• Chhattisgarh
  • विशेष : क्या अब हम ‘सच्चा इतिहास’ फिल्मों के ज़रिये पढ़ेगे! – मुकुल सरल

विशेष : क्या अब हम ‘सच्चा इतिहास’ फिल्मों के ज़रिये पढ़ेगे! – मुकुल सरल

2 years ago
872

जो ऐतिहासिक सच्चाई हमारे तमाम इतिहासकार, शोधकर्ता, सरकार का पूरा तंत्र और उसके तमाम जांच कमीशन नहीं खोज पाए, वो अब कुछ कमर्शियल फ़िल्म मेकर ढूंढ ले रहे हैं। अब लगता है कि हमें सच्चा इतिहास जानने के लिए इतिहास की किताबें पढ़ने की ज़रूरत नहीं है, बस दो-ढाई घंटे की एक फ़िल्म देखकर हम इतिहास के प्रवक्ता हो सकते हैं।

यही नहीं, आजकल की कई फ़िल्में हमें न केवल नया इतिहास या एक पक्षीय इतिहास बता रही हैं, बल्कि अब दंगे-फ़साद के भी काम आ रही हैं। अभी हाल में रिलीज़ हुई फ़िल्म ‘छावा’ को लेकर इस तरह का दावा तो ख़ुद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया है। नागपुर हिंसा के पीछे उन्होंने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से फ़िल्म ‘छावा’ को ज़िम्मेदार ठहरा दिया।

नागपुर हिंसा के बाद देवेंद्र फडणवीस ने बयान दिया कि यह फ़िल्म मराठा राजा छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन पर आधारित है और इसने मुग़ल शासक औरंगज़ेब के ख़िलाफ़ लोगों के गुस्से को उजागर किया है। फ़िल्म ने मराठा राजा का सच्चा इतिहास पेश किया है, जिससे औरंगज़ेब के प्रति जनता की भावनाएं फिर से जाग उठी हैं।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने फ़िल्म ‘छावा’ की विशेष स्क्रीनिंग में भी भाग लिया था। उनका कहना है कि फ़िल्म के बाद औरंगज़ेब के ख़िलाफ़ गुस्सा बड़े पैमाने पर प्रदर्शित हो रहा है।

कुछ ऐसी ही सच्चाई उजागर होने का दावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ़िल्म मेकर एकता कपूर की ‘द साबरमती रिपोर्ट’ फ़िल्म देखकर किया था। यह फ़िल्म 2002 में गुजरात के गोधरा कांड और उसके बाद हुए दंगों पर आधारित बताई गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 दिसंबर 2024 को संसद भवन के बालयोगी ऑडिटोरियम में आयोजित विशेष स्क्रीनिंग के दौरान ‘द साबरमती रिपोर्ट’ फ़िल्म देखी। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, और अन्य केंद्रीय मंत्री एवं सांसद भी उपस्थित थे। फ़िल्म देखने के बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर फ़िल्म निर्माताओं की सराहना करते हुए लिखा: “यह अच्छी बात है कि सच सामने आ रहा है, वो भी इस तरह से कि आम जनता भी इसे देख सके। झूठी धारणा सिर्फ कुछ वक्त कायम रह सकती है, हालांकि तथ्य सामने आता ही है।”

यानी जो काम गुजरात दंगों को लेकर बने तमाम जांच कमीशन और सरकारी जांच एजेंसियां 20-22 साल में न कर सकीं, वो एक फ़िल्म निर्माता ने कुछ ही महीनों में करके दिखा दिया। इसके बाद क्या कहा जा सकता है! सिर्फ़ यही कि ‘मोदी है तो मुमकिन है!’

