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ट्रंप ने ईरान पर हमला करने का फैसला किस तरह किया? – साभार आलेख पीपुल्स डेमोक्रेसी, अनुवाद- संजय पराते

4 months ago
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7 अप्रैल, 2026 को ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ में छपी एक रिपोर्ट में विस्तार से यह खुलासा किया गया है कि कैसे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उनके शीर्ष सलाहकारों को इज़रायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ईरान के ख़िलाफ़ मौजूदा युद्ध शुरू करने के लिए राज़ी किया। व्हाइट हाऊस से जुड़े दो पत्रकारों — जोनाथन स्वान और मैगी हैबरमैन — की यह रिपोर्ट, इन दोनों द्वारा लिखी गई एक किताब “रेजीम चेंज : इनसाइड द इंपीरियल प्रेसीडेंसी ऑफ डोनाल्ड ट्रंप” पर आधारित है। यह रिपोर्ट उन शीर्ष अधिकारियों के साक्षात्कार पर आधारित है, जिन्होंने अपनी पहचान गुप्त रखी है।

‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने 11 फरवरी को एक घंटे का प्रेजेंटेशन दिया। इसमें उन्होंने यह बात रखी कि ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए माहौल तैयार है और अमेरिका तथा इज़राइल का सैन्य हमला उसकी परमाणु क्षमताओं को नष्ट कर सकता है, उसके मिसाइल कार्यक्रम को कुचल सकता है, शीर्ष नेताओं को मार सकता है और एक ऐसे जन-विद्रोह को भड़का सकता है, जिससे वहां की सत्ता का अंत हो जाएगा। इसके बाद, ट्रंप ने अगले कुछ हफ़्तों तक अपने राजनीतिक और खुफिया अधिकारियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया। आखिरकार, 27 फरवरी को उन्होंने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के लिए हरी झंडी दे दी।

‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की इस रिपोर्ट में जिस तरह के ब्योरे दिए गए हैं, उनसे इस रिपोर्ट की बहुत ज़्यादा प्रामाणिकता का पता चलता है। इस बात की पुष्टि इस तथ्य से भी होती है कि व्हाइट हाऊस की ओर से अभी तक इसका कोई खंडन नहीं किया गया है या चुनौती नहीं दी गई है। यह सुनना भी कोई हैरानी की बात नहीं है और न ही कोई नई बात है कि ट्रंप और उनका करीबी समूह इज़रायली दृष्टिकोण के साथ पूरी तरह से जुड़ा हुआ है। लेकिन, अलग-अलग लोगों की सोच के सटीक तरीके — और ट्रंप के सामने उनकी जी-हुज़ूरी — के विस्तृत सबूत मिलना दुर्लभ है ; खासकर तब, जब वे अमेरिका को एक ऐसे युद्ध की ओर ले जा रहे हैं, जो अमेरिका और दुनिया के ज़्यादातर लोगों को बिल्कुल भी मंज़ूर नहीं है।

ज़ाहिर है, चूंकि यह ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ है, इसलिए इसमें नेतन्याहू के खून का प्यासा होने की कोई आलोचना नहीं है — जो गाज़ा और वेस्ट बैंक में चल रहे जनसंहार के लिए ज़िम्मेदार हैं — और न ही इसमें उस यहूदीवादी परियोजना पर कोई सवाल उठाया गया है, जिसे अमेरिका पिछले सात दशकों से भी ज़्यादा समय से समर्थन और सहारा देता आ रहा है। इसके अलावा, इसमें अमेरिका द्वारा अपने साम्राज्यवादी हितों से प्रेरित होकर दर्जनों देशों पर थोपी गई आक्रामकता और युद्धों का भी कोई ज़िक्र नहीं है।

लेकिन फिर भी, न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट से यह तो पता चलता है कि अमेरिका और युद्ध में उसका सहयोगी इज़राइल किस तरह घनिष्ठ रूप से काम कर रहे हैं। उनकी फ़ैसले लेने की प्रक्रिया की बारीकियों के साथ ही यह भी पता चलता है कि वे अपने ही संस्थानों के साथ-साथ दूसरे देशों की संप्रभुता के प्रति भी कितनी गहरी अवमानना रखते हैं।

आइए, न्यूयॉर्क टाइम्स की इस रिपोर्ट में सामने आए कुछ पहलुओं पर नज़र डालें।

नेतन्याहू की ‘ज़ोरदार कोशिश’

