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‘बंगीय साहित्य संस्था’ : ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-96’ में शामिल हुए- स्मृति दत्त, दुलाल समाद्दार, प्रकाशचंद्र मण्डल, पल्लव चटर्जी, वीरेंद्रनाथ सरकार, बृजेश मल्लिक, आलोक कुमार चंदा, पं. बासुदेब भट्टाचार्य, जीबोन हालदार, विपुल सेन और रविंद्रनाथ देबनाथ : विजयादशमी की शुभकामना एवं काव्य पाठ हुआ

👉 [बाएँ से] दुलाल समाद्दार, रविंद्रनाथ देबनाथ, बृजेश मल्लिक, वीरेंद्रनाथ सरकार, आलोक कुमार चंदा, जीबोन हालदार, पं. बासुदेब भट्टाचार्य, स्मृति दत्त, विपुल सेन और प्रकाशचंद्र मण्डल.
‘छत्तीसगढ़ आसपास’ [भिलाई निवास,इंडियन कॉफी हाउस : 4 सितम्बर,2025 : रिपोर्ट-प्रस्तुति दुलाल समाद्दार एवं फोटो क्लिक पल्लव चटर्जी]
विगत 65 वर्षों से इस्पात नगरी भिलाई में बांग्ला साहित्यिक, संस्कृति एवं सांस्कृतिक उद्देश्यों को लेकर संचालित ‘बंगीय साहित्य संस्था’ प्रतिमाह ‘साहित्य सभा’ और प्रति सप्ताह ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा’ का आयोजन बंगीय सदस्य करते हैं. इस कड़ी में आड्डा-96, 04 सितम्बर, 2025 को भिलाई निवास के इंडियन कॉफी हाउस में सम्पन्न हुआ. इस विचार-विमर्श में बांग्ला भाषा एवं साहित्यिक उन्नयन के लिए चर्चा और देश, समाज, आध्यात्मिक व प्रगतिशील विषयों को लेकर काव्य पाठ हुआ. सदस्यों ने सबसे पहले एक- दूसरे को विजयादशमी की बधाई दी. इस अवसर पर उपस्थित हुए- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उप सभापति एवं देश की लब्धप्रतिष्ठित वयोवृद्ध लेखिका कवयित्री स्मृति दत्त, बांग्ला में प्रकाशित लिटिल मेंगजिंन ‘मध्यबलय’ के संपादक व गंभीर कवि दुलाल समाद्दार, विचारवान कवि पल्लव चटर्जी, संस्था के सह-सचिव एवं बांग्ला-हिंदी के ख्यातलब्ध कवि नाट्यकार प्रकाशचंद्र मण्डल, चिंतनशील कवि बीरेंद्रनाथ सरकार, राष्ट्रवादी कवि बृजेश मल्लिक, हिंदुत्ववादी कवि पं. बासुदेव भट्टाचार्य, बांग्ला के सुपरिचित कवि जीबोन हालदार, विपुल सेन, साहित्यिक चिंतक व समाजसेवी आलोक कुमार चंदा और रविंद्रनाथ देबनाथ.
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आज सम्पन्न हुए आड्डा-96 की अध्यक्षता श्रीमती स्मृति दत्त ने किया. काव्य पाठ का संचालन प्रकाशचंद्र मण्डल और आभार व्यक्त पल्लव चटर्जी द्वारा किया गया.
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काव्य पाठ स्मृति दत्त, दुलाल समाद्दार, पल्लव चटर्जी, प्रकाशचंद्र मण्डल, वीरेंद्रनाथ सरकार, जीबोन हालदार, विपुल सेन, बृजेश मल्लिक, पं. बासुदेब भट्टाचार्य और आलोक कुमार चंदा ने किया. रविंद्रनाथ देबनाथ ने साहित्यिक आड्डा पर अपने विचार व्यक्त किए.

👉 • दुलाल समाद्दार ने ‘मध्य- बलय’ [वर्ष-2016] में प्रकाशित हुई कुछ अनु कविता और ‘भय’ शीर्षक से कविता का पाठ किया.
• जीबोन हालदार ने ‘पंखे की सहिष्णुता’ और ‘टेलीफोन का संकट’/ • विपुल सेन ने ‘जीवन रंगमंचों’ और ‘ईश्वरेर खोजें’/ • पं. बासुदेब भट्टाचार्य ने ‘बिरह’/ • पल्लव चटर्जी ने ‘शुभो बिजोया’ • बृजेश मल्लिक ने ‘छोटी सी जिंदगी’, ‘जीबन एमोन छोटो केनो’ और ‘रॉबोण बध’/ • बीरेंद्रनाथ सरकार ने अपनी कृति ‘अभागी का स्वर्ग’ से कुछ रचनाएँ और एक कविता ‘स्मृति’/ • आलोक कुमार चंदा ने ‘जे भाबे प्रेम’/ • प्रकाशचंद्र मण्डल ने ‘फिरिए दाओ विजयार दिन गुलि…’/ •जीबोन हालदार ने छंदों कविता और अंत में •स्मृति दत्त ने ‘बिजोयादशमी’ एवं ‘नीलकंठेर दु:खों शब्दबाण’ का पाठ किया गया.
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[ • रपट प्रस्तुति- दुलाल समाद्दार और फोटो सौजन्य- पल्लव चटर्जी ]
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