इसमें दो राय नहीं हैं कि सिनेमा अपनी बात पहुंचाने और लोगों को जागरूक करने का बेहद सशक्त माध्यम है। लेकिन यही सिनेमा लोगों को गुमराह करने और भड़काने के काम भी आ सकता है और फ़ासीवाद इसकी इस ख़ूबी को बख़ूबी पहचानता है और उसे अपने पक्ष में एक हथियार की तरह इस्तेमाल करता है।

यही वजह है कि पिछले कुछ समय से भारतीय हिंदी सिनेमा में ऐसी फ़िल्मों की बाढ़ आ गई है, जिन्हें एक पक्षीय या प्रोपेगैंडा फ़िल्में कहा जा सकता है। ये फ़िल्में अक्सर एक विशेष विचारधारा, राजनीतिक एजेंडा या सांस्कृतिक नैरेटिव को बढ़ावा देने के लिए बनाई जाती हैं। और आज वह विचारधारा क्या है, सब जानते हैं। यह है आरएसएस-बीजेपी की विचारधारा, जिसे राष्ट्रवाद के नाम पर पेश किया जा रहा है।

इनमें से कुछ फ़िल्में खुलकर एक पक्षीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करती हैं, जबकि कुछ परोक्ष रूप से इस सोच को प्रोत्साहित करती हैं। कुछ नाटकीय ढंग से आधा-अधूरा सच दिखाती हैं और आपको मालूम है कि आधा सच, पूरे झूठ से भी ज़्यादा ख़तरनाक होता है।

ऐतिहासिक तथ्यों के नाम पर भी जो फ़िल्में आ रही हैं उनमें भी फ़िक्शन के नाम पर छूट ले ली जाती है और अतिरंजना के साथ ऐसा नाटकीय तड़का लगाया जाता है कि सत्य और तथ्य कहीं पीछे छूट जाते हैं और एकतरफ़ा भावनाएं हावी हो जाती हैं। क़ानूनी विवाद से बचने के लिए एक डिस्क्लेमर दे दिया जाता है कि इसका उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं है।

कुल मिलाकर इन दिनों हिन्दुत्व पर गर्व करने और इस्लामोफोबिया बढ़ाने के लिए ढूंढ-ढूंढकर ऐसी फ़िल्में बनाई जा रही हैं, जिसमें मुसलमानों को बेहद क्रूर, बर्बर खलनायक के तौर पर दिखाया जा सके।

पिछले कुछ सालों की प्रमुख प्रोपेगैंडा फ़िल्मों का ज़िक्र करें, तो ‘द कश्मीर फाइल्स’ (2022) और ‘द केरला स्टोरी’ (2023) के नाम प्रमुख रूप से हमारे सामने आते हैं।

‘कश्मीर फाइल्स’ में कश्मीरी पंडितों के पलायन और नरसंहार को एक विशेष दृष्टिकोण से दिखाया गया। इसी तरह ‘केरला स्टोरी’ में केरल की लड़कियों के कथित इस्लामी कट्टरपंथ में फंसने और आईएसआईएस में शामिल होने की कहानी दिखाई गई। फ़िल्म में यह दावा किया गया कि केरल की हज़ारों लड़कियों को इस्लामिक कट्टरपंथ में फंसाकर आतंकवादी संगठनों में भेजा गया, जबकि इस दावे को कई संगठनों और राज्य सरकार ने ख़ारिज किया।

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने फ़िल्म की आलोचना करते हुए इसे ‘संघ परिवार की झूठ की फैक्ट्री का उत्पाद’ कहा। उन्होंने दूरदर्शन पर इस फिल्म के प्रसारण के निर्णय की भी निंदा की और इसे आम चुनाव से पहले तनाव बढ़ाने का प्रयास कहा।

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी इस फ़िल्म की आलोचना करते हुए इसे केरल की वास्तविकता से परे बताया। उन्होंने फ़िल्म के एक पोस्टर को साझा करते हुए ट्वीट किया, “यह आपकी केरल की कहानी हो सकती है, लेकिन यह हमारी केरल की कहानी नहीं है।”

फ़िल्म के रिलीज़ को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गईं, जिनमें इसे ‘घृणा फैलाने वाला’ और ‘ऑडियो-विज़ुअल प्रोपेगैंडा’ बताया गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सेंसर बोर्ड की मंज़ूरी का हवाला देते हुए हस्तक्षेप से इंकार कर दिया। लेकिन विवाद बढ़ने पर फ़िल्म के ट्रेलर के विवरण में ‘32,000 महिलाओं’ के स्थान पर ‘3 महिलाओं’ का उल्लेख किया गया, यानी निर्माता अपने पहले के दावे से पीछे हट गए।

