कहानी : निरुपमा – आशा झा

1 year ago
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▪️ निरुपमा
– आशा झा [दुर्ग, छत्तीसगढ़]

निरुपमा आज बेहद खुश थी कारण आज उसकी बेटी अनिमा को समाज सेवा के क्षेत्र में विशिष्ट सेवा पुरस्कार राज्यपाल के हाथों मिलने वाला था । कार्यक्रम में उसे विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था । वह कार्यक्रम में जाने हेतु तैयार होते होते सोचने लगी काश उसके पति भी उसके साथ होते परंतु दूसरे पल सोचने लगी कि वह ऐसा क्यों सोच रही है कारण उसने स्वयं ही अपने पति से अलग रहने का निर्णय लिया था उस वक्त उसकी बेटी अनिमा मात्र दो साल की थी जब उसने अपने पति महेश से अपना रिश्ता तोड़ लिया था । और उस दिन से लेकर आज तक वह अपनी बेटी अनिमा के लिए माता और पिता दोनों का दायित्व बखूबी निभाती चली आ रही थी ।उसने अपनी बिटिया से कटु सत्य छुपा रखा था कि उसके पिता जिंदा है वह समझती थी कि उसके पिता बचपन में ही कल कवलित हो गए थे ।नजदीकी रिश्तेदारों में मात्र नानी और मौसी कभी-कभी आती थी उन्होंने भी अनिमा को सच से अनजान रखा । उम्र बढ़ने पर अनिमा ने यह सोचकर के पिता के बारे में पूछने पर माँ नाराज वह दुखी हो जाती है माँ से उनके बारे में जिक्र करना छोड़ दिया था निरुपमा और एनिमा दोनों अपनी छोटी सी दुनिया में खुश और मस्त थे। निरुपमा अपनी बेटी अनिमां की नजरों में आदर्श व चरित्रवान मां थी परंतु निरुपमा सच से अनभिज्ञ ना थी वह अच्छी तरह जानती थी अनिमा को आदर्श व चरित्रवान बेटी बनाने हेतु उसे किन-किन कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा था । कंघी करते-करते वहआईने के सामने जा खड़ी हुई अपने गाल का तिल देखते ही उसे अपना अतीत याद आने लगा ।इसी तिल के कारण वह सबको खूबसूरत नजर आती थी उसे बहुत अच्छी तरह याद है जैसे ही उसने जवानी की दहलीज पर कदम रखा बिरादरी के कई अच्छे घरों के लड़के उससे शादी करने के लिए लालायित होने लगे ।कारण निरुपमा के पिताजी उस समय प्रतिष्ठित कंपनी में कार्यरत थे ।सभी कुछ ठीक-ठाक चल रहा था परंतु अचानक परिस्थितियां बदलीं । पिताजी इस कदर बीमार पड़ गए कि उन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेना पड़ा । हाथ में पैसा आते ही उल्टी सीधी सलाह देने वाले दोस्तों की बन आई पिताजी ने अधिकांश जमा पूंजी धंधे व शेयर खरीदी बिक्री में लगा दी ।सब कुछ गंवाकर सेवा के छोटे धंधे में लग गए परंतु छोटे धंधे से इतने बड़े परिवार का पालन पोषण नहीं हो सकता था ।निरुपमा अपने पांच भाई बहनों में सबसे बड़ी थी वह किसी तरह अपनी पढ़ाई पूरी कर नौकरी की तलाश करने लगी । बहुत अधिक मेहनत मशक्कत के बाद उसे शासकीय संस्था में क्लर्क की नौकरी मिल गई ।घर में खुशियां पून : घर बनाने लग गई । निरुपमा घर व्यवस्थित तथा आर्थिक रूप से सुदृढ़ होते ही अपनी शादी के सपने देखने लगी । अन्य लड़कियों की तरह वह भी सोचने लगी कि अब उसके माता-पिता उसकी शादी की चिंता करने लगेंगे । परंतु उसकी आशा के विपरीत माँ तो उसकी शादी की चिंता अन्य रिश्तेदारों से करती हुई नजर आती थी परंतु पिताजी की जुबान पर कभी उसकी शादी का नाम नहीं आता था । माँ बहुत ज्यादा जिद करती तो निरुपमा अभी बहुत छोटी है शादी की क्या जल्दी है कह कर बात बदल देते ।एक दिन पिताजी जल्दी घर आ गए ।कैसे बाप हो तुम तुम्हें अपनी बेटी की शादी की कोई चिंता नहीं मां जोर-जोर से कहने लगी प्रति प्रत्युत्तर में पिताजी ने जो कुछ कहा सुनते ही निरुपमा के होश उड़ गए । पिताजी माँ से कह रहे थे तुम एकदम मूर्ख हो समझती नहीं हो यदि हम निरुपमा का ब्याह कर उसे ससुराल भेज देंगे तो हमारे घर का खर्च किस तरह चलेगा तुम चाहो तो छोटी अनुपमा की शादी की जा सकती है निरुपमा को अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था ।वह रात करवट बदलते हुए रोते-रोते बीत गई दूसरे दिन अनमने ढंग से हमेशा की तरह आफिस पहुंच गई । अभी तक वह जिस नौकरी को खेल समझकर आनंद अनुभूति के साथ कर रही थी वही नौकरी आज उसे बोझ लग रही थी । जिसे ढोने के लिए वह विवश थी । उसके अंतर्मन में पिताजी के प्रति श्रद्धा लुप्त होती जा रही थी ।देखते ही देखते उसकी आंखों के सामने उसकी छोटी बहन की शादी धूमधाम से कर उसे ससुराल भेज दिया गया निरुपमा झूठी व खोखली हंसी हंसते-हंसते खुश होने का ढोंग करते हुए मेहमानों का स्वागत करती रही । अपने पिता का मान रखने के लिए उसने सारा दोष अपने सर पर लेते हुए मेहमानों की शंकाओ का मैं अभी शादी नहीं करना चाहती हूं मैं आगे बढ़ना चाहती हूं कह कर समाधान कर दिया । मेहमानों के विदा लेते ही पुनः जिंदगी उसी ढर्रे पर चल पड़ी । उसके पिताजी के स्वार्थी व्यवहार ने उसे विद्रोही बना दिया था । अब वह प्रत्येक ऐसा कार्य करना चाहती थी जिससे उसे सुख मिले और पिताजी को दुख । वह इस तर्क के आधार पर स्वयं को सही सिद्ध कर अंतर्मन को शांत कर देती थी कि उसे भी अपने हिस्से का सुख लेने का हक है . ।