बाल गीत : दुर्गा प्रसाद पारकर
2 years ago
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फूरफुंदी
दू पाँख ले जब तैं उड़थस
हवई जहाज कस तैं लगथस
लइका मन धरे बर दउड़थे
कोनो गिरथे कोनो हपटथे
काकरो हाथ म नइ आवस
सबके मन ल तैं ह भावस
रंग बिरंग के तोर हे पांख
सब ल तैं ह नचाथस नाच
जउन जघा म तैं ह बइठथस
सुंदरता ल ओकर बढ़ा देथस
फूरफंदी बिन बोले गोठियाय
सबके हिरदे म तैं ह समाय
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फौजी
दाई मोला असीस दे दे मँय फौजी बन जाहूं
भारत माता के पाँव म मँय ह माथ नवाहूं
सेना के वर्दी पहिर के बंदूक भाला धरहूं
बैरी मन संग लड़े खातिर आगू डाहर बढ़हूं
लड़त लड़त मँय ह मइया वंदे मातरम गाहूं
दुनिया भर म मँय ह तीरंगा के मान बढ़ाहू़ं
माटी के कर्जा उतारे बर मँय ह मर मिट जाहूं
मातृभूमि के रक्षा खातिर मय शहिद हो जाहूं
•संपर्क-
•79995 16642
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chhattisgarhaaspaas
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