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रामनवमी विशेष : निरबल के बल राम – डॉ. नीलकंठ देवांगन

छत्तीसगढ़ राम के माता कौशल्या के मयिके आय | राम ह छत्तीसगढ़ के दुलरुवा भांचा ये | भांचा के रिश्ता बड़ मयारुक अउ आत्मीय होथे | तेखर सेती ओखर जनम दिन बड़ उमंग उल्लास से मनाय जाथे | चैत महीना के अंजोरी पाख के नवमी के दिन ओखर जनम होय रहिसे |
राम नवमी भगवान राम के जनम दिन आय | ये संसार ल अत्याचारी राक्षस मन ले मुक्त करे , पापी मन ल नाश करे खातिर त्रेताजुग मं अयोध्या के राजा दशरथ – रानी कौशल्या के पुत्र रूप मं आजे के दिन आय रहिसे | ओखर पूरा जीवन समाज सेवा मं बीतिस | ओहा जीवन भर मर्यादा के पालन करिस | लाखों करोड़ों हिंदू मन आज के दिन बरत उपवास , पूजा पाठ , भजन कीर्तन करके ओला याद करथें |
गोस्वामी तुलसीदास ह अवधी- हिदी मं रामचरित मानस महाकाव्य के रचना कर राम के संदेश ल जन जन तक पहुंचाय हे | येमा हमर गौरवशाली अतीत, धरम समाज अउ संस्कृति के सुंदर चित्रण हे | येमा मानव जीवन, परिवार, राजधरम अउ परजा के कर्तव्य के मर्यादा के बरनन हे | बाल्मीकि ह राम के समकालीन रहिसे | ओहा संस्कृत मं इतिहास पुरुष राम के कथा राम चरित मानस रामायण लिख के राम के जीवन दर्शन कराय हे |
दुख देवइया मन के नाश- ताड़िका बध, बाली, कुंभकरन, मेघनाथ समेत अत्याचारी रावन कुल के नाश करके सुग्रीव, विभीषन ल राज देके सुशासन के बेवस्था बनायिस अउ अपन जब राजा बनिस त सुख शांति के रामराज लायिस जिहां दुख अशांति के नाम नइ रिहिस |
निरबल के बल राम- राम के करुना शोषित अउ समाज के पिछड़ा कमजोर लोगन मन बर परवाहित होय हे | ओहा केंवट, शबरी ,जटायु, कोल- भील अउ बानर भालू मन ल भी गला लगाइस | ओहा ऋषि मुनि के आश्रम मं गयिस त शबरी के कुटिया मं घलो पहुंचिस अउ किहिस के मैं तो बस परेम चाहत हंव |
सब के आदर्श राम – राम चरित मानस सिरफ उपदेश भर नइ देवय, पग पग मं जीवन जिये के कला अउ मारजादा बताथे | राम तो आदर्श हें | पुत्र, भाई, पति, शासक, मित्र हर रूप मं आदर्श हें |
आज हिंदूच मन के नहीं, सबो मानव समाज के आदर्श हें | येखर ले आज के राजनीति, समाज अउ संयुक्त परिवार बहुत कुछ सीख सकथें |
सबो परिस्थिति अनुकूल- राम जनम के समय सबो परिस्थिति अनुकूल हो गे रहिसे | तुलसीदास लिखथें – ‘जोग लग्न ग्रह बार तिथि, सकल भये अनुकूल | चर और अचर हर्ष जुत, राम जनम सुख मूल |’
राम पूज्य हें, प्रनम्य हें, अनुकरनीय हें | आज के दौर मं तो ओखर अउ जादा जरूरत हे | राम जनम के उत्सव मं हम अपन भीतर के राम ल जगावन अउ ओखर ले एकाकार हो जावन, ओखर गुन ल धारन करन | सुख के अनुभूति करन | सुख पावन अउ सुख देवन | श्रेष्ठ अउ सुखमय जीवन जिये के उद्देश्य ल प्रापत करन | हमर छत्तीसगढ़ मं ओखर मया पियार बरसत रहय | सबके जिनगी सुखे सुख मं बीतय |

•डॉ.नीलकंठ देवांगन
•संपर्क –
•84355 52828
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