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साहित्यिक संस्था ‘ एकत्र ‘ एवं संगीतधर्मी संस्था ‘ गुंजन ‘ ने किया कवि शरद कोकास का सम्मान

भिलाई – दुर्ग [छत्तीसगढ़ आसपास न्यूज़] : विगत दिनों सुप्रसिद्ध कवि एवं गीतकार शैलेन्द्र के जन्मशताब्दी वर्ष में उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर साहित्यिक संस्था ‘एकत्र’ एवं संगीतधर्मी संस्था ‘गुंजन’ के संयुक्त तत्वावधान में डॉ शैलेंद्र श्रीवास्तव के निवास पर आयोजित संगीत एवं साहित्य के कार्यक्रम में सुविख्यात कवि लेखक शरद कोकास का शॉल श्रीफल से सम्मान किया गया। शरद कोकास ने इस अवसर पर कवि शैलेन्द्र की गैरफिल्मी कविताओं और उनकी रचना यात्रा पर अपना वक्तव्य देते हुए देश की आज़ादी और जनमानस के निर्माण में उनके साहित्यिक योगदान,इप्टा व प्रगतिशील लेखक संघ में उनकी भूमिका,फणीश्वरनाथ रेणु से उनकी मित्रता आदि की चर्चा की । उन्होंने बताया कि शैलेंद्र ने फिल्मों के अलावा भी 100 के लगभग प्रेम, क्रांति, आदि विषयों पर कविताएं लिखी हैं।

‘एकत्र’ के संयोजक महेश कुमार विनोदिया ने शरद कोकास एवं उपस्थितों का परिचय दिया तथा तिलकधर दुबे ने कार्यक्रम का संचालन किया । शैलेंद्र के चर्चित गीतों जागो मोहन प्यारे, सजनवा बैरी हो गए हमार, रमैया वस्तावैया आदि गीतों की संगीतमय प्रस्तुति गुंजन के कलाकारों शैलेन्द्र श्रीवास्तव,दीपेन्द्र हालदार, तरूण पहाड़े, नरेन्द्र गहलोत, शांताराम वानखेडे , तिलक दूबे, गिरीश चतुर्वेदी संजय भरने,परन भाटिया, सुनील परदेशी, मधुरिमा रे, अलका शर्मा, तथा रेखा द्वारा की गई।

कार्यक्रम में जगजीत सिंह भाटिया,तेज प्रताप सिंह, सरोज दुबे, श्रीमती गीता साठे, श्रीमती दीपा हालदार, श्रीमती गीता सोनी , जानकी प्रसाद आदि उपस्थित थे.
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