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विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

11 months ago
1129

भाई दूज : संवेदना और आत्मीयता का उत्सव है

– भावना संजीव ठाकुर
[ रायपुर, छत्तीसगढ़ ]

भाई दूज, जिसे भ्रातृ द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है, दीपावली के उत्सवों की श्रृंखला का अंतिम और अत्यंत भावनात्मक पर्व है। यह दिन केवल धार्मिक कर्मकांडों तक सीमित नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में निहित उस गहन संवेदना का प्रतीक है जो भाई-बहन के पवित्र स्नेह और परस्पर दायित्व को दर्शाती है। सनातन धर्म में इसे नारी के स्नेह और पुरुष के संरक्षण धर्म के संतुलन का आदर्श दिन कहा गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यमराज ने अपनी बहन यमुनाजी के आग्रह पर इस दिन उसे दर्शन दिए और वरदान दिया कि जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर आएगा और बहन उसके तिलक करेगी, वह दीर्घायु होगा, भयमुक्त रहेगा और समृद्धि प्राप्त करेगा। इसी से यह परंपरा आरंभ हुई। यम और यमुना का यह मिलन केवल भाई-बहन का स्नेह नहीं, बल्कि कर्तव्य और करुणा के मिलन का प्रतीक है — जहाँ यम मृत्यु के देवता हैं और यमुना जीवनदायिनी नदी, यह पर्व जीवन और मृत्यु के बीच पवित्र भावनात्मक संतुलन का संदेश देता है।
भाई दूज का उल्लेख स्कंद पुराण और पद्म पुराण जैसे ग्रंथों में भी मिलता है, जहाँ इसे “भ्रातृ द्वितीया” कहा गया है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के दीर्घ जीवन, आरोग्य और समृद्धि की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहनों को सुरक्षा और स्नेह का वचन देते हैं। यह संबंध केवल जन्मगत नहीं, बल्कि भावनात्मक और आध्यात्मिक है।
भाई दूज बहन की आराधना और भाई के दायित्व का पर्व है। सनातन परंपरा में स्त्री को शक्ति स्वरूपा कहा गया है। वह जीवन में सृजन, करुणा और संस्कार की जननी है। भाई दूज इसी भावना को पुनर्जीवित करता है। यह बहन के मंगलकामना और आत्मीय संरक्षण का प्रतिरूप है। तिलक लगाना केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि बहन का यह संदेश है — “तू जहां भी रहे, ईश्वर तेरे हर संकट को हर ले।” वहीं भाई का उत्तर — “तेरे स्नेह की रक्षा मेरा धर्म है।”
यह आदान-प्रदान वस्तुओं का नहीं, संवेदनाओं का सौदा है — एक सुरक्षा का वचन और एक आशीर्वाद का संकल्प।आधुनिक युग में इसकी प्रासंगिकता बहुत महत्वपूर्ण है। आज जब सामाजिक ढांचे में संयुक्त परिवार का स्वरूप बदल चुका है, और रिश्ते अक्सर डिजिटल संवादों तक सीमित हो रहे हैं, तब भाई दूज जैसे पर्व हमें अपने मूल संस्कारों की याद दिलाते हैं। यह दिन हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि रिश्ते केवल संदेशों से नहीं, समय और संवेदना से जीवित रहते हैं। आधुनिक युग में भाई दूज की प्रासंगिकता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि यह हमें भाई-बहन के बीच भावनात्मक सुरक्षा का स्मरण कराता है। यह केवल भाई के संरक्षण का दिन नहीं, बल्कि दोनों के समान भाव के पुनर्पुष्टि का पर्व है। अब बहनें भी अपने भाइयों के लिए आशीर्वाद देती हैं, और कई स्थानों पर भाई भी बहनों के माथे पर तिलक लगाते हैं — यह संकेत है कि प्रेम का यह बंधन परस्पर है, एकतरफा नहीं।सोशल मीडिया और शहरी व्यस्तता के बीच यह पर्व एक भावनात्मक ठहराव बनकर आता है। यह स्मरण कराता है कि पारिवारिक संबंधों का अर्थ केवल रक्त नहीं, बल्कि आत्मीयता, विश्वास और त्याग से है।
भाई दूज केवल व्यक्तिगत संबंध का पर्व नहीं, बल्कि समाज के संतुलन का भी प्रतीक है। सनातन विचारधारा में परिवार ही समाज की मूल इकाई है, और भाई-बहन का संबंध उसकी सबसे कोमल और स्थायी डोर। जब बहनें अपने भाइयों की दीर्घायु की कामना करती हैं, तो वह केवल अपने परिवार की नहीं, बल्कि समाज की सुरक्षा का भी आशीर्वाद देती हैं।इस दिन गाँव-शहरों में बहनों का स्नेहिल साज-सिंगार, भाइयों का उपहार लेकर पहुँचना, पारंपरिक व्यंजन — ये सब मिलकर एक ऐसी संस्कृति का उत्सव बनाते हैं जो केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानवीय रिश्तों का उत्सव है।
भाई दूज हमें यह सिखाता है कि संबंधों की पवित्रता समय और परिस्थिति से नहीं बदलती। सनातन धर्म की यही विशेषता है — वह परंपराओं को रूढ़ि नहीं बनने देता, उन्हें जीवनमूल्य बना देता है।आज जब रिश्ते औपचारिकता में सिमटते जा रहे हैं, भाई दूज हमें स्नेह, संरक्षण और आत्मीयता का सजीव उदाहरण देता है। यह केवल बहन के तिलक या भाई के उपहार का पर्व नहीं, बल्कि उस भावना का उत्सव है जो कहती है —
“जहाँ प्रेम है, वहीं धर्म है; जहाँ स्नेह है, वहीं सनातनता है।”
पौराणिक आधार पर रक्षाबंधन और भाई दूज की मान्यता। इसकी जड़ें कई कथाओं से जुड़ी हैं — इंद्राणी और इंद्र, रानी कर्णावती और हुमायूँ, द्रौपदी और कृष्ण, यशोदा और बलराम जहाँ राखी एक रक्षा सूत्र के रूप में बंधी और उसने संकट के समय सुरक्षा का प्रतीक रूप लिया।
यहाँ मुख्य भाव “संकट से रक्षा” का है।
वहीं भाई दूज का आधार यमराज और यमुना की कथा में निहित है। इस दिन यम अपनी बहन यमुना के घर जाते हैं और उसे वरदान देते हैं कि जो भाई इस दिन अपनी बहन से तिलक करवाएगा, वह दीर्घायु, भयमुक्त और समृद्ध रहेगा।
यहाँ भाव “आशीर्वाद और आत्मीयता” का है — यह पर्व केवल रक्षा नहीं, बल्कि जीवन और करुणा के संतुलन का प्रतीक है ।राखी में बहन रक्षा सूत्र बांधती है एक प्रतीक कि भाई उसकी रक्षा करेगा, चाहे कैसी भी परिस्थिति हो। यहाँ भाई “रक्षक” और बहन “आश्रित” प्रतीक के रूप में है।
भाई दूज में बहन तिलक करती है, आरती उतारती है, और भाई को दीर्घायु का आशीर्वाद देती है।यहाँ बहन “आशीर्वाद देने वाली”, “करुणा स्वरूपा” बनती है — और भाई “श्रद्धा और कृतज्ञता” का प्रतीक। अर्थात, राखी में बहन संरक्षण मांगती है,
जबकि भाई दूज में बहन संरक्षण का आशीर्वाद देती है। राखी का पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा को आता है वर्षा ऋतु का मध्य, जब प्रकृति उमंग और उत्साह से भरी होती है। इसका भावनात्मक स्वर प्रेम और कर्तव्य के बीच की एक नई शुरुआत है।
भाई दूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है — दीपावली के बाद, जब वातावरण में शुद्धता, आत्मचिंतन और कृतज्ञता का भाव होता है।यह पर्व उत्सव के समापन पर आत्मीयता के विस्तार का प्रतीक है  जैसे दीपावली के उजालों के बीच संबंधों की लौ फिर से प्रज्वलित होती है। रक्षा बंधन एक सामाजिक बंधन का उत्सव है — इसमें रक्त संबंध न होने पर भी बहनें रक्षा सूत्र बांध सकती हैं। यह समाज में विश्वास, एकता और परस्पर सुरक्षा का प्रतीक है।भाई दूज अधिक पारिवारिक और निजी संबंध का पर्व है यह मुख्यतः जन्मजात भाई-बहनों के बीच ही मनाया जाता है। इसमें भावनात्मक गहराई और आत्मीय स्नेह प्रमुख होता है
राखी: रक्षा सूत्र = बंधन, वचन, सुरक्षा भाई दूज: तिलक = आशीर्वाद, करुणा, जीवन-संवेदना
राखी कर्तव्य का उत्सव है,भाई दूज संवेदना और आत्मीयता का उत्सव है आधुनिक युग में भाई दूज का विशेष महत्व है। आज जब संबंधों में दूरी और व्यस्तता बढ़ रही है, भाई दूज संवाद और निकटता का अवसर देता है।
यह हमें याद दिलाता है कि रिश्ते केवल संरक्षण से नहीं, संवेदना से जीवित रहते हैं।भाई दूज इस मायने में अधिक गहन है क्योंकि यह परंपरा को भावनात्मक रूप में पुनर्स्थापित करता है —यह बताता है कि “भाई-बहन का संबंध केवल रक्षा का अनुबंध नहीं, बल्कि आत्मीयता का अनुबंध है।”
राखी हमें सुरक्षा का भाव सिखाती है,
भाई दूज हमें स्नेह की गहराई सिखाता है।राखी जहाँ “बंधन” का प्रतीक है,
वहीं भाई दूज “बंधन से परे आत्मीयता” का पर्व।दोनों पर्व एक ही वृक्ष की दो शाखाएँ हैं एक सुरक्षा की, दूसरी संवेदना की।और यही सनातन धर्म का सौंदर्य है,जहाँ हर पर्व केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन के रिश्तों को जीने की कला सिखाता है।

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🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

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🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

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🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

राजनीति न्यूज़

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

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■छत्तीसगढ़ :

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भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

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भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
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धमतरी आसपास

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स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

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छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

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राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
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मरवाही उपचुनाव

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प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

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ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

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अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
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सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

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हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

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पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन