रामलला की प्राण प्रतिष्ठा पर विशेष : बसंत राघव
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राम
राम अधारित हों सबके जीवन में
राम रमें जन जन में अन्तर्मन में
राम के आदर्श सारे प्रति पलित हों
कर्म में गुणधर्म में आचरण में
प्राणों में होता रहे राम का प्रकटोत्सव
लीला लालित्य का उद्भास हो चिंतन में
राम नाम का अजपा जाप चले श्वसन में
संकीर्तन चलता रहे हर धड़कन – स्पंदन मे
अविराम राम धुन लगी रहे मन में ऐसे
रागद्वेष विगलित हो जाए कुछ ही क्षण में
मनोराज्य में रामराज्य प्रभाती होए
भाव विचार रहे सदा आत्मनियंत्रण में
जब भी गावोगे तुम भावभूषण होकर
नंगे पांव चले आएंगे राम भजन में
चित्त वृत्ति निर्मल हों हृदय कमल में
अनुराग …अगाध हो सीतारमण में।
कपटी अहंकारी रावण का चित्त हरो
तुम विराजो राम सदा मानस भवन में।
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बसंत राघव
रायगढ़ छत्तीसगढ़
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संपर्क-
83199 39396
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chhattisgarhaaspaas
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