इसी तरह कई फ़िल्मों को लेकर विवाद उठे। हालांकि ज़्यादातर प्रोपेगैंडा फ़िल्म चल नहीं पाईं और बॉक्स ऑफ़िस पर फ्लॉप रहीं।

कुछ पीरियड फ़िल्म यानी जिन्हें ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में बनाने का दावा किया गया, वे भी अपने ख़राब निर्देशन, अभिनय या एकतरफ़ा नैरेटिव की वजह से अपना खर्चा भी नहीं निकाल पाईं। अक्षय कुमार और कंगना रनौत की कई फ़िल्में इसी लाइन में शुमार की जा सकती हैं।

कंगना रनौत की अभी आई फ़िल्म ‘इमरजेंसी’ का भी हाल बुरा रहा। सेंसर बोर्ड में फंसने की वजह से इस फ़िल्म की रिलीज़ बार-बार टली और अंतत यह जनवरी 2025 में परदे पर आ पाई। इस फ़िल्म का निर्देशन, लेखन कंगना ने ही किया और मुख्य भूमिका भी ख़ुद ही निभाई। यह फ़िल्म 1975 में लगाए गए आपातकाल और इंदिरा गांधी के व्यक्तित्व पर केंद्रित थी। लेकिन इसे भी दर्शकों ने ख़ास पसंद नहीं किया।

इसी तरह 2019 में एक फ़िल्म आई थी– “पीएम नरेंद्र मोदी।” इसका निर्देशन ओमंग कुमार ने किया था और अभिनेता विवेक ओबेरॉय ने नरेंद्र मोदी की भूमिका निभाई थी। इसे बायोपिक फ़िल्म कहा गया, लेकिन यह भी फ्लॉप रही।

आमतौर पर दर्शक भी समझता है कि इस तरह की फ़िल्मों का उद्देश्य एक ख़ास राजनीतिक विचारधारा को बढ़ावा देना है और या तो फेक नैरेटिव है या फिर सच्चाई को अतिरंजना के तड़के के साथ सेलेक्टिव यानी चुनिंदा तरीके से पेश किया गया है।

साथ ही कुछ निर्माता-निर्देशकों और अभिनेताओं ने इसे सफलता का शॉर्टकट मान लिया है। साथ ही सत्ता के लाभ का ज़रिया भी बना लिया है। कंगना रनौत इसी तरह देखते-देखते आज भारतीय जनता पार्टी की सांसद बन गई हैं।

हालांकि कई फ़िल्में अपने बेहतर निर्देशन और अभिनय की वजह से हिट भी रहीं। और उन्होंने बॉक्स ऑफ़िस पर कई रिकार्ड बनाए। उन्हीं में एक थी 2019 में आई ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’। फ़िल्म में सर्जिकल स्ट्राइक की घटना का उल्लेख है और यह राष्ट्रवाद को केंद्र में रखती है।

अब इसी तरह सुपर हिट की फ़िल्म की श्रेणी में आ गई है– ‘छावा’। ‘छावा’ एक मराठी शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘शेर का बच्चा’ या ‘शेर का बेटा’। मराठा संस्कृति में ‘छावा’ विशेष रूप से योद्धा और वीर पुत्र के रूप में संदर्भित होता है।

यह फ़िल्म प्रसिद्ध मराठी लेखक शिवाजी सावंत (31 अगस्त 1940–18 सितंबर 2002) के उपन्यास ‘छावा’ पर आधारित है। यह उपन्यास 1980 में प्रकाशित हुआ था। इस उपन्यास में छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन और वीरता को ‘छावा’ के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो अपने पिता छत्रपति शिवाजी महाराज के उत्तराधिकारी थे। शिवाजी सावंत को इस कृति के लिए काफ़ी सराहना मिली और यह मराठी साहित्य का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है। लेकिन भावनाएं अब 45 साल बाद एक फ़िल्म बनने के बाद उबाल मार रही हैं। यह भी सोचने का विषय है।