नेतन्याहू के साथ हुई बैठक में ट्रंप के सबसे करीबी लोग शामिल थे — सूज़ी वाइल्स, जो व्हाइट हाऊस की चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ हैं ; मार्को रूबियो, जो विदेश मंत्री के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी हैं ; पीट हेगसेथ, जो रक्षा (या युद्ध) मंत्री हैं ; जनरल डैन केन, जो जॉइंट चीफ़्स ऑफ़ स्टाफ़ के चेयरमैन हैं ; जॉन रैटक्लिफ़, जो सीआईए के निदेशक हैं ; जेरेड कुशनर, जो राष्ट्रपति के दामाद हैं ; और स्टीव विटकॉफ़, जो ट्रंप के विशेष दूत हैं ; आदि। जेडी वेंस अज़रबैजान में थे, इसलिए वे इसमें शामिल नहीं हो पाए।

ईरान के बारे में नेतन्याहू की भविष्यवाणियाँ — कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को “कुछ ही हफ़्तों में तबाह कर दिया जाएगा” और जीत लगभग पक्की होगी ; कि वहाँ की सरकार “इतनी कमज़ोर हो जाएगी कि वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद नहीं कर पाएगी” ; और कि पड़ोसी देशों में अमेरिकी हितों पर ईरान के हमले की संभावना “बहुत कम” होगी — ये सभी भविष्यवाणियाँ इतनी हास्यास्पद और ज़बरदस्त रूप से गलत साबित हुईं हैं कि उन पर हँसी आती है। इसी तरह, “मोसाद की वह खुफिया जानकारी” भी गलत निकली, जिसमें कहा गया था कि “ईरान के अंदर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन फिर से शुरू हो जाएँगे” और इज़रायल की जासूसी एजेंसी “दंगे और विद्रोह भड़काने में मदद करेगी”।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा, “मुझे यह बात अच्छी लगी।” यह उनके आस-पास मौजूद चापलूसों के लिए भी एक संकेत था।

ट्रंप ने संदेह को दरकिनार किया

बैठक के बाद, अमेरिकी खुफिया विशेषज्ञों को नेतन्याहू की प्रस्तुति का विश्लेषण करने के लिए कहा गया। अगले दिन, यह विश्लेषण वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के सामने प्रस्तुत किया गया। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में इस प्रस्तुतिकरण का वर्णन इस प्रकार किया गया है :

“खुफिया अधिकारियों को अमेरिकी सैन्य क्षमताओं की गहरी जानकारी थी, और वे ईरानी व्यवस्था तथा उसमें शामिल लोगों को अच्छी तरह समझते थे। उन्होंने श्री नेतन्याहू की प्रस्तुति को चार हिस्सों में बाँट दिया था। पहला था ‘डीकैपिटेशन’ — यानी अयातुल्ला की हत्या। दूसरा था ईरान की अपनी ताकत दिखाने और अपने पड़ोसियों को धमकाने की क्षमता को पंगु बनाना। तीसरा था ईरान के भीतर एक जन-विद्रोह। और चौथा था सत्ता परिवर्तन, जिसमें देश पर शासन करने के लिए एक धर्मनिरपेक्ष नेता को गद्दी पर बिठाया जाता।

अमेरिकी अधिकारियों ने यह आकलन किया कि पहले दो लक्ष्य अमेरिकी खुफिया और सैन्य शक्ति की मदद से हासिल किए जा सकते थे। उन्होंने यह भी माना कि श्री नेतन्याहू के प्रस्ताव के तीसरे और चौथे हिस्से — जिनमें कुर्द लोगों द्वारा ईरान पर ज़मीनी हमला करने की संभावना भी शामिल थी — वास्तविकता से कोसों दूर थे।

ट्रंप के मीटिंग में शामिल होने के बाद, सीआईए के प्रमुख रैटक्लिफ़ ने नेतन्याहू के सत्ता-परिवर्तन के प्लान को “मज़ाकिया” बताया, जबकि रूबियो ने तो इसे “बकवास” तक कह दिया। दूसरे लोग भी इस पर शक कर रहे थे।

जब जनरल केन से उनकी राय पूछी गई, तो उन्होंने कहा, “सर, मेरे अनुभव के हिसाब से, यह इस्राइलियों के लिए एक आम तरीका है। वे अपनी बात को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं, और उनके प्लान हमेशा अच्छी तरह से तैयार नहीं होते। उन्हें पता है कि उन्हें हमारी ज़रूरत है, और इसीलिए वे इतनी ज़ोर-शोर से अपनी बात मनवाने की कोशिश कर रहे हैं।”

