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- ‘प्राचीन बैंकुंठधाम मंदिर माता श्रृंगार समिति’ के तत्वावधान में सर्वधर्म समभाव का प्रतीक मंदिर परिसर में माला सिंह एवं नवेद रजा दुर्गवी के संयोजन व परिकल्पना में तथा कैलाश जैन बरमेचा, मंजू जैन व मंदिर महाराज स्वामीजी तीरथ सिंह की आथिथ्य एवं प्रदीप भट्टाचार्य की अध्यक्षता में भव्य काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह सम्पन्न हुआ
‘प्राचीन बैंकुंठधाम मंदिर माता श्रृंगार समिति’ के तत्वावधान में सर्वधर्म समभाव का प्रतीक मंदिर परिसर में माला सिंह एवं नवेद रजा दुर्गवी के संयोजन व परिकल्पना में तथा कैलाश जैन बरमेचा, मंजू जैन व मंदिर महाराज स्वामीजी तीरथ सिंह की आथिथ्य एवं प्रदीप भट्टाचार्य की अध्यक्षता में भव्य काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह सम्पन्न हुआ

👉 • कार्यक्रम संयोजिका कवयित्री माला सिंह आयोजिकी व्यक्तव्य देते हुए…

👉 [बाएँ से] • प्रदीप भट्टाचार्य, कैलाश जैन बरमेचा और मंजू जैन
• छत्तीसगढ़ आसपास
• छत्तीसगढ़ [भिलाई]
भिलाई मरोदा-नेवई स्थित “बैकुंठधाम डेम हनुमान मंदिर समिति” के सौजन्य से ‘प्राचीन बैकुंठधाम मंदिर माता श्रृंगार समिति’ के तत्वावधान में संयोजक एवं ओज की राष्ट्रभक्त कवयित्री माला सिंह एवं शायर नवेद रजा दुर्गवी के सहयोग से भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ.
12 अप्रैल, 2026 को अपराह्न 2.30 बजे प्रारंभ हुए काव्य गोष्ठी के मुख्य अतिथि समाजसेवी लेखक एवं ‘आरंभ’ के मुख्य संरक्षक कैलाश जैन बरमेचा थे एवं विशिष्ट अतिथि मंजू जैन थीं. कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष व प्रगतिशील कवि-पत्रकार प्रदीप भट्टाचार्य ने किया.
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के पूजा अर्चना से हुई. माँ सरस्वती की वंदना मोहम्मद हुसैन माजाहिर रायपुरी के सु-मधुर प्रस्तुतिकरण से हुआ.
स्वागत उद्बोधन कार्यक्रम संयोजिका कवयित्री माला सिंह ने दिया. कुशल संचालन परिकल्पना शायर नवेद रजा दुर्गवी ने किया.

👉 • माँ सरस्वती की पूजा अर्चना करते हुए अतिथि
कैलाश जैन बरमेचा ने आयोजन की प्रशंसा करते हुए बोले कि-

ऐसे साहित्यिक आयोजन से लिखने वालों को भी हौसलाअफजाई होती है. कवि-लेखक कोई छोटा-बड़ा नहीं होता. रचना से व्यक्ति की पहचान होती है. आप सब समाज के स्तम्भ हैं. मैं साहित्य में अपना कुछ योगदान देकर आत्मसंतुष्टि पाता हूँ. यहाँ जितने रचनाकार हैं सबकी रचनाओं में संवेदना है, संवेदनशील है. समाज को दिशा देने में समर्थ है.
प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि-

