■शरद पूर्णिमा पर विशेष : ■डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’.
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♀ चंदा का ज़ोर है.
♀ डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’.
[ कोरबा,छत्तीसगढ़ ]

मौसम मदमस्त हुआ चन्दा का ज़ोर है
सोलह कलाएँ लिए आया चितचोर है
मुद्दत के बाद पुकारा कोई नाम से
ढूँढ रहा है पनघट में जाकर शाम से
जाती है दृष्टि जिधर किरणों का शोर है
निकला है रसिया बन छलने वो गाँव में
छिपना मुश्किल है अब दूर कहीं ठाँव में
उँगली हर बाला की कान्हा की ओर है
आज सुधा बरसेगी मर्ज़ी से रात में
चार चाँद लग जाएगा हर सौगात में
उसके कब्जे में अद्भुत लौकिक डोर है
महारास लीला का ये अनुपम दौर है
कोई विजेता यहाँ कोई सिरमौर है
नाच रहा जो भीतर वो मन का मोर है
●कवि संपर्क-
●94241 41875
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chhattisgarhaaspaas
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