‘छावा’ फ़िल्म की शुरुआत में एक डिस्क्लेमर दिया गया, जिसमें कहा गया कि फ़िल्म शिवाजी सावंत के उपन्यास पर आधारित है और इसका उद्देश्य किसी भी ऐतिहासिक तथ्य को बदनाम करना, अपमानित करना, ग़लत तरीके से प्रस्तुत करना या विकृत करना नहीं है। साथ ही, फ़िल्म का इरादा किसी व्यक्ति या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने या कमजोर करने का भी नहीं है।

इसके अलावा, केंद्रीय फ़िल्म प्रमाणन बोर्ड (सेंसर बोर्ड) ने फ़िल्म को तीन कट्स और सात बदलावों के साथ यूए (UA) प्रमाणपत्र प्रदान किया है। यानी फ़िल्म मेकर ने भी इसके इतिहास होने का दावा नहीं किया है।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने फ़िल्म की समीक्षा में विक्की कौशल के अभिनय की तारीफ़ की है, लेकिन फ़िल्म में अत्यधिक शोरगुल और हिंसा के लिए आलोचना भी की है। ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ ने भी अपनी समीक्षा में विक्की कौशल और अक्षय खन्ना के अभिनय की प्रशंसा की, लेकिन अत्यधिक हिंसा और एक्शन के लिए आलोचना भी की।

अब फ़िल्म की हिंसा बाहर भी इसी रूप में प्रतिबिंबित हो रही है या यह कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री और उनका शासन-प्रशासन अपनी नाकामी छुपाने के लिए फ़िल्म के कंधे का इस्तेमाल कर रहे हैं।

फ़ासीवाद और सिनेमा

इतिहास गवाह है कि फ़ासीवादी ताक़तों ने कला, सिनेमा और मीडिया का अपनी विचारधारा फैलाने के लिए भरपूर या कहें बेजा इस्तेमाल किया है।

जर्मनी में हिटलर ने भी यही किया और इटली में मुसोलिनी ने भी यही किया। वास्तव में, प्रोपेगैंडा फ़ासीवादी-नाज़ीवादी शासन का एक अनिवार्य और मूलभूत अंग होता है। उन्होंने कला, साहित्य-संस्कृति, मनोरंजन और सूचना के जितने भी साधन हो सकते थे, सब पर क़ब्ज़ा कर लिया और अपनी विचारधारा फैलाने के लिए प्रयोग किए। इसके तहत नाज़ी जर्मनी में कई फ़िल्में बनाई गईं, जिनका उद्देश्य नाज़ी विचारधारा को बढ़ावा देना था और यहूदियों को दुश्मन के तौर पर रेखांकित करना था।

इस तरीके से जनता के मन में नफ़रत और श्रेष्ठता की भावना एक साथ भर दी जाती है। एक नेता को एक ‘मसीहा’ या ‘महानायक’ के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जो राष्ट्र को संकट से उबारने वाला होता है। एक ही सत्य को मान्यता दी जाती है। अन्य विचारों, मतों और दृष्टिकोणों को कुचल दिया जाता है।

इनमें मीडिया पर नियंत्रण स्थापित करके प्रोपेगैंडा को व्यापक रूप से फैलाया जाता है। फ़ासीवादी शासन सांस्कृतिक प्रतीकों और इतिहास का पुनर्निर्माण करता है, ताकि वे अपनी विचारधारा के अनुरूप बन सकें। कला, संगीत, साहित्य और सिनेमा का उपयोग करके एक ‘राष्ट्रीय गौरव’ और ‘विरासत’ की भावना को जगाया जाता है।

और फिर अपनी सत्ता कायम रखने के लिए ‘दुश्मन’ का निर्माण किया जाता है, जो निश्चित तौर पर देश के भीतर अल्पसंख्यक और राजनीतिक विरोधी होते हैं और बाहरी तौर पर दूसरे देशों को दुश्मन राष्ट्र के रूप में चित्रित किया जाता है। नाज़ी जर्मनी में हिटलर ने यहूदियों और कम्युनिस्टों को दुश्मन करार दिया, तो मुसोलिनी की इटली में समाजवादियों और उदारवादियों को राष्ट्र-विरोधी माना गया।

क्या आप आज यही सब अपने भारत में होते नहीं देख रहे!