भिलाई-दुर्ग के ऊर्जावान साहित्यकारों बुद्धिजीवी, 21 लोगों ने कैलाश जैन बरमेचा के मुख्य संरक्षक एवं मुख्य सलाहकार डॉ. महेशचंद्र शर्मा के नेतृत्व में प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ की नींव रखी. हमारी संस्था रचनाकारों को मंच प्रदान करेगी और उनके लेखन को प्रोत्साहित भी करेगी. ‘आरंभ’ एक सशक्त मंच भी होगा. हमें सम्मान के पीछे नहीं जाना चाहिए, रचना को तराशना चाहिए. विश्व प्रसिद्ध कथाकार प्रेमचंद कभी सम्मान के पीछे भागे नहीं और आज कालजयी हैं. कविताओं में समय, समाज और जीवन से जुड़े छोटे-छोटे प्रसंगों को व्यापाक संदर्भ से जोड़कर कविता लिखें, यही रचनाएँ जीवंत होती है. “भोर की पहली किरण को पी सको तो ही सबेरा पी सकोगे/नीलकंठी कंठ अपना कर सको तो ही धरा पर जी सकोगे”
प्रदीप भट्टाचार्य ने ‘आरंभ’ की तरफ से नवेद रजा दुर्गवी को उनके उत्कृष्ट व कुशल संचालन के लिए नगद राशि देकर सम्मानित किया.
इस भव्य काव्य गोष्ठी में दुर्ग-भिलाई, रायपुर एवं राजनांदगांव से लगभग 30-40 कवियों व शायरों ने भाग लिया.
इस अवसर पर मंदिर समिति की ओर से कैलाश जैन बरमेचा, मंजू जैन, प्रदीप भट्टाचार्य, नवेद रजा दुर्गवी और माला सिंह का शॉल, श्रीफल एवं सम्मान पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया.

👉 • कैलाश जैन बरमेचा का स्वागत अभिनंदन करती हुई कार्यक्रम संयोजिका माला सिंह

👉 • प्रदीप भट्टाचार्य का मंदिर समिति द्वारा अभिनंदन किया…

👉 • नवेद रजा दुर्गवी को सम्मानित करते हुए स्वामी तीर्थ सिंह जी एवं अतिथि


आयोजन में लेखक, कवि, कवयित्री, पत्रकार, बुद्धिजीवी एवं मंदिर समिति के अनेक प्रबुद्धजन उपस्थित हुए-

👉 उपस्थित रचनाकार [प्रथम पंक्ति में बैठे हुए, बाएँ से] • गिरीश द्विवेदी ‘गिरीश’, शशि प्रभा गुप्ता, डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’, प्रकाशचंद्र मण्डल और ब्रजेश मल्लिक

👉 [बाएँ से] • ब्रजेश मल्लिक, प्रकाशचंद्र मण्डल और प्रदीप भट्टाचार्य

👉 • मंदिर प्रांगण में उपस्थित साहित्यकार
प्रकाशचंद्र मण्डल, ब्रजेश मल्लिक, घनश्याम सोनी, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, मोहम्मद हुसैन माजाहिर रायपुरी, बैकुंठ महानंद, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’, राकेश गुप्ता ‘रूसिया’, सुशील यादव, श्रीमती शशिप्रभा गुप्ता, आशा देवी गुप्ता, इस्माइल आजाद, हाजी रियाज खान गौहर, टीआर कोशरिया ‘अलकहरा’, नीलम जायसवाल, ओमप्रकाश जायसवाल, चंद्रकुमार बर्मन, डॉ. यशवंत सूर्यवंशी ‘यश’, सतीश शांति मोहन, मोनु रंजन भोई, सुरेश कुमार बंछोर ‘अभ्याअर्थी’, डॉ. संजय दानी, प्रदीप कुमार पाण्डेय, अनिल राय ‘भारत’, सोनिया सोनी, फरीदा शाहीन और अन्य. नवेद रजा दुर्गवी, माला सिंह और प्रदीप भट्टाचार्य ने भी काव्य पाठ किया.
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कुछ प्रमुख रचनाकारों द्वारा प्रस्तुत की गई रचना की पंक्तियां-

👉 • ‘आरंभ’ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं राष्ट्रवादी कवि ब्रजेश मल्लिक ने ‘पिता’ पर एक मार्मिक कविता का पाठ किया

👉 • ‘आरंभ’ के कोषाध्यक्ष एवं कवि प्रकाशचंद्र मण्डल ने जीवन की यथार्थता पर एक कविता का पाठ किया

👉 • ग़ज़लकार सुशील यादव ने ग़ज़ल की बखूबी प्रस्तुति दी
रुको पथिक तुम कहाँ जा रहे हो/मैली शरीर दुःखी मन से/फटे पुराने शरीर लेकर/जीव के अंतिम क्षण में/खंडहर से झरता हुआ मिट्टी जैसे…
– प्रकाशचंद्र मण्डल
रहम करता नहीं जालिम ना अफसोस होता है/उस मजलूम पे लानत जो खामोश होता है…
– राकेश गुप्ता ‘रुसिया’
हमारी सांस चल रही मगर कहीं हवा नहीं/अभी हमारे ख्वाब में/ कहीं तो ‘पर’ लगा नहीं…
– सुशील यादव
हम आज जहाँ हैं/वहाँ से और ऊँचा उठे/यही हम हमारा उद्देश्य है…
– शशिप्रभा गुप्ता
खाली हाथों में ही किस्मत तो नहीं होती है/मेहनतों से ही लकीरें ये बदल जाती है/तुम अगर ख्वाब हकीकत में बदलना चाहो/रात की नींद भी आँखों से निकल जाती है…
– फरीदा शाहीन

