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- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ : ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-93’ में शामिल हुए- बानी चक्रवर्ती,स्मृति दत्त,समरेंद्र विश्वास,दुलाल समाद्दार,पल्लव चटर्जी,गोविंद पाल,प्रकाशचंद्र मण्डल,बीरेंद्रनाथ सरकार,प्रदीप भट्टाचार्य,बृजेश मल्लिक,विपुल सेन,जीबन हालदार,निर्मेलेंदु डे,पं. बासुदेव भट्टाचार्य,सुबीर रॉय,रविंद्रनाथ देबनाथ,शंकर भट्टाचार्य, शिवमंगल सिंह और संतोष जाटव शामिल हुए. बांग्ला भाषा में साहित्यिक उन्नयन के लिए चर्चा एवं काव्य पाठ हुआ
‘बंगीय साहित्य संस्था’ : ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-93’ में शामिल हुए- बानी चक्रवर्ती,स्मृति दत्त,समरेंद्र विश्वास,दुलाल समाद्दार,पल्लव चटर्जी,गोविंद पाल,प्रकाशचंद्र मण्डल,बीरेंद्रनाथ सरकार,प्रदीप भट्टाचार्य,बृजेश मल्लिक,विपुल सेन,जीबन हालदार,निर्मेलेंदु डे,पं. बासुदेव भट्टाचार्य,सुबीर रॉय,रविंद्रनाथ देबनाथ,शंकर भट्टाचार्य, शिवमंगल सिंह और संतोष जाटव शामिल हुए. बांग्ला भाषा में साहित्यिक उन्नयन के लिए चर्चा एवं काव्य पाठ हुआ

👉 {बाएँ से प्रथम पंक्ति} प्रदीप भट्टाचार्य, संतोष जाटव, दुलाल समाद्दार, बानी चक्रवर्ती, पं. बासुदेब भट्टाचार्य, स्मृति दत्त, प्रकाशचंद्र मण्डल, शिवमंगल सिंह, सुबीर रॉय. {बाएँ से दूसरी पंक्ति} रविंद्रनाथ देबनाथ, समरेंद्र विश्वास, गोविंद पाल, वीरेंद्रनाथ सरकार, बृजेश मल्लिक, निर्मेलेंदु डे, जीबन हालदार, पल्लव चटर्जी, शंकर भट्टाचार्य और विपुल सेन.
‘छत्तीसगढ़ आसपास’ [भिलाई निवास,इंडियन कॉफी हाउस : 6 अगस्त,2025 : रिपोर्ट-प्रस्तुति प्रदीप भट्टाचार्य एवं फोटो क्लिक पल्लव चटर्जी]
विगत 65 वर्षों से इस्पात नगरी भिलाई में बांग्ला साहित्यिक, संस्कृति एवं सांस्कृतिक उद्देश्यों को लेकर संचालित ‘बंगीय साहित्य संस्था’ प्रतिमाह ‘साहित्य सभा’ और प्रति सप्ताह ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा’ का आयोजन बंगीय सदस्य करते हैं. इस कड़ी में आड्डा-93, 06 अगस्त, 2025 को भिलाई निवास के इंडियन कॉफी हाउस में सम्पन्न हुआ. इस विचार-विमर्श में बांग्ला भाषा एवं साहित्यिक उन्नयन के लिए चर्चा और देश, समाज,आध्यात्मिक व प्रगतिशील विषयों को लेकर काव्य पाठ हुआ. इस अवसर पर उपस्थित हुए- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की सभापति व बांग्ला-अंग्रेजी की सुपरिचित लेखिका कवयित्री बानी चक्रवर्ती, उप सभापति एवं देश की लब्धप्रतिष्ठित वयोवृद्ध लेखिका कवयित्री स्मृति दत्त, संस्था के संरक्षक एवं चर्चित बांग्ला लेखक कवि समरेंद्र विश्वास, बांग्ला में प्रकाशित लिटिल मेंगजिंन ‘मध्यबलय’ के संपादक व गंभीर कवि दुलाल समाद्दार, विचारवान कवि पल्लव चटर्जी, संस्था के सह-सचिव एवं बांग्ला-हिंदी के ख्यातलब्ध कवि नाट्यकार प्रकाशचंद्र मण्डल, संस्था के सलाहकार एवं बांग्ला-हिंदी के कवि गोविंद पाल, चिंतनशील कवि बीरेंद्रनाथ सरकार, ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक व प्रगतिशील कवि प्रदीप भट्टाचार्य, राष्ट्रवादी कवि बृजेश मल्लिक, बांग्ला-अंग्रेजी के लेखक निर्मेलेंदु डे, हिंदुत्ववादी कवि पं. बासुदेव भट्टाचार्य, बांग्ला के सुपरिचित कवि जीबन हालदार, विपुल सेन, ‘सुर-ओ-बाणी’ के संयोजक व समाजसेवी सुबीर रॉय, साहित्यिक चिंतक रविंद्रनाथ देबनाथ, शंकर भट्टाचार्य, हिंदी के प्रगतिशील कवि शिवमंगल सिंह और संतोष जाटव.