हमारे देश में अल्पसंख्यक के तौर पर मुसलमानों को और राजनीतिक तौर पर कम्युनिस्ट ही नहीं, सेकुलर लोगों तक को दुश्मन करार दे दिया गया है। टुकड़े-टुकड़े गैंग और एंटी नेशनल का नाम दे दिया गया है।

इसी सब के चलते अब हर तरफ़ नफ़रत का माहौल है। हर तीज-त्योहार पर तनाव है। हमले हो रहे हैं। मॉब लिंचिंग हो रही है। हर मस्जिद के नीचे मंदिर खोजे जा रहे हैं। कभी बाबर, कभी औरंगज़ेब के नाम पर दंगे-फ़साद किए जा रहे हैं।

हालांकि यह प्रक्रिया काफ़ी पहले शुरू हो गई थी। लेकिन 2014 में केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद से यह और तेज़ हो गई है। और मीडिया या सिनेमा ही नहीं कई स्तर पर इस काम को किया जा रहा है।

इसी कड़ी में हमारी इतिहास, विज्ञान की किताबों को बदला जा रहा है ताकि एक नया अतीत, नया दिमाग़ गढ़ा जा सके। आपको मालूम होगा कि हाल के वर्षों में स्कूल और कॉलेजों की इतिहास, राजनीतिक विज्ञान और यहां तक की विज्ञान तक की किताबों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं और इनका उद्देश्य पाठ्यक्रम को अपडेट और समकालीन आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना बताया गया है।

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 12वीं की इतिहास की पुस्तकों से मुग़ल साम्राज्य से संबंधित कुछ अध्यायों को हटाया है। इसी तरह कक्षा 12 की ही राजनीतिक विज्ञान की किताब से बाबरी मस्जिद के अस्तित्व को ही मिटा दिया गया है। पुरानी पुस्तकों में ‘बाबरी मस्जिद’ को 16वीं शताब्दी की मस्जिद के रूप में वर्णित किया गया था, जिसे मुग़ल सम्राट बाबर के जनरल मीर बाकी ने बनवाया था। नई पुस्तकों में इसे ‘तीन-गुंबद वाला ढांचा’ कहा गया है। पहले की पुस्तकों में भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा और कारसेवा का विस्तृत वर्णन था। नए संस्करणों में इन घटनाओं का उल्लेख हटा दिया गया है, क्योंकि इसकी प्रतिक्रिया में व्यापक तौर पर दंगे हुए थे। एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश कुमार सकलानी के अनुसार, स्कूली पाठ्यपुस्तकों में दंगों और सांप्रदायिक हिंसा पर ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए।

नए संस्करणों में 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फ़ैसले पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसमें राम मंदिर निर्माण की अनुमति दी गई थी। कहा गया है कि यह परिवर्तन छात्रों को क़ानूनी और सामाजिक संदर्भ प्रदान करने के लिए किया गया है।

इस तरह अब आप किताबों के जरिये भी ऐतिहासिक सच के क़रीब नहीं पहुंच सकते। और फ़िल्में तो आप देख ही रहे हैं कि किस तरह गड़े मुर्दे उखाड़ कर वर्तमान और भविष्य पर मिट्टी डाली जा रही है।

▪️ लेखक मुकुल सरल स्वतंत्र पत्रकार और साहित्यकार हैं.