👉 • फरीदा शाहीन ने एक बेहतरीन ग़ज़ल की प्रस्तुति देकर समाँ बांधा

👉 • शशिप्रभा गुप्ता काव्य पाठ करती हुई

👉 • राकेश गुप्ता ‘रुसिया’ ने भी एक उत्कृष्ट रचना को पढ़ा
इस अर्पण में कुछ और नहीं/केवल उत्सर्ग झलकता है/मैं दे दूँ और कुछ न लूँ/इतना ही सरल झलकता है…
– डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’
मोबाइल है तो मुमकिन है/दुनिया को मुट्ठी में कर लो/आस मां के तारे गिन लो/जंगल घुमो बीच उतर लो/मोबाइल है तो मुमकिन है/अच्छों को चूना लग जाए/एक मोबाइल वो भी रखता/घर का भेदी लंका ढाये…
– डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’
वार मुझपे वो करेगा दिल में आया ही नहीं/आज तक जिस ने कभी खंजर चलाया ही नहीं/मैं तुम्हारी बात पे नाराज क्यों होने लगा/मैं तुम्हारी बात को दिल से लगाया ही नहीं…
– हाजी रियाज खान गौहर
रात भर जाग कर मैंने पहरा दिया/क्यूँ सुई शक की मुझ पर ही ठहरा दिया/जिसको दिल पे दिया जान भी दे चुकी/जख्म भी सबसे उसने ही गहरा दिया…
– नीलम जायसवाल
अगर कहीं न मिले ठिकाना/पता हमारा संभाल कर रखना…
– सोनिया सोनी

👉 • हाजी रियाज खान गौहर ग़ज़ल की प्रस्तुति देते हुए

👉 • डॉ. विजय कुमार गुप्ता ‘मुन्ना’ कविता पाठ करते हुए

👉 • डॉ. संजय दानी काव्य पाठ करते हुए
दो नज़र मिलते, तो मन की बात कहते/तुम अगर मिलते, तो मन की बात कहते/फोन पर अब क्या बताएं हाल अपना/चाय पर मिलते, तो मन की बात कहते…
– अनिल राय ‘भारत’
आज इंसान इंसान को बढ़ने कहाँ देते हैं/थामने को कंधा, पकड़ने कहाँ देते हैं/अरे बुझा देते हैं खार ‘यश’ जलती चिराग भी/जब पढ़ने बैठो तो लोग पढ़ने कहाँ देते हैं…
– डॉ. यशवंत ‘यश’ सूर्यवंशी
जिसने भी इनका नाम लिया बल पाया है/जो गुणगान करते, उसने अंकल पाया हूँ/सच्चे मन से भक्ति करके देख भला तू/जो पुकारे हनुमान उसने जल थल पाया है…
– नवेद रजा दुर्गवी
शौक जीने का यहाँ/लगे हैं सबको अच्छा/शौक पालके सभी/बने हैं प्यारा बच्चा…
– सुरेश कुमार बन्छोर
तेरी रोशनी से जगमगाता है शहर/हम भी चमक जाएं, तु छू लो अगर…
– गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’
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कवयित्री माला सिंह के संयोजन और शायर नवेद रज़ा दुर्गवी के संचालन में सम्पन्न हुई आयोजन की कुछ और सचित्र झलकियाँ-

👉 • मंदिर परिसर में विराजमान देवताओं का दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त करते हुए [बाएँ से] प्रदीप भट्टाचार्य और ब्रजेश मल्लिक

👉 • कवि प्रकाशचंद्र मण्डल के साथ प्रदीप भट्टाचार्य

👉 • आयोजक माला सिंह और परिकल्पना नवेद रज़ा दुर्गवी
[ • रिपोर्ट : डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’ ]
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