छत्तीसगढ़ आसपास साहित्य : कवि- पल्लव चटर्जी : बांग्ला में अनुवाद- तारकनाथ चौधुरी

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नींव
– मूल कवि- पल्लव चटर्जी
– अनुवाद- तारकनाथ चौधुरी

तुम सभी की मनोकामनायें
पूर्ण हों,मूर्त रुप धरें,गगन छुएँ
इसलिए चुपचाप स्वीकार लिया मैंने
आत्मबलिदान का पथ
और प्रेम मंत्र से अभिमंत्रित कर
रख दिया गया अंधेरे गर्भ में।
ज्यों ज्यों मुझ पर परत दर परत
स्वप्न- ईंटें रक्खी गईं
त्यों-त्यों मेरा त्याग भुलाया जाने लगा।
मैं अतीत हूँ,तुम वर्तमान
तुम मुस्कान हो,मैं म्रियमाण।
युगों-युगों से नींव की यही कथा रही है
कंगूरे ही पूजे गये हैं।
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ভিত
পল্লব চ্যাটার্জী
তোমাদের মনোবাঞ্ছা পুরণ করতে
আমি মাটির অনেক নিচে নেমে আসি
পবিত্র হাতেই আমার জন্ম ।
ঝড় বৃষ্টি রৌদ্র শীতের মরশুমে
তোমাদের রক্ষা কবচ হয়ে
ঠাঁয় দাঁড়িয়ে আছি।
সচরাচর কেউ আমার কথা জিজ্ঞেস করে না
হয়তো বোকাসোকা বলেই,
আমার উপর বিশ্বাস করে
তোমরা বড়ো ঘর, গগন চুম্বী বিল্ডিং তৈরি করো।
সাধ্যমত নিজেকে বাজী রেখে
তোমাদের মুখে হাসি ফুটিয়ে এসেছি,
এভাবেই যুগ যুগ ধরে।
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• 81093 03936
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chhattisgarhaaspaas
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