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट कहती है कि “ऐसा लगा कि श्रीमान ट्रंप पहले और दूसरे हिस्से को पूरा करने में बहुत ज़्यादा दिलचस्पी ले रहे थे : अयातुल्ला और ईरान के बड़े नेताओं को मार गिराना, और ईरानी सेना को खत्म कर देना।”

अगले कुछ दिनों तक ज़ोरदार विचार-विमर्श चलता रहा। जनरल केन ने एक और “चिंताजनक सैन्य आकलन” पेश किया — ईरान के साथ युद्ध से “अमेरिकी हथियारों के ज़खीरे में भारी कमी आ जाएगी, जिसमें मिसाइल इंटरसेप्टर भी शामिल हैं”। उन्होंने “हॉरमुज़ जलडमरूमध्य को सुरक्षित रखने में आने वाली भारी मुश्किलों और ईरान द्वारा इसे बंद कर देने के जोखिमों” की ओर भी इशारा किया। लेकिन ट्रंप ने इसे यह कहकर खारिज कर दिया कि “हालात यहाँ तक पहुँचने से पहले ही वहाँ की सत्ता झुक जाएगी”। ट्रंप को लगा था कि युद्ध जल्दी खत्म हो जाएगा — यह एक और ऐसी धारणा थी, जो पूरी तरह से गलत साबित हुई।

‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप “3 जनवरी, 2026 को वेनेज़ुएला के नेता निकोलस मादुरो को उनके परिसर से पकड़ने के लिए की गई शानदार कमांडो रेड से विशेष रूप से उत्साहित थे।” उन्हें “अमेरिकी सेनाओं की बेजोड़ क्षमता” पर पूरा भरोसा था। जहाँ एक ओर हेगसेथ ईरान के खिलाफ युद्ध के बड़े समर्थक थे, वहीं दूसरी ओर अन्य लोग इस बारे में पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे, लेकिन उन्होंने राष्ट्रपति के निर्णय का ही समर्थन करने का फैसला किया।

‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के अनुसार, एकमात्र व्यक्ति, जिसने ईरान के खिलाफ युद्ध के विचार को खुले तौर पर हतोत्साहित करने की कोशिश की, वह उपराष्ट्रपति जेडी वेंस थे। उन्होंने “अपना राजनीतिक करियर ठीक उसी तरह के सैन्य दुस्साहस का विरोध करते हुए बनाया था, जिस पर अब गंभीरता से विचार किया जा रहा था।” उन्होंने ईरान के साथ युद्ध को “संसाधनों का भारी अपव्यय” और “बेहद खर्चीला” बताया था। यह बताना ज़रूरी है कि वेंस कोई शांतिवादी या नरमपंथी नहीं हैं। वे “एक सीमित, दंडात्मक हमले” के पक्ष में थे। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ का आकलन है कि जब उन्हें लगा कि ट्रंप युद्ध करने पर आमादा हैं, तो वेंस ने “तर्क दिया कि उन्हें ऐसा ज़बरदस्त सैन्य शक्ति के साथ करना चाहिए, ताकि वे अपने लक्ष्यों को तेज़ी से हासिल कर सकें।”

हमला कब करें?

‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के अनुसार, फरवरी के आखिरी हफ़्ते में, अमेरिका और इज़रायल को यह खुफिया जानकारी मिली कि अयातुल्ला खामेनेई “शासन के अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ ज़मीन पर दिन-दहाड़े खुले में बैठक करेंगे, जिस पर पूरी तरह से हवाई हमला किया जा सकता है।” इसे “ईरान के केंद्रीय नेतृत्व पर हमला करने का एक दुर्लभ मौका” माना गया। बताया जाता है कि नेतन्याहू ने ट्रंप से तेज़ी से कदम उठाने का आग्रह किया। ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत का प्रस्ताव दिया था, जिससे “अमेरिका को मध्य-पूर्व में अपनी सैन्य सामग्रियां पहुँचाने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया।” कुशनर और विटकॉफ़, जो जिनेवा और ओमान में ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहे थे, ने यह आकलन दिया कि इस बातचीत में कई महीने लगेंगे।