धीरे-धीरे वह शांत स्वभाव की लड़की से स्वच्छंद प्रवृत्ति की लड़की बनती चली गई ।एक दिन उसके छोटे भाई को उसका दोस्त स्कूल से घर लेकर आया छोटे भाई के शरीर पर मारपीट के निशान थे निरुपमा ने घाव पर मरहम लगाते हुए छोटे भाई से प्यार से पूछा मारपीट क्यों हुई सच बताओ भाई ने तो उत्तर नहीं दिया परंतु उसके दोस्त ने प्यार से पूछने पर कहा दीदी रमेश ने तुम्हें बदचलन आवारा गंदी लड़की कहा इसलिए मदन ने गुस्से में आकर उसे खूब पीटा जवाब में उसने भी इसे खूब मारा सच जानते ही निरुपमा सर पर हाथ रख कर बैठ गई ।वह सोचने लगी अब उसे किसी न किसी से शादी करनी ही पड़ेगी चाहे वह विधुर या शादीशुदा ही क्यों न हो ।
उसने अपने मन की बात चचेरी बहन से कहीं उसने कहा दीदी मेरे ऑफिस में एक प्रवीण नाम का लड़का है उसकी पहली पत्नी का डिलीवरी के समय एक्सीडेंट हो जाने के कारण दोनों बच्चेदानी निकालना पड़ गया था जिसे अब वह कभी मां नहीं बन सकती इसलिए वह दूसरी शादी करना चाहता है ताकि उसे वंश चलाने के लिए वारिश मिल सके । कल तुम मेरे ऑफिस में चलना मैं उससे तुम्हारी मुलाकात कर दूंगी आगे तुम मोर्चा संभाल लेना इस तरह का मोर्चा संभालने में निरुपमा तो सिद्ध हस्त हो गई थी ।पहले दोस्ती फिर प्यार का नाम देकर शादी कर ली गई। निरूपमा को लगने लगा उसने रवि से शादी करने का निर्णय लेकर अपने लिये सुख के सारे द्वार खोल दिये है । . उसके द्वारा शादी से पहले की गई सारी गलतियां धुल गई हैं ।परंतु उसके मन का यह भ्रम अधिक दिन तक नहीं रह सका ।उसके पति को निरुपमा की कोख से कन्या का जन्म लेना नागवार गुजरा परंतु निरुपमा से मिलने वाली आर्थिक मदद को ध्यान में रख वह चुप रहा ।अनुपमाअपने पति के इन भावों से अनजान अपनी फूल सी सुंदर बिटिया के साथ अपने पति को देवता मानते हुए खुश थी।शादी का एक साल भी नहीं बीत पाया था कि रवि के बदले व्यवहार में अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया । अब रवि कई कई दिन निरूपमा के पास नहीं आता था पूछने पर गांव में खेती के कामकाज का बहाना बना देता था । उसकी गांव में रहने वाली पत्नी अपने पति की किसी भी बात पर आँख मूंदकर विश्वास कर लेती थी जबकि निरुपमा नौकरी पेशा व पढ़ी-लिखी होने के कारण उससे जवाब तलब करती रहती थी । यही कारण था कि उसका झुकाव पहली पत्नी की ओर पुनः हो गया था । पत्नि के व्यवहार से आशंकित निरुपमा प ति के उस दिन गांव जाते ही उसके पीछे पीछे चल पड़ी । घर में विनय के घुसते ही उसकी पहली पत्नि देर से आने के कारण नाराज होने लगी प्रत्युत्तर में विनय कहने लगा नाराज क्यों होती हो इतना भी नहीं समझती यदि मै निरुपमा को मोदक बनाकर उसे खुश नहीं रखूंगा तो इस घर का खर्च कैसे चलेगा ?मां और बेटी राधा का इलाज किस तरह से होगा ?मुझे व्यापार में भी घाटा हुआ है इसकी भरपाई मैं कहां से करूंगा ?जब तक सब कुछ ठीक-ठाक नहीं हो जाता तुम्हें उसे सहना ही पड़ेगा एक बार व्यापार में लाभ होने लग जाए फिर देखेंगे हमें क्या करना है ।निरुपमा के पैरों तले जमीन खिसक गई ।वह स्वयं को असक्त परित्यक्ता के रूप में देख रही थी ।इस वक्त उसने अपने जीवन का हम निर्णय लिया दूसरे दिन जब दफ्तर पहुंची तो उसके हाथ में ट्रांसफर हेतु आवेदन था जिसमें उसने किसी अन्य प्रदेश में ट्रांसफर की मांग की थी। उसने इस निर्णय के बारे में पति को भनक तक नहीं लगने दी ।किसी बात का शक ना हो यह सोचकर उसके द्वारा मांगी गई आर्थिक मदद को पूरा करती रही ।उसने अपने आफिसर व अपनी मां से इस बात का वादा लिया कि उसके पति को उसके स्थानांतरण की जगह ना बताई जाएऔर उसे यह कहकर भगा दिया जाए कि जब हमारी बेटी हमसे रिश्ता तोड़कर कहीं दूर चली गई तो तुम्हारा भी हमसे कोई रिश्ता नहीं है ।स्थानांतरण वाली जगह में निरुपमा की चाची रहती थी ।लोगों को उसके चाचा-चाची के द्वारा यह जानकारी दी गई कि उसके पति की एक्सीडेंट में मृत्यु हो गई है जीवन की सच्चाई तथा सचरित्र होने का महत्व उसे समझ में आ जाने के कारण वह विपरीत परिस्थितियों का द्धढ़ता के साथ मुकाबला करने में सफल रही ।