बेटी दिवस पर दो कविताएं : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय सरायपाली, छत्तीसगढ़]
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बेटी

छोटी- बिटिया
सम्भालती है
घर को
माँ की तरह.
छोटे भाई की
पोंछती है नाक
झाडू-बुहारू
चौका- चूल्हा
आए- गए में
हाथ बटाती है
माँ का.
छुटकू को
सिखाती है
ऊंगली पकड़
चिन्हाती है
A B C D
अ आ इ ई
वन टू
एकदम
मैडम की तरह.
पिता की
छोटी- छोटी
जरूरतों के प्रति
सजग है
दादी की तरह.
बिटिया में
अंखुआ रही है
एक छोटी माँ
बिल्कुल वैसी ही
ठीक
मेरी मां की तरह।
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लड़कियां

लड़कियाँ
सुन्दर होती हैं|
सुन्दर लड़कियाँ
बात नहीं करतीं
अजनबियों से|
अजनबी
होते हैं पेड़ और
बह जाती हैं लड़कियाँ
नदी की तरह|
तट के पेड़
सूखने नहीं देते
नदी को
और नदी
दुलारती रहती है
जड़ों के
रेशे- रेशे|
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• संपर्क-
• 98265 61819
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chhattisgarhaaspaas
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