आखिरी बैठक

26 फरवरी को, व्हाइट हाऊस के सिचुएशन रूम में एक युद्ध समूह (वॉर ग्रुप) इकट्ठा हुआ। उन लोगों के अलावा, जो दो हफ़्ते पहले नेतन्याहू की प्रेजेंटेशन में शामिल हुए थे, इस ग्रुप में जेडी वेंस ; व्हाइट हाऊस के वकील डेविड वारिंगटन ; व्हाइट हाऊस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीवेन चैंग ; और व्हाइट हाऊस की प्रेस सचिव कैरोलिन लिविट भी शामिल थे। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट और ऊर्जा सचिव क्रिस राइट — जिन्हें आने वाले तेल/गैस संकट को संभालना था — को इस बैठक से बाहर रखा गया था ; ठीक वैसे ही, जैसे नेशनल इंटेलिजेंस की निर्देशक तुलसी गैबार्ड को बाहर रखा गया था।

बैठक सिर्फ़ 90 मिनट तक चली। कुछ शंकाओं के बावजूद, सभी लोग ईरान पर हमला करने के फ़ैसले पर आगे बढ़ने के लिए राज़ी हो गए कि वे राष्ट्रपति के साथ खड़े रहेंगे।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट इन अंशों के साथ खत्म होती है :

“मुझे लगता है कि हमें यह करना चाहिए,” राष्ट्रपति ने कमरे में मौजूद लोगों से कहा। उन्होंने कहा कि उन्हें यह पक्का करना होगा कि ईरान के पास कोई परमाणु हथियार न हो, और उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ईरान, इज़राइल या पूरे इलाके में कहीं भी मिसाइलें न दाग सके।”

जनरल केन ने मिस्टर ट्रंप से कहा कि उनके पास अभी कुछ समय है ; उन्हें अगले दिन शाम 4 बजे तक मंज़ूरी देने की ज़रूरत नहीं है।

अगले दिन दोपहर में, एयर फ़ोर्स वन में सवार रहते हुए, जनरल केन की डेडलाइन से 22 मिनट पहले, मिस्टर ट्रंप ने यह आदेश भेजा : “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को मंज़ूरी दी जा रही है। इसे रोका नहीं जा सकता। शुभकामनाएँ।”

युद्ध जारी है

अमेरिका और इज़राइल की संयुक्त सेनाओं द्वारा ईरान पर किया गया हमला अब अपने छठे हफ़्ते में है, हालाँकि अभी युद्ध विराम चल रहा है। इज़राइल द्वारा लेबनान पर संयुक्त आक्रमण किया गया है और यह हमला पूरी तीव्रता के साथ जारी है। ईरान में, अनुमान है कि 1700 से ज़्यादा आम नागरिक मारे गए हैं ; इसके अलावा, अयातुल्ला खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों सहित कई शीर्ष नेताओं की भी हत्या कर दी गई है। अनुमान है कि बमबारी के हमलों में लगभग एक लाख घर क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गए हैं, साथ ही लगभग 23,500 व्यावसायिक इकाईयाँ भी प्रभावित हुई हैं। यह भी अनुमान है कि 339 चिकित्सा सुविधाओं, 857 स्कूलों और 32 विश्वविद्यालयों को अमेरिकी हमलों का निशाना बनाया गया है, जिससे उन्हें नुकसान पहुँचा है। लगभग 120 संग्रहालय और सांस्कृतिक स्थल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की इस रिपोर्ट से साफ तौर पर यह पता चलता है कि ईरान के लोगों के खिलाफ़ छेड़े गए इस युद्ध के पीछे किस तरह की संवेदनहीन निर्णय प्रक्रिया और मूर्खतापूर्ण धारणाएँ काम कर रही थीं।

[ • अनुवादक संजय पराते ‘अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध ‘छत्तीसगढ़ किसान सभा’ के उपाध्यक्ष हैं. ]

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‘साहित्य सृजन परिषद्’ के तत्वावधान में पावस ऋतु पर सरस काव्य गोष्ठी 26 जुलाई को इंदिरा गाँधी उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सुपेला-भिलाई में अपराह्न 2.30 बजे से

रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक
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रवींद्र-नज़रूल उत्सव-2026 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में रवींद्र-नज़रूल उत्सव 25 जुलाई को ‘ऑफिसर्स एसोसिएशन प्रगति भवन’ में प्रात:11.00 बजे से रात 8.00 बजे तक

काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए
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काव्य संध्या : प्रगतिशील कवि डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय के निवास में दिव्या सक्सेना, विजया भारती, गजेंद्र द्विवेदी ‘गिरीश’, पारुल पांडेय, संजय मैथिल, युसूफ सागर, हाजी रियाज़ खान गौहर, मनमोहन मतवाला, ओम पांडेय, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, छ्गनलाल सोनी, संतराम वर्मा और डॉ. आरबी कुशवाहा शामिल हुए

विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर
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विशेष : भाईदूज, भाई-बहन के परस्पर प्रेम और दायित्व का त्योहार : भाईदूज और रक्षा बंधन की सनातनी मान्यताएं – श्रीमती संजीव ठाकुर

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तीन लघुकथा : रश्मि अमितेष पुरोहित

व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा
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व्यंग्य : देश की बदनामी चालू आहे ❗ – राजेंद्र शर्मा

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लघुकथा : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय वेंकटगिरि, आंध्रप्रदेश]

जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा
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जोशीमठ की त्रासदी : राजेंद्र शर्मा

18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा
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18 दिसंबर को जयंती के अवसर पर गुरू घासीदास और सतनाम परम्परा

जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
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जयंती : सतनाम पंथ के संस्थापक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा
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व्यंग्य : नो हार, ओन्ली जीत ❗ – राजेंद्र शर्मा

🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.
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🟥 अब तेरा क्या होगा रे बुलडोजर ❗ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा.

🟥 प्ररंपरा या कुटेव  ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा
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🟥 प्ररंपरा या कुटेव ❓ – व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा

▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.
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▪️ न्यायपालिका के अपशकुनी के साथी : वैसे ही चलना दूभर था अंधियारे में…इनने और घुमाव ला दिया गलियारे में – आलेख बादल सरोज.

▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.
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▪️ मशहूर शायर गीतकार साहिर लुधियानवी : ‘ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी ‘ : वो सुबह कभी तो आएगी – गणेश कछवाहा.

▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा
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▪️ व्यंग्य : दीवाली के कूंचे से यूँ लक्ष्मी जी निकलीं ❗ – राजेंद्र शर्मा

25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक
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25 सितंबर पितृ मोक्ष अमावस्या के उपलक्ष्य में… पितृ श्राद्ध – श्राद्ध का प्रतीक

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🟢 आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. अशोक आकाश.

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🟣 अमृत महोत्सव पर विशेष : डॉ. बलदाऊ राम साहू [दुर्ग]

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🟣 समसामयिक चिंतन : डॉ. अरविंद प्रेमचंद जैन [भोपाल].

राजनीति न्यूज़

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उदयपुर हत्याकांड को लेकर दिया बड़ा बयान

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■छत्तीसगढ़ :

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भारतीय जनता पार्टी,भिलाई-दुर्ग के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय जे.दानी,लल्लन मिश्रा, सुरेखा खटी,अमरजीत सिंह ‘चहल’,विजय शुक्ला, कुमुद द्विवेदी महेंद्र यादव,सूरज शर्मा,प्रभा साहू,संजय खर्चे,किशोर बहाड़े, प्रदीप बोबडे,पुरषोत्तम चौकसे,राहुल भोसले,रितेश सिंह,रश्मि अगतकर, सोनाली,भारती उइके,प्रीति अग्रवाल,सीमा कन्नौजे,तृप्ति कन्नौजे,महेश सिंह, राकेश शुक्ला, अशोक स्वाईन ओर नागेश्वर राव ‘बाबू’ ने सयुंक्त बयान में भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव से जवाब-तलब किया.

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भिलाई कांड, न्यायाधीश अवकाश पर, जाने कब होगी सुनवाई

धमतरी आसपास
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धमतरी आसपास

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स्मृति शेष- बाबू जी, मोतीलाल वोरा

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छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल

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राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा- मर्यादित भाषा में रखें अपनी बात

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल  ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन
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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने डाॅ. नरेन्द्र देव वर्मा पर केन्द्रित ‘ग्रामोदय’ पत्रिका और ‘बहुमत’ पत्रिका के 101वें अंक का किया विमोचन

मरवाही उपचुनाव
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प्रमोद सिंह राजपूत कुम्हारी ब्लॉक के अध्यक्ष बने

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ओवैसी की पार्टी ने बदला सीमांचल का समीकरण! 11 सीटों पर NDA आगे

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, ग्वालियर में प्रेस वार्ता

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अमित और ऋचा जोगी का नामांकन खारिज होने पर बोले मंतूराम पवार- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, भूपेश बघेल बिहार चुनाव के स्टार प्रचारक बिहार में कांग्रेस 70 सीटों में चुनाव लड़ रही है

सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म
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सियासत- हाथरस सामूहिक दुष्कर्म

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हाथरस गैंगरेप के घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा, पढ़िए पूरी खबर

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पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना के बाद, पीसीसी चीफ ने जांच समिति का किया गठन