- Home
- breaking
- international
- रूस से तेल खरीद पर अमेरिका का नया कदम, भारत पर दबाव बढ़ा तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है असर
रूस से तेल खरीद पर अमेरिका का नया कदम, भारत पर दबाव बढ़ा तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है असर

India US Relations: रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका ने प्रतिबंधों को और कड़ा करने की दिशा में कदम उठाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर नए प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक पर हस्ताक्षर कर उसे कानून का रूप दे दिया है। इस कानून के बाद अमेरिकी प्रशासन के पास रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए अतिरिक्त विकल्प मौजूद होंगे। भारत और चीन रूस से कच्चे तेल के बड़े खरीदारों में शामिल हैं, ऐसे में इस कदम का असर भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ने को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
भारत ने साफ किया अपना रुख

अमेरिकी कदम के बीच भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि देश अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रालय के अनुसार भारत अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा की खरीद करता है और बाजार की बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपने फैसले लेता रहेगा।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में इस मुद्दे को लेकर अमेरिका के अधिकारियों और प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तर पर चर्चा हुई है। भारत ने अमेरिका के सामने ऐसे किसी भी कदम के संभावित प्रभावों को स्पष्ट रूप से रखा है। भारत के अनुसार इसका असर केवल दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार इस घटनाक्रम से संभावित प्रभावों से निपटने के लिए भारतीय व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम करेगी।
भारतीय राजदूत ने भी बताई भारत की प्राथमिकता

अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने भी रूस से तेल खरीद को लेकर भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत के लिए लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है। उनके मुताबिक भारत ऊर्जा खरीद से जुड़े फैसले उपलब्धता, कीमत, बाजार की स्थिति और वाणिज्यिक व्यवहार्यता को ध्यान में रखकर करता है।
क्वात्रा ने बताया कि भारत अपनी जरूरत के 85 प्रतिशत से अधिक कच्चे तेल और करीब आधी प्राकृतिक गैस का आयात करता है। उन्होंने कहा कि हालिया संघर्षों के कारण जब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई, तब भारत ने अपने नागरिकों को ऊर्जा कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से बचाने के लिए कदम उठाए।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत मध्य पूर्व, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, यूरेशिया और अमेरिका समेत अलग-अलग क्षेत्रों के साझेदारों से ऊर्जा खरीदता है। भारत का कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए स्रोतों में विविधता बनाए रखना जरूरी है।
100 फीसदी टैरिफ लगाने का भी प्रावधान
पूर्व राजनयिक के.पी. फैबियन ने कहा है कि नए कानून के तहत राष्ट्रपति ट्रंप को रूस से बड़े पैमाने पर तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। रूस से ऊर्जा और अन्य सामान खरीदने वाले देशों को लेकर अमेरिकी नीति में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत और चीन की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसे में अगर अमेरिकी प्रशासन भारत पर अतिरिक्त शुल्क या अन्य आर्थिक प्रतिबंध लागू करता है, तो इसका असर दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों के साथ-साथ ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका के लिए भी आसान नहीं होगा फैसला
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ाने की अमेरिकी नीति के अपने आर्थिक प्रभाव
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)