🟥🟥🟥

विज्ञापन (Advertisement)

ब्रेकिंग न्यूज़

मानसून की विदाई के साथ बदला छत्तीसगढ़ का मौसम, बढ़ेगा दिन का तापमान, रात में महसूस होगी ठंडक
breaking Chhattisgarh

मानसून की विदाई के साथ बदला छत्तीसगढ़ का मौसम, बढ़ेगा दिन का तापमान, रात में महसूस होगी ठंडक

वरिष्ठ भाजपा नेता अजय चंद्राकर के बिगड़े बोल, अधिकारी को कही गाड़ने की बात, कांग्रेस ने दी मानसिक चेकअप की सलाह
breaking Chhattisgarh

वरिष्ठ भाजपा नेता अजय चंद्राकर के बिगड़े बोल, अधिकारी को कही गाड़ने की बात, कांग्रेस ने दी मानसिक चेकअप की सलाह

इलॉन मस्क का भारतीय मूल की गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप: 4 बच्चों की मां शिवॉन बोलीं- एक हफ्ते में ही आई लव यू कहा था…
breaking Chhattisgarh

इलॉन मस्क का भारतीय मूल की गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप: 4 बच्चों की मां शिवॉन बोलीं- एक हफ्ते में ही आई लव यू कहा था…

भारत ने जीता गोल्ड मेडल, पाकिस्तान को 19 रन से हराया
breaking Chhattisgarh

भारत ने जीता गोल्ड मेडल, पाकिस्तान को 19 रन से हराया

नई सड़क, फोरलेन और बड़े पुल, 672 करोड़ के 24 कामों पर लगी मुहर, जानिए आपके जिले में क्या नया बनेगा
breaking Chhattisgarh

नई सड़क, फोरलेन और बड़े पुल, 672 करोड़ के 24 कामों पर लगी मुहर, जानिए आपके जिले में क्या नया बनेगा

पीएम मोदी से बातचीत में भावुक हुए कैप्टन स्मित, बोले- मुश्किल वक्त में पढ़ रहा था हनुमान चालीसा
breaking National

पीएम मोदी से बातचीत में भावुक हुए कैप्टन स्मित, बोले- मुश्किल वक्त में पढ़ रहा था हनुमान चालीसा

आशीष टिकरिया ने संभाला जनसंपर्क संचालक का पदभार, अधिकारियों-कर्मचारियों ने किया स्वागत
breaking Chhattisgarh

आशीष टिकरिया ने संभाला जनसंपर्क संचालक का पदभार, अधिकारियों-कर्मचारियों ने किया स्वागत

छत्तीसगढ़ से मानसून की विदाई शुरू, अगले 48 घंटे में कई जिलों से होगी वापसी
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ से मानसून की विदाई शुरू, अगले 48 घंटे में कई जिलों से होगी वापसी

छत्तीसगढ़ कोयला घोटाला केस में बड़ी कार्रवाई: भिलाई विधायक देवेंद्र यादव की मुश्किलें बढ़ीं, EOW ने भेजा नोटिस
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ कोयला घोटाला केस में बड़ी कार्रवाई: भिलाई विधायक देवेंद्र यादव की मुश्किलें बढ़ीं, EOW ने भेजा नोटिस

LPG सिलिंडर नहीं आ रहा? रायपुर में गैस और बिजली कनेक्शन की e-KYC अनिवार्य, ऑफलाइन-ऑनलाइन ऐसे करें वेरिफिकेशन
breaking Chhattisgarh

LPG सिलिंडर नहीं आ रहा? रायपुर में गैस और बिजली कनेक्शन की e-KYC अनिवार्य, ऑफलाइन-ऑनलाइन ऐसे करें वेरिफिकेशन

सुप्रीम कोर्ट का पटाखों पर बड़ा रुख, न पूरी तरह बैन न 24 घंटे की खुली छूट; तय होगा समय और पटाखों का प्रकार
breaking National

सुप्रीम कोर्ट का पटाखों पर बड़ा रुख, न पूरी तरह बैन न 24 घंटे की खुली छूट; तय होगा समय और पटाखों का प्रकार

केंद्र से बराबर राशि मिलने के बाद कितना हुआ काम? छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन की वर्तमान स्थिति बताए राज्य सरकार: हाई कोर्ट
breaking Chhattisgarh

केंद्र से बराबर राशि मिलने के बाद कितना हुआ काम? छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन की वर्तमान स्थिति बताए राज्य सरकार: हाई कोर्ट

छत्तीसगढ़ में जमीन का सीमांकन अब घर बैठे, तहसील के चक्कर खत्म, ऑनलाइन ऐसे करें आवेदन
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में जमीन का सीमांकन अब घर बैठे, तहसील के चक्कर खत्म, ऑनलाइन ऐसे करें आवेदन

