■छत्तीसगढ़ी रचना आसपास. ■डॉ. बलदाऊ राम साहू.
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●सुख-दुख आवत-जावत रहिथे
●मन ल हमर भरमावत रहिथे
-डॉ. बलदाऊ राम साहू
[ दुर्ग-छत्तीसगढ़ ]
सुख-दुख आवत-जावत रहिथे
मन ल हमर भरमावत रहिथे.
ठलहा मनखे घूमत रहिथे
कमिया मन ह कमावत रहिथे.
जाॅंगर टोरे म नइ मिलय कुछु
सब झन ला समझावत रहिथे.
फगवा, चैतू, अघनू भैया
असल पछीना बहावत रहिथे.
दूसर देश ले आये हें जउन
मतलब अपन सधावत रहिथे.
छत्तीसगढ़िया जम्मो बेच के
हाथ रगर पछतावत रहिथे.
●कवि संपर्क-
●94076 50458
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chhattisgarhaaspaas
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