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बांग्ला और हिंदी में कविता पाठ उपस्थित रचनाकारों द्वारा किया गया. बांग्ला में कविता/अनु गोल्पो [लघु कथा] का पाठ किए – बानी चक्रवर्ती, स्मृति दत्त, समरेंद्र विश्वास, दुलाल समाद्दार,पल्लव चटर्जी, प्रकाशचंद्र मण्डल,गोविंद पाल, वीरेंद्रनाथ सरकार,जीबन हालदार, विपुल सेन, बृजेश मल्लिक, पं. बासुदेव भट्टाचार्य और निर्मेलेंदु डे. हिंदी में कविता पाठ किए- प्रदीप भट्टाचार्य, शिवमंगल सिंह, शंकर भट्टाचार्य और संतोष जाटव. संस्था के संदर्भ में अपनी बात रखते हुए सुबीर रॉय एवं रविंद्रनाथ देबनाथ ने कहा कि ऐसे आयोजन से साहित्य को जानने और समझने का अवसर मिलता है.

👉 [बाएँ से नीचे] विपुल सेन, जीबन हालदार और समरेंद्र विश्वास. [बाएँ से उपर] बृजेश मल्लिक, शिवमंगल सिंह, विपुल सेन, जीबन हालदार और समरेंद्र विश्वास.
• निर्मेलेंदु डे ने ‘उबेर ड्राइवर’ [लघु कथा]/ • जीबन हालदार ने ‘ऐमोन होले केमोन होबे’/ • विपुल सेन ने ‘मेघे ढाका पाहाड़’ और ‘शिक्षक दिवस’/ • बृजेश मल्लिक ने ‘हे जननी आमार बांग्ला…जननी जन्म भूमि’/ • वीरेंद्रनाथ सरकार ने ‘इंडलैंड लेटर [चिठी] और ‘एक पाहाड़ भालो बासा’ • पं. बासुदेव भट्टाचार्य ने ‘आघात कालेर 50 साल’ [आपातकाल के 50 वर्ष]/ • बानी चक्रवर्ती ने ‘अलौकिक बाती र घर’ और ‘ बानेर शेषे’/ • स्मृति दत्त ने शिक्षक दिवस पर समर्पित रचना ‘शिक्षक तुमी नतो होए आमी’ और तिल धुबड़ी’/ प्रकाशचंद्र मण्डल ने ‘केनो ऐतो करालो प्रक्रोती’ [क्यूँ प्रकृति ने ऐसा किया? ]/ गोविंद पाल ने ‘आंस्था कुड़े’/ • दुलाल समाद्दार ने ‘मध्यबलय’ में 25 वर्ष पूर्व में प्रकाशित कविता का पाठ किया. शीर्षक था- ‘सबाई की पारे’और विवेकानंद बोस की लिखित एक कविता ‘घूम भांगे’/ • पल्लव चटर्जी ने छोटी-छोटी 2 गंभीर रचना को पढ़ा. शीर्षक था- ‘वॉयरल’ एवं ‘कॉलगर्ल’. • समरेंद्र विश्वास ने ‘कोथाए पालाबे’ [कहाँ भागोगे].
• प्रदीप भट्टाचार्य ने छोटी- छोटी मुक्तक [1] पगडंडियां [2] व्हाट्सएप/ • शिवमंगल सिंह ने ‘मैं उन शब्दों को खोज रहा हूँ…’/ • शंकर भट्टाचार्य ने ‘लगभग खत्म’ और • संतोष जाटव ने ‘चाँद को पूजते- पूजते, चाँद में जा चुका इंसान…’

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इस अवसर पर निर्मेलेंदु डे ने अपनी कृति “नाना रंगे र गोल्बो” [बांग्ला] और “जीबन आमार चोलबे जेमोन” [बांग्ला] का अंग्रेजी अनुवाद “As My Life Goes On” by- Nirmalendu Dey ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सह-सचिव प्रकाशचंद्र मण्डल को सप्रेम भेंट में देते हुए कहा कि इस संग्रह को संस्था के सभी सदस्य बारी-बारी से पढ़ने के लिए दे रहा हूँ. [चित्र में बाएँ से] बानी चक्रवर्ती, कृतिकार निर्मेलेंदु डे, प्रकाशचंद्र मण्डल और प्रदीप भट्टाचार्य.
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आज के आड्डा-93 के सभापति निर्मेलेंदु डे, अध्यक्षता बानी चक्रवर्ती एवं विशिष्ट अतिथि समरेंद्र विश्वास थे. काव्य पाठ का संचालन प्रकाशचंद्र मण्डल और आभार व्यक्त स्मृति दत्त ने किया.
[ • रिपोर्ट by- प्रदीप भट्टाचार्य ]
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