25 करोड़ की फिरौती केस में नया मोड़, जमानत मिली तो फरार हुआ शोएब! अब ठिकानों पर रेड मार रही पुलिस
breaking Chhattisgarh

25 करोड़ की फिरौती केस में नया मोड़, जमानत मिली तो फरार हुआ शोएब! अब ठिकानों पर रेड मार रही पुलिस

ऑस्ट्रेलिया में छत्तीसगढ़ की बेटी का डंका, पल्लवी नायक की ‘Social Sage’ को मिला प्रतिष्ठित Champion Award
breaking Chhattisgarh

ऑस्ट्रेलिया में छत्तीसगढ़ की बेटी का डंका, पल्लवी नायक की ‘Social Sage’ को मिला प्रतिष्ठित Champion Award

भारत में Apple Pay की शुरुआत, Axis Bank क्रेडिट कार्ड से बिना कार्ड निकाले कर सकेंगे पेमेंट
breaking Chhattisgarh

भारत में Apple Pay की शुरुआत, Axis Bank क्रेडिट कार्ड से बिना कार्ड निकाले कर सकेंगे पेमेंट

इंस्टाग्राम Supervision फीचर, क्या माता-पिता देख सकते हैं बच्चे का अकाउंट? जानें नियम
breaking Chhattisgarh

इंस्टाग्राम Supervision फीचर, क्या माता-पिता देख सकते हैं बच्चे का अकाउंट? जानें नियम

INDIA ब्लॉक का बड़ा ऐलान, 2 से 8 अक्टूबर तक ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अभियान
breaking Chhattisgarh

INDIA ब्लॉक का बड़ा ऐलान, 2 से 8 अक्टूबर तक ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अभियान

छत्तीसगढ़: स्कूलों की बिल्डिंग का हिसाब नहीं दिया तो वेतन पर संकट, 31 जिलों के DEO को नोटिस
breaking Chhattisgarh

छत्तीसगढ़: स्कूलों की बिल्डिंग का हिसाब नहीं दिया तो वेतन पर संकट, 31 जिलों के DEO को नोटिस

पूर्व अग्निवीरों के लिए खुला रास्ता, साय कैबिनेट ने मंजूर किए नए भर्ती नियम; लिए ये 3 अहम फैसले
breaking Chhattisgarh

पूर्व अग्निवीरों के लिए खुला रास्ता, साय कैबिनेट ने मंजूर किए नए भर्ती नियम; लिए ये 3 अहम फैसले

कविता

आरंभ साहित्यिक मंच : वीणा सिंह
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : वीणा सिंह

हिंदी दिवस पर विशेष : डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’
poetry

हिंदी दिवस पर विशेष : डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’

देश के सुविख्यात गीतकार डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ द्वारा रचित विश्वकर्मा कुल गीत लाँच हुआ
poetry

देश के सुविख्यात गीतकार डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ द्वारा रचित विश्वकर्मा कुल गीत लाँच हुआ

विशेष : हमारे श्री कृष्ण- डॉ. नीलकंठ देवांगन
poetry

विशेष : हमारे श्री कृष्ण- डॉ. नीलकंठ देवांगन

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. दीक्षा चौबे
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. दीक्षा चौबे

आरंभ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : दीप्ति श्रीवास्तव

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’

डॉ. संजय दानी की ग़ज़ल संग्रह ‘चश्मेबद्दुर’ मेरी नज़र में- प्रदीप भट्टाचार्य
poetry

डॉ. संजय दानी की ग़ज़ल संग्रह ‘चश्मेबद्दुर’ मेरी नज़र में- प्रदीप भट्टाचार्य

कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी
poetry

कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी
poetry

कवि और कविता : पल्लव चटर्जी

आरंभ साहित्यिक मंच : उभरते हुए प्रगतिशील परंपरा एवं सोच के कवि डॉ. गिरधर चंद्रा ‘साज़’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : उभरते हुए प्रगतिशील परंपरा एवं सोच के कवि डॉ. गिरधर चंद्रा ‘साज़’

इस माह की कवयित्री –  सेवानिवृत्त प्राचार्या शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जुनवानी भिलाई जिला- दुर्ग छत्तीसगढ़ की श्रीमती वर्षा ठाकुर
poetry

इस माह की कवयित्री – सेवानिवृत्त प्राचार्या शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जुनवानी भिलाई जिला- दुर्ग छत्तीसगढ़ की श्रीमती वर्षा ठाकुर

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : बांग्ला-हिंदी के सुविख्यात प्रगतिशील परंपरा के छोटी-छोटी कविताओं के रचनाशील कवि पल्लव चटर्जी

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव
poetry

पावस रचना : दीप्ति श्रीवास्तव

आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच – अर्पिता चौधुरी

इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव
poetry

इस माह के ग़ज़लकार : सुशील यादव

आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : शुचि ‘भवि’

आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी
poetry

आज पढ़ें ‘आरंभ’ साहित्यिक मंच में बांग्ला और हिंदी के सुस्थापित कवि पल्लव चटर्जी

इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’
poetry

इस माह की कवयित्री : शुचि ‘भवि’

आरंभ साहित्यिक मंच : संध्या जैन
poetry

आरंभ साहित्यिक मंच : संध्या जैन

कहानी

बचपन आसपास [बाल कहानी] – बलदाऊ राम साहू
story

बचपन आसपास [बाल कहानी] – बलदाऊ राम साहू

लेख : कैलाश जैन बरमेचा
story

लेख : कैलाश जैन बरमेचा

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव
story

कहानी : दीप्ति श्रीवास्तव

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय
story

लघु कथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव
story

लघुकथा : सरस सलिला – दीप्ति श्रीवास्तव

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’
story

आलेख : ‘बहकता बचपन’ – साजिद अली ‘सतरंगी’

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी
story

स्वर्ग का न्याय : महेश की आत्मकथा – लेखक शायर नावेद रज़ा दुर्गवी

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहानी : ‘पीहू’ – डॉ. दीक्षा चौबे

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन
story

संदेशप्रद लघु कथा : ‘पुकार’ – कैलाश बरमेचा जैन

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है
story

लेखिका विद्या गुप्ता की कृति ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ की समीक्षा लेखक कवि विजय वर्तमान के शब्दों में – ‘मैं हस्ताक्षर हूँ’ यह विद्या गुप्ता की सच्ची, निर्भीक और सर्व स्वीकार्य घोषणा है

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे
story

मास्टर स्ट्रोक [व्यंग्य] : राजशेखर चौबे

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघु कथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ :  ब्रजेश मल्लिक
story

सत्य घटना पर आधारित कहानी : ‘सब्जी वाली मंजू’ : ब्रजेश मल्लिक

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती
story

लघुकथा : डॉ. सोनाली चक्रवर्ती

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे
story

कहिनी : मया के बंधना – डॉ. दीक्षा चौबे

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी
story

🤣 होली विशेष :प्रो.अश्विनी केशरवानी

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…
story

चर्चित उपन्यासत्रयी उर्मिला शुक्ल ने रचा इतिहास…

story

रचना आसपास : उर्मिला शुक्ल

story

रचना आसपास : दीप्ति श्रीवास्तव

story

कहानी : संतोष झांझी

लेख

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से
Article

‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक
Article

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए
Article

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
Article

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

Article

तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

Article

लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
Article

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
Article

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
Article

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
Article

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
Article

🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
Article

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
Article

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
Article

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
Article

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

Article

🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

Article

🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

Article

🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

राजनीति न्यूज़

breaking Politics

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

Politics

■छत्तीसगढ़ :

Politics

भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

breaking Politics

भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
Politics

धमतरी आसपास

Politics

स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

Politics

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

breaking Politics

राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
Politics

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
Politics

मरवाही उपचुनाव

Politics

प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

Politics

ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

breaking Politics

अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

breaking Politics

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
breaking National Politics

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

breaking Politics

हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

breaking Politics

पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन