रौना” ने किया।इस अवसर पर सुधी श्रोता के रूप में राजेंद्र कुमार देवांगन, भूषण यादव, गैंद लाल साहू,रामस्वरूप साहू,संतराम निर्मलकर, मीना साहू, हेमू साहू,राधा यादव, चुरामन लाल साहू, राजू, हरि राम सिन्हा, राजेन्द्र गोस्वामी सहित बड़ी संख्या काव्यरसिक उपस्थित थे।
🟥🟥🟥
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)