रामनवमी विशेष रचना : महेश राठौर ‘ मलय ‘
🕉 राम जगत के
राम जगत के।
राम भगत के।
हरि-अवतारी, जन-दुखहारी।
जनक-दुलारी, तव सिय नारी।
राघव राजा, मम् उर आजा।
तीर चला जा, लंक जला जा।
राम प्रणत के।
राम जगत के ।
दशरथनन्दन, शीतल चंदन।
असुरनिकंदन, तुमको वंदन।
इष्ट काल के, लखनलाल के,
चंद्रभाल के, दिशापाल के।
राम भरत के।
राम जगत के।
मख रखवारे, घन सम कारे।
नाम उचारे, हनुमत प्यारे।
कर धनुसायक, जय रघुनायक।
सदा सहायक, शांति प्रदायक।
राम निरत के।
राम जगत के।
🕉 रामनवमी पर नौ दोहे
नीलमणि-सम देह में,
चितवन ललित ललाम।
कुंचित कुंतल कोष के,
स्वामी प्रभुवर राम।।
देह अवध हो पावनी,
मति, मन, उर अभिराम।
केंवट, शबरी-भाव हों,
उसमें बसते राम।।
जटिल, कुटिल जिस ठौर हों,
भरा हुआ मन- काम।
लोभी, लम्पट, पातकी
सकल सँहारें राम।।
हनुमत पर महती सदा,
संतो पर अविराम।
शरणागत पर अति कृपा,
करते राघव राम।।
जीभ उचारे सत्य को,
चरण चलें हरि-धाम।
कर्म करें कर दान का,
इनसे रीझें राम।।
प्रेम-उपासक जो मिले,
इंद्रिय कसे लगाम।
दया जीव पर जो करें,
दिखते उनमें राम।।
देते शुभ, अपकर्म का,
यथा-उचित परिणाम।
न्याय, धर्म के अक्ष हैं,
दशरथनन्दन राम।।
धीर – वीर नरश्रेष्ठ ने,
जीत लिया संग्राम।
दशमुख मारे लंक में,
सियानाथ श्रीराम।।
उर में उमड़े राम के,
दया – उर्मि उद्दाम।
शील गँवाई गौतमी,
किये पुनीता राम।।

•महेश राठौर ‘ मलय ‘
•संपर्क –
•81094 70546
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)