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विमोचन : बाल गीतकार कमलेश चंद्राकर की कृति ‘मम्मा मेरी सुनो जरा’ का विमोचन नई दिल्ली से पधारे प्रख्यात बाल साहित्यकार दिविक रमेश के मुख्य आथित्य में सम्पन्न हुआ : इस अवसर पर दिविक रमेश ने कहा “बच्चों की परवरिश और संस्कार देने में अहम भूमिका निभाता है बाल साहित्य”

[बाएँ से] 👉 • डॉ. परदेशीराम वर्मा, डॉ. सुधीर शर्मा, रवि श्रीवास्तव, दिविक रमेश, कमलेश चंद्राकर, विनोद साव, गिरीश पंकज और गुलबीर सिंह भाटिया
छत्तीसगढ़ आसपास
भिलाई
‘अगासदिया’ एवं ‘वैभव प्रकाशन’ के संयुक्त तत्वावधान में बाल कवि के रूप में चर्चित कमलेश चंद्राकर के पांचवें सुंदर, सरस, सुमधुर एवं रोचक बाल गीत संग्रह ‘मम्मा मेरी सुनो जरा’ का विमोचन बीते दिनों ‘भिलाई निवास’ के ‘इंडियन कॉफी हाउस’ सभागार में अंतर्राष्ट्रीय बाल साहित्यकार दिविक रमेश [नई दिल्ली] के करकमलों से सम्पन्न हुआ.
विमोचन समारोह के मुख्य अतिथि दिविक रमेश ने मौजूदा दौर में बाल साहित्य की दशा और दिशा पर अपनी बात रखते हुए बोले कि-

👉 • दिविक रमेश कृति ‘मम्मा मेरी सुनो जरा’ पर बोले कि “बाल गीतों की शैली जहाँ-जहाँ सहज संवादात्मक है, वहाँ-वहाँ रचना और अधिक पठनीय, रोचक हो गई है”
कमलेश चंद्राकर छत्तीसगढ़ से हैं. बाल साहित्य और छत्तीसगढ़ की बात हो तो स्व. नारायणलाल परमार की सहज याद आना स्वाभाविक है. बाल साहित्य सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है बल्कि यह बच्चों की परवरिश और उन्हें संस्कार देने में अहम भूमिका निभाता है. कमलेश चंद्राकर की रचनाओं को पढ़कर साफ समझा जा सकता है कि वे इस सच को गहराई से समझते हैं, इसलिए उनके यहाँ प्राय: गढ़ना नहीं है बल्कि रचना है. पाठक उनके यहां इसलिए अभिव्यक्तिगत सहजता से अभिभूत होता है. अपने पहले संकलन ‘दादी अम्मा गई किधर’ से ही कमलेश चंद्राकर ने रचनाधर्मिता की अपनी क्षमता से परिचित करा दिया था. दो उदाहरण प्रमाण के लिए पर्याप्त है – “ये बाबू का, वो बाबू का/सारा, सब-कुछ बाबू का/ना दीदी का, ना भैया का/ना पापा, ना दादू का” “ये लो छूटी मेरी नाव/जाएगी नानी के गांव/नानी बैठ के आएगी/खेल- खिलौने लाएगी”. चित्र और साज-सज्जा की दृष्टि से भी अन्य संग्रहों सहित कमलेश चंद्राकर का नवीनतम संग्रह ‘मम्मा मेरी सुनो जरा’ भी आकर्षक और स्मद्ध है.
[ • दिविक रमेश द्वारा कृति पर पूरी समीक्षा ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के दूसरे लिंक को खोलकर पढ़ सकते हैं ]
विमोचन पश्चात कमलेश चंद्राकर ने कृति ‘मम्मा मेरी सुनो जरा’ में से कुछ गीतों का सस्वर पाठ किया-


👉 • कृतिकार कमलेश चंद्राकर कृति में से कुछ रचनाओं का पाठ करते हुए…
•औ ना, पौ ना, बम बुक, हौ ना/ दादू सो गए बिछोना/ना, ना, ना, ना हमें न चाही/दादू फिर क्या खेल-खिलौना.
•झम, झम, झम, झम, झक, झम्मा/क्या खाऊँ कुछ है मम्मा/पहले खा फिर पढ़ लेना/बोल रही दादी अम्मा.
•ढम, ढम, ढम, ढम धिनक, धिनक/चल रे ठबुआ बिना झिझक/बबुआ मेरा राजा है/मुंह ना ताके ठिठक-ठिठक.
•हम्मा, हम्मा आ हम्मा/बुला रही तुमको मम्मा/ये लो रोटी, पानी भी/डर मत और ही ना शरमा.
•चपड़म चू भई चपड़म चू/माल उड़ाकर हो गया छू/हो गया छू पर बचा कहां/पकड़ लिया जो पकड़म पू.
विमोचन कार्यक्रम की अध्यक्षता ‘अगासदिया’ के अध्यक्ष व कथाकार डॉ. परदेशीराम वर्मा ने किया. विशिष्ट अतिथि थे- ‘छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य सम्मेलन’ के प्रांतीय अध्यक्ष व वरिष्ठ साहित्यकार रवि श्रीवास्तव और ‘सद्भावना दर्पण’ के संपादक गिरीश पंकज थे. मुख्य वक्ता वरिष्ठ व्यंग्यकार गुलबीर सिंह भाटिया और सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार विनोद साव थे. कृति की समीक्षा डॉ. सुधीर शर्मा ने किया.
अतिथियों ने मूल रूप से इस बात पर चिंता जताई कि बाल साहित्य पर ज्यादा चर्चा नहीं होती. जरूरत है कि बाल साहित्य पर सम्मेलन हो और इस पर विमर्श हो. रवि श्रीवास्तव ने सरकार का ध्यान भी इस ओर दिलाया कि शासन बाल साहित्यकार को कोई पुरस्कार भी आज तक नहीं दिया. यह विचारणीय प्रश्न भी है?
शुरूआत में कमलेश चंद्राकर की बेटी ऋतुपर्णा चंद्राकर ने सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया. कलाकार राजेंद्र साहू ने छत्तीसगढ़ महतारी वंदन गीत प्रस्तुत किया.
कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. सोनाली चक्रवर्ती ने किया और आभार व्यक्त शिक्षाविद् प्रो. [डॉ.] डीएन शर्मा ने किया.
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विमोचन कार्यक्रम की कुछ प्रमुख सचित्र झलकियाँ-

👉 • कृतिकार कमलेश चंद्राकर का सम्मान

👉 • ‘अगासदिया’ और ‘वैभव प्रकाशन’ ने संयुक्त रूप से कमलेश चंद्राकार को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया

👉 • राजेंद्र साहू छत्तीसगढ़ी महतारी वंदन का गायन प्रस्तुत किया

👉 • कमलेश चंद्राकर परिवार की तरफ से डॉ. सोनाली चक्रवर्ती का अभिनंदन किया गया
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आयोजन में कमलेश चंद्राकर परिवार के अलावा लेखक, पत्रकार एवं बुद्धिजीवी व गणमान्य लोग उपस्थित हुए. कुछ प्रमुखजन-

डॉ. महेशचंद्र शर्मा, प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य, ‘आरंभ’ की कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. रजनी नेलसन, प्रकाशचंद्र मण्डल, त्रमबयक राव साटकर ‘अंबर’, शिवमंगल सिंह, विद्या गुप्ता, यश ओबेरॉय, बलदाऊ राम साहू, सरला शर्मा, वीरेंद्र सरल, विजय वर्तमान, शरद कोकास, पत्रकार मो. जाकिर हुसैन, ‘कला परंपरा’ के संपादक डॉ. डीपी देशमुख, डॉ. संजय दानी, नागेंद्र वर्मा, चित्रकार हरिसेन, प्रशांत कानसकर, जोश एंथोनी और शुचि भवि.

👉 • कमलेश चंद्राकर परिवार की तरफ से श्रीमती शारदा चंद्राकर, अस्मिता चंद्राकर, स्वातिबाला दिल्लीवार, अशेष कुंतल चंद्राकर और रितुपर्णा चंद्राकर भी उपस्थित रहे.

👉 [प्रथम पंक्ति में बाएँ से] • डॉ. महेशचंद्र शर्मा, बलदाऊ राम साहू और प्रकाशचंद्र मण्डल

👉 [बाएँ से] • डॉ. महेशचंद्र शर्मा, बलदाऊ राम साहू, प्रदीप भट्टाचार्य, प्रकाशचंद्र मण्डल और डॉ. डीएन शर्मा

👉 • इस अवसर पर प्रख्यात आलोचक प्रो. सियाराम शर्मा भी उपस्थित थे.
[ • प्रस्तुति व रिपोर्ट : प्रदीप भट्टाचार्य ]
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