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■स्वरांजलि : स्वर यात्रा का मंगल राग- लता मंगेश्कर.

4 years ago
606

♀ भारत रत्न लता मंगेशकर.
♀ मिथिलेश रॉय
[ शहडोल, मध्यप्रदेश ]

लता मंगेशकर ख्यातिप्राप्त पार्श्वगायिका हैं जिन्होंने अपने गायकी के हुनर व अंदाज़ में अनेक सदाबहार फिल्मी और गैर-फिल्मी गीत गाए हैं। दुनिया भर की सीमाओं के बांध को तोड़कर कर उनके गाये गीतों ने बड़ी सहजता से अनेक लोगों के अंतर्मन को छुआ, फिर चाहे सुदूर गांवों में रहने वाले स्त्री पुरुष बूढ़े, बच्चे किशोर, किशोरियों, बच्चे हो, उनके प्रशंसक हर आयु वर्ग और समझ के लोग है। अपने जीवन मे किवदंती सी बनी रही, हमारे आसपास उनके अनेक किस्से सुनते सुनाते लोग मिल जाते है। अपनी सुरीली आवाज, चंचल स्वरलहरियों और गाने में अभिनय को जिस तरह से उन्होंने एक साथ पिरोया जो अपने आप मे किसी चमत्कार से कम नही हैं,लता जी ने अपने साथ कि तमाम मशहूर अभिनेत्रियों को हूबहू उनके अंतर्मन की भाषा और अंदाज दिया, पर्दे पर उनके अभिनय को देखकर सहज यह अनुमान लगाना कठिन था कि यह आवाज़ उनकी नही है। लता ने हजार से ज्यादा हिंदी फिल्मों में गीत गाए हैं। उन्होंने हिंदी, मराठी और बंगाली सहित कई भाषाओं में 30 हजार से अधिक गीत गाए।

जन्म-

लता मंगेशकर के पिता शहर -शहर में घूम घूम कर नाटक करते थे इसी यात्रा के दौरान उनका एक पड़ाव इंदौर में रहा, इसी दौरान लता जी का जन्म 28 सितम्बर 1929 को इन्दौर (मध्यप्रदेश) में हुआ। मूलतः लता जी मराठी थी, उनके बचपन के कुछ दिन महाराष्ट्र में ही बीता,।उनके पिता नाम दीनानाथ मंगेशकर और शेवंती था। लता के पिता ,एक मराठी संगीतकार, शास्त्रीय गायक और थिएटर एक्टर थे उनके पिता मराठी जबकि मां गुजराती थीं। जो उनकी दूसरी पत्नी थी।

लता का नाम व उपनाम मंगेशकर-

लता जी के परिवार का उपनाम हरदिकर था, पर जैसा कि बताया जाता है, की उनके पिता दीनानाथ, जी गोआ के मंगेशी गाँव के रहने वाले थे, अतः उन्होंने अपने नाम के साथ इस गांव का नाम जोड़कर अपना पूरा नाम दीनानाथ मंगेशकर लिखते थे जिसको बाद में परिवार में सभी ने माना व अपने नाम के साथ जोड़ लिया। ऐसा ही रोचक किस्सा लता जी के नाम को लेकर भी है। असल मे लता जी का जन्म के समय नाम हेमा रखा गया था। लेकिन लता जी ने सन 1942 में भावबन्धन नाम के नाटक जो उनके पिता द्वारा निर्देशित था में काम किया। जिस नाटक की प्रमुख किरदार का नाम लतिका था। बाद में इसी नाम के आधार पर उनके पिता ने उन्हें लता नाम दिया । आगे चलकर में इसी नाम से वे मशहूर हुई।
लता जी के बाद मीना, आशा, उषा और हृदयनाथ का जन्म हुआ।