पति वह परिवार से मोह भंग हो जाने के पश्चात वह अपना समय व्यतीत करने के लिए अच्छे लेखकों की पुस्तके पढ़ने लगी । पुस्तको ने दोस्ती का धर्म निभाया और निरुपमा को. जीवनपथ बनाम अग्निपथ पर चलने की हिम्मत दी। निरुपमा हिम्मती व चरित्रवान नौकरी पैसा महिला के रूप में पहचानी जाने लगी । उसने अपनी बेटी अनिमा को बचपन से ही सुसंस्कार दिए उसकी शिक्षा पर विशेष ध्यान देते हुए उसने साहित्य कला और संस्कृति के प्रति उसमें अभिरुचि जागृत की । अनिमा ने भी अपने माँ की मेहनत का मान रखते हुए जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता अर्जित कर माँ की झोली में खुशियां डाल दी ।वह विभिन्न गतिविधियों में भाग लेते हुए प्रसिद्ध समाज सेविका भी बन गई ।फलता आज इंदिरा गांधी जयंती के दिनों से राज्यपाल के हाथों रेड एंड व्हाईट पुरस्कार प्रदान किया जाना था । अचानक निरुपमा के कानों में अनिमा की तेज आवाज सुनाई थी मां जल्दी करो ना देर हो रही है कार्यक्रम शुरू हो जाएगा निरुपमा अतीत से वर्तमान में लौट आई । वस्तुस्थिति समझ में आते ही अभी आई बेटी आंख में कुछ चला गया था इसलिए देर हो गई कहते हुए वह तेजी से बाहर आकर बेटी अनिमा के साथ गाड़ी में बैठकर कार्यक्रम स्थल की ओर चल पड़ी जब उसकी बेटी को सम्मानित किया जा रहा था तब उसे महसूस हो रहा था मानो उसके सर से बदनामी का बोझ उतर गया हो । जिसके बोझ से वह इतने दिनों से दबी जा रही थी ।बहुत जल्दी आनेमा का हाथ मांगने योग्य वर रिश्ता लेकर घर आने लगे । अनुपमा ने अपने माता-पिता की गलतियों को ना दोहराते हुए एनिमा की शादी योग्य वर से सही समय पर कर दिया । अनिमा की विदाई करते समय निरुपमा को ऐसा लग रहा था मानो बदनामी का मैल धोकर वह स्वच्छ हो गई हो मानसिक बोझ के सिर से उतर जाने से उसने मन रूपी आसमान में खुशियों का घर बना लिया हो ।

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व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
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व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
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🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
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🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
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▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
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▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
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▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
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25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

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🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

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🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

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🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

राजनीति न्यूज़

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

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■छत्तीसगढ़ :

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भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

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भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
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स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

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छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

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राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
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प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

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ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

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अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
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सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

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हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

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पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन