गणतंत्र दिवस
6 years ago
378
0
●देखो ! आज़ गणतंत्र आया.
-विजय पंडा
देखो ! आज गणतंत्र आया!
स्वर्ण मुकुट से सजा हुआ
पहन कर वो फिर इठलाया
परोसा शब्दों की व्यंजन
पर किसी को न रास आया ;
देखो !आज गणतंत्र आया!
तंत्र आज बिखरा हुआ
गण एकता का मन्त्र ढूँढ रहा
कंधे उसके हैं झुके हुए
जाल में पैर हैं बंधें हुए
आज वह गुमराह है
बन्द मुट्ठी आँख नीची
सिर्फ दौड़ना है।
देखो ! आज गणतंत्र आया !
न हाथ मे चाबुक है
गण का मन भावुक है ;
एक साहूकार बाकी सब बेकार
जनता देश में करती हाहाकार
गणतंत्र में आवाज हुई गुम
शरीर बोझ से टूट चुका
वह बस तिरंगे को निहार रहा
देखो! आज गणतंत्र आया ।
यहाँ कहा – सुनी का दौर है
चिल्लाते बेरोजगारों का शोर है
चीखते बच्चियों की पुकार है
घुटन है छायी ; मची है कोहराम
बादल में घुप्प अँधेरा है
देखो!आज गणतंत्र आया है !
◆◆◆ ◆◆◆ ◆◆◆
chhattisgarhaaspaas
Previous Post SS फाउंडेशन
Next Post गणतंत्र दिवस
विज्ञापन (Advertisement)