संगीत शिक्षा –

लता जी को गीत-संगीत की शिक्षा उनके घर पर ही उनके पिता से प्राप्त हुई,कला का माहौल मिला और बचपन से वह इस ओर आकर्षित हुईं। संगीत की शिक्षा को लेकर एक वाकया यह भी है जिसे लता जी अपने साक्षात्कार में बताती रहीं है। एक बार कोई उनके पिता शागिर्द उनके घर पर उनके पिता से गायन सीखते हुए बार बार गलत गा रहा था लता वहीं पास बैठे खेल रही थी, उन्होने उस शागिर्द को कहा कि वह गलत सुर लगा रहा है। उनके पिता ने लता के सुर कर प्रति इस समझ से अत्यंत खुश हुएऔर लता को विधिवत संगीत शिक्षा देने लगे, इस तरह लता पांच वर्ष की छोटी सी उम्र से ही संगीत का पाठ पढ़ने लगी। उनके पिता ने उन्हें संगीत की पहली सिख देते हुए कहा था – जिस तरह कविता में शब्दों का अर्थ होता है वैसे ही गीत में सुरों का अर्थ होता है। गाते समय दोनो अर्थ उभरकर आना चाहिए। लता ने उनकी दी हुई इस सिख को हमेशा के लिए अपने जीवन मे आत्मसात किया, और गाती रहीं। अपने पिता की देखरेख में उन्होंने ने कुछ नाटकों में भी अभिनय किया। किन्तु अभिनय में उनकी रुचि ना होने के कारण संगीत में ही उन्होंने अपना कैरियर चुना।

 पिता की मृत्यु-

लता मंगेशकर के पिता दीनानाथ की मृत्यु 1942 में हृदयाघात के कारण हो गई, उस समय घर माली हालत ठीक नही थी। पिता की मृत्यु से परिवार पर मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा। उस समय लता मात्र 13 वर्ष की थी। घर में बच्चों में सबसे बड़ी लता ही थी अतः सारी जिम्मेदारी उन्ही के ऊपर आ पड़ी। मुसीबत की इस घड़ी पिता के मित्र व नवयुग चित्रपट मूवी कंपनी के मालिक मास्टर विनायक, कॉफी मददगार साबित हुये, उन्होंने ने लता को अपनी कंपनी में गाने का अवसर देना जारी रखा जिससे परिवार की कुछ आर्थिक मदद होती रही। पैसों की तंगी के कारण लता जी को अपने शुरुआती दिनों में कई मराठी फिल्मो में अभिनय भी करना पड़ा । मंगला गौरी, माझे बल गजभाउ बड़ी मां जीवन यात्रा जैसे नवयुग चित्रपट कंपनी की फिल्मों में छोटी- मोटी भूमिकाएं अदा करनी पड़ी। सबसे पहला गाना लता जी ने सदाशिव राव की एक मराठी फिल्म के लिए एक गाना गाया। परन्तु उनके पिता जी नाराजगी के कारण फ़िल्म के फाइनल कट में उस गाने को हटा दिया गया। बाद में मंगला गौर में उन्होंने ने गाया। साथ ही मराठी फिल्म गजाभाउ में उन्होंने सबसे पहले एक हिंदी गाना गाया। एक तरह से लता को गायिका व अभिनेत्री के रूप में कैरियर बनाने का सुअवसर विनायक मास्टर जी ने प्रदान किया।

मुंबई आगमन-

इसी बीच सन 1945 में नवयुग चित्रपट कम्पनी लेकर मास्टर विनायक मुंबई आ गए । फलतः लता को भी मुंबई आना पड़ा। यही उन्होंने उस्ताद अमन अली खान जो भिंडीबाजार घराना के उस्ताद थे से भारतीय शास्त्रीय संगीत शिक्षा-दीक्षा लेना प्रारंभ किया। उन्ही कि मदद से लता को फिल्म बड़ी मां ,में एक भजन ‘माता तेरे चरणों (1946) में गाया। उन्होंने बतौर गायिका फ़िल्म ‘आपकी सेवा में’ गीत ‘पा लागूं कर जोरी’ गाया जिसने लोगों को बढ़ा भाया इसके साथ ही संगीत जगत में उनके नाम की सुगबुगाहट होने लगी । लेकिन इधर मास्टर विनायक और उस्ताद, अमन अली खान के निधन से लता को बड़ा झटका लगा। किन्तु तभी गुलाम हैदर जैसे संगीतकार का उन्हें सानिध्य प्राप्त हुआ। उनकी गायिकी परवान चढ़ने लगी। किन्तु तभी एक वाकये ने लता और गुलाम हैदर के मन को गहरे तक झकझोर दिया। हुआ यूं कि लता की गायिकी से खुश होकर उनके मार्गदर्शक हैदर अली ने बड़े उमंग में आकर लता को मशहूर फिल्म ‘शहीद’ के निर्माता शशधर मुखर्जी से मिलवाया। किन्तु शशधर मुखर्जी ने लता को गाने गवाने से यह कहकर इन्कार कर दिया कि उनकी आवाज़ पतली है। हैदर अली इस बात से कॉफी नाराज हो गए। और उन्होंने लता के लिए भविष्यवाणी की देख लेना एक दिन वो आयेगा। जब संगीतकार लता के पास चलकर आएंगे। और उनकी यह बात आगे चलकर शत प्रतिशत सच साबित हुई।

लता की चुनौतियां-

लता ने जब फ़िल्म गायन के क्षेत्र में कदम रखा उस समय उनके सामने कीदिग्गज गायिका पार्श्वगायन के क्षेत्र में उनके सामने चुनौती बन कर खड़ी थी। नूरजहां, शमशाद बेगम, सुरैया, राजकुमारी, जैसी माहीर गायिकाओं की गायन शैली की तूती बोलती थी। लता ने शुरुआत में इन्ही का अनुसरण किया किन्तु जल्द ही वे उनके प्रभाव से बाहर आकर उन्होंने हिंदी और उर्दू के शब्दों के उच्चारण उच्चारण पर अपनी पकड़ मजबूत की। साथ ही साथ उस जमाने की सभी सफल अभिनेत्रियों के हावभाव को बारीकी से देखना परखना शुरू किया। लता ने यह अच्छी तरह से जान लिया था कि गायन में शास्त्रीय नियमों के आलावा अभिनय के पुट को रखा जाना आवश्यक है, उनको माइक पर गाना चलकर या कितने दूर से गाना है या किस विशेष स्थित परिस्थिति में गाना है इसकी उनमे कमाल की समझ थी। जिससे उन्होंने जल्दी ही अपनी शैली के रूप में विकसित किया।

लता ने अपनी बेमिसाल गायिकी की समझ का प्रदर्शन 1949 में बनी फिल्म ‘महल’ का मशहूर गाना, आएगा आने वाले के रिकार्डिंग के दौरान किया इस गाने को गाते हुए वे दूर से चलकर माइक तक आती थी। जिससे इसमे एक कमाल का प्रभाव सुनने वाले पर पड़ता है।इस गाने के बाद तो लता ने पीछे मुड़कर कभी देखा ही नही।

 1950 का दशक-

1950 का दशक लता के बड़े धमाकेदार रहा इस दौर में उन्होंने की हिट फिल्मों जैसे, दीदार,उड़न खटोला, बैजू बावरा,देवदास, मधुमती, श्रीमान 420,मुगले आज़म, बरसात, मदर इंडिया, दिल अपना और प्रीत पराई, के लिए अपने जादुई और खनकदार आवाज दी, लता जी ने उस के सभी उस दौर के लगभग सभी संगीतकारों और गीतकारों व गायकों के साथ गाना गया। कुछ गायक व गीतकार, संगीतकार से उनके मनमुटाव भी हुए, पर फिर भी अपने सहज और अपनेपन के बर्ताव ने कॉफी लोगों को उनके करीब लाया, उनकी गायकी के एक बड़े मुरीद बड़े गुलाम अली खान साहब भी थे। वे अक्सर लता जी बारे में कहते। “”कमबख्त कभी सुर से कभी कटती ही नही। “”

 1962 का साल-
एक तरफ जहां गायकी में दिन ब दिन सफलता के नए शिखर छू रही थी वही हमारी सीमा पर भारत चीन के मध्य युद्ध चल रहा था, युद्ध चल क्या रहा था हम 1962 का युद्ध चीन से हार गए थे। पूरा देश गहरी निराशा में डूबा हुआ था। देश के चहेते प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू गहरे सदमे से गुजर रहे थे। उन्हें देश मे नए मनोबल किस तरह से भरा जाए इस बारे में कुछ सूझ नही रहा था उस संकट की घड़ी में लता जी ने कवि प्रदीप द्वारा लिखित गीत “ये मेरे वतन के लोगों “को आज़ादी के समारोह में गाकर लोगो के अंदर एक नये जोश का संचार देशवासियों के हृदय में कर दिया था। जिसे सुनकर पंडित नेहरू जो विकट से विकट परिस्थिति में नही रोये। रो पड़े थे। और लता जी के प्रशसंकों में से एक हो गए थे।

लता जी भजन,-
लता जी हर तरह के गीत गाये खुशी, प्रेम, वियोग, मिलन, विछोह, पर हर गीत का परम तत्व करुणा ही रही। जहां उनके गीतों में नयापन और अद्भुत स्वर संयोजन मिलता है वही उनके गाये भजनों में एक रूहानी सुकून मिलता है। मीरा के गए भजनों को इस सहज और सुरीला अंदाज दिया कि लगता ही मीरा स्वयं कहीं उपस्थित हो गई हो।

लता जी की शादी-

लता जी शादी को लेकर अक्सर लोगों उनके चाहने वालों की चर्चाओं में रही। दरअसल बहुत छोटी सी उम्र में ही उन पर अपने परिवार भाई बहन के देख रेख की जिम्मेदारी कुछ इस तरह रही कि वे विवाह नही कर सकी। उनकी शादी को लेकर कभी उनकी बहन उषा जी ने कहा था कि “ईश्वर का दिया लता जी के पास सब कुछ था, पर उनके पास हम भाई बहन भी थे.

लता मंगेशकर को को जीवन काल मे कई दिग्गज मान-सम्मान, व पुरुस्कारों से नवाजा गया गया।

1969 – पद्म भूषण

1989 – दादा साहेब फाल्के पुरस्कार

1999 – पद्म विभूषण

2001 – भारत रत्न

लता जी दुनिया के उन महत्वपूर्ण गायिकाओं में शामिल है जो सबसे अधिक उम्र तक गाती रही । तथा अपने अंतिम जीवन काल तक कभी भी गायन ना करने की कोई घोषणा नही की। लता जी ने अपने सहज व्यक्तित्व से न केवल संगीत को ऊँचाई दी बल्कि समाजिकता को भी अव्वल रखा वे दिलीप कुमार को राखी बांधती थी, दोनो ने 13 साल के मनमुटाव के बाबजूद भाई बहन के रिश्ते को निभाया। यह उनकी महान आत्मा का एक छोटा सा किस्सा है ऐसे तमाम किस्सों उनके जीवन से जुड़े है।

1.कभी लता जी के बारे में बोलते हुए नरगिस ने इकबाल का शेर कहा था।

हजारों साल नरगिस अपनी बे नूरी पर रोती है,
बड़ी मुश्किल से पैदा होता है चमन में दीदा-वर पैद

2.महान गायक कुमार गन्धर्व ने कहा था-
लता के देश मे कभी सूर्य अस्त नही होता।

3.कभी अभिनेता अमिताभ बच्चन ने विदेश में कहा था आपके पास सब चीजे हो सकती है, पर दो चीजें ताजमहल और लता मंगेशकर नही हो सकती,

3.ऐसे ही एक सुनील गावस्कर ने नूरजहाँ से एक मुलाकात में कहा था। मैं किसी नूरजहां को नही लता मंगेशकर को जानता हूँ।
4. मशहूर वायलिन वादक येहूदी मेनहिन ने उनके लिए कहा था.- काश!मेरी वायलिन लता जी के गायिकी की तरह बज सके।
स्वर कोकिला लता जी जीवन-राग की तरह हम भारतीयों के जीवन मे शामिल हैं,जब तक हमारे जीवन मे समाज मे जीवन मे राग तत्व रहेगा लता जी हमारे बीच बनी रहेगी।

♀ लेखक संपर्क-
♀ 88898 57854

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🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
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🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
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▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
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▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
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▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
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25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

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🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

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🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

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🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

⏩ 12 अगस्त-  भोजली पर्व पर विशेष
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⏩ 12 अगस्त- भोजली पर्व पर विशेष

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■पर्यावरण दिवस पर चिंतन : संजय मिश्रा [ शिवनाथ बचाओ आंदोलन के संयोजक एवं जनसुनवाई फाउंडेशन के छत्तीसगढ़ प्रमुख ]

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■पर्यावरण दिवस पर विशेष लघुकथा : महेश राजा.

राजनीति न्यूज़

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

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■छत्तीसगढ़ :

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भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

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भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
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स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

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छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

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राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
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प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

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ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

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अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
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हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

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पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन